बाइबल व्याख्या

दानिय्येल 5

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

बाबेल का राजा बेलशस्सर अपने हज़ार प्रधानों के लिए दावत रचता है, और नशे की गर्मी में आज्ञा देता है कि यरूशलेम के मन्दिर से लूटे गए सोने-चाँदी के पात्र लाए जाएँ; उनमें से वह अपनी रानियों और रखैलों के साथ दाखमधु पीता है और सोने, चाँदी, लोहे, काठ और पत्थर के देवताओं की स्तुति करता है। उसी घड़ी दीवार के चूने पर एक हाथ लिखने लगता है, और राजा के घुटने काँपने लगते हैं। बाबेल के पंडित पढ़ नहीं पाते; रानी की सलाह पर दानिय्येल बुलाया जाता है, इनाम ठुकराता है, राजा के अहंकार का लेखा-जोखा उसके मुँह पर रखता है और शब्दों का अर्थ खोलता है: गिना गया, तौला गया, बाँट दिया गया। उसी रात बेलशस्सर मार डाला जाता है।

मर्म

यह अध्याय परमेश्वर को उस रूप में दिखाता है जिसे हम कम याद रखते हैं: वे नापते हैं। "तू मानो तराजू में तौला गया और हलका पाया गया है" यह कोई क्रोध का विस्फोट नहीं, बल्कि हिसाब है। बेलशस्सर का पाप यह नहीं कि उसने दावत की, बल्कि यह कि उसने पवित्र वस्तुओं को अपने मनोरंजन का साधन बनाया और जिस परमेश्वर के "हाथ में तेरा प्राण है" उसका सम्मान नहीं किया। यहाँ नैतिकता का आधार खुलता है: हम अपने जीवन के स्वामी नहीं, किराएदार हैं। हर श्वास उधार की है। जो यह भूल जाता है, वह अपनी सत्ता, अपने पैसे, अपने शरीर, अपने समय के साथ जो चाहे कर सकता है, और ठीक यही भूलना ही न्याय की जड़ है।

मुख्य सूत्र

दानिय्येल की पूरी पुस्तक एक ही धुन बजाती है: "परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है।" साम्राज्य आते हैं, दीवार पर तौले जाते हैं, और अगले साम्राज्य को सौंप दिए जाते हैं; मादी और फारसी भी अपनी बारी में हलके पाए जाएँगे। इसी पुस्तक में पहले वह पत्थर दिखाया गया था जो मनुष्य के हाथ से नहीं, और वह राज्य जो कभी नष्ट नहीं होगा। मसीह उसी राज्य के राजा हैं, और उनका आना इस अध्याय का उलटा दृश्य है: वे बाबेल की तरह लूटी हुई थाली से नहीं पीते, वे अपने ही हाथों से रोटी तोड़कर देते हैं और प्याला उठाकर कहते हैं कि यह उनका लहू है। एक राजा दूसरों के पात्रों से पीता है; दूसरा अपना कटोरा खुद पीता है, उन तौले हुए लोगों के लिए जो हलके निकले।

दर्पण

सबसे चुभनेवाला वाक्य पद 22 में है: "तू जो उसका पुत्र है, और यह सब कुछ जानता था, तो भी तेरा मन नम्र न हुआ।" यही हमारी असली स्थिति है। हमने देखा है कि अहंकार लोगों के साथ क्या करता है। हमने वह सहकर्मी देखा जिसने शॉर्टकट लिया और नौकरी खोई, वह रिश्तेदार जिसकी शराब ने घर तोड़ा, वह अगुवा जिसका दोहरा जीवन खुल गया। हम जानते हैं। और फिर भी वही ईमेल लिखते हैं, वही खाता छिपाते हैं, वही तीखा वाक्य पत्नी से कहते हैं, वही घंटे स्क्रीन पर बहा देते हैं। ज्ञान अपने आप नम्रता नहीं बनाता। बेलशस्सर के पास सूचना की कमी नहीं थी, झुकने की इच्छा की कमी थी।

आज ही एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखें जिसका गिरना आपने अपनी आँखों से देखा है, और उसके नीचे एक वाक्य: "इससे मैं जो जानता हूँ पर करता नहीं, वह यह है…" उसे पूरा करें और वह वाक्य ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने कह दें।

एक बारीकी

पद 29 पर रुकिए। दानिय्येल ने अभी-अभी कहा है कि राज्य के दिन गिने जा चुके हैं, और राजा क्या करता है? बैंगनी वस्त्र मँगवाता है, सोने की कण्ठमाला पहनाता है, ढिंढोरा पिटवाता है। सब कुछ शिष्टाचार के अनुसार, वादा पूरा, नबी को सम्मान। बस एक चीज़ गायब है: पश्चाताप। वह संदेश का पुरस्कार देता है और संदेश को अनसुना कर देता है। यह हमारी सबसे परिष्कृत आत्मरक्षा है। हम प्रवचन की तारीफ करते हैं, पुस्तक को रेखांकित करते हैं, अगुवे को धन्यवाद भेजते हैं, और अपने जीवन में एक इंच नहीं हिलते। बेलशस्सर की मृत्यु उसी रात हुई, गले में सोने की माला पहनाने के कुछ घंटों बाद। धार्मिक शिष्टाचार किसी को नहीं बचाता।

पहले सुननेवाले

पहले पाठक निर्वासित यहूदी थे, या उनकी संतानें, जिनके दादा-दादी ने मन्दिर को जलते देखा था और वे पात्र गाड़ियों पर लदते देखे थे। उनके लिए यह कहानी सिर्फ़ नैतिक शिक्षा नहीं थी, यह घाव पर उँगली थी। जब बाबेल उन पात्रों से पीकर पत्थर के देवताओं की स्तुति कर रहा था, तो यह कहा जा रहा था कि उनका परमेश्वर हार गया। और तब वह हाथ लिखता है, बाबेल के ही महल में, बाबेल की ही दीवार पर, बाबेल के ही उत्सव के बीच। परमेश्वर को अपना मन्दिर वापस पाने की ज़रूरत नहीं थी; वे विजेता के भोजनकक्ष में घुसकर बोल सकते थे। यही अल्पसंख्यक विश्वासी की एकमात्र सच्ची शांति है: सत्ता का पासा किसी और के हाथ में है।

एक कठिन प्रश्न

नबूकदनेस्सर को सात काल मिले, पशुओं के बीच, और अन्त में बहाली। बेलशस्सर को एक रात मिली। क्यों? पाठ हमें यह नहीं बताता कि उसे चेतावनी के बाद पश्चाताप का अवसर मिला या नहीं; दानिय्येल भी उसे "फिर" नहीं कहता, केवल "अब यह हो चुका है"। यह असहज है, और इसे चिकना करना बेईमानी होगी। जो संकेत पाठ देता है वह यह है: उसने अपने पिता का अनुभव जानते हुए भी मन नम्न नहीं किया। दिया गया प्रकाश ही उत्तरदायित्व का पैमाना बनता है। इसका अर्थ हमारे लिए राहत नहीं, गम्भीरता है: हमने जितना जाना है, उतना ही हम तौले जाएँगे। और अनुग्रह की खिड़की कभी हमेशा के लिए खुली नहीं रहती। यही अनुग्रह की कीमत भी है।

चिंतन

कौन-सी एक बात आप वर्षों से जानते हैं, दूसरों को सिखाते भी हैं, पर अपने ऊपर लागू करने से बचते आए हैं?

आपके जीवन में वे कौन-से "पात्र" हैं, जो परमेश्वर के हैं पर जिन्हें आपने अपने आराम के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया है: समय, शरीर, प्रभाव, पैसा?

Daniel में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Daniel

Dale Ralph Davis

Courage in exile and the God who rules history, told with verve.

Daniel: An Introduction and Commentary

Joyce Baldwin

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Daniel

Tremper Longman

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

Daniel For You

David Helm

Standing firm in Babylon, with hope fixed on the true King.

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Daniel 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

दानिय्येल 5 का क्या अर्थ है?
बाबेल का राजा बेलशस्सर अपने हज़ार प्रधानों के लिए दावत रचता है, और नशे की गर्मी में आज्ञा देता है कि यरूशलेम के मन्दिर से लूटे गए सोने-चाँदी के पात्र लाए जाएँ; उनमें से वह अपनी रानियों और रखैलों के साथ दाखमधु पीता है और सोने, चाँदी, लोहे, काठ और पत्थर के देवताओं की स्तुति करता है। उसी घड़ी दीवार के चूने पर एक हाथ लिखने लगता है, और राजा के घुटने काँपने लगते हैं। बाबेल के पंडित पढ़ नहीं पाते; रानी की सलाह पर दानिय्येल बुलाया जाता है, इनाम ठुकराता है, राजा के अहंकार का लेखा-जोखा उसके मुँह पर रखता है और शब्दों का अर्थ खोलता है: गिना गया, तौला गया, बाँट दिया गया। उसी रात बेलशस्सर मार डाला जाता है।
दानिय्येल 5 किस विषय में है?
दानिय्येल की पूरी पुस्तक एक ही धुन बजाती है: "परमप्रधान परमेश्वर मनुष्यों के राज्य में प्रभुता करता है।" साम्राज्य आते हैं, दीवार पर तौले जाते हैं, और अगले साम्राज्य को सौंप दिए जाते हैं; मादी और फारसी भी अपनी बारी में हलके पाए जाएँगे। इसी पुस्तक में पहले वह पत्थर दिखाया गया था जो मनुष्य के हाथ से नहीं, और वह राज्य जो कभी नष्ट नहीं होगा। मसीह उसी राज्य के राजा हैं, और उनका आना इस अध्याय का उलटा दृश्य है: वे बाबेल की तरह लूटी हुई थाली से नहीं पीते, वे अपने ही हाथों से रोटी तोड़कर देते हैं और प्याला उठाकर कहते हैं कि यह उनका लहू है। एक राजा दूसरों के पात्रों से पीता है; दूसरा अपना कटोरा खुद पीता है, उन तौले हुए लोगों के लिए जो हलके निकले।
दानिय्येल 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही एक कागज़ पर उस एक व्यक्ति का नाम लिखें जिसका गिरना आपने अपनी आँखों से देखा है, और उसके नीचे एक वाक्य: "इससे मैं जो जानता हूँ पर करता नहीं, वह यह है..." उसे पूरा करें और वह वाक्य ऊँची आवाज़ में परमेश्वर के सामने कह दें।
दानिय्येल 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पहले पाठक निर्वासित यहूदी थे, या उनकी संतानें, जिनके दादा-दादी ने मन्दिर को जलते देखा था और वे पात्र गाड़ियों पर लदते देखे थे। उनके लिए यह कहानी सिर्फ़ नैतिक शिक्षा नहीं थी, यह घाव पर उँगली थी। जब बाबेल उन पात्रों से पीकर पत्थर के देवताओं की स्तुति कर रहा था, तो यह कहा जा रहा था कि उनका परमेश्वर हार गया। और तब वह हाथ लिखता है, बाबेल के ही महल में, बाबेल की ही दीवार पर, बाबेल के ही उत्सव के बीच। परमेश्वर को अपना मन्दिर वापस पाने की ज़रूरत नहीं थी; वे विजेता के भोजनकक्ष में घुसकर बोल सकते थे। यही अल्पसंख्यक विश्वासी की एकमात्र सच्ची शांति है: सत्ता का पासा किसी और के हाथ में है।
दानिय्येल 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
कौन-सी एक बात आप वर्षों से जानते हैं, दूसरों को सिखाते भी हैं, पर अपने ऊपर लागू करने से बचते आए हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Daniel 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 16

पिता, मेरे सामने भी कुछ बातें ऐसी हैं जिन्हें मैं पढ़ तो लेता हूँ पर समझ नहीं पाता। मुझे अपनी समझ दीजिए, ताकि उलझनें सुलझें। और जब लोग मान या इनाम देना चाहें, तब भी मेरा मन आपकी ओर ही झुका रहे, क्योंकि सब कुछ आपसे ही आता है।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 12

पिता, आपने दानिय्येल को ऐसी समझ दी कि उलझी हुई गुत्थियाँ भी सुलझ गईं। मेरे भीतर भी वैसी ही आत्मा डालिए, जो आपसे सुनती हो। जहाँ मेरी बुद्धि छोटी पड़ जाती है, वहाँ आप राह दिखाइए, और मेरा जीवन दूसरों के लिए आपकी बुद्धि की गवाही बने।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

दावत चल रही थी, हँसी थी, परमेश्वर के भवन के पात्रों में दाखमधु छलक रहा था। फिर दीवार पर एक हाथ लिखने लगा, और "राजा का रंग उड़ गया, और वह मन ही मन घबरा गया, और उसकी कमर के जोड़ ढीले हो गए, और उसके घुटने एक दूसरे से टकराने लगे।"

जिस साहस से उसने पवित्र वस्तुओं को छुआ था, वह एक पल में ढह गया। सोच, तेरी निडरता किस चीज़ पर टिकी है?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 25

पिता, दीवार पर लिखे उन शब्दों की तरह आप मेरे जीवन को भी तौलते हैं। मैं जानता हूँ कि आपके तराजू में मैं अकसर कम उतरता हूँ। मुझे घमंड से बचाइए और सच्चाई देखने की हिम्मत दीजिए, ताकि मैं आपके सामने खुले दिल से जी सकूँ।

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