7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

2 राजाओं 4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

स्पष्टीकरण

2 राजा अध्याय 4 में हम तीन घटनाएँ पढ़ते हैं, और तीनों में एक ही व्यक्ति सामने आता है, परमेश्वर का भक्त एलीशा।

पहली घटना में एक विधवा रोते हुए एलीशा के पास आती है। उसके पति पर कर्ज था, और अब कर्जदार उसके दो बेटों को दास बनाकर ले जाना चाहता है। उस स्त्री के घर में सिर्फ एक छोटी हाण्डी तेल है, और कुछ नहीं। एलीशा उससे कहता है कि वह पड़ोसियों से खाली बर्तन माँग ले आए, जितने मिल सकें। फिर वह उस एक हाण्डी से सारे बर्तनों में तेल भरती है, और तेल तब तक नहीं रुकता जब तक बर्तन खत्म नहीं हो जाते। वह तेल बेचकर अपना कर्ज चुकाती है और बाकी से जीवन चलाती है।

दूसरी घटना शूनेम गाँव की एक स्त्री की है। वह एलीशा के लिए एक कमरा बनवाती है, जहाँ वह हर बार रुक सके। उसके कोई संतान नहीं थी। एलीशा उसे वचन देता है कि आने वाले वसंत में उसका अपना बेटा होगा, और वैसा ही होता है। पर साल बीतने के बाद वह बालक अचानक सिर दर्द की शिकायत करता है और दोपहर तक माँ की गोद में मर जाता है। वह स्त्री बालक को एलीशा के कमरे की खाट पर लिटाती है और दौड़कर एलीशा के पास जाती है। एलीशा वहाँ पहुँचकर द्वार बंद करता है, यहोवा से प्रार्थना करता है, और बालक के शरीर पर लेट जाता है। बालक जीवित हो उठता है।

तीसरी घटना भविष्यद्वक्ताओं के दल के बीच की है। अकाल के समय में भोजन पकाते समय गलती से जंगली फल हण्डे में पड़ जाते हैं, जिससे वह जहरीला लगता है। एलीशा आटा डालकर उसे खाने योग्य बनाता है। फिर कोई बीस जौ की रोटियाँ लाता है, और सौ लोगों को खिलाने के बाद भी भोजन बच जाता है।

इसका मतलब क्या है?

इन तीन कहानियों में एक बात बार-बार दिखती है, परमेश्वर उन जगहों पर भी काम करते हैं जहाँ इंसान के पास कुछ नहीं बचा है। विधवा के पास बस एक हाण्डी तेल था। शूनेमिन स्त्री के पास कोई संतान नहीं थी, और फिर उसका बेटा मर गया। भविष्यद्वक्ताओं के पास अकाल में भी भरपूर भोजन नहीं था। हर बार लगता है कि कहानी वहीं खत्म हो जाएगी। पर परमेश्वर वहाँ से आगे काम करते हैं।

ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि एलीशा खुद कुछ नहीं बनाता। वह तेल नहीं, आटा नहीं, जीवन नहीं। वह सिर्फ परमेश्वर के पास प्रार्थना में जाता है, और परमेश्वर काम करते हैं। शूनेमिन स्त्री की कहानी में एक बात साफ लिखी है, यहोवा ने एलीशा को नहीं बताया कि उस स्त्री का मन क्यों व्याकुल है, वह छिपा ही रह गया। यह ईमानदार बात है, एलीशा को भी सब कुछ पहले से पता नहीं होता।

एक बड़ी कड़ी

यह कहानियाँ हमें आगे की ओर इशारा करती हैं। जब यीशु मसीह सौ लोगों को नहीं, बल्कि हजारों को कुछ रोटियों से खिलाते हैं, तो वह ठीक वैसा ही काम करते हैं जो एलीशा ने जौ की बीस रोटियों से किया, पर बहुत बड़े रूप में। और जब यीशु किसी मरे हुए बच्चे को जीवन देते हैं, जैसे शूनेमिन के बेटे को लूका के सुसमाचार में एक विधवा के बेटे को जिलाया गया, तो वह दिखाते हैं कि वे मृत्यु से भी बड़े हैं। एलीशा एक भक्त था, जो प्रार्थना करता था। यीशु खुद परमेश्वर का पुत्र हैं, जिनके पास जीवन देने का अधिकार है।

तुम्हारे लिए

शायद तुम्हारे पास भी कभी लगता है कि कुछ नहीं बचा, दोस्ती टूट गई, कोई मुश्किल हल नहीं हो रही, या तुम्हें लगता है तुम्हारे पास देने के लिए बहुत कम है। यह कहानियाँ कहती हैं कि परमेश्वर वहीं से शुरू कर सकते हैं जहाँ तुम्हें लगता है कि अंत आ गया। पर यह भी सच है कि परमेश्वर हर बार हमें पहले से नहीं बताते कि आगे क्या होगा। शूनेमिन स्त्री को भी इंतजार करना पड़ा, और रोना भी पड़ा। विश्वास का मतलब यह नहीं कि सब कुछ समझ में आ जाए, बल्कि यह कि तुम उस परमेश्वर के पास जाओ जो सुनते हैं।

बात करें

अगर तुम उस विधवा की जगह होते, जिसके पास सिर्फ एक हाण्डी तेल बचा था, तो तुम्हें कैसा लगता जब एलीशा ने तुमसे खाली बर्तन माँगने को कहा होता?

शूनेमिन स्त्री को यह नहीं पता था कि उसका बेटा क्यों मरा। क्या तुम्हें लगता है कि बिना जवाब पाए भी परमेश्वर पर भरोसा करना संभव है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप वहाँ भी काम करते हैं जहाँ हमारे पास कुछ नहीं बचता। जब हमें लगे कि सब खत्म हो गया है, तब हमें याद दिलाइए कि आप हमारी सुनते हैं। हमें वह भरोसा दीजिए जो बिना हर जवाब जाने भी आपके पास आता है। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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2 राजाओं 4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

2 राजाओं 4 किस विषय में है?
पहली घटना में एक विधवा रोते हुए एलीशा के पास आती है। उसके पति पर कर्ज था, और अब कर्जदार उसके दो बेटों को दास बनाकर ले जाना चाहता है। उस स्त्री के घर में सिर्फ एक छोटी हाण्डी तेल है, और कुछ नहीं। एलीशा उससे कहता है कि वह पड़ोसियों से खाली बर्तन माँग ले आए, जितने मिल सकें। फिर वह उस एक हाण्डी से सारे बर्तनों में तेल भरती है, और तेल तब तक नहीं रुकता जब तक बर्तन खत्म नहीं हो जाते। वह तेल बेचकर अपना कर्ज चुकाती है और बाकी से जीवन चलाती है।
2 राजाओं 4 क्या कहता है?
तीसरी घटना भविष्यद्वक्ताओं के दल के बीच की है। अकाल के समय में भोजन पकाते समय गलती से जंगली फल हण्डे में पड़ जाते हैं, जिससे वह जहरीला लगता है। एलीशा आटा डालकर उसे खाने योग्य बनाता है। फिर कोई बीस जौ की रोटियाँ लाता है, और सौ लोगों को खिलाने के बाद भी भोजन बच जाता है।
2 राजाओं 4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
ध्यान देने योग्य बात यह भी है कि एलीशा खुद कुछ नहीं बनाता। वह तेल नहीं, आटा नहीं, जीवन नहीं। वह सिर्फ परमेश्वर के पास प्रार्थना में जाता है, और परमेश्वर काम करते हैं। शूनेमिन स्त्री की कहानी में एक बात साफ लिखी है, यहोवा ने एलीशा को नहीं बताया कि उस स्त्री का मन क्यों व्याकुल है, वह छिपा ही रह गया। यह ईमानदार बात है, एलीशा को भी सब कुछ पहले से पता नहीं होता।
बच्चे 2 राजाओं 4 से क्या सीख सकते हैं?
शायद तुम्हारे पास भी कभी लगता है कि कुछ नहीं बचा, दोस्ती टूट गई, कोई मुश्किल हल नहीं हो रही, या तुम्हें लगता है तुम्हारे पास देने के लिए बहुत कम है। यह कहानियाँ कहती हैं कि परमेश्वर वहीं से शुरू कर सकते हैं जहाँ तुम्हें लगता है कि अंत आ गया। पर यह भी सच है कि परमेश्वर हर बार हमें पहले से नहीं बताते कि आगे क्या होगा। शूनेमिन स्त्री को भी इंतजार करना पड़ा, और रोना भी पड़ा। विश्वास का मतलब यह नहीं कि सब कुछ समझ में आ जाए, बल्कि यह कि तुम उस परमेश्वर के पास जाओ जो सुनते हैं।
2 राजाओं 4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
शूनेमिन स्त्री को यह नहीं पता था कि उसका बेटा क्यों मरा। क्या तुम्हें लगता है कि बिना जवाब पाए भी परमेश्वर पर भरोसा करना संभव है?

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