एज्रा 5
पाठ
तत्तनै और शतर्बोजनै मंदिर के निर्माण-स्थल पर आते हैं और दो सवाल पूछते हैं: किसने आज्ञा दी, और तुम्हारे नाम क्या हैं। हाग्गै और जकर्याह की भविष्यवाणी से जागे हुए जरुब्बाबेल और येशुअ काम रोकते नहीं; वे उत्तर देते हैं और पत्थर जोड़ते रहते हैं। अधिपति दारा को चिट्ठी लिखते हैं, जिसमें यहूदियों का पूरा उत्तर दर्ज है: हम आकाश और पृथ्वी के परमेश्वर के दास हैं, हमारे पुरखाओं ने परमेश्वर को रिस दिलाई थी, और कुस्रू राजा ने ही यह भवन बनाने की आज्ञा दी थी। अंत में एक सुझाव: बाबेल के राजभण्डार में खोज कर देख लीजिए।
मर्म
पद 4 का सवाल हल्का नहीं है। नाम पूछना धमकी है, क्योंकि नाम फाइल में जाता है और फाइल कभी बंद नहीं होती। और पद 5 इसका उत्तर एक अजीब मोड़ से देता है: "यहूदियों के पुरनियों के परमेश्वर की दृष्टि उन पर रही।" परमेश्वर ने अधिपतियों को अंधा नहीं किया, चिट्ठी को रास्ते में गुम नहीं किया, तत्तनै का मन नहीं बदला। उन्होंने केवल इतना किया कि काम रुका नहीं। यही इस अध्याय का धर्मशास्त्र है: परमेश्वर की देखरेख का अर्थ खतरे का हटना नहीं, बल्कि खतरे के बीच आज्ञाकारिता का जारी रहना है। जो विश्वास सुरक्षा की गारंटी मांगता है, वह इस पाठ में कुछ नहीं पाएगा। जो आज के दिन का काम मांगता है, वह सब कुछ पाएगा।
सूत्र
बंदी से लौटे लोग एक अधूरी नींव पर खड़े हैं। सोलह साल से पत्थर बेकार पड़े थे। नबियों का वचन आता है और हाथ हिलने लगते हैं; वचन पहले, काम बाद में, यही क्रम पूरी बाइबल का है। यह मंदिर बनकर भी अधूरा रहेगा, क्योंकि जो भवन परमेश्वर की उपस्थिति को सचमुच लोगों के बीच रखेगा वह पत्थर का नहीं होगा। मसीह अपने शरीर को मंदिर कहेंगे, और वही तोड़ा जाकर तीन दिन में उठाया जाएगा। इसलिए जरुब्बाबेल का कमर बाँधना केवल पुरातत्त्व नहीं है, वह एक दिशा है: परमेश्वर अपनी उपस्थिति को अपनी प्रजा के बीच स्थापित करने का काम कभी अधूरा नहीं छोड़ते, चाहे रुकावटें दशकों लंबी हों।
आईना
आपका सवाल आज कागज पर नहीं आता, फिर भी वही है: किसने आपको इसका अधिकार दिया? जब आप दफ्तर में हिसाब सीधा रखने पर अड़ते हैं और वरिष्ठ अधिकारी की भौंह टेढ़ी होती है; जब आप अपने बच्चे को उस भीड़ से अलग चलना सिखाते हैं और रिश्तेदार पूछते हैं कि तुम खुद को क्या समझते हो; जब आप किसी को माफ करने का फैसला करते हैं और घर में इसे कमजोरी कहा जाता है। ध्यान दें कि जरुब्बाबेल ने क्या नहीं किया। उन्होंने न झगड़ा किया, न छिपकर काम किया, न तत्तनै की मंजूरी का इंतजार किया। उन्होंने काम चालू रखा और सच बोल दिया। अधिकतर बार हमारा पाप इनमें से एक होता है: या तो हम लड़ने लगते हैं, या हम रुक जाते हैं और उसे विवेक कह देते हैं।
बारीकी
पद 12 सबसे चौंकाने वाला है। सरकारी जांच के सामने बयान देते हुए वे यह नहीं कहते कि हम निर्दोष सताए हुए लोग हैं। वे कहते हैं: "जब हमारे पुरखाओं ने स्वर्ग के परमेश्वर को रिस दिलाई थी, तब उसने उन्हें… नबूकदनेस्सर के हाथ में कर दिया था।" यानी बंदीवास की जिम्मेदारी वे बाबेल पर नहीं, अपने घराने पर डालते हैं। यह असाधारण नैतिक साहस है। दुश्मन के सामने अपनी सबसे शर्मनाक बात स्वीकार करना, क्योंकि वह सच है। और ठीक यही स्वीकारोक्ति उनकी दलील को मजबूत बनाती है, कमजोर नहीं: यह भवन इसलिए फिर बन रहा है क्योंकि जिन परमेश्वर ने इसे न्याय में गिराया, उन्होंने ही इसे फिर उठाने की आज्ञा दी। जो अपनी गलती छिपाता है, उसे अपनी सफाई गढ़नी पड़ती है; जो मान लेता है, वह सीधा बोल सकता है।
अंतर्पाठ
हाग्गै का शब्द इस अध्याय की पृष्ठभूमि है: लोग अपने-अपने छत वाले घरों में बैठे थे और परमेश्वर का भवन उजाड़ पड़ा था। यह सोलह साल की चुप्पी आलस नहीं थी, समझदारी थी; हालात अनुकूल नहीं थे, विरोध असली था। नबी ने उस समझदारी को ही पाप कहा। दूसरी ओर, दानिय्येल की तरह यहाँ भी बेबीलोन के दस्तावेज और परमेश्वर की योजना एक साथ चलते हैं: कुस्रू का पुराना आदेश राजभण्डार में पड़ा है और वही निर्णायक साबित होगा। परमेश्वर अपने काम को न केवल नबियों के मुख से, बल्कि सरकारी फाइलों की धूल से भी आगे बढ़ाते हैं। हमें अपनी ईमानदारी को व्यवस्था के बाहर नहीं, उसके भीतर टिकाना है।
पाठक
पहले पढ़नेवाले वे लोग थे जो जानते थे कि साम्राज्य की चिट्ठी क्या कर सकती है। एक बार पहले भी ऐसी चिट्ठी से काम बंद हो चुका था। जब उन्होंने पद 5 सुना, उन्होंने उसे भावुक दिलासे के रूप में नहीं सुना, बल्कि इतिहास के रूप में: हुआ यही कि इस बार काम नहीं रुका। उनके लिए मंदिर का पत्थर पर पत्थर चढ़ना यह घोषणा थी कि निर्वासन का न्याय अंतिम शब्द नहीं था। और उन्होंने वह भी सुना जो हम जल्दी छोड़ देते हैं: यह पीढ़ी अपने पुरखाओं के पाप का बोझ ईमानदारी से उठाती है, बिना कड़वाहट के, बिना बहाने के, और उसी सच्चाई के बल पर आगे बढ़ती है।
आप कहाँ किसी सही काम को "हालात ठीक नहीं हैं" कहकर रोक रखे हैं, और यह कैसे तय करेंगे कि वह विवेक है या डर?
जब आपसे आपके विश्वास का हिसाब मांगा जाता है, तो क्या आप अपनी और अपने समुदाय की गलतियों को भी उतनी ही सीधी बात से स्वीकार कर पाते हैं जितनी सीधी बात से पुरनियों ने की?
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Ezra 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
एज्रा 5 का क्या अर्थ है?
एज्रा 5 किस विषय में है?
एज्रा 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
एज्रा 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
एज्रा 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ezra 5 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि जो सोने चाँदी के पात्र नबूकदनेस्सर बाबेल ले गया था, वे खोए नहीं। आपने उन्हें सम्भाले रखा और कुस्रू के हाथों शेशबस्सर को लौटा दिए। मेरी वह बातें भी जो छिन गई लगती हैं, आपकी नज़र में सुरक्षित हैं। आप लौटाना जानते हैं।
पिता, जो काम अधूरा छोड़ दिया गया है, उसे फिर से शुरू करने की हिम्मत दे। मुझे भी उठकर पहला पत्थर रखना सिखा, और ऐसे साथी दे जो कंधे से कंधा मिलाकर खड़े रहें। तेरा साथ ही मेरी ताकत है।
तुम्हारे बारे में भी कभी कोई चिट्ठी लिखी जा सकती है, तुम्हारी नीयत पर सवाल उठाया जा सकता है। यहाँ पूरी शिकायत लिखी जा रही थी, और मन्दिर का काम रुका नहीं। परमेश्वर की दृष्टि उन बुज़ुर्गों पर बनी रही। जो पत्र उन्हें रोकने के लिए लिखा गया, उसी से राजा की मंज़ूरी निकल आई। तू भी काम करता रह।
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