यहेजकेल 44
पाठ
स्वर्गदूत जैसा वह पुरुष यहेजकेल को मन्दिर के पूर्वी बाहरी फाटक पर लौटा लाता है, और वह फाटक बन्द है, हमेशा के लिए बन्द, क्योंकि "इस्राएल का परमेश्वर यहोवा इससे होकर भीतर आया है।" केवल प्रधान को वहाँ ओसारे में बैठकर परमेश्वर के सामने भोजन करने की अनुमति है। फिर उत्तरी फाटक से भवन के सामने आकर भविष्यद्वक्ता देखता है कि परमेश्वर का तेज पूरे भवन को भर चुका है, और वह मुँह के बल गिर पड़ता है। इसके बाद एक लम्बी, कड़ी सूची आती है: कौन पवित्रस्थान में आ सकता है और कौन नहीं, लेवियों को उनकी अविश्वासयोग्यता के कारण नीचे का काम, सादोक की सन्तान को वेदी की सेवा, और याजकों के लिए वस्त्र, विवाह, शोक, शिक्षा और न्याय के विस्तृत नियम, इस घोषणा पर समाप्त होते हुए कि याजकों की निज भूमि परमेश्वर स्वयं हैं।
मूल बात
यह अध्याय एक ऐसी बात कहता है जिसे हम आसानी से भूल जाते हैं: परमेश्वर की उपस्थिति कोई कोमल भावना नहीं, एक सजीव आग है जिसके पास आने का तरीका परमेश्वर स्वयं तय करते हैं। पूरा अध्याय दरवाज़ों, दहलीज़ों और दूरियों के बारे में है, क्योंकि पाप ने निकटता को घातक बना दिया है। ध्यान दीजिए, शिकायत यह नहीं कि लोगों ने बलिदान चढ़ाना छोड़ दिया; बलिदान तो चल ही रहे थे। शिकायत यह है कि "तुम ने मेरी पवित्र वस्तुओं की रक्षा न की", यानी उपासना का ढाँचा तो खड़ा रहा पर उसका हृदय खोखला हो गया। और खतना का ज़िक्र दोहरा है, "मन और तन दोनों के खतनारहित", जो साफ़ करता है कि परमेश्वर बाहरी चिह्न से कहीं गहरी चीज़ माँग रहे हैं। पवित्रता यहाँ अलगाव नहीं, बल्कि उस जीवित परमेश्वर के साथ रहने की योग्यता है जो अपने भवन को अपने तेज से भर देते हैं।
जोड़नेवाला सूत्र
वह बन्द पूर्वी फाटक इस अध्याय की सबसे बड़ी भविष्यवाणी है। यहेजकेल ने पहले देखा था कि परमेश्वर का तेज मन्दिर छोड़कर पूर्व की ओर चला गया; अब वही तेज उसी रास्ते से लौट आया है, और दरवाज़ा सदा के लिए मुहरबन्द कर दिया जाता है। परमेश्वर आए हैं और अब जाएँगे नहीं। यह वही वादा है जो देहधारण में शरीर पहनकर हमारे बीच आ बसता है: परमेश्वर का तेज एक भवन में नहीं, एक व्यक्ति में। और इस बन्द फाटक के पास केवल एक ही आकृति बैठ सकती है, "केवल प्रधान ही, प्रधान होने के कारण, मेरे सामने भोजन करने को वहाँ बैठेगा।" वह प्रधान न याजक है न पुराना राजा; वह दाऊद का वंशज है जो परमेश्वर की उपस्थिति में भोजन करता है और अपने लोगों को भीतर लाता है। मसीह में यह द्वारपाल और द्वार दोनों एक ही हो जाते हैं।
दर्पण
इस अध्याय की सबसे चुभने वाली बात यह है कि लेवियों ने सेवा बन्द नहीं की थी; उन्होंने बस सेवा को उस चीज़ के साथ बाँट लिया जिसे परमेश्वर घृणित कहते हैं। वे मन्दिर में भी थे और मूरतों के सामने भी। हममें से बहुत लोग इसी दो-तरफ़ा जीवन में जीते हैं: रविवार को गीत, सोमवार को दफ़्तर में वही चालाकी; घर में प्रार्थना, और पैसे के हिसाब में वही छिपी बेईमानी; बाइबल पढ़ने की आदत बरकरार, पर पत्नी या बेटे से महीनों से सच्ची बात नहीं हुई। परमेश्वर यहाँ ढाँचे को नहीं, ढाँचे के भीतर के खोखलेपन को पकड़ते हैं। और वे इसे हल्के में नहीं लेते। आज दस मिनट निकालिए और काग़ज़ पर एक ही वाक्य लिखिए: वह एक जगह जहाँ आप परमेश्वर की सेवा के नाम पर सिर्फ़ रूप निभा रहे हैं। फिर उसे ज़ोर से बोलकर प्रभु के सामने रख दीजिए, बिना सफ़ाई दिए।
एक बारीकी
उन्नीसवीं आयत रुककर पढ़ने लायक़ है: याजक बाहरी आँगन में जाते समय सेवा के वस्त्र उतार दें, "जिससे लोग उनके वस्त्रों के कारण पवित्र न ठहरें।" पवित्रता यहाँ संक्रामक है, पर ख़तरनाक ढंग से; वह छूने से फैलती है और साधारण जीवन में घुसकर उसे जोखिम में डाल देती है। इसलिए पवित्रता को सावधानी से पहना और उतारा जाता है, जैसे कोई जलता हुआ कोयला। अब उस आदमी को याद कीजिए जिसके वस्त्र का छोर एक बीमार स्त्री ने भीड़ में छू लिया और वह चंगी हो गई। वहाँ पवित्रता को उतारकर कोठरी में रखने की ज़रूरत नहीं पड़ी, क्योंकि अशुद्धता उसे दूषित नहीं कर सकी। यहेजकेल का मन्दिर पवित्रता की रक्षा करता है; मसीह में वही पवित्रता बाहर निकलकर हमला करती है।
कठिन प्रश्न
लेवियों के साथ जो होता है, वह हमें असहज करता है। उन्हें क्षमा तो मिली, वे मन्दिर से निकाले नहीं गए, पर उनका पुराना ओहदा कभी वापस नहीं मिलता: "वे मेरे समीप न आएँ, और न मेरे लिये याजक का काम करें।" यानी परमेश्वर के घर में जगह है, मगर घाव का निशान बना रहता है। हम सुनना चाहते हैं कि अनुग्रह हर परिणाम मिटा देता है, पर यह पाठ ऐसा नहीं कहता। पाप की क्षमा और पाप के प्रभाव दो अलग चीज़ें हैं; टूटा भरोसा माफ़ किया जा सकता है और फिर भी वापस कमाना पड़ता है। यह कड़वा है। पर ध्यान दीजिए कि परमेश्वर उन्हें फेंकते नहीं, काम देते हैं। सीमित सेवा भी सेवा है, और अस्वीकृति नहीं।
पृष्ठभूमि
यहेजकेल स्वयं याजक था, जिसे मन्दिर में सेवा करने का मौक़ा कभी नहीं मिला; वह बाबेल में बन्धुआई में बैठा है, और यरूशलेम का मन्दिर राख हो चुका है। लगभग पच्चीस साल के निर्वासन के बाद उसे यह विशाल दर्शन मिलता है: नापा हुआ मन्दिर, लौटता हुआ तेज, फिर से व्यवस्थित उपासना। सादोक की सन्तान का ज़िक्र राजनीति नहीं, इतिहास है: यही वंश यरूशलेम की वेदी पर टिका रहा जब बाक़ी लेवीय देश भर के ऊँचे स्थानों पर मूर्तिपूजा की व्यवस्था सँभालते रहे। और अन्त की बात एक निर्वासित व्यक्ति के लिए सबसे बड़ी सान्त्वना है: याजकों को ज़मीन नहीं मिलती, "उनकी निज भूमि मैं ही हूँ।" जिनके पास कुछ नहीं बचा, उनसे परमेश्वर कहते हैं कि मैं ही तुम्हारी जायदाद हूँ।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन-सा "बाहरी आँगन" है जहाँ आप सेवा के वस्त्र उतारकर बिल्कुल दूसरे इंसान बन जाते हैं?
अगर परमेश्वर आज आपसे कहें, "तुम्हारी निज भूमि मैं ही हूँ", तो आपके भीतर राहत जागेगी या डर, और क्यों?
Ezekiel में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Makes the visions understandable and the hope of new hearts vivid.
Ezekiel: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Ezekiel 44 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यहेजकेल 44 का क्या अर्थ है?
यहेजकेल 44 किस विषय में है?
यहेजकेल 44 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यहेजकेल 44 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहेजकेल 44 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ezekiel 44 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
अन्नबलि, पापबलि और दोषबलि उनका भोजन होगा, और इस्राएल में जो कुछ अर्पण किया जाए वह उन्हीं का होगा।"
याजकों के पास अपना खेत नहीं था। उनकी हर दिन की रोटी वेदी से आती थी। कितना असुरक्षित लगता है, फिर भी परमेश्वर ने यही ठहराया, कि उनका पेट उसकी उपस्थिति से जुड़ा रहे। तेरी सुरक्षा आज किस चीज़ से बँधी है?
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
