2 इतिहास 28
पाठ
आहाज़ यहूदा का राजा बनता है और अपने ही बच्चों को हिन्नोम की तराई में आग में होम कर देता है; परमेश्वर उसे अराम, इस्राएल, एदोम और पलिश्तियों के हाथ में कर देते हैं, और एक ही दिन में यहूदा के एक लाख बीस हजार वीर मारे जाते हैं। बीच में एक अनोखा दृश्य: ओदेद नामक नबी सामरिया की विजयी सेना को रोकता है, और एप्रैम के कुछ मुख्य पुरुष यहूदी बन्दियों को कपड़े, जूतियाँ, भोजन और तेल देकर गदहों पर बैठाकर यरीहो लौटा देते हैं। आहाज़ फिर भी नहीं बदलता; वह अश्शूर को मन्दिर का धन देता है, दमिश्क के देवताओं को बलि चढ़ाता है, और अन्त में यहोवा के भवन के द्वार ही बन्द कर देता है।
मर्म
यह अध्याय दिखाता है कि मूर्तिपूजा केवल एक धार्मिक ग़लती नहीं, बच्चों की हत्या तक पहुँचने वाली एक भूख है। आहाज़ का तर्क साफ़ है और डरावना भी: जिन देवताओं ने मुझे हराया, वे ही शक्तिशाली होंगे, इसलिए "मैं उनके लिये बलि चढ़ाऊँगा कि वे मेरी सहायता करें।" यह विश्वास नहीं, सौदेबाज़ी है। और लेखक निर्दयता से जोड़ता है: "परन्तु वे उसके और सारे इस्राएल के पतन का कारण हुए।" परमेश्वर के साथ रिश्ता लेन-देन नहीं, वाचा है; जहाँ मनुष्य उसे सौदे में बदलता है, वहाँ वह अपने ही निकटतम लोगों को ईंधन बना देता है। आहाज़ की सबसे भयानक कीमत उसकी सेना नहीं, उसके बच्चे हैं।
सूत्र
यहीं दो धागे मिलते हैं। पहला: आहाज़ बच्चों को आग में देता है ताकि देवता उसे बचाएँ; परमेश्वर अपने एकमात्र पुत्र को देते हैं ताकि हम बचें। वही हिन्नोम की तराई बाद में "गेहन्ना", नरक का नाम बनी, और उसी नाम के साये में यीशु मसीह क्रूस पर परमेश्वर के क्रोध को अपने ऊपर ले लेते हैं। दूसरा धागा पद 15 में है: घायल, नंगे, असहाय लोगों को कपड़े, तेल, भोजन और गदहा मिलता है, और उन्हें यरूशलेम से यरीहो के रास्ते पर पहुँचाया जाता है, वह भी शत्रु सामरिया के हाथों। लूका 10 में यीशु ठीक यही कहानी दोहराते हैं: यरीहो का रास्ता, तेल, पशु, एक सामरी। वे इस भूले हुए अध्याय को उठाकर दिखाते हैं कि दया की शक्ल कैसी होती है, और स्वयं वही सामरी बनकर हमें उठा लेते हैं।
दर्पण
आहाज़ का पाप हमसे दूर लगता है, पर उसका तर्क नहीं। जब परियोजना हाथ से निकल रही हो, जब बीमारी की रिपोर्ट आ रही हो, जब पैसा कम पड़ रहा हो, हम भी उसी की तरह सोचते हैं: जो काम करता दिखे, उसी के आगे झुक जाओ। और उस सौदे की कीमत अक्सर वही चुकाते हैं जो हमारे सबसे करीब हैं: वह बच्चा जिसे हम समय नहीं देते क्योंकि करियर का देवता भूखा है, वह जीवनसाथी जो हमारी प्रतिष्ठा की वेदी पर चुप रहना सीख गया है। ध्यान दीजिए, आहाज़ ने भवन के द्वार बन्द किए, पर वेदियाँ हर कोने में बनाईं; पूजा बन्द नहीं हुई, बस दिशा बदल गई। आज ही अपनी अलमारी से एक जोड़ी अच्छे जूते निकालकर दरवाज़े के पास रख दें, और उस एक व्यक्ति का नाम ज़ोर से बोलें जिसे आप उन्हें देंगे।
पाठकगण
इतिहास की पुस्तक बेबीलोन से लौटे उन लोगों के लिए लिखी गई जिन्होंने जला हुआ मन्दिर अपनी आँखों से देखा था। उनके लिए पद 24 सबसे मार्मिक था: एक राजा ने यहोवा के भवन के द्वार बन्द कर दिए। वे जानते थे कि उपासना रुकना किसी सैनिक हार से बड़ी विपत्ति है। उन्हें यह भी चुभा होगा कि उत्तर के "अधर्मी" एप्रैमी नबी की बात मान गए, जबकि दाऊद के सिंहासन पर बैठा राजा नहीं माना। और पद 27 में आहाज़ को राजाओं के कब्रिस्तान से बाहर रखा जाना उन्हें याद दिलाता कि वंश की विरासत स्वतः वरदान नहीं; हर पीढ़ी को स्वयं चुनना पड़ता है। यह उनके अपने भविष्य का प्रश्न था।
अन्तर्पाठ
यशायाह 7 इसी आहाज़ के साथ हुई बातचीत है। जब वह डर के मारे चिह्न माँगने से इनकार करता है, परमेश्वर स्वयं चिह्न देते हैं: कुँवारी गर्भवती होगी और पुत्र का नाम इम्मानुएल रखेगी। यानी इस्राएल के सबसे बेईमान राजा के दरबार में ही मसीह की सबसे स्पष्ट प्रतिज्ञा दी गई; अनुग्रह मनुष्य की योग्यता का प्रतिफल नहीं। दूसरी ओर लूका 10 का भला सामरी हमें पद 15 पर लौटाता है। इतिहास का लेखक जिस दृश्य को दर्ज करता है, यीशु उसे कहानी में बदलकर पूछते हैं, "तेरा पड़ोसी कौन है?" दोनों मिलकर एक ही बात कहते हैं: जहाँ राजा विफल होता है, वहाँ परमेश्वर या तो एक नबी भेजते हैं या स्वयं आते हैं।
विवरण
पद 24 के उस छोटे वाक्य पर रुकिए: "यहोवा के भवन के द्वारों को बन्द कर दिया।" पहले उसने पात्र तोड़े, यानी उपासना के औज़ार नष्ट किए, फिर दरवाज़े पर ताला लगाया। यह सिर्फ़ उपेक्षा नहीं, सुविचारित बहिष्कार है: परमेश्वर को उनके ही घर में बन्द कर देना, जैसे कोई असहज रिश्तेदार भीतर के कमरे में धकेल दिया जाए। और यहीं सुसमाचार की चमक दिखती है। जिसे आहाज़ ने बन्द किया, उसे उसका बेटा हिजकिय्याह अगले ही अध्याय में खोलता है, और मसीह अपने विषय में कहते हैं कि वे स्वयं द्वार हैं, ऐसा द्वार जिसे कोई राजा बन्द नहीं कर सकता। मनुष्य ताला लगाता है; परमेश्वर एक नया रास्ता खोल देते हैं, अपने शरीर के द्वारा।
चिन्तन
आहाज़ के "क्लेश के समय" में मैं किस देवता के पास भागता हूँ, और उस सौदे की कीमत मेरे घर में कौन चुका रहा है?
पद 15 के एप्रैमी पुरुषों ने शत्रु को कपड़े और तेल दिए; इस सप्ताह वह "शत्रु" कौन है जिसे मैं केवल छोड़ देना नहीं, बल्कि घर तक पहुँचाना चाहूँगा?
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2 Chronicles 28 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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2 Chronicles 28 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
आपका धन्यवाद कि आपने ओदेद जैसे भविष्यद्वक्ता के मुँह से चेतावनी दी, "अब मेरी सुनो, और इन बंदियों को लौटा दो।" धन्यवाद कि आप बंदियों को भूलते नहीं, और हमें भी समय रहते रोक लेते हैं, ताकि हम अपने भाइयों पर अन्याय न करें।
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