13 वर्ष और उससे बड़े किशोर के लिए

यहोशू 13

किशोर (13 वर्ष और उससे बड़े) के लिए व्याख्या और बाइबल कहानी

बाइबल

व्याख्या

यहोशू अब बूढ़ा हो चुका है। जिस आदमी ने यरीहो की दीवारें गिरते देखीं, जिसने दर्जनों राजाओं को हराया, वह अब थका हुआ, उम्र का मारा खड़ा है। और परमेश्वर उससे कुछ ऐसा कहते हैं जो चौंकाने वाला है, "तू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया है, और बहुत देश रह गए हैं, जो इस्राएल के अधिकार में अभी तक नहीं आए।" काम अधूरा है। पलिश्तियों का इलाका, गशूरियों का प्रदेश, लबानोन की पहाड़ियाँ, सीदोनियों का क्षेत्र, यह सब अभी भी कनानियों के हाथ में है।

यह अध्याय फिर पीछे मुड़कर देखता है, यरदन नदी के पूर्व की ओर, जहाँ मूसा के समय में पहले ही ज़मीन बाँटी जा चुकी थी। रूबेन, गाद, और मनश्शे के आधे गोत्र को वह भाग मिला था, अरनोन घाटी से लेकर हेर्मोन पर्वत तक फैला इलाका, जहाँ कभी एमोरी राजा सीहोन और बाशान का विशालकाय राजा ओग राज करते थे। मूसा ने उन्हें हराया था, और वह ज़मीन इन गोत्रों को दी गई थी। पर यहाँ एक कड़वा सच भी दर्ज है, "इस्राएलियों ने गशूरियों और माकियों को उनके देश से न निकाला; इसलिए गशूरी और माकी इस्राएलियों के मध्य में आज तक रहते हैं।" जीत पूरी नहीं थी। और लेवी के गोत्र को कोई ज़मीन नहीं मिली, क्योंकि यहोवा स्वयं उनका भाग था।

यह अध्याय नक्शों, सीमाओं, और नगरों के नामों से भरा है। पढ़ने में उबाऊ लग सकता है। पर रुककर सोचो, यह सिर्फ भूगोल नहीं है।

इसका क्या अर्थ है?

यहाँ दो बातें एक साथ खड़ी हैं जो पहली नज़र में टकराती हुई लगती हैं। पहली, परमेश्वर का वादा पूरा होता चला जा रहा है, भूमि का एक-एक टुकड़ा बाँटा जा रहा है, जैसा उन्होंने सदियों पहले अब्राहम से कहा था। दूसरी, काम अभी अधूरा है। दुश्मन अभी भी बीच में रहते हैं। यह आधी-अधूरी जीत कोई असफलता की कहानी नहीं है, यह ईमानदारी की कहानी है। बाइबल झूठा आशावाद नहीं बेचती। यह नहीं कहती कि "और फिर सब ठीक हो गया।" यह कहती है, काम बचा है, और तुम्हें बूढ़े हो चुके यहोशू के बाद भी यह काम आगे बढ़ाना होगा।

यह बात तुम्हारी ज़िंदगी से मेल खाती है। तुम्हारे जीवन में भी ऐसी चीज़ें होंगी जो अधूरी रह जाएँगी, रिश्ते जो पूरी तरह ठीक नहीं होंगे, आदतें जो जड़ से नहीं उखड़ेंगी, सवाल जो जवाब नहीं पाएँगे। परमेश्वर यहाँ यह स्वीकार करते हैं कि कुछ लड़ाइयाँ पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। यहोशू को रिटायर नहीं होने दिया गया सिर्फ इसलिए कि वह थक गया था। परमेश्वर का काम उसकी ताकत पर निर्भर नहीं था, न अब है।

समान सूत्र

ध्यान दो, लेवी के गोत्र को कोई ज़मीन नहीं मिली, "इस्राएल का परमेश्वर यहोवा ही अपने वचन के अनुसार उनका भाग ठहरा।" यह एक अजीब सी बात लगती है, एक पूरे गोत्र के पास कोई भूमि नहीं, कोई संपत्ति नहीं, सिर्फ परमेश्वर। पर यही सबसे गहरी बात इस अध्याय में छुपी है। बाकी सब गोत्र ज़मीन के टुकड़ों से संतुष्ट हो सकते थे, पर लेवियों का हिस्सा खुद परमेश्वर था।

यही सूत्र पूरी बाइबल से होकर यीशु मसीह तक जाता है। यीशु ने कहा था कि उनके पास सिर उठाने की जगह नहीं। उन्होंने भूमि का कोई भाग नहीं माँगा, कोई राज्य इस दुनिया का नहीं लिया। उनकी विरासत कुछ और थी, पिता के साथ संबंध, और वह संबंध उन्होंने हमारे लिए खोल दिया। यहोशू अधूरा काम छोड़ गया क्योंकि वह इंसान था। यीशु ने क्रूस पर कहा, "पूरा हुआ।" जो यहोशू नहीं कर पाया, जो कोई इंसान नहीं कर सकता, वह यीशु ने किया। वे पूर्णता लाए जहाँ हर मानव प्रयास अधूरा रह जाता है।

तुम्हारे लिए

तुम शायद किसी ऐसी जगह खड़े हो जहाँ लगता है कि तुम्हारी ज़िंदगी में भी बहुत सी "कनानी ज़मीनें" अभी जीती नहीं गई हैं, कोई आदत जो छूटती नहीं, कोई रिश्ता जो टूटा हुआ है, कोई सवाल विश्वास के बारे में जो सुलझता नहीं। यह अध्याय तुम्हें झूठी उम्मीद नहीं देता कि एक दिन सब कुछ अचानक ठीक हो जाएगा। पर यह तुम्हें यह ज़रूर दिखाता है कि परमेश्वर अधूरे कामों के बीच भी वफादार रहते हैं। वे यहोशू को छोड़ते नहीं, बल्कि अगली पीढ़ी को तैयार करते हैं। शायद तुम्हारा काम भी यही है, अपने हिस्से की लड़ाई लड़ना, यह जानते हुए कि पूरी जीत तुम्हारे हाथ में नहीं, परमेश्वर के हाथ में है।

बात करो

क्या तुम्हारी ज़िंदगी में ऐसी कोई "अधूरी ज़मीन" है, जो अभी तक जीती नहीं गई? तुम उसके साथ कैसे जीते हो?

लेवी के गोत्र का हिस्सा सिर्फ परमेश्वर था, कोई ज़मीन नहीं। क्या तुम्हारे लिए परमेश्वर खुद "काफी" महसूस होते हैं, या तुम्हें हमेशा कुछ और चाहिए होता है?

साथ में प्रार्थना

प्रभु, हमारी ज़िंदगी में भी बहुत कुछ अधूरा है। हमें ईमानदार होने की हिम्मत दीजिए, झूठी उम्मीदें मत पालने दीजिए। पर यह भी सिखाइए कि आप अधूरे कामों के बीच भी वफादार रहते हैं। हमें यह सिखाइए कि आप ही हमारा सबसे बड़ा हिस्सा हैं। आमीन।

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यहोशू 13 के बारे में प्रश्न

पहली बार इसके बारे में पढ़ने वाले हर किसी के लिए छोटे उत्तर।

यहोशू 13 किस विषय में है?
यहोशू अब बूढ़ा हो चुका है। जिस आदमी ने यरीहो की दीवारें गिरते देखीं, जिसने दर्जनों राजाओं को हराया, वह अब थका हुआ, उम्र का मारा खड़ा है। और परमेश्वर उससे कुछ ऐसा कहते हैं जो चौंकाने वाला है, "तू बूढ़ा और बहुत उम्र का हो गया है, और बहुत देश रह गए हैं, जो इस्राएल के अधिकार में अभी तक नहीं आए।" काम अधूरा है। पलिश्तियों का इलाका, गशूरियों का प्रदेश, लबानोन की पहाड़ियाँ, सीदोनियों का क्षेत्र, यह सब अभी भी कनानियों के हाथ में है।
यहोशू 13 क्या कहता है?
यह अध्याय नक्शों, सीमाओं, और नगरों के नामों से भरा है। पढ़ने में उबाऊ लग सकता है। पर रुककर सोचो, यह सिर्फ भूगोल नहीं है।
यहोशू 13 हमें परमेश्वर के बारे में क्या सिखाता है?
यह बात तुम्हारी ज़िंदगी से मेल खाती है। तुम्हारे जीवन में भी ऐसी चीज़ें होंगी जो अधूरी रह जाएँगी, रिश्ते जो पूरी तरह ठीक नहीं होंगे, आदतें जो जड़ से नहीं उखड़ेंगी, सवाल जो जवाब नहीं पाएँगे। परमेश्वर यहाँ यह स्वीकार करते हैं कि कुछ लड़ाइयाँ पीढ़ी दर पीढ़ी चलती रहती हैं। यहोशू को रिटायर नहीं होने दिया गया सिर्फ इसलिए कि वह थक गया था। परमेश्वर का काम उसकी ताकत पर निर्भर नहीं था, न अब है।
किशोर यहोशू 13 से क्या सीख सकते हैं?
यही सूत्र पूरी बाइबल से होकर यीशु मसीह तक जाता है। यीशु ने कहा था कि उनके पास सिर उठाने की जगह नहीं। उन्होंने भूमि का कोई भाग नहीं माँगा, कोई राज्य इस दुनिया का नहीं लिया। उनकी विरासत कुछ और थी, पिता के साथ संबंध, और वह संबंध उन्होंने हमारे लिए खोल दिया। यहोशू अधूरा काम छोड़ गया क्योंकि वह इंसान था। यीशु ने क्रूस पर कहा, "पूरा हुआ।" जो यहोशू नहीं कर पाया, जो कोई इंसान नहीं कर सकता, वह यीशु ने किया। वे पूर्णता लाए जहाँ हर मानव प्रयास अधूरा रह जाता है।
यहोशू 13 एक महत्वपूर्ण बाइबल कहानी क्यों है?
क्या तुम्हारी ज़िंदगी में ऐसी कोई "अधूरी ज़मीन" है, जो अभी तक जीती नहीं गई? तुम उसके साथ कैसे जीते हो?

दूसरों ने क्या पाया

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 6

यहोशू बूढ़ा हो चुका था और बहुत सा देश अब भी जीता नहीं गया था। फिर भी परमेश्वर कहता है, "मैं उनको इस्राएलियों के सामने से निकाल दूँगा; तू केवल उस देश को चिट्ठी डालकर इस्राएल को बाँट देना।" जो अभी हाथ में नहीं आया, उसे भी बाँटने का हुक्म मिला। क्या तुम उस वादे पर भरोसा करके आगे बढ़ पाओगे, जो अभी पूरा नहीं हुआ?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 26

फिर हेशबोन से लेकर रामत्मिस्पे और बतोनीम तक, और महनैम से लेकर दबीर की सीमा तक।" सिर्फ नाम लगते हैं, पर महनैम वही जगह है जहाँ याकूब ने डरते हुए परमेश्वर के दूतों को देखा था। पीढ़ियों बाद वही डर की जगह गाद के गोत्र की विरासत बनी। तेरे जीवन का वह कोना, जहाँ तू अकेला काँपा था, परमेश्वर उसे भी नाप रहा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

मूसा अब जीवित नहीं था, अगुवाई यहोशू के हाथ में थी। फिर भी लिखा है कि रूबेनियों और गादियों ने वही भाग पाया "जिसे यहोवा के दास मूसा ने उन्हें दिया था।" जो परमेश्वर ने किसी के द्वारा तुझे दिया, वह उस व्यक्ति के चले जाने से छिन नहीं जाता। जिस माँ ने तेरे लिए प्रार्थना की, वह आज नहीं है, पर उसकी प्रार्थना का भाग आज भी तेरे नाम पर लिखा है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

यहोशू बूढ़ा हो चला था, और परमेश्वर उसे ऐसे नाम गिना रहा है जिन्हें उसके पैर कभी नहीं छुएँगे: "फिर गिबलियों का देश, और सूर्योदय की ओर समस्त लबानोन।" जो अभी जीता नहीं गया, उसे भी परमेश्वर विरासत कहकर बाँट देता है। तेरी अधूरी ज़मीन भी उसकी सूची में लिखी है। तू उसे अपने जीवन में पूरा होते न देखे, फिर भी वह वादा मरता नहीं।

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