बाइबल व्याख्या

1 शमूएल 30

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

तीन दिन की थकी हुई वापसी के बाद दाऊद और उसके छह सौ आदमी सिकलग पहुँचते हैं और पाते हैं कि नगर जलकर राख हो चुका है, उनकी पत्नियाँ और बच्चे बन्दी बना लिए गए हैं। लोग रोते-रोते निढाल हो जाते हैं और फिर दाऊद पर ही पथराव करने की बात करने लगते हैं; दाऊद यहोवा से पूछता है, पीछा करता है, और सब कुछ छुड़ा लाता है। लौटते समय वह लूट के बँटवारे को लेकर एक नियम ठहराता है और यहूदा के पुरनियों को उपहार भेजता है।

मर्म

यह अध्याय परमेश्वर की सहायता को किसी रहस्यमय अनुभूति के रूप में नहीं, बल्कि एक बहुत ठोस क्रम में दिखाता है: पहले टूटना, फिर पूछना, फिर चलना। दाऊद के पास कोई भविष्यवाणी पहले से नहीं थी, कोई आश्वासन नहीं था; उसके पास केवल एपोद था और एक सवाल। परमेश्वर उत्तर देते हैं, और उत्तर सटीक है, "निःसन्देह सब कुछ छुड़ा लाएगा।" पर ध्यान दीजिए कि छुड़ाना दाऊद की तलवार से होता है, बीस घंटे की लड़ाई से, एक भूखे दास की गवाही से। परमेश्वर का उद्धार यहाँ इतिहास के भीतर से काम करता है, परिस्थितियों को हटाकर नहीं, उनके बीच से होकर। और अंत में वही उद्धार एक न्याय-नियम बन जाता है: जो लड़ा और जो सामान के पास बैठा रहा, दोनों बराबर।

जुड़ा हुआ सूत्र

सिकलग का यह दिन दाऊद के राजा बनने की दहलीज़ है। कुछ ही दिनों में शाऊल गिलबो पर मरेगा, और दाऊद हेब्रोन में अभिषिक्त होगा (2 शमूएल 2:4) ठीक उन्हीं पुरनियों के बीच जिन्हें उसने यहाँ लूट का हिस्सा भेजा था। यानी अध्याय के अंत की लंबी नामसूची कोई परिशिष्ट नहीं, राज्य की नींव है। पर सूत्र इससे गहरा है: यहाँ एक अभिषिक्त जन है जो अपने ही लोगों की कड़वाहट झेलता है, फिर भी उन्हीं को छुड़ाने निकलता है, और लौटकर पीछे रह गए थकेहारों को बराबर का हिस्सा देता है। मसीह का राज्य इसी तर्क पर चलता है, जहाँ अंतिम घंटे में आया मज़दूर भी पूरी मज़दूरी पाता है, क्योंकि हिस्सा योग्यता से नहीं, राजा की उदारता से मिलता है।

दर्पण

आप उस दिन को जानते हैं जब सब कुछ एक साथ ढह गया: नौकरी गई और उसी हफ़्ते जाँच रिपोर्ट आई, या घर लौटने पर पता चला कि जिस पर सबसे ज़्यादा भरोसा था वही चला गया। और फिर वह दूसरी मार, जब लोग आपको ही दोषी ठहराते हैं। दाऊद के पास कोई आत्मविश्वास नहीं बचा था; उसके पास केवल परमेश्वर बचे थे, और उसने वहीं से हियाव बाँधा। यह पाठ आपकी उस चालाकी को भी बेपर्दा करता है जो थके हुए दो सौ लोगों पर हँसती है, वह सहकर्मी जो पिछड़ गया, वह भाई जो सेवा में हाथ नहीं बँटा सका, वह विश्वासी जो बीमारी में घर बैठा रहा। दाऊद उन्हें "हे मेरे भाइयों" कहकर बँटवारा तय करता है।

आज ही एक ऐसे व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जो थककर पीछे रह गया है, और उसे एक छोटा संदेश भेजिए जिसमें कोई सलाह न हो, केवल यह कि आप उसे अपना समझते हैं।

कठिन प्रश्न

अगर परमेश्वर ने दाऊद को सब कुछ लौटा दिया, तो उन्होंने अमालेकियों को सिकलग जलाने ही क्यों दिया? वे तीन दिन जिनमें माँएँ बँधी हुई चलती रहीं और बच्चे रोते रहे, वे मिटते नहीं। पाठ कोई सफ़ाई नहीं देता। वह इतना ज़रूर बताता है कि यह वही अमालेक है जिसे शाऊल ने अधूरे मन से छोड़ा था, और छूटी हुई बुराई लौटकर काटती है। पर यह पूरा उत्तर नहीं। कई बार हमें वह वापस मिल जाता है जो खोया था, और तब भी खोने के दिन हमारे शरीर में रह जाते हैं। बाइबल इस दर्द को मिटाती नहीं, उसे दर्ज करती है: "इतना रोए, कि फिर उनमें रोने की शक्ति न रही।"

एक बारीकी

मैदान में पड़ा वह मिस्री जवान इस कहानी का धुरी-बिंदु है। वह अमालेकी का दास था, बीमार पड़ा तो मालिक ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया, तीन दिन बिना रोटी बिना पानी। दाऊद के आदमी उसे पानी, अंजीर की टिकिया और किशमिश देते हैं, और लिखा है "उसके जी में जी आया।" फेंका हुआ आदमी बोलने लायक बनता है, और वही रास्ता दिखाता है। ध्यान दीजिए, दाऊद पहले पूछताछ नहीं करता, पहले खिलाता है। और जब वह दास शपथ माँगता है कि उसे मारा या लौटाया न जाए, दाऊद मान लेता है। जिस युद्ध को परमेश्वर ने ठहराया था, उसकी कुंजी एक ऐसे आदमी के हाथ में थी जिसे उसके अपने लोगों ने कचरा समझा था।

पृष्ठभूमि

सिकलग कोई इस्राएली गाँव नहीं था। यह पलिश्ती राजा आकीश की दी हुई सीमावर्ती चौकी थी, और दाऊद वहाँ एक भाड़े के सरदार की तरह रहता था, अपने ही देश से भागा हुआ, दुश्मन का नौकर। अध्याय 29 में पलिश्ती सरदारों ने उसे युद्ध से लौटा दिया था, इसलिए वह घर आ रहा था, अपमानित पर जीवित। नेगेव का यह इलाका छापामार गिरोहों की दुनिया थी, जहाँ लूट ही अर्थव्यवस्था थी। अमालेकियों ने किसी को मारा नहीं, क्योंकि जीवित स्त्री-बच्चे बाज़ार में बिकते हैं; यह क्रूरता नहीं, हिसाब था। और एक सरदार जो अपने लोगों की पत्नियाँ नहीं बचा सकता, वह सरदार नहीं रहता, इसीलिए पथराव की चर्चा उठी।

चिंतन के प्रश्न

जब सब कुछ एक साथ टूटा था, आपने अपने आपको किस चीज़ में मज़बूत किया, और दाऊद ने किसमें?

आपके जीवन में वे "दो सौ थके हुए" कौन हैं, और क्या आप उन्हें बराबर का हिस्सा देने को तैयार हैं?

1 Samuel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

1 Samuel: Looking on the Heart

Dale Ralph Davis

Storytelling commentary at its best, from Hannah's prayer to David's rise.

The Message of Samuel

Mary Evans

One clear guide through both books of Samuel and their flawed kings.

1 Samuel For You

Tim Chester

Accessible walk through Samuel, Saul and David with constant application.

1 and 2 Samuel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Samuel

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Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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1 Samuel 30 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 शमूएल 30 का क्या अर्थ है?
तीन दिन की थकी हुई वापसी के बाद दाऊद और उसके छह सौ आदमी सिकलग पहुँचते हैं और पाते हैं कि नगर जलकर राख हो चुका है, उनकी पत्नियाँ और बच्चे बन्दी बना लिए गए हैं। लोग रोते-रोते निढाल हो जाते हैं और फिर दाऊद पर ही पथराव करने की बात करने लगते हैं; दाऊद यहोवा से पूछता है, पीछा करता है, और सब कुछ छुड़ा लाता है। लौटते समय वह लूट के बँटवारे को लेकर एक नियम ठहराता है और यहूदा के पुरनियों को उपहार भेजता है।
1 शमूएल 30 किस विषय में है?
सिकलग का यह दिन दाऊद के राजा बनने की दहलीज़ है। कुछ ही दिनों में शाऊल गिलबो पर मरेगा, और दाऊद हेब्रोन में अभिषिक्त होगा (2 शमूएल 2:4) ठीक उन्हीं पुरनियों के बीच जिन्हें उसने यहाँ लूट का हिस्सा भेजा था। यानी अध्याय के अंत की लंबी नामसूची कोई परिशिष्ट नहीं, राज्य की नींव है। पर सूत्र इससे गहरा है: यहाँ एक अभिषिक्त जन है जो अपने ही लोगों की कड़वाहट झेलता है, फिर भी उन्हीं को छुड़ाने निकलता है, और लौटकर पीछे रह गए थकेहारों को बराबर का हिस्सा देता है। मसीह का राज्य इसी तर्क पर चलता है, जहाँ अंतिम घंटे में आया मज़दूर भी पूरी मज़दूरी पाता है, क्योंकि हिस्सा योग्यता से नहीं, राजा की उदारता से मिलता है।
1 शमूएल 30 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही एक ऐसे व्यक्ति का नाम कागज़ पर लिखिए जो थककर पीछे रह गया है, और उसे एक छोटा संदेश भेजिए जिसमें कोई सलाह न हो, केवल यह कि आप उसे अपना समझते हैं।
1 शमूएल 30 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
मैदान में पड़ा वह मिस्री जवान इस कहानी का धुरी-बिंदु है। वह अमालेकी का दास था, बीमार पड़ा तो मालिक ने उसे मरने के लिए छोड़ दिया, तीन दिन बिना रोटी बिना पानी। दाऊद के आदमी उसे पानी, अंजीर की टिकिया और किशमिश देते हैं, और लिखा है "उसके जी में जी आया।" फेंका हुआ आदमी बोलने लायक बनता है, और वही रास्ता दिखाता है। ध्यान दीजिए, दाऊद पहले पूछताछ नहीं करता, पहले खिलाता है। और जब वह दास शपथ माँगता है कि उसे मारा या लौटाया न जाए, दाऊद मान लेता है। जिस युद्ध को परमेश्वर ने ठहराया था, उसकी कुंजी एक ऐसे आदमी के हाथ में थी जिसे उसके अपने लोगों ने कचरा समझा था।
1 शमूएल 30 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जब सब कुछ एक साथ टूटा था, आपने अपने आपको किस चीज़ में मज़बूत किया, और दाऊद ने किसमें?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Samuel 30 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

दाऊद घर लौटा था, आराम की आस लेकर। पर जो मिला वह राख थी: "जब दाऊद और उसके जन उस नगर में पहुँचे, तब क्या देखते हैं, कि वह आग से फुँका गया है, और उनकी स्त्रियाँ और बेटे-बेटियाँ बन्दी कर लिए गए हैं।" कभी-कभी परमेश्वर का चुना हुआ जन भी जली हुई दीवारों के सामने खड़ा रह जाता है। रोना यहाँ पाप नहीं था, दाऊद भी रोया। पर वह वहीं नहीं रुका, उसने अपने परमेश्वर में खुद को दृढ़ किया। तेरी राख के सामने तू आज क्या करेगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 22

लड़ाई जीतने के बाद भी दिल का असली हाल तब खुलता है, जब बाँटने की बारी आती है। "ये लोग हमारे संग नहीं चले थे, इस कारण हम उन्हें अपने छुड़ाए हुए माल में से कुछ न देंगे।" वे दो सौ लोग थके थे, चलने लायक नहीं। और थके हुए भाई को इनाम से बाहर करना कितना आसान लगता है। दाऊद ने वह माल अपना नहीं, यहोवा का दिया हुआ माना। तू जो पाया है, उसे किसका कहता है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

दाऊद अभी अभी एक बड़े खतरे से बचकर लौटा था। तीन दिन की थकी हुई यात्रा, और मन में यही कि अब घर पहुँचकर चैन मिलेगा। पर वहाँ राख के सिवा कुछ न था, "और सिकलग को मारकर फूँक दिया है।"

कभी कभी जिस जगह को हम सुरक्षित समझते हैं, वहीं सबसे गहरी चोट लगती है। दाऊद ने उस राख पर बैठकर रोना नहीं छिपाया, पर उसने परमेश्वर से पूछना भी नहीं छोड़ा। तेरी राख भी उससे बात करने की जगह बन सकती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

सिकलग जलकर राख, पत्नियाँ और बच्चे बंदी, और अपने ही साथी पथराव की बात कर रहे हैं। दाऊद के पास रोने तक की ताकत नहीं बची थी। फिर भी लिखा है, "परन्तु दाऊद ने अपने परमेश्वर यहोवा को स्मरण करके हियाव बाँधा।"

ध्यान दे, किसी ने आकर उसे सांत्वना नहीं दी। कभी-कभी तेरे आसपास कोई नहीं होगा जो तुझे संभाले। उस घड़ी परमेश्वर तुझसे यही पूछता है, क्या तू मुझमें अपना हियाव बाँधेगा?

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