3 यूहन्ना 1
पत्री की पहली झलक
एक बूढ़ा आदमी, जिसे लोग सिर्फ "प्राचीन" कहकर पुकारते हैं, एक छोटा सा पत्र लिखता है, शायद पपाइरस के एक ही टुकड़े पर, स्याही और कलम से। पत्र किसी बड़ी कलीसिया के नाम नहीं है, बल्कि एक व्यक्ति के नाम है, गयुस। इसमें एक की तारीफ है, एक की शिकायत है, एक की गवाही है, और एक जल्दी मुलाकात की उम्मीद है। बस इतना ही। लेकिन इस छोटी सी चिट्ठी में पहली सदी की कलीसिया की धड़कन सुनाई देती है, जहाँ यात्रा करने वाले प्रचारक, मेहमाननवाज़ी, और सत्ता की भूख आपस में टकरा रही थी।
मूल बात
यह पत्र दिखाता है कि "सत्य में चलना" कोई अंदरूनी आध्यात्मिक अनुभव नहीं है, बल्कि दरवाज़ा खोलने, रोटी बाँटने, और यात्रा के लिए पैसे देने जैसा ठोस काम है। प्राचीन गयुस से कहते हैं, "जब भी तू भाइयों के लिए कार्य करे और अजनबियों के लिए भी तो विश्वासयोग्यता के साथ कर।" सत्य यहाँ एक विचार नहीं है जिस पर सहमत होना है, बल्कि एक जीवनशैली है जो अजनबी को घर में जगह देती है। और इसके ठीक विपरीत खड़ा है दियुत्रिफेस, जो "उनमें बड़ा बनना चाहता है।" यही असली आध्यात्मिक बीमारी है, सत्य को मानना पर अपनी जगह छोड़ने को तैयार न होना।
बड़ी कहानी में जगह
यीशु ने अपने चेलों को बिना थैली और बिना जूते के भेजा था, और कहा था कि जो घर उन्हें ग्रहण करे, वहीं रहें। पहली सदी में यह आदेश एक व्यावहारिक ज़रूरत बन गया था। सुसमाचार पैदल चलकर फैलता था, और पैदल चलने वालों को कहीं न कहीं रुकना पड़ता था। गयुस जैसे लोग, जो अपना घर खोलते थे, इस सुसमाचार-यात्रा की रीढ़ थे। मसीह की सेवा उनके द्वारा हुई जिन्होंने कभी मंच नहीं देखा, सिर्फ अपनी रसोई खोली। यह वही धारा है जो अंत में उस दिन तक जाती है जब राजा कहेगा, "मैं परदेशी था, और तुमने मुझे अपने घर में रखा।"
आईना
यह पत्र हमारी आधुनिक धर्मपरायणता पर एक असहज सवाल रखता है। हम "सत्य पर चलने" को अक्सर सही धर्मशास्त्र से जोड़ते हैं, या नियमित प्रार्थना से। लेकिन प्राचीन के लिए इसका सबूत यह था कि गयुस के घर से थके हुए यात्री अच्छी विदाई पाकर निकले थे। आपके घर में पिछले महीने कौन आया? किसे आपने रात के खाने पर बुलाया जिससे आपको कोई फ़ायदा नहीं था? और दियुत्रिफेस का आईना और भी तीखा है। कलीसिया में, समिति में, परिवार में, कहाँ आप "बड़ा बनना" चाहते हैं? कहाँ आप दूसरों को इसलिए स्वीकार नहीं करते क्योंकि उनका आना आपकी स्थिति को खतरे में डालता है?
पहले पाठक
गयुस शायद एक साधारण मध्यमवर्गीय विश्वासी था, जिसके पास एक ऐसा घर था जहाँ मेहमानों के लिए जगह थी। पहली सदी की सराय गंदी, महँगी और अक्सर वेश्यावृत्ति से जुड़ी होती थीं, इसलिए मसीही यात्री उनसे बचते थे। जब "भाइयों" ने कलीसिया के सामने गयुस के प्रेम की गवाही दी, तो वे शायद उन थैलियों की बात कर रहे थे जो उन्हें अगले पड़ाव तक ले जाने के लिए दी गई थीं, या उन जूतों की जो मरम्मत करके वापस दिए गए थे। और दियुत्रिफेस? वह शायद एक स्थानीय अगुआ था जिसने अपनी कलीसिया को यूहन्ना के प्रभाव क्षेत्र से अलग करने की कोशिश की थी। सत्ता का यह संघर्ष उन पहले पाठकों को भलीभाँति जाना-पहचाना लगा होगा, क्योंकि हर छोटे शहर की कलीसिया में ऐसे तनाव थे।
अन्य वचनों की गूँज
"वे उस नाम के लिये निकले हैं, और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते।" यह वाक्य पौलुस की उस चिंता से मेल खाता है जब वह कहता है कि सुसमाचार को बेचा नहीं जाना चाहिए। यात्रा करने वाले प्रचारक जानबूझकर गैर-विश्वासियों से पैसे नहीं लेते थे, ताकि सुसमाचार पर व्यापार का दाग न लगे। इसका मतलब यह भी था कि विश्वासियों की मेज़बानी ही उनकी एकमात्र सहायता थी। और "जो भलाई करता है, वह परमेश्वर की ओर से है" वही स्वर है जो 1 यूहन्ना में बार-बार लौटता है, कि जीवन के फल से ही असली संबंध पहचाना जाता है।
एक बारीकी
गौर कीजिए कि प्राचीन दियुत्रिफेस पर किस बात का मुख्य आरोप लगाते हैं। सिद्धांत की गलती नहीं। नैतिक कमज़ोरी नहीं। बल्कि यह कि वह "हमें ग्रहण नहीं करता" और "भाइयों को ग्रहण नहीं करता।" उसका पाप दरवाज़ा बंद करना है। पहली सदी में यह बहुत गंभीर था, क्योंकि दरवाज़ा बंद करने का मतलब था किसी को भूखा, बेघर, और असुरक्षित छोड़ देना। दियुत्रिफेस शायद सही धर्मशास्त्र मानता था, शायद रविवार को अच्छा प्रचार भी करता था। लेकिन उसका दरवाज़ा बंद था। और प्राचीन की नज़र में यह उसे "परमेश्वर को नहीं देखा" की श्रेणी में डाल देता है। यह एक ऐसी चेतावनी है जो हर उस कलीसिया के लिए है जहाँ "सिद्धांत" और "आतिथ्य" को अलग-अलग विभागों में रख दिया गया है।
चिंतन के प्रश्न
*आपके जीवन में वे कौन से "अजनबी" हैं जिनके लिए आपका दरवाज़ा खुला रहना चाहिए, पर व्यस्त
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
3 John 1 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
3 यूहन्ना 1 का क्या अर्थ है?
3 यूहन्ना 1 किस विषय में है?
3 यूहन्ना 1 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
3 यूहन्ना 1 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
3 यूहन्ना 1 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
3 John 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, मुझे ऐसा दिल दे जो अपनों के साथ ही नहीं, अनजानों के साथ भी खुलकर प्रेम करे। जो थोड़ा मेरे पास है, उसे बाँटने में मैं कंजूस न बनूँ। मेरी सेवा दिखावे के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई और विश्वासयोग्यता से हो।
पिता, धन्यवाद कि जो गलत होता है वह आपकी नज़र से छिपा नहीं रहता। दियुत्रिफेस जैसे व्यवहार के सामने आपने यूहन्ना को सच बोलने का साहस दिया, और जो भाई कलीसिया से निकाले गए, उन्हें आपने अपने पास ग्रहण किया। आप न्यायी और सच्चे हैं।
यूहन्ना गयुस के लिए लिखता है, "हे प्रिय, मेरी यह प्रार्थना है, कि जैसे तू आत्मिक उन्नति कर रहा है, वैसे ही तू सब बातों में उन्नति करे, और स्वस्थ रहे।" गौर कर, यहाँ नापने का पैमाना आत्मा है, शरीर नहीं। गयुस की आत्मा इतनी स्वस्थ थी कि उसी के बराबर सेहत माँगना आशीष थी। तेरे लिए भी यही प्रार्थना हो, तो क्या माँगी जाएगी?
यूहन्ना उन प्रचारकों की बात कर रहा है जो "नाम के लिये" निकले और अन्यजातियों से कुछ नहीं लेते थे। उनके लिए दरवाज़ा खोलना, रोटी देना, यात्रा का खर्च उठाना, यही गयुस की सेवा थी। और यूहन्ना कहता है, "इसलिए ऐसों का स्वागत करना हमारा कर्तव्य है, जिससे हम भी सत्य के सहकर्मी हों।" सोचो, तुम मंच पर नहीं, पर किसी सेवक की थकान बाँटकर उसी काम के भागी बन सकते हो। आज किसका बोझ हल्का कर सकते हो?
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
