1 थिस्सलुनीकियों 3
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
पौलुस एक शहर में थे, जिसका नाम एथेंस था। पर उनका मन वहाँ नहीं लगा। वे बार-बार थिस्सलुनीके के बारे में सोचते थे। वहाँ के लोग यीशु में नए-नए विश्वासी बने थे। और उन पर बड़ी कठिनाइयाँ आ रही थीं। लोग उन्हें सताते थे। पौलुस को डर था, "कहीं वे डगमगा न जाएँ। कहीं वे विश्वास छोड़ न दें।"
आखिर पौलुस से रहा नहीं गया। उन्होंने अपने प्रिय साथी तीमुथियुस को बुलाया। "जाओ," उन्होंने कहा, "थिस्सलुनीके जाओ। उन्हें स्थिर करो। उनके विश्वास के बारे में पता लगाओ।" तीमुथियुस निकल पड़ा, दूर के रास्तों से होकर। पौलुस पीछे रह गए, इंतज़ार करते हुए। क्या तुमने कभी किसी का इंतज़ार किया है, जब तुम्हें नहीं पता था कि सब ठीक है या नहीं?
कुछ समय बाद तीमुथियुस लौट आया। पौलुस दौड़कर उसके पास गए होंगे। "क्या हाल है उनका?" उन्होंने पूछा होगा। और तीमुथियुस ने खुशखबरी सुनाई। थिस्सलुनीके के लोग अब भी विश्वास में मज़बूत थे। वे अब भी एक-दूसरे से प्रेम करते थे। और वे पौलुस को याद करते थे, ठीक वैसे ही जैसे पौलुस उन्हें याद करते थे।
यह सुनकर पौलुस की आँखों में आँसू आ गए होंगे, खुशी के आँसू। उन्होंने लिखा, "अब यदि तुम प्रभु में स्थिर रहो तो हम जीवित हैं।" जैसे कोई भारी बोझ उनके कंधों से उतर गया हो।
What Does This Mean?
पौलुस एक पिता की तरह थे, जो अपने बच्चों की चिंता करता है। जब बच्चे दूर होते हैं और मुश्किल में होते हैं, तो पिता चैन से नहीं बैठ सकता। वह मदद भेजता है। वह इंतज़ार करता है। और जब अच्छी खबर आती है, तो उसका दिल भर आता है।
यह पाठ हमें सिखाता है कि विश्वास कोई एक बार की बात नहीं है। विश्वास को थामे रहना पड़ता है, खासकर जब मुश्किलें आएँ। पौलुस ने खुद कहा था, "हमें क्लेश उठाने पड़ेंगे।" यानी कठिनाई आने पर हैरान होने की ज़रूरत नहीं। पर उस कठिनाई में भी परमेश्वर पर भरोसा रखना, यही असली विश्वास है।
The Common Thread
पौलुस बार-बार यीशु की बात करते हैं। वे कहते हैं, "प्रभु यीशु" उन्हें थिस्सलुनीके तक पहुँचने का रास्ता दिखाए। और सबसे खास बात आखिर में है। पौलुस चाहते हैं कि जब यीशु अपने सब पवित्र लोगों के साथ फिर से आएँ, तो थिस्सलुनीके के लोग परमेश्वर के सामने बिना किसी दोष के खड़े हों।
यह एक बड़ा वादा है। यीशु सिर्फ एक बार पृथ्वी पर नहीं आए। वे फिर आएँगे, राजा की तरह, अपने सब लोगों के साथ। और जो लोग उन पर विश्वास बनाए रखते हैं, वे उस दिन डरेंगे नहीं। वे खुशी से खड़े होंगे, साफ और निर्दोष, क्योंकि यीशु ने उन्हें थाम रखा है।
For You
तुम्हारे आसपास भी लोग होंगे जो यीशु पर विश्वास करते हैं। शायद तुम्हारा कोई दोस्त, या परिवार का कोई सदस्य, कठिन समय से गुज़र रहा हो। पौलुस ने तीमुथियुस को भेजा था। तुम क्या भेज सकते हो? शायद एक प्रार्थना। शायद एक प्यारा सा संदेश, "मैं तुम्हारे लिए प्रार्थना कर रहा हूँ।"
और जब तुम्हें खुद मुश्किल लगे, याद रखना, परमेश्वर तुम्हें भूले नहीं हैं। पौलुस रात-दिन प्रार्थना करते थे। तुम भी आज रात परमेश्वर से बात कर सकते हो।
Talk About It
पौलुस को तीमुथियुस की खबर सुनकर इतनी खुशी क्यों हुई?
तुम किसी के लिए आज प्रार्थना कर सकते हो, जो मुश्किल में है?
Praying Together
हे परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें कभी नहीं भूलते। जब हम कठिनाई में हों, तो हमें स्थिर रखिए। हमारे प्रेम को बढ़ाइए, अपने लोगों के लिए और सबके लिए। और जब यीशु फिर आएँ, हमें तैयार पाइए। आमीन।
1 थिस्सलुनीकियों 3 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
1 थिस्सलुनीकियों 3 किस विषय में है?
1 थिस्सलुनीकियों 3 क्या कहता है?
1 थिस्सलुनीकियों 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे 1 थिस्सलुनीकियों 3 से क्या सीख सकते हैं?
1 थिस्सलुनीकियों 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पौलुस चिंता में था, इसलिए तीमुथियुस को भेजा। और जो खबर लौटकर आई, उसे वह "सुसमाचार" कहता है: "तुम्हारे विश्वास और प्रेम का सुसमाचार सुनाया।" सोचिए, जो शब्द वह मसीह के लिए इस्तेमाल करता है, वही आपके टिके रहने के लिए। आपका चुपचाप विश्वास में बने रहना किसी दूर बैठे व्यक्ति के लिए खुशखबरी हो सकता है। क्या आप जानते हैं कि कौन आपकी खबर का इंतज़ार कर रहा है?
किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?
हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें