यहोशू 16
पाठ
यूसुफ की सन्तान के लिए चिट्ठी डालकर भूमि ठहराई जाती है: यरीहो के पास यरदन से लेकर पहाड़ी देश होते हुए बेतेल, लूज, बेथोरोन और गेजेर तक, और वहाँ से समुद्र तक। फिर एप्रैम के गोत्र की सीमाएँ अलग से गिनाई जाती हैं, और मनश्शे के भाग के भीतर भी कुछ नगर एप्रैमियों के लिए अलग किए जाते हैं। अध्याय का अन्त अचानक एक खटकने वाले वाक्य से होता है: गेजेर के कनानियों को एप्रैमियों ने नहीं निकाला, और वे "आज के दिन तक" उनके बीच बसे हुए हैं, बेगारी में दास के समान काम करते हुए।
मर्म
यह अध्याय पहली नज़र में सिर्फ़ नाप-जोख है, पर इसका धर्मशास्त्रीय वज़न भारी है। भूमि कमाई हुई सम्पत्ति नहीं, चिट्ठी से बँटा हुआ उपहार है। चिट्ठी का अर्थ है: कोई गोत्र अपनी ताक़त या सौदेबाज़ी से अपना हिस्सा नहीं छीनता, परमेश्वर बाँटते हैं। यह अनुग्रह का ठोस, मिट्टी वाला रूप है, वाचा का वचन नक़्शे पर उतरता हुआ। पर उसी साँस में पद 10 बताता है कि उपहार पाना और उपहार में पूरी तरह जीना दो अलग बातें हैं। एप्रैम को सब कुछ मिला, फिर भी उसने गेजेर के साथ समझौता कर लिया; कनानियों को निकालने के बजाय उन्हें कमाई का साधन बना लिया। आज्ञाकारिता की जगह सुविधा ने ले ली, और वह चुनाव इतिहास में जम गया।
सूत्र
बाइबल की बड़ी कहानी में भूमि केवल ज़मीन नहीं, सृष्टि का वह टुकड़ा है जहाँ परमेश्वर अपनी प्रजा के साथ बसना चाहते हैं; अदन का खोया हुआ विश्राम कनान में लौटता हुआ दिखाई देता है। इसीलिए यहोशू की सूचियाँ ऊबाऊ नहीं, वे वाचा की रसीदें हैं: जो वादा इब्राहीम से किया गया था, वह अब गाँवों और नदियों के नामों में गिना जा सकता है। पर अधूरा कब्ज़ा बताता है कि यह विश्राम अन्तिम नहीं। इब्रानियों 4:8 इसी ओर इशारा करता है, कि यदि यहोशू ने उन्हें विश्राम दिया होता तो आगे किसी और दिन की चर्चा न होती। एक दूसरा यहोशू, यीशु, वह राज्य लाते हैं जिसमें कोई गेजेर छूटा हुआ नहीं रहता।
दर्पण
हम में से अधिकांश परमेश्वर के विरुद्ध खुली बग़ावत नहीं करते; हम बस कुछ गेजेर छोड़ देते हैं। वह पुराना गुस्सा जो पिता के साथ हर फ़ोन कॉल में उभरता है, पर जिसे निपटाना बहुत थका देने वाला लगता है। वह आर्थिक समझौता जिससे धन्धा चलता रहता है। वह आदत जो देर रात अकेले में लौटती है। हम उसे नष्ट नहीं करते, हम उसे बेगारी में लगा देते हैं, सोचते हैं कि वह हमारे काम आएगी और क़ाबू में रहेगी। एप्रैम ने भी यही सोचा था। "आज के दिन तक" वाक्य ही चेतावनी है: जो छोड़ा गया, वह पीढ़ियों तक रहता है। आज एक काम कीजिए: काग़ज़ पर अपना "गेजेर" एक वाक्य में लिखिए और उसे ज़ोर से परमेश्वर के सामने बोलकर कहिए कि मैं इसे अपने अधिकार में नहीं रखूँगा।
संदर्भ
हम यहोशू की पुस्तक के उस हिस्से में हैं जहाँ लड़ाइयाँ पीछे छूट चुकी हैं और बँटवारा चल रहा है, लगभग तेरहवीं से बारहवीं शताब्दी ईसा पूर्व। यूसुफ के वंशज, एप्रैम और मनश्शे, मिस्र में उस व्यक्ति की सन्तान हैं जिसने पूरे परिवार को भूख से बचाया था; उनका वज़न बड़ा है और उनकी अपेक्षाएँ भी। उन्हें देश का उपजाऊ मध्य भाग मिलता है, वह पहाड़ी रीढ़ जहाँ आगे चलकर शीलो, शकेम और सामरिया बसेंगे। गेजेर अलग मामला है: पश्चिमी ढलान पर, व्यापार मार्ग पर बैठा हुआ एक मज़बूत कनानी किलेबन्द नगर, जिसे जीतना महँगा पड़ता। इसी आर्थिक और सामरिक दबाव में समझौता जन्म लेता है, और लेखक उसे छिपाता नहीं।
मुख्य पात्र
इस अध्याय में असली कर्ता परमेश्वर हैं, और उनका स्वभाव दो बातों में दिखता है। पहला, वे देने वाले हैं, और उनका देना अस्पष्ट नहीं: सीमाएँ नापी जाती हैं, नगर गिने जाते हैं, यहाँ तक कि मनश्शे के भीतर भी एप्रैम के लिए नगर "अलग किए गए"। अनुग्रह भावुक भावना नहीं, मापी हुई ज़मीन है। दूसरा, वे सत्य बोलने वाले हैं। परमेश्वर का वचन अपनी ही प्रजा की असफलता को रिकॉर्ड से नहीं मिटाता। कोई मानवीय राजकीय इतिहास अपने गोत्रों की हार इस तरह दर्ज नहीं करता। यही बाइबल की ईमानदारी है, और यही हमारी आशा भी: जो परमेश्वर हमारी कमज़ोरी को बिना सजावट के लिखते हैं, वे ही उसे बिना शर्त क्षमा भी कर सकते हैं।
बारीकी
ध्यान दीजिए कि कनानी मिटाए नहीं गए, वे "बेगारी में दास के समान काम करते हैं।" यह शब्द इस्राएल की अपनी कहानी से उठाया गया है: मिस्र में वे स्वयं यही थे, बेगार में पिसते हुए दास, जिनकी चीख़ सुनकर परमेश्वर उतर आए थे। अब, आज़ादी पाने के एक ही पीढ़ी बाद, वे दूसरों पर वही जुआ रख देते हैं। छुड़ाए गए लोग छुड़ाने वाले नहीं बनते, वे नए फ़िरौन बन जाते हैं। यह अध्याय की सबसे गहरी चोट है, और वह हम पर भी पड़ती है। अनुग्रह पाना अपने आप हमें अनुग्रह करने वाला नहीं बनाता; उसके लिए रोज़ याद रखना पड़ता है कि हम कहाँ से निकाले गए थे।
चिंतन
मेरे जीवन में वह कौन-सी बात है जिसे मैंने हराया नहीं, बल्कि अपने काम में लगा लिया है, और मैं उससे क्या लाभ उठा रहा हूँ?
जिन लोगों पर मेरा अधिकार है, घर में, काम पर, कलीसिया में, क्या मैं उनके साथ उस दया से पेश आता हूँ जो मुझे मिली है, या उस दबाव से जिससे मैं कभी बचाया गया था?
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Joshua 16 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यहोशू 16 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यहोशू 16 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Joshua 16 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, आपने यूसुफ की संतान की सीमा ठहराई, निचले बेथोरोन और गेजेर से होते हुए समुद्र तक। धन्यवाद कि आप आज भी मेरे जीवन की सीमाएँ अपने हाथ से खींचते हैं, हर मोड़ को जानते हैं, और जो भाग आपने मेरे लिए ठहराया है उसे कोई छीन नहीं सकता।
गेजेर के कनानी निकाले नहीं गए। एप्रैम ने उन्हें रहने दिया, "और उनके लिये बेगार करनेवाले दास बन गए हैं।" आज्ञा मानने से ज़्यादा आसान था उनसे फायदा उठाना। जो पाप हम पूरी तरह नहीं छोड़ते, वह चुपचाप हमारे घर में काम करता रहता है, और एक दिन मालिक बन बैठता है। तेरे भीतर कोई ऐसा कनानी बचा है, जिसे तूने उपयोगी समझकर रख लिया है?
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