नीतिवचन 31
प्राथमिक आयु (7-12) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
The Explanation
नीतिवचन 31 का यह अध्याय दो भागों में बँटा है। पहले भाग में (पद 1-9) राजा लमूएल की माता उसे सिखाती है। वह अपने बेटे से कहती है, "हे मेरे पुत्र, हे मेरी मन्नतों के पुत्र।" वह उसे चेतावनी देती है कि अपनी शक्ति उन चीज़ों में न लगा दे जो उसे नष्ट कर दें, और दाखमधु में बुद्धि न खो दे, क्योंकि एक राजा को न्याय करना है। इसके बजाय वह कहती है, "गूँगे के लिये अपना मुँह खोल, और सब अनाथों का न्याय उचित रीति से किया कर।" यानी एक राजा का असली काम है उन लोगों के लिए बोलना जो खुद अपने लिए नहीं बोल सकते।
दूसरे भाग में (पद 10-31) एक लंबी कविता है, जो एक "भली पत्नी" का वर्णन करती है। यह स्त्री सुबह जल्दी उठती है, अपने घराने का ध्यान रखती है, खेत खरीदती है, कपड़े बनाकर बेचती है, और दीन-दरिद्र के लिए अपना हाथ खोलती है। वह मज़बूत है, बुद्धिमान है, और उसके शब्दों में कृपा है। अंत में लिखा है कि असली शोभा बाहरी सुंदरता नहीं है, बल्कि यह कि वह "यहोवा का भय मानती है।"
What Does This Mean?
यह अध्याय दिखाता है कि बुद्धि कोई दूर की बात नहीं है, बल्कि वह रोज़मर्रा के जीवन में दिखती है, कैसे हम अपना समय, अपना पैसा, अपने शब्द इस्तेमाल करते हैं। लमूएल की माता चाहती है कि उसका बेटा न्यायी राजा बने, जो कमज़ोरों की सुनता है। और वह स्त्री जिसकी तस्वीर पद 10 से बनती है, वह केवल एक आदर्श पत्नी का चित्र नहीं है, वह बुद्धि का ही चेहरा है, मेहनती, ईमानदार, दूसरों की परवाह करने वाली।
यहाँ हमें ईमानदार रहना चाहिए। यह स्त्री इतना कुछ करती है, व्यापार, खेती, सिलाई, दान, कि कोई एक इंसान सच में यह सब एक साथ नहीं कर सकता। यह शायद इसलिए है कि यह एक कविता है, एक गीत जो बुद्धि की पूरी तस्वीर खींचता है, न कि एक सूची जो हर स्त्री को पूरी करनी हो। इसे पढ़कर किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि "मैं इतना नहीं कर पाती तो मैं कम हूँ।" असली बात अंत में छुपी है, "यहोवा का भय मानना", यानी परमेश्वर को गंभीरता से लेना, उसी से शक्ति और बुद्धि पाना।
The Common Thread
पूरी किताब नीतिवचन में बुद्धि की शुरुआत यही है, परमेश्वर का भय मानना। यह अध्याय भी वहीं पहुँचता है। और जब हम बाइबल की बड़ी कहानी देखते हैं, तो यीशु मसीह भी यही करते दिखते हैं, वे गूँगों के लिए बोले, अनाथों और दीन-दरिद्रों का पक्ष लिया, और उन्होंने कभी बाहरी दिखावे को नहीं चाहा, बल्कि सेवा को बड़ा माना। यीशु ने कहा कि जो सबसे छोटा बनकर सेवा करता है, वही सबसे बड़ा है। यह भली स्त्री की तस्वीर और यीशु की सेवा, दोनों एक ही बुद्धि की ओर इशारा करते हैं, जो परमेश्वर से आती है और दूसरों की भलाई में बहती है।
For You
तुम्हें अभी कोई राज्य नहीं चलाना, और न ही घर का व्यापार संभालना है। पर तुम भी हर दिन छोटे-छोटे फैसले लेते हो, क्या तुम अपने शब्दों से किसी की मदद करते हो या नहीं, क्या तुम अपना काम मन लगाकर करते हो, क्या तुम उन बच्चों का ध्यान रखते हो जिनकी कोई नहीं सुनता। यह अध्याय कहता है कि असली सुंदरता दिखावे में नहीं, बल्कि परमेश्वर के साथ चलने और दूसरों की परवाह करने में है। तुम भी आज किसी के लिए अपना मुँह खोल सकते हो, जब कोई तुमसे कमज़ोर हो और उसकी बात कोई नहीं सुन रहा हो।
Talk About It
यह स्त्री इतना सब कुछ करती है, क्या तुम्हें लगता है हमें भी वैसा ही बनने की कोशिश करनी चाहिए, या इस कविता का मतलब कुछ और है?
तुम्हारे जीवन में कौन है जिसके लिए तुम "अपना मुँह खोल" सकते हो, यानी उसकी तरफ से बोल सकते हो?
Praying Together
प्रभु, आप हमें सिखाते हैं कि असली सुंदरता दिखावे में नहीं, बल्कि आपके भय और प्रेम में है। हमें मेहनती, ईमानदार और दयालु हृदय दें। हमें उनकी याद दिलाएँ जिनकी आवाज़ कोई नहीं सुनता, और हमें बुद्धि दें कि हम उनके लिए बोल सकें। आमीन।
नीतिवचन 31 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नीतिवचन 31 किस विषय में है?
नीतिवचन 31 क्या कहता है?
नीतिवचन 31 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
बच्चे नीतिवचन 31 से क्या सीख सकते हैं?
नीतिवचन 31 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
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हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और किशोरों (12 वर्ष और अधिक) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
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