बाइबल व्याख्या

यहोशू 10:10

बाइबल

पाठ

पाँच राजाओं की सम्मिलित सेना गिबोन को घेरे खड़ी है, और रातोंरात चढ़ाई करके यहोशू अचानक उन पर टूट पड़ता है। इस आयत में जो होता है, उसका पहला कर्ता इस्राएल नहीं है: "तब यहोवा ने ऐसा किया कि वे इस्राएलियों से घबरा गए।" पहले घबराहट, फिर हार। इसके बाद इस्राएली गिबोन के पास उनका बड़ा संहार करते हैं, बेथोरोन की चढ़ाई पर पीछा करते हैं, और अजेका तथा मक्केदा तक मारते चले जाते हैं। एक ही वाक्य में परमेश्वर का काम और मनुष्य की तलवार इस तरह गुँथे हुए हैं कि उन्हें अलग करना असंभव है, और यही इस आयत का सबसे कठिन और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।

मर्म

ध्यान दीजिए कि यहोशू किसके लिए रातभर चला। गिबोनियों ने उसे धोखा दिया था, फफूँदी लगी रोटी और फटे जूते दिखाकर संधि करवाई थी। फिर भी जब उनका संदेश आया, इस्राएल ने वचन निभाया। परमेश्वर उस लड़ाई में उतरते हैं जो एक धोखेबाज़ पड़ोसी को बचाने के लिए लड़ी जा रही है, क्योंकि उसके साथ शपथ बाँधी गई थी। यहाँ परमेश्वर का चरित्र दिखता है: वे वाचा को गंभीरता से लेते हैं, तब भी जब वाचा टेढ़े तरीके से बनी हो। और वे स्वयं लड़ते हैं, पर इस्राएल को घर बैठने नहीं देते। कृपा आलस्य नहीं जगाती; वह रात की थकाऊ चढ़ाई में साथ चलती है। जो परमेश्वर पर भरोसा रखता है, वह चलना बंद नहीं करता, वह भरोसे के साथ चलता है।

सूत्र

यह आयत उस लंबी कहानी का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर एक देश देते हैं और साथ ही न्याय करते हैं। एमोरियों की पीढ़ियों का हिसाब यहाँ चुकता होता है, और वह हिसाब भयानक है। पर ध्यान दीजिए किस दिशा में यह सूत्र बढ़ता है: यहोशू के हाथ में तलवार है, उसी नाम के दूसरे व्यक्ति, यीशु, के हाथ में कीलें हैं। वहाँ शत्रु मारे जाते हैं; यहाँ शत्रुओं के लिए स्वयं को दे दिया जाता है। दोनों जगह परमेश्वर ही लड़ते हैं, दोनों जगह मनुष्य को चलना पड़ता है। पर क्रूस के बाद हमारी लड़ाई का हथियार बदल चुका है, लक्ष्य नहीं। परमेश्वर अब भी वाचा निभाने वालों के पक्ष में मैदान में उतरते हैं, अब भी घबराहट भेजते हैं, पर उनकी विजय अब खून बहाने से नहीं, खून बहाए जाने से आती है।

दर्पण

यह आयत उस भरोसे पर उँगली रखती है जो हम चुपचाप अपनी ताकत, अपनी योजना, अपनी नौकरी की सुरक्षा पर टिकाते हैं। यहोशू के पास सेना थी, पर आयत कहती है कि पहले परमेश्वर ने शत्रुओं का मन घबरा दिया। हम अक्सर उल्टा जीते हैं: पहले खुद हिसाब लगाते हैं, फिर प्रार्थना को अंतिम सहारे की तरह जोड़ देते हैं। दूसरी ओर, यह आयत हमारे आराम पर भी चोट करती है। किसी ने आपसे वादा लिया है, शायद वह व्यक्ति भरोसेमंद भी नहीं, शायद उसने चालाकी से आपको बाँधा है, फिर भी वादा वादा है। रातभर चलना पड़ेगा। परिवार में, पैसों के लेनदेन में, दफ़्तर के उस सहकर्मी के साथ जिसने आपका फ़ायदा उठाया, वचन निभाना महँगा पड़ता है और परमेश्वर उसी महँगी वफ़ादारी के साथ खड़े होते हैं।

आज ही वह एक वादा लिखकर सामने रखिए जिसे आप टालते आ रहे हैं, और अगले दस मिनट में उस व्यक्ति को संदेश भेजकर तारीख तय कीजिए।

एक बारीकी

"तब यहोवा ने ऐसा किया कि वे इस्राएलियों से घबरा गए।" इस घबराहट पर रुकिए। शास्त्र में यह एक विशेष शब्द है, वह पवित्र आतंक जो परमेश्वर युद्ध में स्वयं भेजते हैं। इसका अर्थ है कि लड़ाई का निर्णायक मोड़ वहाँ आया जहाँ किसी इस्राएली की तलवार पहुँची भी नहीं थी, शत्रु के मन के भीतर। हार पहले भीतर होती है, फिर मैदान में दिखती है। यह हमारे लिए भी सच है, उल्टी दिशा में: जो लड़ाइयाँ आप हारते हैं, वे अक्सर घटना से पहले मन में हारी जा चुकी होती हैं। और जो साहस आपको मिलता है, वह भी आपकी बनावट का उत्पाद नहीं, आठवीं आयत के उस वाक्य का फल है, "उनसे मत डर, क्योंकि मैंने उनको तेरे हाथ में कर दिया है।"

कठिन प्रश्न

क्या परमेश्वर वाकई इस संहार के पीछे थे? आयत इसे छिपाती नहीं। हम इसे मीठा नहीं कर सकते, और ईमानदारी यही है कि यह हमें असहज करे। दो बातें कहना ज़रूरी है। पहली, यह एक विशेष समय की विशेष आज्ञा थी, कनान के न्याय की, न कि हर पीढ़ी के लिए हिंसा का लाइसेंस; बाइबल कहीं भी इसे दोहराने का आदेश नहीं देती। दूसरी, यह हमें याद दिलाता है कि पाप हल्की चीज़ नहीं है और परमेश्वर की पवित्रता कोई भावुक कोमलता नहीं। फिर भी एक गाँठ बची रहती है, और उसे खोलने का दिखावा करना बेईमानी होगी। हम उसे क्रूस के सामने रखकर खड़े रहते हैं, जहाँ वही न्याय स्वयं परमेश्वर पर गिरा।

पृष्ठभूमि

यह घटना कनान में इस्राएल के प्रवेश के शुरुआती वर्षों की है। यरीहो और आई गिर चुके हैं, और गिबोन ने संधि करके पाला बदल लिया है। उस समय कनान छोटे-छोटे नगर-राज्यों में बँटा था, हर नगर का अपना राजा और अपनी दीवारें। किसी बड़े नगर का पाला बदलना पूरे क्षेत्र की शक्ति-संतुलन को हिला देता था, इसीलिए पाँच राजा घबराकर एक हो गए। गिलगाल से गिबोन तक चढ़ाई लगभग तीस किलोमीटर की है, वह भी घाटी से पहाड़ की ओर। यहोशू ने वह रास्ता रातभर में तय किया। बेथोरोन की ढलान संकरी और पथरीली थी, भागती सेना के लिए मौत का जाल। यह भूगोल जानने के बाद ही समझ आता है कि यह जीत कितनी असंभव थी।

चिंतन

कौन सा वादा आपने ऐसे व्यक्ति से किया है जो उसका हकदार नहीं लगता, और आप उसे निभाने से बचने के लिए कौन से बहाने गढ़ते रहे हैं?

अपनी वर्तमान सबसे बड़ी चिंता के बारे में सोचिए: आप कहाँ अपनी योजना पर टिके हैं और कहाँ सचमुच परमेश्वर के मैदान में उतरने पर?

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Joshua 10:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यहोशू 10:10 का क्या अर्थ है?
पाँच राजाओं की सम्मिलित सेना गिबोन को घेरे खड़ी है, और रातोंरात चढ़ाई करके यहोशू अचानक उन पर टूट पड़ता है। इस आयत में जो होता है, उसका पहला कर्ता इस्राएल नहीं है: "तब यहोवा ने ऐसा किया कि वे इस्राएलियों से घबरा गए।" पहले घबराहट, फिर हार। इसके बाद इस्राएली गिबोन के पास उनका बड़ा संहार करते हैं, बेथोरोन की चढ़ाई पर पीछा करते हैं, और अजेका तथा मक्केदा तक मारते चले जाते हैं। एक ही वाक्य में परमेश्वर का काम और मनुष्य की तलवार इस तरह गुँथे हुए हैं कि उन्हें अलग करना असंभव है, और यही इस आयत का सबसे कठिन और सबसे महत्वपूर्ण पहलू है।
यहोशू 10:10 किस विषय में है?
यह आयत उस लंबी कहानी का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर एक देश देते हैं और साथ ही न्याय करते हैं। एमोरियों की पीढ़ियों का हिसाब यहाँ चुकता होता है, और वह हिसाब भयानक है। पर ध्यान दीजिए किस दिशा में यह सूत्र बढ़ता है: यहोशू के हाथ में तलवार है, उसी नाम के दूसरे व्यक्ति, यीशु, के हाथ में कीलें हैं। वहाँ शत्रु मारे जाते हैं; यहाँ शत्रुओं के लिए स्वयं को दे दिया जाता है। दोनों जगह परमेश्वर ही लड़ते हैं, दोनों जगह मनुष्य को चलना पड़ता है। पर क्रूस के बाद हमारी लड़ाई का हथियार बदल चुका है, लक्ष्य नहीं। परमेश्वर अब भी वाचा निभाने वालों के पक्ष में मैदान में उतरते हैं, अब भी घबराहट भेजते हैं, पर उनकी विजय अब खून बहाने से नहीं, खून बहाए जाने से आती है।
यहोशू 10:10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज ही वह एक वादा लिखकर सामने रखिए जिसे आप टालते आ रहे हैं, और अगले दस मिनट में उस व्यक्ति को संदेश भेजकर तारीख तय कीजिए।
यहोशू 10:10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
क्या परमेश्वर वाकई इस संहार के पीछे थे? आयत इसे छिपाती नहीं। हम इसे मीठा नहीं कर सकते, और ईमानदारी यही है कि यह हमें असहज करे। दो बातें कहना ज़रूरी है। पहली, यह एक विशेष समय की विशेष आज्ञा थी, कनान के न्याय की, न कि हर पीढ़ी के लिए हिंसा का लाइसेंस; बाइबल कहीं भी इसे दोहराने का आदेश नहीं देती। दूसरी, यह हमें याद दिलाता है कि पाप हल्की चीज़ नहीं है और परमेश्वर की पवित्रता कोई भावुक कोमलता नहीं। फिर भी एक गाँठ बची रहती है, और उसे खोलने का दिखावा करना बेईमानी होगी। हम उसे क्रूस के सामने रखकर खड़े रहते हैं, जहाँ वही न्याय स्वयं परमेश्वर पर गिरा।
यहोशू 10:10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
कौन सा वादा आपने ऐसे व्यक्ति से किया है जो उसका हकदार नहीं लगता, और आप उसे निभाने से बचने के लिए कौन से बहाने गढ़ते रहे हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Joshua 10 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 30

पिता, जो लड़ाइयाँ मेरे बस के बाहर हैं, वे तेरे हाथ में हैं। जैसे तूने अपने लोगों के आगे बढ़कर शहर दर शहर रास्ता खोला, वैसे ही मेरे डर और रुकावटों के बीच तू आगे चल। मुझे अपनी ताकत पर नहीं, तेरे साथ होने पर भरोसा करना सिखा।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 39

पिता, तेरे वचन के कुछ पन्ने मुझे कठिन लगते हैं, और मैं उन्हें पूरी तरह समझ नहीं पाता। फिर भी मैं जानता हूँ कि तू न्यायी है और तेरा हृदय भला है। मुझे सिखा कि पाप को हलके में न लूँ, और तेरी करुणा पर भरोसा रखते हुए चलता रहूँ।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 33

गेजेर के राजा होराम पर किसी ने हमला नहीं किया था। उसका शहर सुरक्षित था। पर वह दूसरे की लड़ाई में कूद पड़ा: "तब गेजेर के राजा होराम लाकीश की सहायता करने को आया।" और उसी में मिट गया।

किसकी तरफ खड़े होना है, यह चुनाव हम रोज़ करते हैं। कभी दोस्ती में, कभी डर में। पूछ तो लो, जिस ओर तुम दौड़ रहे हो, क्या परमेश्वर भी वहीं है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 5

पिता, धन्यवाद कि जब एमोरियों के पाँचों राजा अपनी-अपनी सेना समेत गिबोन के विरुद्ध छावनी डालकर लड़ने आए, तब भी तूने अपने लोगों से बंधी वाचा नहीं भूली। जब मेरे विरुद्ध भी कई बातें एक साथ उठ खड़ी होती हैं, धन्यवाद कि मैं अकेला नहीं छोड़ा जाता, तू मेरी पुकार सुनता है।

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