3 से 6 वर्ष के बच्चे के लिए

नीतिवचन 23

नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

कहानी क्या कहती है

सुनो, एक पिता था। वह अपने बेटे से बहुत प्यार करता था। बहुत, बहुत प्यार।

एक दिन पिता ने अपने बेटे को पास बुलाया। उसने बेटे को गोद में बिठाया। और वह बोलने लगा।

"मेरे प्यारे बच्चे," पिता ने कहा, "सुनो। मैं तुम्हें कुछ बताना चाहता हूँ।"

बेटे ने कान लगाए। वह सुनने लगा।

पिता बोला, "देखो, कभी-कभी खाना बहुत स्वादिष्ट दिखता है। मीठा, गरम, अच्छी खुशबूवाला। पर सब खाना अच्छा नहीं होता।"

फिर पिता ने कहा, "और देखो, पैसा। चमकीला पैसा। लोग सोचते हैं, बहुत सारा पैसा चाहिए। पर पैसा पंख लगाकर उड़ जाता है। जैसे एक बड़ा पक्षी। फुर्र्र! ऊपर, आकाश में।"

बेटा हँस पड़ा। एक पक्षी जो उड़ जाता है!

पिता ने बेटे को कसकर पकड़ा। "मेरे बच्चे, मेरी बात सुनो। तुम्हारी माँ की बात सुनो। हम तुमसे प्यार करते हैं।"

इसका क्या मतलब है

परमेश्वर हमारे स्वर्गीय पिता हैं। वे भी हमसे बात करते हैं। बिल्कुल इसी तरह। प्यार से।

परमेश्वर कहते हैं, "मेरे बच्चे, मेरी सुनो। मैं तुम्हें अच्छी बातें सिखाना चाहता हूँ।"

परमेश्वर हमें डराते नहीं। वे हमें प्यार से बुलाते हैं। जैसे एक पिता अपने छोटे बच्चे को।

बड़ी कहानी

क्या तुम जानते हो? यीशु भी हमें ऐसे ही बुलाते हैं।

यीशु कहते हैं, "छोटे बच्चों को मेरे पास आने दो।"

यीशु कोई डरावने शिक्षक नहीं हैं। वे हमारे प्रभु हैं, और वे हमें प्यार करते हैं। वे हमारा हाथ पकड़ते हैं। वे कहते हैं, "मेरे पीछे-पीछे चलो। मैं तुम्हें रास्ता दिखाऊँगा।"

जैसे एक अच्छा पिता अपने बच्चे का हाथ पकड़ता है। ताकि बच्चा गिरे नहीं।

तुम्हारे लिए

तुम भी एक छोटे बच्चे हो। तुम्हारे पापा हैं। तुम्हारी माँ है। और तुम्हारे स्वर्गीय पिता भी हैं।

जब पापा या माँ कुछ कहते हैं, तो कान लगाकर सुनो। क्योंकि वे तुमसे प्यार करते हैं।

और जब बाइबल पढ़ी जाती है, तब भी कान लगाओ। क्योंकि तब परमेश्वर तुमसे बात करते हैं। बिल्कुल तुमसे।

क्या तुम जानते हो, परमेश्वर तुम्हारा नाम भी जानते हैं? हाँ, सच में!

बात करें

तुम्हारी माँ या पापा जब कुछ कहते हैं, तो तुम क्या करते हो?

क्या तुम्हें पता है कि परमेश्वर तुम्हें प्यार करते हैं? कितना ज़्यादा?

साथ में प्रार्थना

प्यारे परमेश्वर,

आप मेरे स्वर्गीय पिता हैं। आप मुझसे प्यार करते हैं। मैं भी आपसे प्यार करता हूँ। मेरे पापा और माँ की बात सुनने में मेरी मदद कीजिए। और आपकी बात भी।

यीशु के नाम में। आमीन।

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नीतिवचन 23 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

नीतिवचन 23 किस विषय में है?
सुनो, एक पिता था। वह अपने बेटे से बहुत प्यार करता था। बहुत, बहुत प्यार।
नीतिवचन 23 क्या कहता है?
फिर पिता ने कहा, "और देखो, पैसा। चमकीला पैसा। लोग सोचते हैं, बहुत सारा पैसा चाहिए। पर पैसा पंख लगाकर उड़ जाता है। जैसे एक बड़ा पक्षी। फुर्र्र! ऊपर, आकाश में।"
नीतिवचन 23 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
परमेश्वर हमें डराते नहीं। वे हमें प्यार से बुलाते हैं। जैसे एक पिता अपने छोटे बच्चे को।
नन्हे बच्चे नीतिवचन 23 से क्या सीख सकते हैं?
जब पापा या माँ कुछ कहते हैं, तो कान लगाकर सुनो। क्योंकि वे तुमसे प्यार करते हैं।
नीतिवचन 23 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हें पता है कि परमेश्वर तुम्हें प्यार करते हैं? कितना ज़्यादा?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

जब तेरे मुँह से सीधी बातें निकलेंगी, तब मेरा अन्तःकरण मगन होगा।" पिता यहाँ बेटे की कमाई या नाम की बात नहीं कर रहा। उसकी खुशी इस बात में है कि बेटे के होंठों से सच निकले। सोचो, तुम्हारी कही एक सच्ची बात किसी के भीतर तक आनन्द पहुँचा सकती है। और परमेश्वर भी तो पिता है। आज तुम्हारी बातें उसके मन को क्या दे रही हैं?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 31

ध्यान दे, चेतावनी पीने पर नहीं, देखने पर है: "जब दाखमधु लाल दिखाई देता है, और कटोरे में चमकता है, और धीरे से उतरता है, तब उसको न देखना।" रंग, चमक, और गले से उतरने की नरमी, सब कुछ सुंदर है। जो चीज़ बाद में डसती है, वह शुरू में कभी बदसूरत नहीं दिखती। इसलिए सवाल यह है कि तेरी आँख आज कहाँ ठहरी हुई है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 11

अनाथ के पास न वकील था, न ज़मीन के कागज़ संभालने वाला कोई बड़ा। बस एक चुपचाप खिसकाई गई सीमा, और वह लुट जाता। पर लिखा है, "क्योंकि उनका छुड़ानेवाला सामर्थी है; वह उनका मुकद्दमा तेरे साथ लड़ेगा।" जिसकी कोई सुनवाई नहीं, उसका मुकद्दमा परमेश्वर खुद अपने हाथ में ले लेता है। सोचो, तुम्हारी चुप्पी में भी कोई तुम्हारे लिए बोल रहा है। और यह भी सोचो, कहीं तुम किसी की सीमा तो नहीं खिसका रहे?

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For parents and teachers: विशेष रूप से 3 से 6 वर्ष के बच्चों को ज़ोर से पढ़कर सुनाने के लिए लिखा गया। इसे अपने बच्चे के साथ बातचीत की शुरुआत के रूप में उपयोग करें, एकमात्र स्रोत के रूप में नहीं। This explanation is generated automatically by language models. While we strive for theological soundness, the software can make mistakes.

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