गलातियों 5
किशोर (12 वर्ष और अधिक) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी
व्याख्या
पौलुस इस अध्याय में सीधे मुद्दे पर आते हैं। गलातिया की कलीसिया में कुछ लोग सिखा रहे थे कि यीशु मसीह पर विश्वास काफी नहीं है, कि उद्धार पाने के लिए खतना कराना और मूसा की व्यवस्था का पूरा पालन करना भी ज़रूरी है। पौलुस इसे बहुत गंभीरता से लेते हैं। वे लिखते हैं, "मसीह ने स्वतंत्रता के लिये हमें स्वतंत्र किया है" और चेतावनी देते हैं कि इस स्वतंत्रता को छोड़कर फिर से "दासत्व के जूए" में न लौटें।
पौलुस स्पष्ट कहते हैं, अगर तुम खतना पर भरोसा रखते हो तो मसीह से कुछ लाभ नहीं होगा, क्योंकि तब तुम पूरी व्यवस्था के अधीन हो जाते हो, और जो व्यवस्था से धर्मी बनना चाहता है वह अनुग्रह से गिर जाता है। यहाँ कोई बीच का रास्ता नहीं है, या तो मसीह पर भरोसा या अपने कामों पर भरोसा। असली बात यह है, "विश्वास का जो प्रेम के द्वारा प्रभाव करता है।"
फिर पौलुस दूसरी दिशा से चेतावनी देते हैं। स्वतंत्रता को शारीरिक इच्छाओं का बहाना मत बनाओ। असली स्वतंत्रता प्रेम से एक दूसरे की सेवा करने में दिखती है, क्योंकि पूरी व्यवस्था इस एक बात में पूरी होती है, "तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।"
आगे पौलुस दो शक्तियों की बात करते हैं जो हर इंसान के भीतर लड़ रही हैं, शरीर और आत्मा। शरीर के काम खुले हैं, व्यभिचार, ईर्ष्या, क्रोध, फूट और भी बहुत कुछ। पर आत्मा का फल है प्रेम, आनन्द, शांति, धीरज, दया, भलाई, विश्वास, नम्रता, संयम। जो मसीह के हैं उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है, और इसलिए आत्मा के अनुसार चलने के लिए बुलाए गए हैं।
इसका अर्थ क्या है?
यह अध्याय एक गहरी सच्चाई खोलता है, आज़ादी आसान नहीं है। बहुत लोग सोचते हैं कि आज़ादी का मतलब है जो चाहो वो करो, कोई रोक नहीं। पौलुस इसे उलट देते हैं। सच्ची आज़ादी तब मिलती है जब तुम किसी और चीज़ की गुलामी से मुक्त होकर, प्रेम से किसी की सेवा करना चुनते हो। यह विरोधाभास लगता है, पर यही सच है।
दूसरी सच्चाई यह है कि तुम्हारे भीतर सच में एक लड़ाई चल रही है। यह किसी कमजोर विश्वास की निशानी नहीं है, यह हर उस इंसान की हकीकत है जो मसीह में है। शरीर और आत्मा की यह खींचातानी रोज़ की बात है, स्कूल में, दोस्ती में, फोन पर, अकेले कमरे में। पौलुस इसे छुपाते नहीं, वे इसे नाम देते हैं ताकि तुम पहचान सको कि यह लड़ाई असामान्य नहीं, बल्कि सामान्य है।
बड़ी कहानी से संबंध
यह पूरा अध्याय मसीह के काम की नींव पर टिका है। व्यवस्था कभी किसी को धर्मी नहीं बना सकी, वह सिर्फ बताती थी कि परमेश्वर की नज़र में सही क्या है। मसीह ने वह किया जो व्यवस्था नहीं कर सकती थी, उन्होंने क्रूस पर वह कीमत चुकाई जो हमारे ऊपर थी। इसीलिए पौलुस कहते हैं कि जो मसीह के हैं उन्होंने शरीर को उसकी लालसाओं समेत क्रूस पर चढ़ा दिया है, यह मसीह के क्रूस से जुड़ा है, कोई अलग काम नहीं।
पवित्र आत्मा वह वादा है जो परमेश्वर ने पूरा किया। पुराने नियम में परमेश्वर ने कहा था कि वे अपने लोगों के भीतर आकर रहेंगे, उन्हें भीतर से बदलेंगे। आत्मा का फल वही है, परमेश्वर का अपना चरित्र हमारे भीतर बढ़ना शुरू होता है। यह इनाम पाने के लिए मेहनत नहीं है, यह उस रिश्ते का नतीजा है जो मसीह ने क्रूस पर बनाया।
तुम्हारे लिए
तुम शायद कभी खतना की बहस में नहीं पड़ोगे, पर यही लड़ाई अलग रूप में तुम्हारे सामने आती है। शायद कोई तुम्हें बताता है कि परमेश्वर के करीब होने के लिए तुम्हें एक निश्चित तरीके से "अच्छा" दिखना होगा, सही चर्च जाना होगा, सही नियम पूरे करने होंगे। पौलुस कहते, मसीह ने तुम्हें उस दबाव से आज़ाद किया है। तुम्हारी पहचान तुम्हारी परफॉर्मेंस पर नहीं, मसीह पर टिकी है।
पर सावधान रहो, यह आज़ादी बहाना नहीं बनना चाहिए कि जो मन आए वो करो। सोशल मीडिया पर किसी की टांग खींचना, ईर्ष्या से किसी की तरक्की देखना, गुस्से में किसी को नीचा दिखाना, ये सब उसी "शरीर के काम" की सूची में हैं जिसकी बात पौलुस करते हैं। यह सूची पुरानी नहीं लगती, यह तुम्हारे स्कूल के ग्रुप चैट में भी सच है।
रोज़ाना का सवाल यह नहीं है कि "क्या मैं इतना अच्छा हूँ कि परमेश्वर मुझे स्वीकार करें", बल्कि यह है कि "आज मैं किसके पीछे चल रहा हूँ, शरीर के पीछे या आत्मा के पीछे।" यह लड़ाई हारने पर भी खत्म नहीं होती, मसीह ने पहले ही तुम्हें आज़ाद कर दिया है, इसलिए फिर उठकर आत्मा के अनुसार चलना शुरू करो।
बात करें
तुम्हारी ज़िंदगी में "शरीर" और "आत्मा" के बीच सबसे ज़्यादा खींचातानी कहाँ महसूस होती है, और तुम अभी तक किस तरफ ज़्यादा झुकते हो?
क्या तुमने कभी महसूस किया है कि परमेश्वर के करीब रहने के लिए तुम्हें कुछ "करना" ज़रूरी है? पौलुस का जवाब उस दबाव के बारे में क्या कहता है?
साथ में प्रार्थना
प्रभु यीशु, आपने हमें आज़ाद किया है, फिर भी हम अक्सर पुराने जूए में लौट जाते हैं, या अपनी आज़ादी को गलत तरीके से इस्तेमाल करते हैं। हमें अपने पवित्र आत्मा से भरिए, कि हम प्रेम से एक दूसरे की सेवा करें, और अपने भीतर की लड़ाई में आपकी ओर देखें। आमीन।
गलातियों 5 के बारे में प्रश्न
पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।
गलातियों 5 किस विषय में है?
गलातियों 5 क्या कहता है?
गलातियों 5 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
किशोर गलातियों 5 से क्या सीख सकते हैं?
गलातियों 5 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
दूसरों ने क्या पाया
पर यदि तुम एक दूसरे को दाँत से काटते और फाड़ खाते हो, तो चौकस रहो कि एक दूसरे का सत्यानाश न कर दो।" पौलुस ने जंगली जानवरों की भाषा चुनी, क्योंकि कलीसिया में बहस इतनी बढ़ गई थी। ध्यान दे, वह यह नहीं कहता कि तुम दूसरे को नष्ट कर दोगे, बल्कि दोनों मिटेंगे। जिस बात को लेकर तू आज किसी भाई से लड़ रहा है, क्या वह इस कीमत के लायक है?
हम घमण्ड करनेवाले न बनें, न एक दूसरे को चिढ़ाएँ, न एक दूसरे से डाह करें।" ध्यान दो, खोखला घमण्ड दो रास्ते बनाता है। जो हमसे पीछे लगते हैं, उन्हें हम चिढ़ाते हैं; जो हमसे आगे दिखते हैं, उनसे जलते हैं। दोनों में तुलना ही जड़ है। आत्मा का फल बताया जा चुका, अब सवाल यह है: क्या तेरी नज़र भाई को नापती है, या थामती है?
पौलुस उन लोगों को लिख रहा है जो व्यवस्था के छोटे से छोटे नियम पर बहस कर रहे थे, और उसी बीच एक दूसरे को काट खा रहे थे। उनसे वह कहता है, "क्योंकि सारी व्यवस्था इस एक ही बात में पूरी हो जाती है, 'तू अपने पड़ोसी से अपने समान प्रेम रख।'" सोचो, जिस इंसान से तुम्हारी अनबन चल रही है, परमेश्वर की पूरी व्यवस्था उसी के साथ तुम्हारे बर्ताव में परखी जा रही है। सही होना काफी नहीं, प्रेम करना ज़रूरी है।
छोटे बच्चों के लिए कुछ ढूँढ रहे हैं?
हमारे पास छोटे बच्चों (3-6 वर्ष) और प्राथमिक आयु (7-12) के लिए विशेष संस्करण भी हैं।
बच्चों की बाइबल टूल में खोलें