बाइबल व्याख्या

होशे 5

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यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

एक चौकीदार का सींग बजता है, और तीन पते चिल्लाए जाते हैं: याजक, राजघराना, पूरा इस्राएल। इन तीनों पर मुकद्दमा है। परमेश्वर कहते हैं कि जो जगहें तीर्थ होनी चाहिए थीं, वे शिकार के फंदे बन गई हैं, और एप्रैम का भेद उनसे छिपा नहीं। फिर युद्ध का बिगुल गूँजता है, यहूदा भी घसीटा जाता है, और अंत में परमेश्वर स्वयं कीड़े और सिंह दोनों बन जाते हैं: धीमी सड़न और अचानक झपट्टा, जब तक लोग संकट में पड़कर उन्हें ढूँढ़ने न लगें।

मूल बात

यह अध्याय एक बात को बेरहमी से साफ करता है: धर्म का ढाँचा खड़ा रह सकता है जबकि उसके भीतर परमेश्वर का ज्ञान मर चुका हो। लोग भेड़-बकरियाँ और गाय-बैल लेकर आते हैं, यानी पूजा बंद नहीं हुई, चढ़ावा घटा नहीं। फिर भी "वह उनको न मिलेगा।" यह सबसे डरावनी पंक्ति है, क्योंकि इसका मतलब है कि परमेश्वर को खोजने का कोई यंत्र नहीं है जिसे दबाकर उन्हें बुलाया जा सके। और ध्यान दें कि दोष कर्म तक सीमित नहीं है: "उनके काम उन्हें अपने परमेश्वर की ओर फिरने नहीं देते।" पाप एक कैद बन जाता है। आदमी लौटना चाहे भी तो उसकी आदतें उसे दरवाज़े तक पहुँचने नहीं देतीं। मुक्ति इसलिए नैतिक सुधार नहीं, छुड़ाई हुई है।

बड़ी कहानी में जगह

होशे में परमेश्वर का पीछे हटना अंतिम शब्द नहीं है। पद 15 का ढाँचा ध्यान से देखिए: सिंह फाड़ता है, फिर "अपने स्थान" को लौट जाता है, और प्रतीक्षा करता है, कि वे अपने को अपराधी मानें। यह न्याय है जिसका लक्ष्य वापसी है। यहीं से बाइबल की एक लंबी लकीर खिंचती है: वनवास, फिर लौटना। और इसी लकीर के सिरे पर वह खड़ा है जिसने चंगाई किसी यारेब राजा से नहीं माँगी, बल्कि स्वयं घायल होकर दी। जिस पंजे से "कोई न छुड़ा सकेगा", उस न्याय के नीचे मसीह गए, और वहीं से परमेश्वर की खोज पहली बार उलट गई: अब खोजनेवाला परमेश्वर है, और मिलनेवाला वह जो छिपा था।

आईना

हम भी अश्शूर के पास जाते हैं। घाव दिखता है, और हाथ फ़ोन की ओर जाता है, या उस आदमी की ओर जिसके पास शक्ति है, या उस बचत खाते की ओर, या उस रिश्ते की ओर जो थोड़ी देर सुन्न कर दे। नौकरी हिल रही है, तो सिफ़ारिश ढूँढ़ते हैं; शादी सूख रही है, तो व्यस्तता ढूँढ़ते हैं; बच्चा बिगड़ रहा है, तो कोई नई तकनीक ढूँढ़ते हैं। ये सब गलत नहीं, पर होशे साफ कहते हैं: "न वह तुम्हें चंगा कर सकता और न तुम्हारा घाव अच्छा कर सकता है।" और सबसे बारीक धोखा यह है कि हम धार्मिक बने रहते हैं, चढ़ावा चलता रहता है, जबकि भीतर परमेश्वर का ज्ञान खोखला हो चुका है।

आज ही एक कागज़ पर उस एक चीज़ या व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके पास आप अपना घाव लेकर सबसे पहले भागते हैं, और उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए: "यह मुझे चंगा नहीं कर सकता।" फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।

एक बारीकी

पद 12 आसानी से फिसल जाता है: "मैं एप्रैम के लिये कीड़े के समान और यहूदा के घराने के लिये सड़ाहट के समान होऊँगा।" सिंह की तस्वीर हमें डराती है, लेकिन कीड़ा? कपड़े को खाने वाला पतंगा कोई शोर नहीं करता। आप उसे काम करते नहीं देखते। बस एक दिन आप वह चादर निकालते हैं जो पीढ़ियों से सन्दूक में रखी थी, और वह हाथ में ही भुरभुरा जाती है। सड़ाहट भी वैसी ही है, लकड़ी के भीतर, दीवार के पीछे। होशे कह रहे हैं कि परमेश्वर का न्याय अक्सर विस्फोट नहीं, क्षय है: संस्थाएँ खड़ी दिखती हैं, पूजा चलती है, सेना गिनती में पूरी है, और भीतर से सब खोखला हो चुका है। बहुत बार हम आग की प्रतीक्षा करते हैं और पतंगे को नहीं देखते।

संदर्भ

आठवीं सदी ईसा पूर्व का उत्तरी राज्य। अश्शूर के तिग्लत-पिलेसेर की सेनाएँ उत्तर से दबाव बना रही हैं, और सामरिया में महल के भीतर एक ही सवाल है: किससे संधि करें, मिस्र से या अश्शूर से? पद 8 में गिबा, रामाह, बेतावेन, ये सब बिन्यामीन की सीमा पर हैं, यानी इस्राएल और यहूदा के बीच की पट्टी। सींग बजने का मतलब है: शत्रु घुस आया है, गाँव खाली करो। पहले सुननेवालों के कानों में यह अध्याय धुएँ की गंध और भागते पैरों की आवाज़ के साथ आया। और "यारेब राजा" नाम पर मुस्कुराइए: यह मज़ाक है, "झगड़ालू राजा", उस सम्राट के लिए जिससे एप्रैम इलाज माँगने गया। साम्राज्य कभी वैद्य नहीं होता; वह फीस में देश लेता है।

सवाल

पद 6 खटकता है: वे परमेश्वर को ढूँढ़ने चलेंगे और नहीं पाएँगे। फिर पद 15 कहता है कि संकट में वे जी लगाकर ढूँढ़ेंगे। तो क्या परमेश्वर छिपते हैं? कब मिलते हैं और कब नहीं? होशे इसका सफ़ाई भरा उत्तर नहीं देते, और मैं भी नहीं दूँगा। फ़र्क शायद खोज के भाव में है: पद 6 की खोज हाथ में बलि लेकर आती है, सौदे की तरह; पद 15 की खोज खाली हाथ, "अपने को अपराधी मानकर।" फिर भी यह कड़वा रहता है कि परमेश्वर प्रतीक्षा करते हैं जब तक चोट गहरी न हो जाए। मैं इसे मीठा नहीं बना सकता। मैं बस यह जानता हूँ कि सिंह लौटता है, और वह अपने स्थान पर बैठा हुआ भी सुनने की मुद्रा में है।

चिंतन

आपकी प्रार्थना में कौन-सा हिस्सा सौदा है और कौन-सा खाली हाथ आना?

आपके जीवन में वह कौन-सी जगह है जहाँ ढाँचा खड़ा है पर भीतर कीड़ा लग चुका है, और आप उसे देखने से बच रहे हैं?

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Hosea 5 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

होशे 5 का क्या अर्थ है?
एक चौकीदार का सींग बजता है, और तीन पते चिल्लाए जाते हैं: याजक, राजघराना, पूरा इस्राएल। इन तीनों पर मुकद्दमा है। परमेश्वर कहते हैं कि जो जगहें तीर्थ होनी चाहिए थीं, वे शिकार के फंदे बन गई हैं, और एप्रैम का भेद उनसे छिपा नहीं। फिर युद्ध का बिगुल गूँजता है, यहूदा भी घसीटा जाता है, और अंत में परमेश्वर स्वयं कीड़े और सिंह दोनों बन जाते हैं: धीमी सड़न और अचानक झपट्टा, जब तक लोग संकट में पड़कर उन्हें ढूँढ़ने न लगें।
होशे 5 किस विषय में है?
होशे में परमेश्वर का पीछे हटना अंतिम शब्द नहीं है। पद 15 का ढाँचा ध्यान से देखिए: सिंह फाड़ता है, फिर "अपने स्थान" को लौट जाता है, और प्रतीक्षा करता है, कि वे अपने को अपराधी मानें। यह न्याय है जिसका लक्ष्य वापसी है। यहीं से बाइबल की एक लंबी लकीर खिंचती है: वनवास, फिर लौटना। और इसी लकीर के सिरे पर वह खड़ा है जिसने चंगाई किसी यारेब राजा से नहीं माँगी, बल्कि स्वयं घायल होकर दी। जिस पंजे से "कोई न छुड़ा सकेगा", उस न्याय के नीचे मसीह गए, और वहीं से परमेश्वर की खोज पहली बार उलट गई: अब खोजनेवाला परमेश्वर है, और मिलनेवाला वह जो छिपा था।
होशे 5 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही एक कागज़ पर उस एक चीज़ या व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके पास आप अपना घाव लेकर सबसे पहले भागते हैं, और उसे ज़ोर से पढ़कर कहिए: "यह मुझे चंगा नहीं कर सकता।" फिर वह कागज़ फाड़ दीजिए।
होशे 5 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
आठवीं सदी ईसा पूर्व का उत्तरी राज्य। अश्शूर के तिग्लत-पिलेसेर की सेनाएँ उत्तर से दबाव बना रही हैं, और सामरिया में महल के भीतर एक ही सवाल है: किससे संधि करें, मिस्र से या अश्शूर से? पद 8 में गिबा, रामाह, बेतावेन, ये सब बिन्यामीन की सीमा पर हैं, यानी इस्राएल और यहूदा के बीच की पट्टी। सींग बजने का मतलब है: शत्रु घुस आया है, गाँव खाली करो। पहले सुननेवालों के कानों में यह अध्याय धुएँ की गंध और भागते पैरों की आवाज़ के साथ आया। और "यारेब राजा" नाम पर मुस्कुराइए: यह मज़ाक है, "झगड़ालू राजा", उस सम्राट के लिए जिससे एप्रैम इलाज माँगने गया। साम्राज्य कभी वैद्य नहीं होता; वह फीस में देश लेता है।
होशे 5 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपकी प्रार्थना में कौन-सा हिस्सा सौदा है और कौन-सा खाली हाथ आना?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Hosea 5 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 2

पिता, धन्यवाद कि आप चुप नहीं रहते। जब हम भटककर बहुत आगे बढ़ जाते हैं, तब भी आपकी नज़र हम पर बनी रहती है और आप ताड़ना देकर हमें रोक लेते हैं। धन्यवाद कि आपका सुधारना क्रोध नहीं, प्रेम है, और वही हमें लौटा लाता है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

गिबा में नरसिंगा और रामाह में तुरही फूँको; बेतावेन में ललकारो!" ध्यान दो, जिस जगह का नाम कभी बेतेल यानी परमेश्वर का घर था, वही अब बेतावेन, यानी अनर्थ का घर कहलाती है। नाम वही जगह, पर भीतर से खोखली। तेरे जीवन में भी कोई ऐसा कोना है जो कभी प्रार्थना से भरा था और अब सिर्फ़ आदत रह गया? परमेश्वर वहाँ तुरही फूँक रहा है, नाश करने नहीं, तुझे जगाने के लिए।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 9

पिता, आपकी चेतावनी को हल्के में लेना मेरी आदत रही है। जो सच आप कहते हैं, वह होकर ही रहता है। मुझे उस दिन की प्रतीक्षा न करने दीजिए जब सब उजड़ जाए। आज ही मेरा मन फेर दीजिए, और आपकी आवाज़ सुनने की नरमी मुझमें बनी रहे।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 5

इस्राएल का अहंकार उसी के विरुद्ध साक्षी देता है।" परमेश्वर को गवाह ढूँढ़ने की ज़रूरत नहीं पड़ी। जिस घमंड को हम ताकत समझते हैं, वही अदालत में खड़ा होकर हमारे विरुद्ध बोलता है। और ध्यान दे, यहूदा भी उनके संग ठोकर खाता है। तेरा अकड़ा हुआ मन सिर्फ़ तुझे नहीं गिराता, तेरे साथ चलने वालों को भी लड़खड़ाता है।

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