उत्पत्ति 25
प्राथमिक आयु (6 से 12 वर्ष) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
अब्राहम बूढ़े हो गए थे। एक सौ पचहत्तर वर्ष जीने के बाद उनके प्राण छूट गए। उनके बेटे इसहाक और इश्माएल ने मिलकर उन्हें मकपेला की गुफा में दफनाया, जहाँ सारा भी दफनाई गई थी। अब्राहम की मृत्यु के बाद परमेश्वर ने इसहाक को आशीष दी।
इसहाक ने रिबका नाम की स्त्री से विवाह किया। पर रिबका के कोई बच्चा नहीं हो रहा था। इसहाक ने परमेश्वर से विनती की, और परमेश्वर ने उसकी सुनी। रिबका गर्भवती हुई, पर कुछ अजीब हुआ। उसके पेट में दो बच्चे एक दूसरे से लड़ने लगे! रिबका को इतना दर्द हुआ कि उसने पूछा, "यह मेरे साथ क्या हो रहा है?" वह परमेश्वर से पूछने गई।
परमेश्वर ने कहा, "तेरे पेट में दो राष्ट्र हैं। एक दूसरे से ताकतवर होगा, और बड़ा बेटा छोटे की सेवा करेगा।" यह बड़ी अनोखी बात थी, क्योंकि उस ज़माने में हमेशा बड़ा बेटा ही आगे होता था।
जब बच्चे पैदा हुए, पहला बच्चा लाल रंग का और बालों से ढका हुआ निकला। उसका नाम एसाव रखा गया। उसके ठीक पीछे दूसरा बच्चा निकला, और उसने अपने हाथ से एसाव की एड़ी पकड़ रखी थी! उसका नाम याकूब रखा गया।
दोनों भाई बड़े हुए, पर बिलकुल अलग निकले। एसाव जंगल में शिकार करने वाला बहादुर आदमी बना। याकूब शांत स्वभाव का था और तंबुओं में रहता था। इसहाक को एसाव का शिकार किया हुआ माँस पसंद था, इसलिए वह एसाव से प्रेम करता था। पर रिबका याकूब से प्रेम करती थी।
एक दिन याकूब दाल पका रहा था। एसाव मैदान से थका हुआ, भूखा हुआ लौटा। उसने कहा, "जल्दी मुझे वह लाल दाल खिला, मैं बहुत थका हूँ!"
याकूब ने तुरंत मौका देख लिया। उसने कहा, "पहले अपना पहलौठे का अधिकार मुझे बेच दे।" पहलौठे का अधिकार बहुत बड़ी चीज़ थी, सबसे बड़े बेटे को पिता की संपत्ति और आशीष में सबसे बड़ा हिस्सा मिलता था।
एसाव ने सोचा भी नहीं। उसने कहा, "मैं तो भूख से मरने वाला हूँ, यह अधिकार मेरे किस काम का?" उसने कसम खाई और अपना अधिकार याकूब को बेच दिया। याकूब ने उसे रोटी और दाल दी। एसाव ने खाया, पिया, और चला गया।
इसका क्या अर्थ है?
एसाव ने एक बड़ी चीज़ को छोटी चीज़ के लिए बेच दिया। सिर्फ एक कटोरी दाल के लिए उसने वह अधिकार छोड़ दिया जो उसे जीवन भर के लिए आशीष देता। बाइबल खुद कहती है कि एसाव ने अपने अधिकार को "तुच्छ जाना", यानी उसे छोटी चीज़ समझा। क्या तुम कभी ऐसा करते हो? कुछ बड़ा और अच्छा छोड़कर, सिर्फ इसलिए कि अभी कुछ चाहिए?
याकूब भी पूरी तरह सही नहीं था। उसने भाई की भूख का फायदा उठाया। यह कहानी हमें दिखाती है कि दोनों भाइयों में कमज़ोरी थी। फिर भी परमेश्वर ने पहले ही कहा था कि छोटा बेटा आगे बढ़ेगा। परमेश्वर अपनी योजना पूरी करते हैं, भले लोग कैसे भी हों।
समान सूत्र
परमेश्वर ने अब्राहम से वादा किया था कि उसके वंश से सारी पृथ्वी के लोग आशीष पाएँगे। वह वादा अब इसहाक से होते हुए याकूब तक जा रहा है, भले याकूब छोटा बेटा था। परमेश्वर अपने वादे किसी इंसानी नियम से नहीं, अपनी इच्छा से पूरे करते हैं। यही वादा आगे चलकर यीशु मसीह तक पहुँचता है, जो याकूब के वंश में जन्मे।
तुम्हारे लिए
क्या तुम कभी किसी छोटी चीज़ के लिए जल्दबाज़ी में कोई बड़ा फैसला कर बैठते हो? एसाव की तरह भूख या गुस्से में बिना सोचे फैसला मत लो। अगली बार जब कुछ चाहिए हो, एक पल रुको और सोचो, "क्या यह सही फैसला है?"
बात करें
क्या तुम्हें लगता है एसाव ने सही किया? क्यों नहीं?
तुमने कभी किसी छोटी चीज़ के लिए कोई बड़ी चीज़ खो दी हो, ऐसा हुआ है क्या?
एक साथ प्रार्थना करें
प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप अपने वादे हमेशा पूरे करते हैं। हमें बुद्धि दीजिए कि हम जल्दबाज़ी में गलत फैसले न लें। हमें सिखाइए कि असली आशीष क्या है। आमीन।
उत्पत्ति 25 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
उत्पत्ति 25 किस विषय में है?
उत्पत्ति 25 क्या कहता है?
उत्पत्ति 25 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे उत्पत्ति 25 से क्या सीख सकते हैं?
उत्पत्ति 25 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पहला तो लाल निकला, और उसका सारा शरीर कम्बल के समान रोंआर था; इसलिए उसका नाम एसाव रखा गया।" जन्म के पहले ही पल में उसे वह नाम मिला जो उसके शरीर को देखकर रखा गया। लोग अक्सर यही करते हैं, बाहर देखकर तुम्हें नाम दे देते हैं। पर जो नाम लोगों ने तुम पर चिपकाया है, क्या वही तुम्हारी पहचान है? परमेश्वर भीतर देखता है।
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