नीतिवचन 8
नन्हे और पूर्व-विद्यालय बच्चे (आयु 3-6) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
सुनो, एक कहानी है।
एक सड़क थी। बड़ी सी सड़क। उस पर लोग चलते थे। कोई इस तरफ, कोई उस तरफ।
और वहाँ, ऊँची जगह पर, एक आवाज़ थी। ज़ोर से बोलती हुई आवाज़।
यह "बुद्धि" थी। बुद्धि माने अच्छी समझ। सही बात जानना।
बुद्धि खड़ी थी सड़क के किनारे। द्वार के पास। शहर के फाटक पर।
और वह पुकार रही थी, "हे लोगों, मैं तुम को पुकारती हूँ!"
बहुत प्यारी आवाज़ थी। सबके लिए थी। छोटे बच्चों के लिए भी।
इसका मतलब क्या है?
बुद्धि क्या कहती थी? वह कहती थी, "सुनो, क्योंकि मैं उत्तम बातें कहूँगी।"
उसकी बातें सीधी थीं। टेढ़ी नहीं। झूठी नहीं।
बुद्धि ने कहा, "मुझ को घृणा आती है दुष्टता से।" यानी बुराई उसे पसंद नहीं।
वह चाँदी से भी अच्छी थी। सोने से भी अच्छी। रत्नों से भी अच्छी।
सोचो, तुम्हारे पास सबसे चमकीला खिलौना हो। सबसे मीठी मिठाई हो। बुद्धि उससे भी अच्छी है।
क्योंकि जो बुद्धि को पाता, वह अच्छी बातें सीखता। सही राह चलता।
समान सूत्र
अब सुनो, यह और भी अचरज की बात है।
बुद्धि ने कहा, "यहोवा ने मुझे उत्पन्न किया, संसार बनाने से पहले।"
जब पहाड़ नहीं थे। जब समुद्र नहीं था। तब भी बुद्धि थी।
जब परमेश्वर ने आकाश बनाया, बुद्धि वहाँ थी। पास ही खड़ी।
वह कहती है, "मैं हर समय उसके सामने आनन्दित रहती थी।"
परमेश्वर के साथ, आनंद के साथ, दुनिया बनी। यह सुन्दर बात है।
और यीशु भी हमेशा से परमेश्वर के साथ थे। बाइबल कहती है, आदि में वचन था। वचन परमेश्वर के साथ था। वही यीशु हैं।
यीशु भी हमें सिखाते हैं। सही राह दिखाते हैं। जैसे बुद्धि पुकारती थी, वैसे ही यीशु आज भी बुलाते हैं।
तुम्हारे लिए
बुद्धि ने कहा, "जो मुझसे प्रेम रखते हैं, उनसे मैं भी प्रेम रखती हूँ।"
तुम भी बुद्धि से प्रेम कर सकते हो। कैसे?
जब मम्मी कहे, "यह सच बोलो," तो सुनो। जब पापा कहे, "यह अच्छी बात है," तो मानो।
परमेश्वर का वचन सुनना, यही बुद्धि है। रोज़ थोड़ा सुनना। रोज़ थोड़ा मानना।
बुद्धि कहती है, "क्या ही धन्य है वह जो मेरी सुनता।" तुम भी धन्य हो सकते हो।
तुमसे बात करते हैं:
तुम्हारे घर में कौन तुम्हें अच्छी बातें सिखाता है?
जब कोई सच बोलने को कहता है, तो तुम क्या करते हो?
साथ में प्रार्थना
प्रभु यीशु, आप हमेशा से हैं। आप ही बुद्धि हैं। हमें अच्छी बातें सिखाइए। सच बोलना सिखाइए। आपकी सुनना अच्छा लगता है। आमीन।
नीतिवचन 8 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
नीतिवचन 8 किस विषय में है?
नीतिवचन 8 क्या कहता है?
नीतिवचन 8 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
नन्हे बच्चे नीतिवचन 8 से क्या सीख सकते हैं?
नीतिवचन 8 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
बुद्धि अपने बारे में कहती है, "मेरा फल सोने से, वरन् शुद्ध कुन्दन से भी उत्तम है, और मेरी उपज उत्तम चाँदी से बढ़कर है।" ध्यान दो, वह "फल" और "उपज" कहती है, "खज़ाना" नहीं। सोना खोदकर एक ही दिन में निकल आता है, पर फल मौसम माँगता है। परमेश्वर का भय मानकर जीना तुम्हें रातोंरात अमीर नहीं बनाएगा, पर जो उगेगा वह टिकेगा। क्या तुममें इतना धीरज है कि उस फसल की प्रतीक्षा करो?
मेरे ही द्वारा राजा राज्य करते हैं, और हाकिम धर्म से न्याय करते हैं।" बुद्धि यह नहीं कहती कि वह सिंहासन पर बैठी है, बल्कि यह कि वह सिंहासन के पीछे खड़ी है। तेरे पास भी कोई न कोई अधिकार है, घर में, काम में, किसी के दिल में। सवाल यह है कि उस अधिकार को कौन चला रहा है, तेरा मन या परमेश्वर की बुद्धि? जहाँ बुद्धि पीछे नहीं होती, वहाँ रौब तो रहता है, पर न्याय मर जाता है।
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