7 से 12 वर्ष के बच्चे के लिए

नीतिवचन 3

प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

एक पिता अपने बेटे के पास बैठा है। वह उसे कुछ बहुत जरूरी बताना चाहता है, जैसे एक सिपाही को लड़ाई से पहले बताया जाता है कि ढाल कैसे पकड़नी है। पिता कहता है, "हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना।" वह चाहता है कि बेटा परमेश्वर की बातों को ऐसे संभाल कर रखे, जैसे कोई कीमती चीज़ गले में हार बनाकर पहनता है।

फिर पिता एक राज़ बताता है। वह कहता है, "अपनी समझ का सहारा न लेना, वरन् सम्पूर्ण मन से यहोवा पर भरोसा रखना।" सोचो, एक बच्चा अंधेरे जंगल में खड़ा है। वह नहीं जानता कौन सा रास्ता सही है। पर उसके साथ एक मजबूत राजा चल रहा है, जो रास्ता जानता है। बच्चे को बस राजा का हाथ पकड़े रहना है। यही परमेश्वर पर भरोसा करना है।

पिता आगे कहता है कि बुद्धि सोने और चाँदी से भी कीमती है, हीरे से भी ज्यादा मूल्यवान। बुद्धि के दाहिने हाथ में लंबी उम्र है, बाएँ हाथ में धन और सम्मान है। बुद्धि एक पेड़ जैसी है, "जीवन का वृक्ष," जिसके फल खाने वाला आशीष पाता है।

What Does This Mean?

यह सिर्फ अच्छी सलाह नहीं है, यह एक युद्ध के लिए तैयारी है। हर दिन हमें चुनना पड़ता है, क्या हम अपने छोटे से दिमाग पर भरोसा करें, या परमेश्वर पर जो सब कुछ जानते हैं? परमेश्वर ने तो पूरी पृथ्वी की नींव बुद्धि से डाली, आकाश को समझ से स्थिर किया, समुद्र को अपने ज्ञान से बहाया। क्या वे हमारे छोटे रास्ते में मदद नहीं कर सकते?

पिता यह भी कहता है कि जब परमेश्वर डाँटते हैं, तो बुरा मत मानना, "जैसे पिता अपने प्रिय पुत्र को डाँटता है, वैसे ही यहोवा जिससे प्रेम रखता है उसको डाँटता है।" डाँट प्यार की निशानी है, नफरत की नहीं। क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारे माता-पिता तुम्हें इसलिए टोकते हैं क्योंकि वे तुमसे प्यार करते हैं?

The Common Thread

यह पिता अपने बेटे को प्यार से सिखा रहा है, ठीक वैसे ही जैसे हमारे स्वर्गीय पिता हमें सिखाते हैं। और बहुत बाद में, एक और बेटा आया जो अपने पिता की हर बात मानता था। लूका की पुस्तक बताती है कि यीशु बड़े होते गए और "परमेश्वर और मनुष्य दोनों का अनुग्रह" पाते गए, ठीक वैसे ही जैसे इस कहावत में वादा किया गया है। यीशु ने कभी अपनी समझ पर भरोसा नहीं किया, हमेशा अपने पिता पर भरोसा रखा, चाहे रास्ता कितना भी कठिन क्यों न हो। वे हमें दिखाते हैं कि परमेश्वर पर भरोसा रखना कैसा दिखता है।

For You

क्या तुम कभी डरे हो, जैसे अचानक कोई अंधेरा कमरा दिखे? पिता कहता है, "अचानक आनेवाले भय से न डरना… क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा।" आज रात जब तुम लेटो, याद रखना, परमेश्वर तुम्हारे पास हैं, तुम्हें "सुख की नींद" देने के लिए।

और एक और बात, अगर तुम्हारे पास अपने पड़ोसी या दोस्त को देने के लिए कुछ अच्छा है, तो उसे कल तक मत टालो। पिता कहता है आज ही दे दो, "कल फिर आना" मत कहो। शायद तुम्हारे पास बाँटने के लिए एक खिलौना है, या किसी को माफ करने का मौका है। आज ही करो।

Talk About It

तुम्हें कब लगता है कि अपनी समझ पर भरोसा करना आसान है, पर परमेश्वर पर भरोसा करना मुश्किल?

क्या कोई है जिसे तुम आज कुछ अच्छा दे सकते हो, बिना कल तक इंतज़ार किए?

Praying Together

हे प्रभु, आप बहुत बुद्धिमान हैं, आपने ही आकाश और धरती बनाई। हमें सिखाइए कि हम अपनी समझ पर नहीं, बल्कि आप पर भरोसा रखें। जब हम डरें, हमारे पास आइए। हमें आज ही भला करने का साहस दीजिए। आमीन।

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नीतिवचन 3 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नीतिवचन 3 किस विषय में है?
एक पिता अपने बेटे के पास बैठा है। वह उसे कुछ बहुत जरूरी बताना चाहता है, जैसे एक सिपाही को लड़ाई से पहले बताया जाता है कि ढाल कैसे पकड़नी है। पिता कहता है, "हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूलना।" वह चाहता है कि बेटा परमेश्वर की बातों को ऐसे संभाल कर रखे, जैसे कोई कीमती चीज़ गले में हार बनाकर पहनता है।
नीतिवचन 3 क्या कहता है?
पिता आगे कहता है कि बुद्धि सोने और चाँदी से भी कीमती है, हीरे से भी ज्यादा मूल्यवान। बुद्धि के दाहिने हाथ में लंबी उम्र है, बाएँ हाथ में धन और सम्मान है। बुद्धि एक पेड़ जैसी है, "जीवन का वृक्ष," जिसके फल खाने वाला आशीष पाता है।
नीतिवचन 3 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
पिता यह भी कहता है कि जब परमेश्वर डाँटते हैं, तो बुरा मत मानना, "जैसे पिता अपने प्रिय पुत्र को डाँटता है, वैसे ही यहोवा जिससे प्रेम रखता है उसको डाँटता है।" डाँट प्यार की निशानी है, नफरत की नहीं। क्या तुमने कभी सोचा है कि तुम्हारे माता-पिता तुम्हें इसलिए टोकते हैं क्योंकि वे तुमसे प्यार करते हैं?
बच्चे नीतिवचन 3 से क्या सीख सकते हैं?
क्या तुम कभी डरे हो, जैसे अचानक कोई अंधेरा कमरा दिखे? पिता कहता है, "अचानक आनेवाले भय से न डरना... क्योंकि यहोवा तुझे सहारा दिया करेगा।" आज रात जब तुम लेटो, याद रखना, परमेश्वर तुम्हारे पास हैं, तुम्हें "सुख की नींद" देने के लिए।
नीतिवचन 3 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
तुम्हें कब लगता है कि अपनी समझ पर भरोसा करना आसान है, पर परमेश्वर पर भरोसा करना मुश्किल?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

उसके मार्ग आनन्ददायक हैं, और उसके सब मार्ग कुशल के हैं।" ध्यान दे, यहाँ मंज़िल की नहीं, रास्ते की बात है। बुद्धि केवल अंत में शान्ति नहीं देती, वह चलते चलते साथ चलती है। और लिखा है "सब" मार्ग, कुछ नहीं। जो रास्ता तुझे आज कठिन लग रहा है, क्या तू उस पर परमेश्वर के संग चल रहा है?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 1

हे मेरे पुत्र, मेरी शिक्षा को न भूल जाना, और अपने हृदय में मेरी आज्ञाओं को रखे रहना।" पिता पहले आज्ञा मानने को नहीं, याद रखने को कहता है। क्योंकि हम विद्रोह से नहीं, भूलने से भटकते हैं। धीरे धीरे, चुपचाप। आज खुद से पूछ: परमेश्वर की कौन सी बात तूने कभी सीखी थी, और अब याद भी नहीं?

किसी अन्य आयु वर्ग की तलाश है?

हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।

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For parents and teachers: 7 से 12 वर्ष के उन बच्चों के लिए लिखा गया जो स्वयं पढ़ सकते हैं। पारिवारिक भक्ति और स्कूल में बाइबल पाठ के लिए उत्तम। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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