7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहेजकेल 24

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या: यहेजकेल 24

व्याख्या

यह अध्याय एक बहुत कठिन दिन से शुरू होता है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं, "आज का दिन लिख ले," क्योंकि आज ही बाबेल के राजा ने यरूशलेम को घेर लिया है। यह वह शहर है जहाँ परमेश्वर का मंदिर है, जहाँ इस्राएल के लोगों का घर है। और अब उस पर घेरा पड़ गया है।

परमेश्वर यहेजकेल को एक चित्र जैसी कहानी सुनाने के लिए कहते हैं, एक दृष्टान्त। एक हण्डा, यानी एक बड़ा बर्तन, आग पर रखा जाता है। उसमें पानी, माँस के अच्छे टुकड़े और हड्डियाँ भरी जाती हैं, और उसे अच्छी तरह पकाया जाता है। पर फिर कहानी मुड़ जाती है। यह हण्डा असल में यरूशलेम शहर है, और उस पर "हाय" कहा जाता है, क्योंकि इस शहर में खून बहाया गया है जिसे किसी ने ढाँपा नहीं। परमेश्वर कहते हैं कि अब वे हण्डे को और गरम करेंगे, माँस पकाएँगे, हड्डियाँ भी जला देंगे, और अंत में हण्डे को खाली करके आग पर रखेंगे ताकि उसका मैल और जंग जल जाए। पर जंग नहीं छूटता। शहर की गंदगी इतनी गहरी है कि वह साफ नहीं होती।

फिर कहानी और भी निजी हो जाती है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं कि उनकी पत्नी, जो उनकी आँखों की प्रिय है, मर जाएगी, पर उन्हें रोना नहीं है, विलाप नहीं करना, आँसू नहीं बहाना। उन्हें अपने कपड़े और जूते वैसे ही पहने रहना है जैसे रोज पहनते थे। और सचमुच, उसी शाम यहेजकेल की पत्नी मर जाती है, और वे वैसा ही करते हैं जैसा परमेश्वर ने कहा था।

लोग हैरान होकर पूछते हैं कि इसका मतलब क्या है। यहेजकेल जवाब देते हैं कि जैसे उनकी प्रिय पत्नी उनसे छीन ली गई, वैसे ही परमेश्वर अपना पवित्रस्थान, यानी मंदिर, जिस पर इस्राएल के लोग गर्व करते थे और जिससे वे प्यार करते थे, उनसे छीन लेंगे। और उनके बेटे-बेटियाँ भी तलवार से मारे जाएँगे। तब लोग भी विलाप नहीं कर पाएँगे, बल्कि चुपचाप अपने अधर्म में गलते जाएँगे।

इसका अर्थ क्या है?

यह अध्याय पढ़ने में भारी लगता है, और सच में भारी है। परमेश्वर यहाँ कोई मीठी कहानी नहीं सुना रहे। वे दिखा रहे हैं कि यरूशलेम शहर की गंदगी, यानी उसका पाप, इतना गहरा हो गया है कि उसे साफ करना अब संभव नहीं रहा। परमेश्वर ने बार-बार कोशिश की थी शहर को शुद्ध करने की, पर शहर ने नहीं सुना।

यहेजकेल का दुःख भी हमें छूता है। एक इंसान अपनी पत्नी को खो रहा है, और उसे उसका शोक भी नहीं मनाने दिया जाता। यह पढ़ते समय हमें पूछना चाहिए, यह इतना कठिन क्यों है? टेक्स्ट इसका सीधा जवाब नहीं देता, पर यह दिखाता है कि यहेजकेल का निजी दर्द इस्राएल के लोगों के आने वाले दर्द की एक झलक बन गया। जब मंदिर गिरेगा, तब वे इतने टूट जाएँगे कि रोने की ताकत भी नहीं बचेगी।

बड़ी कहानी से जुड़ाव

यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर पाप को हल्के में नहीं लेते। उनका न्याय सच्चा है। पर यह भी याद रखने वाली बात है कि पूरी बाइबल में परमेश्वर बार-बार अपने लोगों को शुद्ध करने की कोशिश करते हैं, और अंत में वे यह काम स्वयं यीशु मसीह के द्वारा पूरा करते हैं। जहाँ यरूशलेम का हण्डा साफ नहीं हो सका, वहाँ यीशु मसीह ने अपने खून से हमें उस गंदगी से धोने का रास्ता खोला जो हमारे भीतर भी है। यह अध्याय हमें यह सवाल पूछने देता है कि क्या हमारे भीतर भी ऐसी गंदगी है जो हम खुद साफ नहीं कर सकते।

तुम्हारे लिए

कभी-कभी हमारे जीवन में भी ऐसी बातें होती हैं जो हमें समझ नहीं आतीं, और हमें दुःख को अपने तरीके से नहीं दिखाने दिया जाता। यहेजकेल का उदाहरण हमें सिखाता है कि परमेश्वर पर भरोसा रखना तब भी संभव है जब हम हर बात नहीं समझते। जब तुम्हारे जीवन में कुछ गलत होता है, या तुम किसी नियम का पालन नहीं समझ पाते, तो परमेश्वर से पूछना ठीक है। वे तुम्हारे सवालों से डरते नहीं हैं।

बात करें

अगर तुम यहेजकेल की जगह होते, तो तुम्हें सबसे कठिन बात क्या लगती, अपनी पत्नी को खोना या शोक न मना पाना?

क्यों लगता है कि परमेश्वर ने चाहा कि यरूशलेम शुद्ध हो जाए, पर वह नहीं हुआ?

आराधना में साथ

प्रिय परमेश्वर, आप जानते हैं कि हमारे भीतर भी ऐसी बातें हैं जिन्हें हम खुद साफ नहीं कर सकते। हमें डर लगता है जब हम मुश्किल बातें पढ़ते हैं, पर हम जानते हैं कि आप सच्चे और न्यायी हैं। धन्यवाद कि यीशु मसीह के द्वारा आपने हमें शुद्ध करने का रास्ता दिया। हमारी मदद करें कि हम आप पर भरोसा रखें, तब भी जब हम सब कुछ नहीं समझते। आमीन।

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यहेजकेल 24 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 24 किस विषय में है?
यह अध्याय एक बहुत कठिन दिन से शुरू होता है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं, "आज का दिन लिख ले," क्योंकि आज ही बाबेल के राजा ने यरूशलेम को घेर लिया है। यह वह शहर है जहाँ परमेश्वर का मंदिर है, जहाँ इस्राएल के लोगों का घर है। और अब उस पर घेरा पड़ गया है।
यहेजकेल 24 क्या कहता है?
फिर कहानी और भी निजी हो जाती है। परमेश्वर यहेजकेल से कहते हैं कि उनकी पत्नी, जो उनकी आँखों की प्रिय है, मर जाएगी, पर उन्हें रोना नहीं है, विलाप नहीं करना, आँसू नहीं बहाना। उन्हें अपने कपड़े और जूते वैसे ही पहने रहना है जैसे रोज पहनते थे। और सचमुच, उसी शाम यहेजकेल की पत्नी मर जाती है, और वे वैसा ही करते हैं जैसा परमेश्वर ने कहा था।
यहेजकेल 24 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह अध्याय पढ़ने में भारी लगता है, और सच में भारी है। परमेश्वर यहाँ कोई मीठी कहानी नहीं सुना रहे। वे दिखा रहे हैं कि यरूशलेम शहर की गंदगी, यानी उसका पाप, इतना गहरा हो गया है कि उसे साफ करना अब संभव नहीं रहा। परमेश्वर ने बार-बार कोशिश की थी शहर को शुद्ध करने की, पर शहर ने नहीं सुना।
बच्चे यहेजकेल 24 से क्या सीख सकते हैं?
यह अध्याय हमें याद दिलाता है कि परमेश्वर पाप को हल्के में नहीं लेते। उनका न्याय सच्चा है। पर यह भी याद रखने वाली बात है कि पूरी बाइबल में परमेश्वर बार-बार अपने लोगों को शुद्ध करने की कोशिश करते हैं, और अंत में वे यह काम स्वयं यीशु मसीह के द्वारा पूरा करते हैं। जहाँ यरूशलेम का हण्डा साफ नहीं हो सका, वहाँ यीशु मसीह ने अपने खून से हमें उस गंदगी से धोने का रास्ता खोला जो हमारे भीतर भी है। यह अध्याय हमें यह सवाल पूछने देता है कि क्या हमारे भीतर भी ऐसी गंदगी है जो हम खुद साफ नहीं कर सकते।
यहेजकेल 24 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
अगर तुम यहेजकेल की जगह होते, तो तुम्हें सबसे कठिन बात क्या लगती, अपनी पत्नी को खोना या शोक न मना पाना?

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