परमेश्वर पर भरोसा रखो
भरोसा और धन्यवाद
बच्चों के लिए चार छोटे बाइबल पल, नीतिवचन 3:5-6, भजन संहिता 118:1, यूहन्ना 6:11 and भजन संहिता 121:1 पर आधारित।
☀ सुबह का पल
तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना। उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
नीतिवचन 3:5-6 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: अपने पूरे दिल से परमेश्वर पर भरोसा रखो, अपनी ही समझ पर नहीं। हर काम में उसे याद रखो, और वह तुम्हारी राह सीधी बनाएगा।
जब तुम बिस्तर से उठते हो, तो शायद पहला ख्याल यह आता है, आज स्कूल में क्या होगा, कौन दोस्त मिलेगा, कौन सा टेस्ट है। दिल में थोड़ा डर भी हो सकता है, थोड़ी घबराहट भी।
परमेश्वर कहते हैं, अपनी ही समझ पर मत टिको। तुम्हें हर सवाल का जवाब खुद नहीं ढूंढना पड़ता। परमेश्वर तुमसे पहले हर रास्ते पर जाते हैं, स्कूल के गेट तक भी, क्लास के अंदर भी।
जब तुम जूते पहनते हो, बैग उठाते हो, बस या साइकिल पर निकलते हो, तब मन में यह याद रखो, आज परमेश्वर तुम्हारे साथ चल रहा है। वह तुम्हारी राह को सीधा करेगा, चाहे दिन कैसा भी हो।
✦ दोपहर का पल
यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!
भजन संहिता 118:1 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: परमेश्वर बहुत अच्छा है और उसका प्यार कभी खत्म नहीं होता, इसलिए हम उसे धन्यवाद कहते हैं।
आज दोपहर जब तुम अपना टिफिन खोलोगे, ज़रा रुककर देखो कि उसमें क्या-क्या है। रोटी, सब्ज़ी, फल, या शायद तुम्हारी पसंदीदा मिठाई। यह सब अपने आप नहीं आया, परमेश्वर ने इसे तुम तक पहुँचाया।
परमेश्वर हर दिन भला है, चाहे स्कूल में दिन कैसा भी रहा हो। वह हमें भूखा नहीं छोड़ता, और उसकी करुणा सुबह से शाम तक हमारे साथ रहती है।
जब तुम खाना खाओ, तो एक पल के लिए मन में कहो, धन्यवाद परमेश्वर। और आस-पास देखो, शायद किसी दोस्त के पास कम खाना हो या वह अकेला बैठा हो। उसे अपने पास बुला लो, यह भी धन्यवाद देने का एक तरीका है।
✩ दोपहर का पल
तब यीशु ने रोटियाँ लीं, और धन्यवाद करके बैठनेवालों को बाँट दीं; और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बाँट दिया।
यूहन्ना 6:11 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: यीशु ने एक लड़के की छोटी रोटियाँ और मछलियाँ लीं, धन्यवाद दिया, और सब लोगों को खाने के लिए बाँट दीं।
स्कूल से घर आकर तुम्हें कैसी भूख लगती है? पेट में गुड़गुड़ होने लगती है, है ना? उस दिन पहाड़ी पर हज़ारों लोगों को भी ऐसी ही भूख लगी थी। पास में बस एक लड़के के पास पाँच रोटियाँ और दो छोटी मछलियाँ थीं। उसने वह सब यीशु को दे दिया। बहुत कम लग रहा था, पर यीशु ने उसे अपने हाथों में लिया, धन्यवाद दिया, और वह इतना हो गया कि सब खा सके। तुम्हारे पास भी शायद बहुत कुछ नहीं लगता, थोड़ी सी मदद, एक हँसी, अपना टिफिन बाँटना। पर जब तुम वह यीशु के साथ बाँटते हो, वह उसे बड़ा बना सकता है। तुम्हारा थोड़ा भी यीशु के हाथों में काफी है।
☾ संध्या का क्षण
मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर उठाऊँगा। मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी?
भजन संहिता 121:1 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: एक आदमी ऊँचे पहाड़ों को देखता है और सोचता है, मुझे मदद कहाँ से मिलेगी? वह जानता है कि परमेश्वर ही उसकी मदद करते हैं।
आज गुरुवार का दिन खत्म हो गया। स्कूल का बैग एक कोने में पड़ा है, जूते उतार दिए गए हैं, और अब बस सोने का समय है। शायद आज कुछ मुश्किल भी हुआ हो, कोई सवाल जो समझ नहीं आया, या किसी दोस्त से थोड़ी नाराज़गी।
भजन में एक आदमी पहाड़ों की ओर देखता है। वह सोचता है, मुझे मदद कहाँ से मिलेगी? तुम भी कभी-कभी ऐसा सोचते हो, है ना? जब कुछ भारी लगता है, तब आँखें ऊपर उठाना अच्छा है।
परमेश्वर पहाड़ों से भी बड़े हैं। वे रात में भी जागते रहते हैं, तुम्हें देखते हैं, तुम्हारी परवाह करते हैं। इसलिए आज रात चिंता को तकिए के नीचे रख दो। परमेश्वर तुम्हारी मदद करने के लिए तैयार हैं, अभी और सुबह भी।
इन अंशों को बाइबल में पढ़ें
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5तू अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।
6उसी को स्मरण करके सब काम करना, तब वह तेरे लिये सीधा मार्ग निकालेगा।
1यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!
11तब यीशु ने रोटियाँ लीं, और धन्यवाद करके बैठनेवालों को बाँट दीं; और वैसे ही मछलियों में से जितनी वे चाहते थे बाँट दिया।
1मैं अपनी आँखें पर्वतों की ओर उठाऊँगा। मुझे सहायता कहाँ से मिलेगी?
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