यिर्मयाह 29:11
पाठ
निर्वासन की चिट्ठी के बीचोंबीच परमेश्वर अपने मन का भेद खोलते हैं: "जो कल्पनाएँ मैं तुम्हारे विषय करता हूँ उन्हें मैं जानता हूँ, वे हानि की नहीं, वरन् कुशल ही की हैं, और अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा।" यह वाक्य किसी सुखी, बसे हुए समाज से नहीं कहा गया, बल्कि उन लोगों से जिनका नगर लुट चुका था, जिनका राजा बन्दी था, और जिन्हें अभी-अभी बताया गया था कि सत्तर वर्ष लगेंगे। परमेश्वर कहते हैं: मेरे पास तुम्हारे लिए एक सोचा-समझा इरादा है, वह तुम्हें तोड़ने का नहीं, तुम्हें फिर से खड़ा करने का है, और उसका अन्त निराशा में नहीं, बल्कि पूरी हुई आशा में होगा।
मर्म
यहाँ जो बात सबसे पहले चौंकाती है, वह यह है कि परमेश्वर कहते हैं "उन्हें मैं जानता हूँ।" यानी बन्धुआई कोई दुर्घटना नहीं थी, किसी बड़ी साम्राज्यवादी ताकत के हाथों परमेश्वर की हार नहीं थी। बाबेल की सेनाएँ उनकी योजना को पटरी से नहीं उतार सकीं; वे उस योजना का हिस्सा थीं। यही इस पद का धार्मिक केंद्र है: परमेश्वर की भलाई और उनकी संप्रभुता एक ही हाथ के दो पहलू हैं। लेकिन ध्यान दीजिए कि "कुशल" तुरंत नहीं आता। पद 10 पहले सत्तर वर्ष गिनवाता है, फिर पद 11 दिलासा देता है। यह कोई सस्ता आश्वासन नहीं कि सब जल्दी ठीक हो जाएगा, बल्कि यह भरोसा कि जो परमेश्वर न्याय करते हैं, वही अंत में उद्धार भी करते हैं, और उनका अंतिम शब्द दण्ड नहीं, अनुग्रह है।
सूत्र
बन्धुआई से लौटना हुआ, पर जो लौटे उन्होंने पाया कि वह "कुशल" अधूरा था: मन्दिर छोटा था, दाऊद की गद्दी खाली रही, और फ़ारस का जुआ कंधों पर बना रहा। यिर्मयाह का वादा झूठा नहीं था, वह बड़ा था। मत्ती अपनी वंशावली को जानबूझकर तीन हिस्सों में बाँटता है और बीच का पड़ाव है "बाबेल को बँधुआई में जाना", और उस सूची का अन्त यीशु पर होता है। यानी मत्ती कह रहा है: निर्वासन की कहानी यहाँ जाकर पूरी होती है। परमेश्वर की वह "कल्पना" जिसे केवल वे जानते थे, अन्ततः एक व्यक्ति में खुली, जो स्वयं निर्वासित हुआ, नगर के बाहर मारा गया, ताकि जो दूर किए गए थे वे घर लौट सकें। मसीह में "अन्त में तुम्हारी आशा पूरी करूँगा" कोई भावुक कामना नहीं, एक खाली कब्र है।
दर्पण
यह पद अक्सर उन तस्वीरों पर छपता है जहाँ सूरज उग रहा होता है, और तब यह हमारी सबसे मासूम भूख को सहलाता है: कि परमेश्वर हमारी योजनाओं पर मुहर लगा दें। पर मूल में यह वादा उन लोगों के लिए है जिनकी योजनाएँ चूर हो चुकी हैं। आप जिस नौकरी में फँसे हैं और जो आपने कभी नहीं चुनी थी, जो रिश्ता सातवें साल भी सूखा है, जो जाँच रिपोर्ट आपने दो बार पढ़ी, जो शहर आपको पराया लगता है, इन्हीं जगहों पर यह वचन उतरता है। और वह यह नहीं कहता कि कल सुबह सब बदल जाएगा। वह कहता है: यह जगह तुम्हारा अन्त नहीं है, पर फ़िलहाल यही तुम्हारा पता है, इसलिए यहीं जियो, यहीं बोओ। आज ही एक काग़ज़ पर उस जगह या स्थिति का नाम लिखिए जहाँ आप फँसा हुआ महसूस करते हैं, और ज़ोर से बोलकर उसके कुशल के लिए प्रार्थना कीजिए, जैसे पद 7 कहता है।
एक बारीकी
"कुशल" के पीछे इब्रानी शब्द है शालोम, और यह वही शब्द है जो पद 7 में लौटता है: "उसके कुशल का यत्न किया करो।" ध्यान दीजिए किस नगर का। बाबेल का, उस साम्राज्य का जिसने उनका मन्दिर जलाया था। परमेश्वर पहले उन्हें अपने शत्रु के भले के लिए प्रार्थना करने को कहते हैं, और फिर कहते हैं कि उनके अपने लिए उनकी कल्पनाएँ शालोम की हैं। दोनों वाक्य एक ही चिट्ठी में हैं, और उन्हें अलग नहीं किया जा सकता। जो परमेश्वर बाबेल के भले की माँग करते हैं, वही आगे चलकर अपने पुत्र को उस दुनिया के भले के लिए भेजेंगे जो उन्हें ठुकराएगी। शालोम यहाँ केवल सुख नहीं, टूटी हुई चीज़ों का फिर से जुड़ जाना है।
पहले सुननेवाले
ये लोग साधारण किसान नहीं थे। पद 2 गिनाता है: राजमाता, खोजे, हाकिम, लोहार और कारीगर। यरूशलेम की क्रीम, जिन्हें बाबेल ने इसलिए उठाया कि पीछे कोई नेतृत्व न बचे। वे यही सुनना चाहते थे कि यह दुःस्वप्न जल्दी ख़त्म होगा, और झूठे नबी ठीक यही परोस रहे थे। अब उन्हें बताया जाता है कि सत्तर वर्ष लगेंगे। इसका सीधा अर्थ यह था कि उस चिट्ठी को सुनने वालों में से अधिकांश यरूशलेम कभी नहीं देखेंगे। पद 11 उनके कानों में इसलिए और भी भारी पड़ा होगा: यह आशा उनके पोतों को मिलेगी। और फिर भी परमेश्वर इसे उन्हीं से कहते हैं, ताकि वे उस भविष्य के लिए जिएँ जिसे वे स्वयं नहीं भोगेंगे।
पृष्ठभूमि
यह 597 ईसा पूर्व के तुरंत बाद का समय है। यकोन्याह गद्दी से उतारकर बाबेल ले जाया गया, सिदकिय्याह को नबूकदनेस्सर ने कठपुतली राजा बनाकर बैठाया। यरूशलेम अभी खड़ा था, इसलिए वहाँ बचे लोग खुद को भाग्यशाली और निर्वासितों को त्यागा हुआ समझते थे। यिर्मयाह यह चिट्ठी सरकारी दूतों के हाथ भेजते हैं, यानी शाही डाक का इस्तेमाल एक ऐसे संदेश के लिए जो शाही नीति के विरुद्ध था। बाबेल में शमायाह जैसे लोग जवाबी चिट्ठियाँ लिख रहे थे कि यिर्मयाह को काठ में ठोंका जाए। इस शोर के बीच परमेश्वर की आवाज़ पहचानना आसान नहीं था, और यही इस चिट्ठी की असली चुनौती थी।
चिंतन
आप किस स्थिति में "दो साल" की उम्मीद पाल रहे हैं जबकि परमेश्वर आपको "सत्तर साल" के लिए जीना सिखा रहे हैं?
यदि मसीह में यह वादा पहले ही पूरा हो चुका है, तो आपकी वर्तमान प्रतीक्षा का स्वभाव कैसे बदलता है?
Jeremiah में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Walks with the weeping prophet and the God whose word will not fail.
Jeremiah and Lamentations: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Jeremiah 29:11 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यिर्मयाह 29:11 का क्या अर्थ है?
यिर्मयाह 29:11 किस विषय में है?
यिर्मयाह 29:11 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यिर्मयाह 29:11 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यिर्मयाह 29:11 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Jeremiah 29 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि जब यकोन्याह, राजमाता, हाकिम, कारीगर और लोहार यरूशलेम से बंधुआई में ले जाए गए, तब भी आपने एक एक को नाम लेकर याद रखा। धन्यवाद कि आपका वचन उनके पीछे परदेश तक पहुँचा, और आज मेरी उजड़ी सी जगह में भी आप मुझे भूलते नहीं।
निर्वासन में पड़े लोगों को लगा होगा कि परमेश्वर यरूशलेम में ही रह गया, और वे बाबेल में भुला दिए गए। लेकिन यिर्मयाह "पत्र" भेजता है। परमेश्वर का वचन सीमाएँ पार करके वहाँ पहुँचता है जहाँ उसके लोग रो रहे हैं। तू जिस जगह को अपनी सज़ा समझता है, वहाँ भी तेरे नाम की एक चिट्ठी पहुँच चुकी है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें