इब्रानियों 11:29
पाठ
पानी अब भी खड़ा है, दोनों ओर दीवार की तरह, और नीचे ज़मीन पर पैरों की चरमराहट सुनाई देती है, जैसे किसी सूखे रास्ते पर चलते हैं। यही चित्र इस एक पंक्ति में बँधा है: "विश्वास ही से वे लाल समुद्र के पार ऐसे उतर गए, जैसे सूखी भूमि पर से।" इस्राएल आगे बढ़ा, समुद्र के बीचोंबीच, और पार निकल गया। फिर वही रास्ता, वही खुला गलियारा, वही गीली रेत, और उस पर मिस्री रथ दौड़ पड़े, "और जब मिस्रियों ने वैसा ही करना चाहा, तो सब डूब मरे।" एक ही पानी, एक ही राह, दो सर्वथा विपरीत अंत। लेखक इसे बिना किसी सजावट के, लगभग ठंडी आवाज़ में कहता है, और इसीलिए यह वाक्य सिहरन पैदा करता है।
मूल
इस अध्याय में यह एकमात्र पंक्ति है जहाँ नायक कोई नाम नहीं, बल्कि एक पूरी भीड़ है, "वे"। हाबिल, नूह, अब्राहम, मूसा, सब के नाम हैं; यहाँ केवल डरे हुए, थके हुए, रोते-चिल्लाते लोग हैं जिन्होंने एक काम किया, वे चल पड़े। विश्वास यहाँ कोई भावना या भीतरी निश्चय नहीं, बल्कि वह पहला कदम है जो तब उठाया जाता है जब पीछे रथ और सामने पानी हो। और ठीक यहीं पर पाठ हमें चुभता है: वह रास्ता कोई प्राकृतिक अवसर नहीं था जिसे कोई भी पकड़ ले। वह परमेश्वर द्वारा अपने लोगों के लिए खोला गया मार्ग था, वाचा का मार्ग। मिस्रियों ने वही काम "वैसा ही" करना चाहा, पर बिना बुलावे, बिना वादे, बिना उस परमेश्वर के सामने झुके। नकल विश्वास नहीं होती। उद्धार रास्ते में नहीं, रास्ता खोलनेवाले में है।
सूत्र
समुद्र से गुज़रना इस्राएल की स्मृति में उद्धार का मूल चित्र बन गया, और वह चित्र मसीह तक जाता है। ध्यान दें कि लेखक ने ठीक पिछली पंक्ति में फसह और लहू छिड़कने की बात कही, "विश्वास ही से उसने फसह और लहू छिड़कने की विधि मानी"। पहले मेम्ने का लहू, फिर पानी से पार होना। यही क्रम कलीसिया में भी बना रहा: मसीह का बलिदान, और फिर बपतिस्मा के पानी से गुज़रकर नई ज़िंदगी में निकलना। इस्राएल उस रात मरा नहीं, पर मिस्र उसके पीछे हमेशा के लिए डूब गया। मसीह में भी यही होता है: पुरानी गुलामी का दावा टूट जाता है। पार जाना केवल बचना नहीं, दासता के देश से कानूनी तौर पर छूट जाना है।
दर्पण
आपके सामने भी कभी वैसा ही पानी खड़ा होता है। वह रिपोर्ट जो कल दफ़्तर में देनी है, वह बातचीत जिससे शादी टूट भी सकती है, वह बिल जिसका जवाब आपके खाते में नहीं है, वह जाँच जिसका नतीजा शुक्रवार आएगा। और पीछे रथ: वही पुरानी आदत, वही आवाज़ कि "तुम यहीं तक के हो"। इस पंक्ति की सख़्ती यह है कि परमेश्वर ने पहले पानी नहीं हटाया और फिर लोगों को चलाया; उन्होंने रास्ता खोला और लोगों को उसमें उतरना पड़ा, दोनों ओर पानी दीवार की तरह खड़ा रहते हुए। विश्वास का अर्थ खतरे का ग़ायब होना नहीं, खतरे के बीच से चलना है। आज ही एक काम कीजिए: जिस एक चीज़ से आप हफ़्तों से बच रहे हैं, उसका पहला छोटा कदम अभी उठाइए, वह फ़ोन कीजिए या वह ईमेल भेजिए, और भेजने से पहले ज़ोर से कहिए, "यह रास्ता आपने खोला है।"
एक बारीकी
"जैसे सूखी भूमि पर से", यही तीन शब्द सबसे अजीब हैं। समुद्र के बीच में सूखी भूमि जैसा कुछ नहीं होता; यह एक असंभव तुलना है। पर निर्गमन की कथा भी यही कहती है, और लेखक इसे दोहराता है क्योंकि इसमें परमेश्वर की देखभाल का स्वाद है। उन्होंने रास्ता बनाया ही नहीं, चलने योग्य बनाया। कीचड़ में फँसे पहिये नहीं, फिसलते बच्चे नहीं। जो परमेश्वर उद्धार देते हैं, वे उद्धार का विवरण भी संभालते हैं। और वही सूखी भूमि मिस्रियों के लिए कब्र बन गई, बिना किसी नए चमत्कार के; परमेश्वर ने केवल हाथ हटा लिया। एक ही ज़मीन, विश्वास के लिए राह, हठ के लिए जाल।
पृष्ठभूमि
यह लगभग तेरहवीं-चौदहवीं सदी ईसा पूर्व का मिस्र है, दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति, और इस्राएल उसकी ईंट बनाने वाली मज़दूर जाति। रथ उस समय का सबसे भयानक सैन्य हथियार था, और फ़िरौन केवल राजा नहीं, देवता माना जाता था। सो समुद्र के किनारे जो टकराव हुआ वह दो सेनाओं का नहीं था, इस्राएल के पास सेना ही नहीं थी; वह इस्राएल के परमेश्वर और मिस्र के देवता-राजा के बीच का मुकदमा था। भागते दास, सामने अथाह पानी, पीछे धूल उड़ाते रथ। मानवीय रूप से यह अंत था। इसीलिए यह कदम "विश्वास ही से" कहा गया: उन्हें पहले हार का पूरा हिसाब देखना पड़ा, फिर चलना पड़ा।
पहले सुननेवाले
इब्रानियों का यह पत्र उन मसीही विश्वासियों को लिखा गया जो थक चुके थे, जिनका सामाजिक अपमान हो रहा था, जिनकी संपत्ति छिन चुकी थी, और जिनके मन में लौट जाने का विचार उठ रहा था। उनके लिए यह पंक्ति सिर्फ़ इतिहास नहीं थी, आइना थी। वे भी मिस्र छोड़ चुके थे और अभी पानी के बीच में थे, न पुरानी सुरक्षा, न पूरी हुई प्रतिज्ञा। लेखक उन्हें याद दिलाता है कि उनके पुरखे भी ठीक इसी जगह खड़े थे और पार निकल गए। और चुपचाप एक चेतावनी भी: लौटना कोई सुरक्षित विकल्प नहीं है, क्योंकि जो पानी उद्धार का रास्ता है, वही हठ के लिए न्याय बन जाता है।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन सा "पानी" है जिसके सामने आप खड़े हैं, और चलने से पहले आप किस चीज़ के हट जाने का इंतज़ार कर रहे हैं?
कहीं आप विश्वास की नकल तो नहीं कर रहे, यानी वही काम कर रहे हैं जो विश्वासी लोग करते हैं, पर बुलावे और प्रतिज्ञा पर भरोसे के बिना?
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Hebrews 11:29 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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इब्रानियों 11:29 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Hebrews 11 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, धन्यवाद कि मूसा के माता-पिता ने विश्वास से उसे तीन महीने छिपाए रखा और राजा की आज्ञा से न डरे। धन्यवाद कि आज भी आप माता-पिता को ऐसा साहस देते हैं कि वे डर के बीच अपने बच्चों को आपके हाथों में सौंप दें, और आप उनकी रक्षा करते हैं।
कुछ लोगों ने ठट्ठों में उड़ाए जाने और कोड़े खाने; वरन् बाँधे जाने और कैद में पड़ने का भी अनुभव किया।" गौर करो, सूची ठट्ठों से शुरू होती है, कोड़ों से नहीं। परमेश्वर जानता है कि हँसी उड़ाया जाना भी एक घाव है। तेरे विश्वास पर जो ताने कसे जाते हैं, वे स्वर्ग में दर्ज हैं, और तू उन्हीं की कतार में खड़ा है जिनके योग्य यह संसार न था।
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