3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

1 शमूएल 13

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

एक राजा था। उसका नाम था शाऊल। शाऊल के पास सैनिक थे। बहुत सारे सैनिक।

पर दूसरी तरफ भी सैनिक थे। पलिश्ती सैनिक। बहुत, बहुत ज़्यादा। उनके पास रथ थे। जितने समुद्र किनारे रेत के कण होते हैं, उतने सैनिक।

शाऊल के सैनिक यह देखकर डर गए। बहुत डर गए। कोई गुफा में छिप गया। कोई चट्टान के पीछे। कोई झाड़ी में। कोई तो नदी पार भाग गया।

शाऊल गिलगाल में रुका रहा। वह इंतज़ार कर रहा था। शमूएल नबी को इंतज़ार कर रहा था। शमूएल ने कहा था, सात दिन रुकना।

एक दिन गया। दो दिन गए। सारे सात दिन बीत गए। शमूएल नहीं आया।

शाऊल के सैनिक भागने लगे। एक एक करके। शाऊल का दिल घबरा गया।

इससे क्या समझ मिलती है?

शाऊल ने सोचा, अब क्या करूँ? उसने खुद ही एक भेंट चढ़ा दी। वह भेंट जो केवल शमूएल चढ़ा सकता था।

और ठीक उसी समय, जैसे ही भेंट चढ़ी, शमूएल आ गया।

शमूएल ने पूछा, "तूने यह क्या किया?"

शाऊल ने कहा, "लोग भाग रहे थे। तू नहीं आया। इसलिए मैंने यह किया।"

शमूएल का चेहरा गंभीर हो गया। उसने कहा, "तूने मूर्खता की है। तूने परमेश्वर की बात नहीं मानी।"

शाऊल डर गया था। और डर में उसने इंतज़ार करना छोड़ दिया।

समान सूत्र

परमेश्वर ने शाऊल से कहा, मैंने एक और आदमी चुन लिया है। एक ऐसा आदमी, जो मेरे मन के अनुसार है।

यह परमेश्वर की एक आदत है। वे हमेशा सही व्यक्ति को चुनते हैं। बाद में परमेश्वर ने दाऊद को चुना। और बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु हमेशा परमेश्वर की बात मानते थे। हर समय। यीशु ने कभी जल्दी नहीं की।

तुम्हारे लिए

क्या तुमने कभी इंतज़ार किया है? इंतज़ार करना मुश्किल होता है, है ना?

जब तुम्हें लगे कि कोई नहीं आ रहा, तब भी परमेश्वर तुम्हें देख रहे होते हैं। वे जानते हैं तुम कहाँ हो। तुम्हें अकेले कुछ ठीक करने की ज़रूरत नहीं। तुम बस उनसे बात कर सकते हो।

बातचीत के लिए:

शाऊल को इंतज़ार करना क्यों कठिन लगा?

जब तुम्हें डर लगता है, तब तुम किससे बात करते हो?

संग मिलकर प्रार्थना

प्रिय परमेश्वर, कभी-कभी हमें इंतज़ार करना मुश्किल लगता है। हमें डर भी लगता है, जैसे शाऊल को लगा। हमें याद दिलाइए कि आप हमेशा हमारे पास हैं। आमीन।

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1 शमूएल 13 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

1 शमूएल 13 किस विषय में है?
एक राजा था। उसका नाम था शाऊल। शाऊल के पास सैनिक थे। बहुत सारे सैनिक।
1 शमूएल 13 क्या कहता है?
शाऊल गिलगाल में रुका रहा। वह इंतज़ार कर रहा था। शमूएल नबी को इंतज़ार कर रहा था। शमूएल ने कहा था, सात दिन रुकना।
1 शमूएल 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
शाऊल ने कहा, "लोग भाग रहे थे। तू नहीं आया। इसलिए मैंने यह किया।"
नन्हे बच्चे 1 शमूएल 13 से क्या सीख सकते हैं?
यह परमेश्वर की एक आदत है। वे हमेशा सही व्यक्ति को चुनते हैं। बाद में परमेश्वर ने दाऊद को चुना। और बहुत बाद में, परमेश्वर ने अपने बेटे यीशु को भेजा। यीशु हमेशा परमेश्वर की बात मानते थे। हर समय। यीशु ने कभी जल्दी नहीं की।
1 शमूएल 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रिय परमेश्वर, कभी-कभी हमें इंतज़ार करना मुश्किल लगता है। हमें डर भी लगता है, जैसे शाऊल को लगा। हमें याद दिलाइए कि आप हमेशा हमारे पास हैं। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

पलिश्तियों की छावनी से लूटनेवाले तीन दल निकले" ऐसे जैसे इस्राएल की ज़मीन उनकी अपनी हो। कोई रोकनेवाला नहीं, क्योंकि लोगों के हाथ में तलवार तक न थी। कभी कभी तेरी ज़िंदगी में भी शत्रु इतनी खुली छूट से घूमता दिखता है कि लगता है परमेश्वर ने मुँह मोड़ लिया। पर यह अध्याय कहानी का अंत नहीं। अगले ही पन्ने पर योनातान चढ़ाई करता है, और लिखा है कि उद्धार बहुतों से नहीं, थोड़ों से भी हो सकता है।

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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