13 वर्ष और उससे बड़े किशोर के लिए

यहेजकेल 14

किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

The Explanation

यहेजकेल 14 की शुरुआत एक साधारण दृश्य से होती है। इस्राएल के कुछ पुरनिये यहेजकेल के पास आकर उसके सामने बैठ जाते हैं, मानो परमेश्वर से कुछ पूछने आए हों। पर परमेश्वर यहेजकेल से कुछ चौंकाने वाला कहते हैं: इन लोगों ने अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित कर रखी हैं, और अपने अधर्म की ठोकर अपने ही सामने रखी है। बाहर से ये धार्मिक लगते हैं, पर भीतर से इनका हृदय कहीं और टिका है। परमेश्वर पूछते हैं, क्या ऐसे लोग फिर भी मुझसे कुछ पूछने का हक़ रखते हैं?

परमेश्वर का जवाब कड़ा है। वे कहते हैं कि अगर कोई ऐसा हृदय लेकर भविष्यद्वक्ता के पास आए, तो वे स्वयं उसे उसकी मूरतों के अनुसार ही उत्तर देंगे, ताकि वह अपने ही छल में फँस जाए। यह दंड नहीं, बल्कि एक आईना है। परमेश्वर उसे उसकी असलियत दिखा देंगे। साथ ही परमेश्वर बुलाहट देते हैं, फिरो, अपनी मूर्तियों को पीठ पीछे करो। यह अंत नहीं, यह निमंत्रण है।

फिर चेतावनी आती है भविष्यद्वक्ताओं के लिए भी। अगर कोई झूठा भविष्यद्वक्ता किसी ऐसे पाखंडी को धोखे का वचन दे, तो वह भविष्यद्वक्ता भी उतना ही उत्तरदायी होगा जितना पूछनेवाला। दोनों अपना-अपना बोझ उठाएँगे।

अध्याय का दूसरा हिस्सा और गहरा उतरता है। परमेश्वर कहते हैं, अगर कोई देश विश्वासघात करके पाप करे, तो वे अकाल, हिंसक जंगली जानवर, तलवार और मरी, ये चार दंड भेज सकते हैं। और फिर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, चाहे नूह, दानिय्येल और अय्यूब जैसे तीन धर्मी पुरुष भी उस देश में हों, वे अपनी धार्मिकता से केवल अपने ही प्राण बचा पाएँगे, अपने बेटे-बेटियों को नहीं। यह बार-बार, चार बार दोहराया जाता है, जैसे परमेश्वर इस बात पर ज़ोर देना चाहते हों। और यह सब यरूशलेम पर लागू होता है, जहाँ चारों दंड एक साथ आएँगे। फिर भी कुछ बचे हुए लोग निकाले जाएँगे, और उनका चाल-चलन देखकर बंधुआई में गए लोग समझ जाएँगे कि परमेश्वर ने जो किया वह बिना कारण नहीं किया।

What Does This Mean?

यह अध्याय एक बात बहुत साफ़ कर देता है, धर्म का बाहरी रूप और हृदय की सच्चाई दो अलग चीज़ें हैं। ये पुरनिये मंदिर जा सकते थे, प्रार्थना कर सकते थे, भविष्यद्वक्ता के पास बैठ सकते थे, पर उनका हृदय कहीं और था। परमेश्वर उस दूरी को पहचानते हैं जो धार्मिक दिखावे और असली विश्वास के बीच होती है।

और दूसरी बात, यह अध्याय धार्मिकता के बारे में एक कठोर सच बताता है, वह बँटती नहीं। नूह, दानिय्येल और अय्यूब इतिहास के सबसे धर्मी इंसानों में गिने जाते थे, फिर भी उनकी धार्मिकता किसी और को नहीं बचा सकती थी, सिर्फ उन्हें खुद को। यह अकेलापन डरावना लगता है, पर यह ईमानदार भी है। कोई तुम्हारी जगह विश्वासयोग्य नहीं हो सकता। तुम्हारे माता-पिता का विश्वास, तुम्हारे दोस्त की भक्ति, ये तुम्हें नहीं बचाएँगी।

The Common Thread

यहीं पर यह अध्याय पूरी बाइबल की कहानी की ओर इशारा करता है। नूह, दानिय्येल और अय्यूब सबसे धर्मी थे, फिर भी उनकी धार्मिकता की एक सीमा थी, वह दूसरों तक नहीं पहुँच सकती थी। पर यीशु मसीह इस नियम को तोड़ने आए। वे ही एकमात्र धर्मी हैं जिनकी धार्मिकता वास्तव में दूसरों को बचा सकती है। क्रूस पर उन्होंने ठीक वही किया जो नूह, दानिय्येल और अय्यूब नहीं कर सके, अपनी धार्मिकता दूसरों को दे दी।

और वह छोटा सा बचा हुआ समूह, जो यरूशलेम से निकाला जाता है, वह भी परमेश्वर के इस वादे की झलक है कि न्याय के बीच भी वे अपने लोगों को पूरी तरह मिटाते नहीं। यह धागा आगे चलकर उस बचे हुए समूह तक पहुँचता है जिसे परमेश्वर हर पीढ़ी में सुरक्षित रखते हैं, और अंततः मसीह में पूरा होता है।

For You

तुम्हारे जीवन में मूरतें पत्थर या सोने की नहीं होंगी, पर वे फिर भी हो सकती हैं। वह इंस्टाग्राम पर मिलने वाली तारीफ़ हो सकती है, वह हर हाल में परफेक्ट दिखने की ज़िद हो सकती है, वह किसी रिश्ते या किसी उपलब्धि पर टिकी पहचान हो सकती है। तुम चर्च जा सकते हो, बाइबल पढ़ सकते हो, प्रार्थना कर सकते हो, और फिर भी तुम्हारे मन में कुछ और सिंहासन पर बैठा हो सकता है। यह अध्याय तुमसे पूछता है, जब तुम परमेश्वर के सामने आते हो, तो सच में क्या तुम्हारे हृदय में सबसे ऊपर बैठा है?

और यह भी याद रखने लायक है कि कोई तुम्हारी जगह विश्वासयोग्य नहीं हो सकता। तुम्हारे घरवालों का विश्वास उधार नहीं लिया जा सकता। यह तुम्हारा अपना फैसला है, हर दिन, कि तुम सच में किसके पीछे चलते हो।

Talk About It

तुम्हारे मन में इस समय ऐसी कौन सी चीज़ हो सकती है जो चुपचाप परमेश्वर की जगह ले रही हो, भले ही बाहर से तुम्हारा विश्वास ठीक दिखे?

अगर धार्मिकता किसी दूसरे को नहीं बचा सकती, तो इसका तुम्हारे और तुम्हारे परिवार या दोस्तों के विश्वास के रिश्ते पर क्या असर पड़ता है?

Praying Together

प्रभु, हमारे हृदय की गहराइयों को आप जानते हैं, वह सब भी जो हम खुद से भी छिपाते हैं। हमें दिखाइए कि हमारे मन में कहाँ कोई और चीज़ आपकी जगह ले रही है। हमें झूठी धार्मिकता से बचाइए, और हमें याद दिलाइए कि केवल यीशु मसीह की धार्मिकता ही हमें सच में बचा सकती है। हमारे हृदय को ईमानदार बनाइए, आपके सामने भी और अपने आप से भी। आमीन।

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यहेजकेल 14 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहेजकेल 14 किस विषय में है?
यहेजकेल 14 की शुरुआत एक साधारण दृश्य से होती है। इस्राएल के कुछ पुरनिये यहेजकेल के पास आकर उसके सामने बैठ जाते हैं, मानो परमेश्वर से कुछ पूछने आए हों। पर परमेश्वर यहेजकेल से कुछ चौंकाने वाला कहते हैं: इन लोगों ने अपनी मूरतें अपने मन में स्थापित कर रखी हैं, और अपने अधर्म की ठोकर अपने ही सामने रखी है। बाहर से ये धार्मिक लगते हैं, पर भीतर से इनका हृदय कहीं और टिका है। परमेश्वर पूछते हैं, क्या ऐसे लोग फिर भी मुझसे कुछ पू
यहेजकेल 14 क्या कहता है?
अध्याय का दूसरा हिस्सा और गहरा उतरता है। परमेश्वर कहते हैं, अगर कोई देश विश्वासघात करके पाप करे, तो वे अकाल, हिंसक जंगली जानवर, तलवार और मरी, ये चार दंड भेज सकते हैं। और फिर एक चौंकाने वाली बात कहते हैं, चाहे नूह, दानिय्येल और अय्यूब जैसे तीन धर्मी पुरुष भी उस देश में हों, वे अपनी धार्मिकता से केवल अपने ही प्राण बचा पाएँगे, अपने बेटे-बेटियों को नहीं। यह बार-बार, चार बार दोहराया जाता है, जैसे परमेश्वर इस बात पर ज़ोर देना चाहते हों। और यह सब यरूशलेम पर लागू होता है, जहाँ चारों दंड एक साथ आएँगे। फिर भी कुछ बचे हुए लोग निकाले जाएँगे, और उनका चाल-चलन देखकर बंधुआई में गए लोग समझ जाएँगे कि परमेश्वर ने जो किया वह बिना कारण नहीं किया।
यहेजकेल 14 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यहीं पर यह अध्याय पूरी बाइबल की कहानी की ओर इशारा करता है। नूह, दानिय्येल और अय्यूब सबसे धर्मी थे, फिर भी उनकी धार्मिकता की एक सीमा थी, वह दूसरों तक नहीं पहुँच सकती थी। पर यीशु मसीह इस नियम को तोड़ने आए। वे ही एकमात्र धर्मी हैं जिनकी धार्मिकता वास्तव में दूसरों को बचा सकती है। क्रूस पर उन्होंने ठीक वही किया जो नूह, दानिय्येल और अय्यूब नहीं कर सके, अपनी धार्मिकता दूसरों को दे दी।
किशोर यहेजकेल 14 से क्या सीख सकते हैं?
और यह भी याद रखने लायक है कि कोई तुम्हारी जगह विश्वासयोग्य नहीं हो सकता। तुम्हारे घरवालों का विश्वास उधार नहीं लिया जा सकता। यह तुम्हारा अपना फैसला है, हर दिन, कि तुम सच में किसके पीछे चलते हो।
यहेजकेल 14 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
प्रभु, हमारे हृदय की गहराइयों को आप जानते हैं, वह सब भी जो हम खुद से भी छिपाते हैं। हमें दिखाइए कि हमारे मन में कहाँ कोई और चीज़ आपकी जगह ले रही है। हमें झूठी धार्मिकता से बचाइए, और हमें याद दिलाइए कि केवल यीशु मसीह की धार्मिकता ही हमें सच में बचा सकती है। हमारे हृदय को ईमानदार बनाइए, आपके सामने भी और अपने आप से भी। आमीन।

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

फिर यहोवा का वचन मेरे पास पहुँचा" यह छोटा सा वाक्य है, पर सोचो, हाथ में मूर्तियाँ लिए पुरनिये अभी अभी यहेजकेल के सामने बैठे थे। ऐसे लोगों के बीच भी परमेश्वर चुप नहीं हुआ। और जो वचन आया वह कठोर था। कभी कभी परमेश्वर का बोलना सांत्वना नहीं, चेतावनी होती है। क्या तू उसे भी सुनने को तैयार है?

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