1 इतिहास 22
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
राजा दाऊद एक दिन खड़े होकर बोले, "यही जगह है! यहीं परमेश्वर का भवन बनेगा, यहीं वेदी होगी।" दाऊद के मन में बरसों से एक सपना था, यहोवा के लिए एक शानदार भवन बनाना। उन्होंने तुरंत काम शुरू कर दिया। उन्होंने मज़दूरों को बुलाया जो पत्थर काट सकें। उन्होंने लोहा, पीतल, और देवदार की लकड़ी इकट्ठी की, इतनी ज़्यादा कि किसी ने गिनी भी नहीं। सोर और सीदोन के लोग बड़े-बड़े जहाज़ों में लकड़ी भेजते रहे।
लेकिन फिर दाऊद ने अपने बेटे सुलैमान को पास बुलाया और एक गहरी बात कही। "बेटा, मेरी इच्छा थी कि मैं यहोवा का भवन बनाऊँ। पर यहोवा ने मुझसे कहा, 'तूने बहुत लड़ाइयाँ लड़ी हैं, तूने बहुत खून बहाया है, इसलिए तू यह भवन नहीं बनाएगा।'" क्या दाऊद को यह सुनकर दुख हुआ होगा? ज़रूर हुआ होगा। पर उन्होंने हार नहीं मानी।
दाऊद ने आगे कहा, "पर तुझसे एक बेटा जन्म लेगा, वह शांति का राजा होगा, उसका नाम सुलैमान होगा। वही मेरे नाम का भवन बनाएगा।" फिर दाऊद ने सुलैमान की आँखों में देखकर कहा, "हियाव बाँध और दृढ़ हो। मत डर, तेरा मन कच्चा न हो।" यह सुनकर सुलैमान को हिम्मत मिली होगी, क्योंकि यह काम बहुत बड़ा था, किसी लड़के के लिए अकेले करना नामुमकिन जैसा।
इसलिए दाऊद ने सुलैमान को खाली हाथ नहीं छोड़ा। उन्होंने कहा, "देख, मैंने एक लाख किक्कार सोना, दस लाख किक्कार चाँदी, और इतना लोहा-पीतल जमा किया है कि गिना नहीं जा सकता। कारीगर भी तेरे पास बहुत हैं।" फिर दाऊद ने इस्राएल के सब सरदारों को बुलाकर आज्ञा दी, "सुलैमान की मदद करो! क्या यहोवा तुम्हारे साथ नहीं है? अब पूरे मन से परमेश्वर का पवित्रस्थान बनाओ।"
What Does This Mean?
दाऊद का सपना पूरा नहीं हो सका, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने वह सब कुछ तैयार किया जो सुलैमान को आगे चाहिए था। यह दिखाता है कि परमेश्वर का काम एक अकेले आदमी का काम नहीं होता। कभी कोई नींव रखता है, कोई और उस पर दीवार खड़ी करता है। दाऊद को यह मानना पड़ा कि परमेश्वर की योजना उनकी अपनी योजना से बड़ी थी। और सुलैमान को यह सीखना पड़ा कि डर लगने पर भी आगे बढ़ना, क्योंकि परमेश्वर साथ है।
The Common Thread
परमेश्वर ने दाऊद से एक वादा किया, "तेरा बेटा मेरे नाम का भवन बनाएगा, और मैं उसकी राजगद्दी सदा के लिए स्थिर रखूँगा।" यह वादा सुलैमान से भी आगे जाता है। बहुत बरसों बाद यीशु मसीह आए, जो दाऊद के घराने से थे, और जिनका राज्य कभी खत्म नहीं होगा। जैसे सुलैमान को शांति का राजा कहा गया, वैसे ही यीशु मसीह हमारे लिए सच्ची शांति लाए।
For You
कभी-कभी तुम्हारा कोई सपना अधूरा रह जाता है, शायद कोई खेल नहीं जीत पाए, या कोई चीज़ बनानी चाही पर नहीं बना पाए। तब दाऊद को याद करो। उन्होंने हार मानने के बजाय दूसरों की मदद की, ताकि काम पूरा हो सके। तुम भी अपने छोटे भाई-बहन की मदद कर सकते हो, भले वह काम तुम खुद पूरा न कर पाओ। और जब कोई बड़ा काम तुम्हें डरावना लगे, याद रखो सुलैमान को क्या कहा गया था, "हियाव बाँध, मत डर, यहोवा तेरे संग है।"
Talk About It
दाऊद को दुख हुआ होगा कि वे खुद भवन नहीं बना सके। फिर भी उन्होंने क्या किया?
अगर तुम सुलैमान की जगह होते, और तुमसे इतना बड़ा काम करने को कहा जाता, तो तुम्हें कैसा लगता?
Praying Together
हे प्रभु, कभी-कभी हमारे सपने वैसे पूरे नहीं होते जैसा हम चाहते हैं। हमें दाऊद जैसा दिल दीजिए, जो फिर भी दूसरों की मदद करता रहे। और जब हमें कोई बड़ा काम डरावना लगे, हमें सुलैमान जैसी हिम्मत दीजिए। हमें याद दिलाइए कि आप हमेशा हमारे साथ हैं। आमीन।
1 इतिहास 22 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 इतिहास 22 किस विषय में है?
1 इतिहास 22 क्या कहता है?
1 इतिहास 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 इतिहास 22 से क्या सीख सकते हैं?
1 इतिहास 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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