बाइबल व्याख्या

1 राजाओं 15

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

आसा राजा अपनी ही माता को राजमाता के पद से उतार देता है, क्योंकि उसने अशेरा के लिए एक घिनौनी मूरत बनाई थी: "आसा ने उसकी मूरत को काट डाला और किद्रोन के नाले में फूँक दिया।" यह अध्याय तीन छोटे राज-वृत्तांतों को एक साथ रखता है: अबिय्याम, जो अपने पिता के पापों की लीक पर चलता रहा; आसा, जिसका मन जीवन भर यहोवा की ओर लगा रहा, फिर भी जिसने संकट में मन्दिर का सोना-चाँदी निकालकर अराम के राजा बेन्हदद को भेज दिया; और उत्तर में नादाब तथा बाशा, जहाँ खून से सत्ता बदलती है और यारोबाम का पूरा घराना मिट जाता है। तीनों कहानियाँ एक ही प्रश्न पूछती हैं: तेरा मन कहाँ लगा है?

मर्म

इस अध्याय का तराजू "पूरी रीति से" वाला मन है। इब्रानी शब्द शालेम का अर्थ है अखंड, बिना दरार का, ऐसा जो टुकड़ों में बँटा न हो। अबिय्याम के बारे में कहा गया कि उसका मन "पूरी रीति से सिद्ध न था"; आसा के बारे में कहा गया कि उसका मन "जीवन भर यहोवा की ओर पूरी रीति से लगा रहा", और यह उसी वाक्य में कहा गया है जिसमें स्वीकार किया गया है कि ऊँचे स्थान नहीं ढाए गए। परमेश्वर की दृष्टि पूर्णता की नहीं, दिशा की नाप लेती है। लेकिन सावधान: दिशा का मतलब ढीलापन नहीं। आसा ने मूरतें काटीं, पद छीना, चाँदी-सोना मन्दिर में पहुँचाया। मन का लगाव उसके हाथों तक उतरा। जहाँ लगाव केवल भावना बनकर रह जाता है, वहाँ बाइबल उसे लगाव नहीं कहती।

मुख्य सूत्र

पद चार में एक अजीब बात है। अबिय्याम बुरा है, फिर भी परमेश्वर उसे यरूशलेम में "एक दीपक" देते हैं, दाऊद के कारण। यह राजवंश योग्यता पर नहीं, वाचा पर टिका है। और वही पद ईमानदारी से जोड़ देता है कि दाऊद भी निर्दोष नहीं था: "हित्ती ऊरिय्याह की बात के सिवाय"। यानी जिस दाऊद के कारण दीपक जलता रहा, वह स्वयं एक क्षमा किया गया पापी था। यहीं से वह धागा खिंचता है जो यीशु मसीह तक जाता है: दाऊद का वह पुत्र जिसका मन वास्तव में अखंड था, जिसने अपने पिता की इच्छा में कोई ऊँचा स्थान बचा नहीं रखा। हमारा दीपक भी हमारी सफाई पर नहीं, उसी के कारण जलता है, और यह हमें आलसी नहीं, कृतज्ञ बनाता है।

दर्पण

आसा की माता वाली घटना चुभती है। उसने परिवार के सम्मान को सत्य से ऊपर नहीं रखा। हम रखते हैं। हम जानते हैं कि घर में कहाँ अन्याय चलता है, कहाँ पैसा गलत रास्ते से आता है, कहाँ किसी की चुप्पी खरीदी जा रही है, और हम कहते हैं: वे बड़े हैं, बात बढ़ेगी। दूसरी चुभन ऊँचे स्थानों में है। हम बड़ी मूरतें तोड़ देते हैं और छोटी सुविधाएँ बचा लेते हैं: वह एक खाता जिसका हिसाब हम नहीं देते, वह एक रिश्ता जिसे हम "सिर्फ दोस्ती" कहते हैं, वह देर रात का पर्दा जिसके सामने हम अकेले बैठते हैं। तीसरी चुभन पद अठारह है। दबाव आते ही आसा ने वह चाँदी खर्च कर दी जो उसने भक्ति से मन्दिर में रखी थी। संकट में हम अपनी सबसे पवित्र प्रतिबद्धताएँ ही सबसे पहले बेचते हैं।

मुख्य पात्र

आसा एक असली आदमी है, न सन्त न खलनायक। इकतालीस वर्ष का लंबा शासन, साहसी सुधार, अपनी माँ के विरुद्ध खड़े होने की हिम्मत, और फिर एक ठंडा, हिसाबी कदम: बाशा रामाह को दृढ़ कर रहा है, यहूदा का रास्ता बंद हो रहा है, और आसा परमेश्वर के भवन का खजाना खोलकर एक अन्यजाति राजा से गठजोड़ खरीदता है। रणनीति काम कर गई, बाशा हट गया, आसा ने गेबा और मिस्पा दृढ़ किए। सफलता ने उसे सही नहीं ठहराया। और अन्त में एक छोटा, उदास वाक्य: "उसके बुढ़ापे में तो उसे पाँवों का रोग लग गया।" जिसने जीवन भर परमेश्वर की ओर चलना चुना, वही अन्त में चल न सका। पाठ इसका कारण नहीं बताता; वह हमें केवल याद दिलाता है कि भक्त शरीर भी टूटता है।

अंतर्पाठ

दो जगहें इस अध्याय पर रोशनी डालती हैं। पहली, 1 राजा 14 में शीलोवासी अहिय्याह के द्वारा कहा गया वचन; यहाँ पद उनतीस साफ कहता है कि बाशा का खून-खराबा उसी वचन के अनुसार हुआ। यह डरावना है: परमेश्वर अपने न्याय के लिए ऐसे हाथ भी काम में लाते हैं जो स्वयं दोषी हैं, क्योंकि बाशा भी "यारोबाम के मार्ग पर" चलता रहा। इतिहास में इस्तेमाल होना बचाया जाना नहीं है। दूसरी, 2 इतिहास 16, जहाँ नबी हनानी आसा को ठीक इसी गठजोड़ के लिए झिड़कता है और आसा उसे बंदीगृह में डाल देता है। जो व्यक्ति एक बार माँ के सामने सत्य के लिए खड़ा हुआ, वही बुढ़ापे में सत्य बोलने वाले को कैद कर देता है। पिछली आज्ञाकारिता अगली की गारंटी नहीं है।

पृष्ठभूमि

यह ईसा पूर्व दसवीं सदी का अंत है, सुलैमान की मृत्यु के कुछ दशक बाद। एक राज्य दो हो चुका है: दक्षिण में यहूदा, दाऊद के वंश और मन्दिर के साथ; उत्तर में इस्राएल, जहाँ तिर्सा राजधानी है और तख्त कभी भी तलवार से पलट सकता है। नादाब गिब्बतोन को घेरे हुए युद्ध के मैदान में मारा जाता है, और नए राजा का पहला काम पिछले घराने को जड़ से मिटाना है, प्राचीन पूर्व की सामान्य राजनीति। रामाह यरूशलेम से कुछ ही किलोमीटर उत्तर में, मुख्य व्यापारिक रास्ते पर है; उसे दृढ़ करना यहूदा की गर्दन दबाना था। इसलिए आसा का दबाव असली था। और अराम का बेन्हदद वही ताकत है जो आगे चलकर इस्राएल का सबसे बड़ा खतरा बनेगी। आसा ने आज की समस्या कल की आपदा से खरीदी।

चिंतन

आपके जीवन का कौन सा "ऊँचा स्थान" अब तक ढाया नहीं गया, और आप उसे किस तर्क से बचाए रखते हैं?

पिछली बार जब दबाव आया, तो आपने सबसे पहले क्या खर्च किया: अपनी सुविधा, या अपनी वह प्रतिबद्धता जो आपने परमेश्वर के सामने रखी थी?

1 Kings में और गहराई से जानें

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1 Kings: The Wisdom and the Folly

Dale Ralph Davis

From Solomon's glory to Elijah's fire, told with pastoral punch.

The Message of Kings

John Olley

Keeps the many kings straight and the one true King in view.

1 and 2 Kings: An Introduction and Commentary

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1 and 2 Kings

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1 Kings 15 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 राजाओं 15 का क्या अर्थ है?
आसा राजा अपनी ही माता को राजमाता के पद से उतार देता है, क्योंकि उसने अशेरा के लिए एक घिनौनी मूरत बनाई थी: "आसा ने उसकी मूरत को काट डाला और किद्रोन के नाले में फूँक दिया।" यह अध्याय तीन छोटे राज-वृत्तांतों को एक साथ रखता है: अबिय्याम, जो अपने पिता के पापों की लीक पर चलता रहा; आसा, जिसका मन जीवन भर यहोवा की ओर लगा रहा, फिर भी जिसने संकट में मन्दिर का सोना-चाँदी निकालकर अराम के राजा बेन्हदद को भेज दिया; और उत्
1 राजाओं 15 किस विषय में है?
पद चार में एक अजीब बात है। अबिय्याम बुरा है, फिर भी परमेश्वर उसे यरूशलेम में "एक दीपक" देते हैं, दाऊद के कारण। यह राजवंश योग्यता पर नहीं, वाचा पर टिका है। और वही पद ईमानदारी से जोड़ देता है कि दाऊद भी निर्दोष नहीं था: "हित्ती ऊरिय्याह की बात के सिवाय"। यानी जिस दाऊद के कारण दीपक जलता रहा, वह स्वयं एक क्षमा किया गया पापी था। यहीं से वह धागा खिंचता है जो यीशु मसीह तक जाता है: दाऊद का वह पुत्र जिसका मन वास्तव में अखंड था, जिसने अपने पिता की इच्छा में कोई ऊँचा स्थान बचा नहीं रखा। हमारा दीपक भी हमारी सफाई पर नहीं, उसी के कारण जलता है, और यह हमें आलसी नहीं, कृतज्ञ बनाता है।
1 राजाओं 15 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आसा एक असली आदमी है, न सन्त न खलनायक। इकतालीस वर्ष का लंबा शासन, साहसी सुधार, अपनी माँ के विरुद्ध खड़े होने की हिम्मत, और फिर एक ठंडा, हिसाबी कदम: बाशा रामाह को दृढ़ कर रहा है, यहूदा का रास्ता बंद हो रहा है, और आसा परमेश्वर के भवन का खजाना खोलकर एक अन्यजाति राजा से गठजोड़ खरीदता है। रणनीति काम कर गई, बाशा हट गया, आसा ने गेबा और मिस्पा दृढ़ किए। सफलता ने उसे सही नहीं ठहराया। और अन्त में एक छोटा, उदास वाक्य: "उसके बुढ़ापे में तो उसे पाँवों का रोग लग गया।" जिसने जीवन भर परमेश्वर की ओर चलना चुना, वही अन्त में चल न सका। पाठ इसका कारण नहीं बताता; वह हमें केवल याद दिलाता है कि भक्त शरीर भी टूटता है।
1 राजाओं 15 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यह ईसा पूर्व दसवीं सदी का अंत है, सुलैमान की मृत्यु के कुछ दशक बाद। एक राज्य दो हो चुका है: दक्षिण में यहूदा, दाऊद के वंश और मन्दिर के साथ; उत्तर में इस्राएल, जहाँ तिर्सा राजधानी है और तख्त कभी भी तलवार से पलट सकता है। नादाब गिब्बतोन को घेरे हुए युद्ध के मैदान में मारा जाता है, और नए राजा का पहला काम पिछले घराने को जड़ से मिटाना है, प्राचीन पूर्व की सामान्य राजनीति। रामाह यरूशलेम से कुछ ही किलोमीटर उत्तर में, मुख्य व्यापारिक रास्ते पर है; उसे दृढ़ करना यहूदा की गर्दन दबाना था। इसलिए आसा का दबाव असली था। और अराम का बेन्हदद वही ताकत है जो आगे चलकर इस्राएल का सबसे बड़ा खतरा बनेगी। आसा ने आज की समस्या कल की आपदा से खरीदी।
1 राजाओं 15 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पिछली बार जब दबाव आया, तो आपने सबसे पहले क्या खर्च किया: अपनी सुविधा, या अपनी वह प्रतिबद्धता जो आपने परमेश्वर के सामने रखी थी?
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1 Kings 15 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

बाशा ने रामाह के पत्थर इसलिए जोड़े थे कि यहूदा घिर जाए, पर वही पत्थर आसा के हाथ लगे: "राजा आसा ने उनसे बिन्यामीन के गेबा और मिस्पा को बनाया।" जो दीवार तुझे कैद करने को उठाई गई थी, परमेश्वर उसी को तेरी सुरक्षा बना सकता है। और ध्यान दे, हर पत्थर किसी के कंधे पर आया, "कोई इससे मुक्त न रहा।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

दाऊद के पूरे जीवन का हिसाब एक वाक्य में: "क्योंकि दाऊद ने वह किया जो यहोवा की दृष्टि में ठीक था, और अपने जीवन भर... यहोवा की किसी आज्ञा से न मुड़ा।" पर उसी वाक्य में ऊरिय्याह का नाम भी लिखा है। परमेश्वर तेरे पाप को छिपाता नहीं, फिर भी तुझे अपना कहना नहीं छोड़ता। यही अनुग्रह है, जो सच बोलकर भी थामे रहता है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 10

पिता, मेरे परिवार की कहानी में जो टूटा हुआ है, वह मुझे बाँध न रखे। जैसे किसी ने वर्षों तक ठहरकर तेरा साथ निभाया, वैसे ही मुझे भी लंबे समय तक वफ़ादार रहना सिखा। मेरे दिन गिनती के हैं, पर वे तेरे हाथ में सुरक्षित हैं।

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