7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

यहोशू 22

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यहोशू 22 एक ऐसी कहानी है जो युद्ध के बाद घटती है। रूबेन, गाद और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगों ने अपने भाइयों के साथ मिलकर कनान देश पर विजय पाने में मदद की थी। अब समय आ गया था कि वे अपने घर लौटें, यरदन नदी के पार, जहाँ उन्हें अपनी भूमि दी गई थी। यहोशू ने उन्हें बुलाकर उनकी प्रशंसा की, कहा कि उन्होंने परमेश्वर की सारी आज्ञाएँ मानी हैं, और उन्हें आशीर्वाद देकर, बहुत सारा धन और पशु लेकर विदा किया।

पर जब ये गोत्र यरदन नदी के पास पहुँचे, तो उन्होंने एक बड़ी वेदी बनाई। यह खबर बाकी इस्राएलियों तक पहुँची, और वे बहुत क्रोधित हुए। उन्हें लगा कि इन गोत्रों ने परमेश्वर के विरुद्ध बलवा किया है, क्योंकि व्यवस्था के अनुसार बलिदान केवल एक ही वेदी पर, शीलो में, चढ़ाए जा सकते थे। इसलिए सारी मण्डली युद्ध के लिए तैयार हो गई, पर पहले उन्होंने पीनहास याजक और दस प्रधानों को बात करने भेजा।

जब पीनहास और प्रधान वहाँ पहुँचे, तो रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों ने समझाया कि उन्होंने यह वेदी बलिदान चढ़ाने के लिए नहीं बनाई, बल्कि एक निशानी के रूप में, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ न भूलें कि वे भी इस्राएल के परमेश्वर की सन्तान हैं, चाहे वे नदी के दूसरी ओर रहते हों। यह सुनकर पीनहास और प्रधान बहुत प्रसन्न हुए, और युद्ध टल गया। उस वेदी का नाम "एद" रखा गया, जिसका अर्थ है साक्षी।

इसका क्या अर्थ है?

यह कहानी हमें दिखाती है कि गलतफहमी कितनी जल्दी बड़ा झगड़ा बना सकती है। इस्राएलियों ने सोचा कि उनके भाई परमेश्वर से दूर जा रहे हैं, बिना पहले पूछे कि असल में हुआ क्या है। पर ध्यान दें, उन्होंने तुरंत युद्ध नहीं किया, पहले बात करने गए। यह बहुत जरूरी सीख है, समझने से पहले सुनना जरूरी है।

दूसरी बात, रूबेन और गाद के लोगों की चिंता वास्तविक थी। वे डरते थे कि नदी उन्हें बाकी इस्राएल से अलग कर देगी, और उनकी सन्तान परमेश्वर को भूल जाएगी। यह डर गलत नहीं था, यह सच्ची चिंता थी कि आस्था पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहे। पर उनका तरीका खतरनाक हो सकता था, क्योंकि दूसरी वेदी बनाना गलतफहमी पैदा कर सकता था, जो हुआ भी।

सामान्य सूत्र

यह कहानी हमें एकता की याद दिलाती है, जो परमेश्वर अपने लोगों में चाहते हैं। भले ही वे नदी से अलग हो गए थे, वे फिर भी एक परिवार थे, एक ही परमेश्वर की प्रजा। यीशु मसीह ने भी अपने चेलों के लिए यही प्रार्थना की, कि वे एक हों, ताकि दुनिया जान सके कि वे परमेश्वर की सन्तान हैं। यह वेदी "एद," यह साक्षी, हमें याद दिलाती है कि परमेश्वर के लोगों को एक-दूसरे से जुड़े रहना है, भले ही वे दूर रहें या अलग दिखें।

आपके लिए

कभी तुमने किसी के बारे में जल्दी से बुरा सोच लिया है, बिना उससे पूछे कि असल में बात क्या है? यह कहानी सिखाती है कि गुस्सा होने से पहले, सवाल पूछना बेहतर है। और जब कोई तुम्हें गलत समझे, तो शांति से समझाने की कोशिश करना, जैसे रूबेन और गाद के लोगों ने किया। परमेश्वर चाहते हैं कि उनके लोग आपस में जुड़े रहें, भले ही वे स्कूल में अलग हों, या परिवार अलग शहर में रहता हो।

बात करने के लिए

अगर रूबेन और गाद के लोगों ने पहले इस्राएलियों को बताया होता कि वे वेदी क्यों बना रहे हैं, तो क्या यह झगड़ा टल सकता था?

क्या तुमने कभी किसी को गलत समझा, और बाद में पता चला कि सच्चाई कुछ और थी?

साथ में प्रार्थना

प्रभु परमेश्वर, धन्यवाद कि आप चाहते हैं कि हम एक-दूसरे को समझें, जल्दी गुस्सा न करें। हमें सिखाइए कि सुनना सीखें, इससे पहले कि हम कुछ मान लें। हमें अपने परिवार में, अपने भाई-बहनों में जोड़े रखिए, जैसे आपने इस्राएल के गोत्रों को जोड़ा था। आमीन।

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यहोशू 22 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 22 किस विषय में है?
यहोशू 22 एक ऐसी कहानी है जो युद्ध के बाद घटती है। रूबेन, गाद और मनश्शे के आधे गोत्र के लोगों ने अपने भाइयों के साथ मिलकर कनान देश पर विजय पाने में मदद की थी। अब समय आ गया था कि वे अपने घर लौटें, यरदन नदी के पार, जहाँ उन्हें अपनी भूमि दी गई थी। यहोशू ने उन्हें बुलाकर उनकी प्रशंसा की, कहा कि उन्होंने परमेश्वर की सारी आज्ञाएँ मानी हैं, और उन्हें आशीर्वाद देकर, बहुत सारा धन और पशु लेकर विदा किया।
यहोशू 22 क्या कहता है?
जब पीनहास और प्रधान वहाँ पहुँचे, तो रूबेन, गाद और मनश्शे के लोगों ने समझाया कि उन्होंने यह वेदी बलिदान चढ़ाने के लिए नहीं बनाई, बल्कि एक निशानी के रूप में, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ न भूलें कि वे भी इस्राएल के परमेश्वर की सन्तान हैं, चाहे वे नदी के दूसरी ओर रहते हों। यह सुनकर पीनहास और प्रधान बहुत प्रसन्न हुए, और युद्ध टल गया। उस वेदी का नाम "एद" रखा गया, जिसका अर्थ है साक्षी।
यहोशू 22 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
दूसरी बात, रूबेन और गाद के लोगों की चिंता वास्तविक थी। वे डरते थे कि नदी उन्हें बाकी इस्राएल से अलग कर देगी, और उनकी सन्तान परमेश्वर को भूल जाएगी। यह डर गलत नहीं था, यह सच्ची चिंता थी कि आस्था पीढ़ी दर पीढ़ी बनी रहे। पर उनका तरीका खतरनाक हो सकता था, क्योंकि दूसरी वेदी बनाना गलतफहमी पैदा कर सकता था, जो हुआ भी।
बच्चे यहोशू 22 से क्या सीख सकते हैं?
कभी तुमने किसी के बारे में जल्दी से बुरा सोच लिया है, बिना उससे पूछे कि असल में बात क्या है? यह कहानी सिखाती है कि गुस्सा होने से पहले, सवाल पूछना बेहतर है। और जब कोई तुम्हें गलत समझे, तो शांति से समझाने की कोशिश करना, जैसे रूबेन और गाद के लोगों ने किया। परमेश्वर चाहते हैं कि उनके लोग आपस में जुड़े रहें, भले ही वे स्कूल में अलग हों, या परिवार अलग शहर में रहता हो।
यहोशू 22 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुमने कभी किसी को गलत समझा, और बाद में पता चला कि सच्चाई कुछ और थी?

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