7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

इफिसियों 6

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

पौलुस नाम का एक आदमी था। वह जेल में बैठा था, हाथों में जंजीर बंधी हुई। फिर भी उसने एक पत्र लिखा, इफिसुस के लोगों के लिए। इस पत्र के आखिरी हिस्से में वह बच्चों से बात करता है। वह कहता है, हे बच्चों, अपने माता-पिता की बात मानो, क्योंकि यह अच्छा है। वह याद दिलाता है, "अपनी माता और पिता का आदर कर," ताकि तुम्हारा भला हो और तुम धरती पर बहुत दिन जीवित रहो। फिर वह पिताओं से कहता है, अपने बच्चों को गुस्सा मत दिलाओ, बल्कि उन्हें प्रभु की बातें सिखाओ।

फिर पौलुस एक नई बात कहता है। वह कहता है, बलवन्त बन जाओ, प्रभु में और उसकी शक्ति में। क्यों? क्योंकि एक लड़ाई चल रही है। पर यह लड़ाई तलवार और भाले वाली नहीं है। यह लड़ाई दुष्ट आत्माओं से है, जो अंधेरे में छिपी रहती हैं। इसलिए पौलुस कहता है, परमेश्वर के सारे हथियार पहन लो। सच्चाई की पेटी कमर में बांधो। धार्मिकता का कवच छाती पर पहनो। पांवों में शांति के सुसमाचार के जूते डालो। विश्वास की ढाल हाथ में लो, जिससे तुम दुष्ट के जलते हुए तीरों को बुझा सको। सिर पर उद्धार का टोप पहनो, और हाथ में आत्मा की तलवार, यानी परमेश्वर का वचन।

What Does This Mean?

सोचो, एक सिपाही युद्ध में जा रहा है बिना ढाल के, बिना तलवार के। क्या होगा उसके साथ? वह हार जाएगा। पौलुस कहना चाहता है, हम भी एक युद्ध में हैं, चाहे हमें दिखे या न दिखे। बुराई असली है। पर परमेश्वर ने हमें अकेला नहीं छोड़ा। उसने हमें हथियार दिए हैं, मजबूत हथियार, ताकि हम खड़े रह सकें।

और घर में भी एक लड़ाई है, छोटी सी। बच्चों के लिए बात मानना आसान नहीं होता हमेशा। पर परमेश्वर कहता है, यह अच्छा रास्ता है। यह प्रेम का रास्ता है।

The Common Thread

यह पूरी लड़ाई की बात यीशु मसीह की तरफ इशारा करती है। यीशु खुद सत्य थे, वे खुद धार्मिकता थे। जब शैतान ने उन्हें परखा, रेगिस्तान में, यीशु ने परमेश्वर के वचन से जवाब दिया, जैसे तलवार चलाई हो। पौलुस जो हथियार बताता है, वे सब यीशु में पूरे हुए। और परमेश्वर ने वादा किया है, जो यीशु से प्रेम रखते हैं, उन पर अनुग्रह और शांति बनी रहे।

For You

तुम भी हर दिन यह हथियार पहन सकते हो। सुबह उठकर कह सकते हो, "परमेश्वर, आज मुझे सच बोलने में मदद कीजिए।" यह सच्चाई की पेटी है। जब कोई तुम्हें गुस्सा दिलाए, और तुम शांत रहो, यह शांति के जूते हैं। जब तुम बाइबल की एक बात याद करते हो और उससे सही काम चुनते हो, यह आत्मा की तलवार है। और जब तुम अपने माता-पिता की बात मानते हो, भले मन से, यह भी परमेश्वर को अच्छा लगता है।

Talk About It

क्या तुम्हें लगता है कि एक असली लड़ाई चल रही है, भले वह दिखती नहीं? वह कैसी होगी?

तुम अपने घर में परमेश्वर के किस हथियार को पहनना चाहोगे, आज ही?

Praying Together

परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें अकेला नहीं छोड़ते। हमें सच्चाई, शांति, और विश्वास दीजिए, ताकि हम मजबूत खड़े रह सकें। हमें अपने माता-पिता का आदर करने में मदद कीजिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

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इफिसियों 6 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

इफिसियों 6 किस विषय में है?
पौलुस नाम का एक आदमी था। वह जेल में बैठा था, हाथों में जंजीर बंधी हुई। फिर भी उसने एक पत्र लिखा, इफिसुस के लोगों के लिए। इस पत्र के आखिरी हिस्से में वह बच्चों से बात करता है। वह कहता है, हे बच्चों, अपने माता-पिता की बात मानो, क्योंकि यह अच्छा है। वह याद दिलाता है, "अपनी माता और पिता का आदर कर," ताकि तुम्हारा भला हो और तुम धरती पर बहुत दिन जीवित रहो। फिर वह पिताओं से कहता है, अपने बच्चों को गुस्सा मत दिलाओ, बल्कि उन्हें प्रभु की बातें सिखाओ।
इफिसियों 6 क्या कहता है?
सोचो, एक सिपाही युद्ध में जा रहा है बिना ढाल के, बिना तलवार के। क्या होगा उसके साथ? वह हार जाएगा। पौलुस कहना चाहता है, हम भी एक युद्ध में हैं, चाहे हमें दिखे या न दिखे। बुराई असली है। पर परमेश्वर ने हमें अकेला नहीं छोड़ा। उसने हमें हथियार दिए हैं, मजबूत हथियार, ताकि हम खड़े रह सकें।
इफिसियों 6 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह पूरी लड़ाई की बात यीशु मसीह की तरफ इशारा करती है। यीशु खुद सत्य थे, वे खुद धार्मिकता थे। जब शैतान ने उन्हें परखा, रेगिस्तान में, यीशु ने परमेश्वर के वचन से जवाब दिया, जैसे तलवार चलाई हो। पौलुस जो हथियार बताता है, वे सब यीशु में पूरे हुए। और परमेश्वर ने वादा किया है, जो यीशु से प्रेम रखते हैं, उन पर अनुग्रह और शांति बनी रहे।
बच्चे इफिसियों 6 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुम्हें लगता है कि एक असली लड़ाई चल रही है, भले वह दिखती नहीं? वह कैसी होगी?
इफिसियों 6 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर, धन्यवाद कि आप हमें अकेला नहीं छोड़ते। हमें सच्चाई, शांति, और विश्वास दीजिए, ताकि हम मजबूत खड़े रह सकें। हमें अपने माता-पिता का आदर करने में मदद कीजिए। यीशु मसीह के नाम में, आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

अन्त में, प्रभु में और उसकी शक्ति के सामर्थ्य में बलवन्त होते जाओ।" ध्यान दे, पौलुस यह नहीं कहता कि अपने भीतर से ताकत निकाल। वह कहता है, प्रभु में बलवन्त हो। यह उधार की शक्ति है, अपनी नहीं। शायद तू आज इसलिए थक गया है क्योंकि तू अकेले लड़ रहा है। उसमें बने रहना ही तेरा कवच है।

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

बच्चों की बाइबल टूल में खोलें

For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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