प्रार्थना से मिलती शान्ति
प्रार्थना और शान्ति
बच्चों के लिए चार छोटे बाइबल पल, फिलिप्पियों 4:6, नीतिवचन 11:17, मरकुस 10:51 and फिलिप्पियों 4:7 पर आधारित।
☀ सुबह का पल
किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ।
फिलिप्पियों 4:6 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: किसी बात की चिंता मत करो। बस परमेश्वर से बात करो और उसे सब कुछ बता दो।
आज सुबह शायद तुम्हारे मन में कुछ घबराहट हो। स्कूल में टेस्ट होगा, या नए दोस्त से बात करनी है, या बस्ता ठीक से पैक नहीं हुआ। ये सब छोटी छोटी चिंताएँ बड़ी लग सकती हैं।
परमेश्वर कहते हैं, तुम्हें अकेले नहीं सोचना पड़ेगा। जैसे तुम अपनी मम्मी को सब बता देते हो, वैसे ही परमेश्वर को भी बता सकते हो। वे तुम्हारी हर बात सुनते हैं, चाहे वो छोटी लगे या बड़ी।
आपकी बारी
स्कूल जाने से पहले परमेश्वर को एक बात बता दो, जो आज तुम्हारे मन में है।
✦ दोपहर का पल
कृपालु मनुष्य अपना ही भला करता है, परन्तु जो क्रूर है, वह अपनी ही देह को दुःख देता है।
नीतिवचन 11:17 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: जब तुम दूसरों पर दया करते हो, तो असल में तुम अपना ही भला करते हो। और जब कोई क्रूर होता है, वह खुद को ही दुखी करता है।
स्कूल की छुट्टी में जब सब लंच खा रहे होते हैं, तभी कोई मौका आता है। शायद तुम्हारे पास एक बिस्किट ज्यादा है, या किसी दोस्त का टिफिन आज खाली है। तुम क्या करोगे?
बाइबल कहती है कि दया दिखाने से असल में तुम्हारा ही भला होता है। यह अजीब लगता है, पर सच है। जब तुम किसी को अपनी चीज़ बाँटते हो, तुम्हारे दिल में एक खुशी आती है जो पैसों से नहीं खरीदी जा सकती। और जब कोई गुस्से में या रूखा होता है, वह खुद ही दुखी रहता है।
आपकी बारी
तो आज की दोपहर आसान है। कोई गुस्सैल दिन हो या शांत दिन, तुम चुन सकते हो कि नरम रहना है। आज लंच में अपने बगल में बैठे किसी दोस्त को अपनी थाली से एक चीज़ दो।
✩ दोपहर का पल
इस पर यीशु ने उससे कहा, “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूँ?” अंधे ने उससे कहा, “हे रब्बी, यह कि मैं देखने लगूँ।”
मरकुस 10:51 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: यीशु ने अंधे आदमी से पूछा, तुम क्या चाहते हो? उसने कहा, मैं फिर से देखना चाहता हूँ।
स्कूल की छुट्टी के बाद कभी तुम भी किसी के पास दौड़कर जाते हो, जब कुछ चाहिए होता है। शायद पेंसिल टूट गई हो, या जूते का फीता खुल गया हो। तुम पुकारते हो, कोई मेरी मदद करो।
सड़क किनारे बैठा एक अंधा आदमी भी ऐसे ही पुकार रहा था। बहुत लोगों ने कहा, चुप रहो, यीशु व्यस्त हैं। पर यीशु रुक गए। उन्होंने पूछा, तू क्या चाहता है, कि मैं तेरे लिये करूँ? यीशु के पास हर एक के लिए समय था, भीड़ में भी।
आपकी बारी
आज शाम आँखें बंद करके यीशु से एक बात कहो, जो तुम्हें आज चाहिए।
☾ संध्या का क्षण
तब परमेश्वर की शान्ति, जो सारी समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी। (यशा. 26:3)
फिलिप्पियों 4:7 (IRV Hindi 2019)
सरल शब्दों में: परमेश्वर की शान्ति तुम्हारे दिल और मन को सुरक्षित रखती है, भले तुम्हें समझ न आए यह कैसे होता है।
आज मंगलवार का दिन खत्म हो गया है। शायद तुमने स्कूल में पढ़ाई की, दोस्तों के साथ खेला, या घर आकर कोई खेल खेला। अब तुम बिस्तर में लेटे हो और कमरे की बत्ती धीरे धीरे बंद हो रही है।
कभी कभी रात में मन में छोटे छोटे सवाल आते हैं, जैसे आज मैंने सब ठीक किया या नहीं, कल क्या होगा। परमेश्वर का वचन कहता है कि उसकी शान्ति हमारे दिल और मन को सुरक्षित रखती है, भले हमें समझ न आए यह कैसे होता है। जैसे मम्मी की गरम चादर तुम्हें ठंड से बचाती है, वैसे ही परमेश्वर की शान्ति तुम्हें डर और चिंता से बचाती है।
आपकी बारी
आज रात सोने से पहले धीरे से कहो, धन्यवाद परमेश्वर, आज के लिए, और फिर चैन से आँखें बंद कर लो।
इन अंशों को बाइबल में पढ़ें
किसी अंश पर टैप करें और अपने माता-पिता या शिक्षक के साथ यहीं पढ़ें।
6किसी भी बात की चिन्ता मत करो; परन्तु हर एक बात में तुम्हारे निवेदन, प्रार्थना और विनती के द्वारा धन्यवाद के साथ परमेश्वर के सम्मुख उपस्थित किए जाएँ।
17कृपालु मनुष्य अपना ही भला करता है, परन्तु जो क्रूर है, वह अपनी ही देह को दुःख देता है।
51इस पर यीशु ने उससे कहा, “तू क्या चाहता है कि मैं तेरे लिये करूँ?” अंधे ने उससे कहा, “हे रब्बी, यह कि मैं देखने लगूँ।”
7तब परमेश्वर की शान्ति, जो सारी समझ से बिलकुल परे है, तुम्हारे हृदय और तुम्हारे विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी। (यशा. 26:3)
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