7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

मत्ती 4:4

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

यीशु का उत्तर

The Explanation

यीशु चालीस दिन से कुछ नहीं खाया था। उन्हें बहुत भूख लगी थी। सोचिए, आपने एक दिन भी बिना खाना खाए रहना कितना मुश्किल होगा। अब चालीस दिन सोचिए।

ठीक उसी समय शैतान आया। वह परखनेवाला था, यानी वह यीशु को गिराना चाहता था। उसने कहा, “यदि तू परमेश्वर का पुत्र है, तो कह दे कि ये पत्थर रोटियाँ बन जाएँ।”

सुनने में यह बुरी बात नहीं लगती। भूखे आदमी को रोटी चाहिए ही। पर शैतान चाहता था कि यीशु अपनी शक्ति का उपयोग परमेश्वर की आज्ञा के बिना करें, सिर्फ अपने लिए।

यीशु ने क्या किया? क्या वे पत्थरों की तरफ देखकर आजमाइश में पड़ गए? नहीं। उन्होंने उत्तर दिया, “लिखा है, मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।”

यीशु ने परमेश्वर के वचन से उत्तर दिया। उन्होंने अपनी तलवार निकाली, और वह तलवार शास्त्र थी।

What Does This Mean?

यीशु यह कह रहे थे कि रोटी ज़रूरी है, पर रोटी से बड़ी एक और चीज़ है। परमेश्वर जो कहते हैं, वह हमें असली जीवन देता है। पेट भरना काफी नहीं है। हमें परमेश्वर की बातें भी चाहिए, जैसे हमें साँस लेने के लिए हवा चाहिए।

सोचिए, यीशु भूखे थे, कमज़ोर थे, अकेले थे। फिर भी वे गिरे नहीं। क्या आपने कभी सोचा कि इतनी भूख में भी कोई गलत काम करने से इनकार कर सकता है? यीशु ने दिखाया कि यह संभव है, क्योंकि वे परमेश्वर के वचन पर भरोसा करते थे।

The Common Thread

यह कोई नई बात नहीं थी जो यीशु ने कही। यह पुराने नियम से एक वचन था, जो परमेश्वर ने बहुत पहले इस्राएल के लोगों से कहा था। यीशु उसे जानते थे, क्योंकि वे परमेश्वर के वचन से प्रेम करते थे।

पूरी बाइबल की कहानी में परमेश्वर हमेशा अपने लोगों से बात करते हैं। वे चुप नहीं रहते। वे वचन देते हैं, वादे करते हैं, रास्ता दिखाते हैं। यीशु खुद परमेश्वर का वचन हैं, जो इंसान बनकर हमारे बीच आए। जब यीशु शैतान के सामने परमेश्वर के वचन का उपयोग करते हैं, तो वे हमें दिखाते हैं कि यही हथियार है जो हमें भी मज़बूत रखता है।

For You

क्या आपने कभी किसी चीज़ की बहुत इच्छा की, और फिर पता चला कि वह गलत रास्ता है? यह मुश्किल होता है, ठीक वैसे ही जैसे भूखे यीशु के लिए पत्थर को रोटी बनाना आसान लगा होगा।

आप भी परमेश्वर का वचन सीख सकते हैं, जैसे यीशु ने सीखा था। एक छोटी आयत याद करना, रोज़ बाइबल की एक कहानी सुनना, यह सब आपको मज़बूत बनाता है। जब मुश्किल समय आएगा, तब वह वचन आपके मन में होगा, जैसे यीशु के मन में था।

Talk About It

क्या आपको लगता है कि भूखे रहते हुए सही फैसला लेना मुश्किल होता है? क्यों?

परमेश्वर का कौन सा वचन आप याद रखना चाहेंगे, जो मुश्किल समय में आपकी मदद करे?

Praying Together

प्रभु यीशु, आप भूखे थे, फिर भी आपने गलत काम नहीं किया। हमें भी अपने वचन से मज़बूत कीजिए। जब हमारे सामने गलत रास्ता आसान लगे, तब हमें याद दिलाइए कि आपकी बातें हमें असली जीवन देती हैं। आमीन।

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मत्ती 4:4 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

मत्ती 4:4 किस विषय में है?
यीशु चालीस दिन से कुछ नहीं खाया था। उन्हें बहुत भूख लगी थी। सोचिए, आपने एक दिन भी बिना खाना खाए रहना कितना मुश्किल होगा। अब चालीस दिन सोचिए।
मत्ती 4:4 क्या कहता है?
यीशु ने क्या किया? क्या वे पत्थरों की तरफ देखकर आजमाइश में पड़ गए? नहीं। उन्होंने उत्तर दिया, “लिखा है, मनुष्य केवल रोटी ही से नहीं, परन्तु हर एक वचन से जो परमेश्वर के मुख से निकलता है जीवित रहेगा।”
मत्ती 4:4 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
सोचिए, यीशु भूखे थे, कमज़ोर थे, अकेले थे। फिर भी वे गिरे नहीं। क्या आपने कभी सोचा कि इतनी भूख में भी कोई गलत काम करने से इनकार कर सकता है? यीशु ने दिखाया कि यह संभव है, क्योंकि वे परमेश्वर के वचन पर भरोसा करते थे।
बच्चे मत्ती 4:4 से क्या सीख सकते हैं?
क्या आपने कभी किसी चीज़ की बहुत इच्छा की, और फिर पता चला कि वह गलत रास्ता है? यह मुश्किल होता है, ठीक वैसे ही जैसे भूखे यीशु के लिए पत्थर को रोटी बनाना आसान लगा होगा।
मत्ती 4:4 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
परमेश्वर का कौन सा वचन आप याद रखना चाहेंगे, जो मुश्किल समय में आपकी मदद करे?

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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