2 शमूएल 17
पाठ
अहीतोपेल की योजना सीधी और घातक है: बारह हजार चुने हुए पुरुष, उसी रात कूच, और थके हुए दाऊद पर अचानक प्रहार। केवल राजा मारा जाए, बाकी प्रजा लौट आए। अबशालोम को बात जँचती है, पर वह हूशै को भी बुलवाता है, और हूशै बड़ी चतुराई से दाऊद को "बच्चा छीनी हुई रीछनी" जैसा चित्रित करके सुझाव देता है कि दान से बेर्शेबा तक सारा इस्राएल इकट्ठा हो और अबशालोम स्वयं युद्ध में जाए। अबशालोम यही चुनता है। याजकों के पुत्र कुएँ में छिपकर संदेश पहुँचाते हैं, दाऊद पौ फटने से पहले यरदन पार कर जाता है, अहीतोपेल अपने घर जाकर फाँसी लगा लेता है, और महनैम में तीन व्यक्ति थके हुए राजा के लिए रोटी, शहद और बिछौने ले आते हैं।
मर्म
अध्याय के ठीक बीच में वर्णनकर्ता परदा हटाता है: "यहोवा ने तो अहीतोपेल की अच्छी सम्मति को निष्फल करने की ठानी थी, कि वह अबशालोम ही पर विपत्ति डाले।" ध्यान दीजिए, पाठ यह नहीं कहता कि अहीतोपेल की सलाह बुरी थी। वह अच्छी थी, सैन्य दृष्टि से निर्दोष। परमेश्वर ने उसे झूठी सिद्ध नहीं किया, निष्फल किया। और यह काम उन्होंने किसी स्वर्गदूत या भूकंप से नहीं, बल्कि अबशालोम के अपने अहंकार से करवाया: हूशै उसे "तू आप ही युद्ध को जाए" कहकर फुसलाता है, और वही वाक्य उसके लिए जाल बन जाता है। परमेश्वर मनुष्य के निर्णयों को रद्द नहीं करते, वे उनके भीतर काम करते हैं। उस कमरे में किसी को पता नहीं था कि क्या हो रहा है; केवल पाठक को बताया जाता है।
मूल सूत्र
यहाँ एक अभिषिक्त राजा है जिसे अपने ही लोग ठुकरा चुके हैं, जो रात में घाटी पार करके भागता है, जिसे उसका सबसे भरोसेमंद सलाहकार धोखा देता है, और जो अपने शत्रुओं के देश में परदेशियों की दया से जीवित रहता है। यह केवल एक राजनीतिक संकट की कहानी नहीं, बल्कि एक आकृति है जो बाइबल में बार-बार लौटती है: परमेश्वर का चुना हुआ व्यक्ति तलवार से नहीं, बल्कि परमेश्वर के छिपे हुए हस्तक्षेप से बचाया जाता है। दाऊद का राज्य इसलिए टिकता है क्योंकि एक सलाह निष्फल कर दी गई। इसी वंश से आनेवाला राजा भी मेज के साथी से पकड़वाया जाएगा, शहर से बाहर निकलेगा, और उसका राज्य सेना से नहीं, परमेश्वर की गुप्त इच्छा से स्थापित होगा।
दर्पण
अहीतोपेल पर रुकिए। वह गद्दार तो था ही, पर उसका अंत विश्वासघात से नहीं, अपमान से आया: "जब अहीतोपेल ने देखा कि मेरी सम्मति के अनुसार काम नहीं हुआ", तब उसने घर का हिसाब किया और जीवन समाप्त कर लिया। जिस व्यक्ति की पहचान इस पर टिकी हो कि उसकी बात मानी जाती है, उसके लिए अनसुना होना मृत्यु जैसा लगता है। आप भी जानते हैं वह स्वाद: कलीसिया की बैठक में आपका प्रस्ताव गिर गया, दफ्तर में किसी कम योग्य व्यक्ति की राय चल गई, घर में बच्चों ने आपका अनुभव नहीं माना। और दूसरी ओर बर्जिल्लै है, जो कोई सलाह नहीं देता, बस दही, मसूर और चारपाइयाँ भेज देता है, यह सोचकर कि "जंगल में वे लोग भूखे प्यासे और थके-माँदे होंगे।" आज किसी एक थके हुए व्यक्ति का नाम लिखिए और उसे अभी संदेश भेजिए कि आप इस सप्ताह उसके लिए खाना लेकर आ रहे हैं, और दिन कौन सा होगा।
अन्तर्पाठ
बहूरीम की वह स्त्री जो कुएँ के मुँह पर कपड़ा बिछाकर दला हुआ अन्न फैला देती है और पीछा करनेवालों को गलत दिशा में भेज देती है, राहाब की सीधी प्रतिध्वनि है (यहोशू 2): दो भेदिए, एक स्त्री, छत या कुआँ, और एक झूठी सूचना जिससे परमेश्वर का काम बचता है। कहानी बताती है कि राज्य के मोड़ अक्सर उन लोगों के हाथों आते हैं जिनका नाम तक इतिहास याद नहीं रखता। दूसरी ओर अहीतोपेल: पूरे पुराने नियम में फाँसी लगाकर मरनेवाला यही एक व्यक्ति है, और नए नियम में दूसरा यहूदा है। यीशु ने अपने विश्वासघात के समय भजन 41:9 उद्धृत किया, "मेरी रोटी खानेवाले" ने लात मारी, और वह भजन दाऊद का है। और महनैम का नाम याकूब से आता है, जो डरते हुए यरदन के उस पार से लौटा था; दाऊद अब उल्टी दिशा में उसी शरणस्थली में पहुँचता है।
पृष्ठभूमि
यह अध्याय एक ही रात में घटता है। अबशालोम यरूशलेम पर कब्जा कर चुका है, दाऊद जैतून पहाड़ से रोता हुआ उतरा है, और सब कुछ गति पर निर्भर है; इसीलिए अहीतोपेल "आज ही रात" कहता है। प्राचीन दरबार में सलाहकार का पद लगभग पवित्र था, और अहीतोपेल की सम्मति की प्रतिष्ठा ऐसी थी मानो परमेश्वर का वचन हो। एनरोगेल नगर के बाहर का सोता था, बहूरीम बिन्यामीनी इलाका जहाँ शिमी ने दाऊद को शाप दिया था, और महनैम यरदन के पूर्व में वह नगर जो कभी ईशबोशेत की राजधानी थी, अर्थात कभी दाऊद के विरोधियों का गढ़। जो लोग उसे खिलाते हैं वे भी चौंकानेवाले हैं: शोबी एक अम्मोनी, माकीर वही जिसने मपीबोशेत को आश्रय दिया था, बर्जिल्लै एक धनी गिलादी।
श्रोताओं का चेहरा
जिन्होंने यह कहानी पहली बार सुनी, वे ऐसे लोग थे जो जानते थे कि दाऊद का घराना कितना कमजोर पड़ सकता है, और आगे चलकर जिनके सामने यरूशलेम सचमुच गिरा। उनके कानों में चौदहवें पद का वाक्य सबसे ऊँचा बजा होगा: इतिहास का कब्जा युद्ध परिषद के पास नहीं है। उन्होंने यह भी सुना कि नातान की भविष्यवाणी के अनुसार दाऊद के अपने घर से उठी तलवार अब भी चल रही है; यह कोई शुद्ध विजयगाथा नहीं, एक क्षमा पाए हुए पापी का बचाव है। और उन्होंने यह ध्यान दिया होगा कि अभिषिक्त राजा को जीवित रखनेवाला भोजन इस्राएल के केंद्र से नहीं, सीमांत और परदेश से आया।
चिंतन के प्रश्न
आपकी पहचान कितनी इस बात पर टिकी है कि आपकी सलाह मानी जाती है, और अनसुना होने पर आपके भीतर क्या जागता है?
इस समय आपके जीवन में परमेश्वर का काम किन अनाम लोगों के हाथों हो रहा है, जिन्हें आपने अब तक धन्यवाद नहीं कहा?
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2 Samuel 17 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
2 शमूएल 17 का क्या अर्थ है?
2 शमूएल 17 किस विषय में है?
2 शमूएल 17 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
2 शमूएल 17 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
2 शमूएल 17 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
2 Samuel 17 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि आपकी नज़र से कोई नाम छूटता नहीं। अमासा, यित्रा और अबीगैल जैसे नाम भी आपके वचन में दर्ज हैं। जब सत्ता बदलती है और अपने ही परिवार के लोग आमने सामने खड़े हो जाते हैं, तब भी आपकी योजना डगमगाती नहीं। हमारे टूटे रिश्तों को भी आप थामे हुए हैं, इसके लिए आपका धन्यवाद।
अहीतोपेल की योजना गौर से सुनिए: "मैं उस पर ऐसे समय पहुँचूँगा जब वह थका हुआ और निर्बल होगा, और उसको घबरा दूँगा।" वार के लिए उसने थकान का समय चुना। तेरा शत्रु भी यही ताक में रहता है, तेरी सबसे थकी हुई रात। पर उसी भागते हुए दाऊद के लिए परमेश्वर ने जंगल में रोटी और बिछौना भेज दिया। तेरी थकान उससे छिपी नहीं है।
अबशालोम के पास अहीतोपेल की सलाह पहले से थी, और वह अच्छी थी। फिर भी उसने पूछा, "क्या हम उसके वचन के अनुसार करें? यदि नहीं, तो तू कह दे।" उसे सलाह नहीं, सहमति चाहिए थी। तू भी कभी कभी तब तक पूछता रहता है जब तक कोई तेरी बात न दोहरा दे। सोच, तू सच खोज रहा है या अपनी मरजी के लिए मुहर?
रात भर की भागदौड़, और भोर होते होते सब पार। लिखा है, "पौ फटने तक उनमें से एक भी न रह गया जो यरदन के पार न हो गया हो।" एक भी नहीं। कोई थका हुआ, कोई बूढ़ा, कोई छोटा बच्चा पीछे नहीं छूटा। परमेश्वर जब अपने लोगों को निकालता है, तो गिनकर निकालता है। तेरी रात भी लंबी लग रही हो, पर तू उस गिनती से बाहर नहीं है।
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