न्यायियों 8
पाठ
तीन सौ थके हुए आदमी यरदन पार करते हैं, पीछा करते-करते चूर, और सुक्कोत तथा पनूएल के लोगों से बस रोटी माँगते हैं। दोनों नगर मना कर देते हैं, और गिदोन बदला लेने की धमकी देकर आगे बढ़ता है, जेबह और सल्मुन्ना को पकड़ता है, लौटकर सुक्कोत के पुरनियों को काँटों से सिखाता है और पनूएल का गुम्मट ढा देता है। अंत में वह राजा बनने से इनकार करता है, पर लूट का सोना माँगकर एक एपोद बनवाता है, जो पूरे इस्राएल के लिए फंदा बन जाता है।
मूल बात
यह अध्याय दिखाता है कि छुटकारा देनेवाला भी छुटकारा पाने की ज़रूरत रखता है। गिदोन के मुँह से सही धर्मशास्त्र निकलता है, "यहोवा ही तुम पर प्रभुता करेगा", पर उसके हाथ ठीक उसी क्षण लूट के सोने की ओर बढ़ जाते हैं। मुकुट ठुकराना और राजाओं का ख़ज़ाना अपने घर ले जाना, दोनों एक साथ चल सकते हैं। परमेश्वर की विजय असली थी; मिद्यान सचमुच दब गया। पर विजय आदमी को पवित्र नहीं बनाती। यहीं न्यायियों की पुस्तक का दर्द है: परमेश्वर बार-बार बचाते हैं, और बचाया हुआ इस्राएल बार-बार अपने बचानेवाले को अपना देवता बना लेता है। अनुग्रह ऊपर से आता है, आदमी की सफलता से नहीं उगता।
जोड़नेवाला सूत्र
गिदोन उस राजा की छाया है जो अभी नहीं आया। उसका इनकार सुनने में ईमानदार है, पर उसकी सत्तर बेटों वाली गृहस्थी, उसकी बहुत स्त्रियाँ और शेकेम में रखी रखैल एक दरबार की तस्वीर बनाते हैं, और अबीमेलेक नाम का अर्थ ही है "मेरा पिता राजा है"। इस्राएल को ऐसे राजा की भूख है जो लूट न बटोरे, और यह भूख शमूएल, शाऊल, दाऊद से होते हुए उस एक तक जाती है जिसने जंगल में सारे राज्यों की पेशकश ठुकरा दी और अपनी सेना को रोटी माँगने नहीं, रोटी बाँटने भेजा। जहाँ गिदोन ने भूखों के लिए बदला लिया, वहाँ मसीह ने भूखों के लिए अपने आप को तोड़ा।
आईना
सुक्कोत के लोग समझदार थे। मिद्यानी अब भी ताक़तवर थे, और अगर गिदोन हार जाता तो रोटी देनेवाले नगर को क़ीमत चुकानी पड़ती। जोखिम लेने से बेहतर है थोड़ा इंतज़ार कर लेना, यह हिसाब हम रोज़ लगाते हैं: उस सहकर्मी के पक्ष में तब बोलेंगे जब पता चल जाए कि हवा किधर बह रही है, उस रिश्तेदार की मदद तब करेंगे जब यक़ीन हो कि वह सँभल जाएगा, उस मंडली को तब देंगे जब अपना बजट सुरक्षित हो। पाठ इस सावधानी को समझदारी नहीं, विश्वासघात कहता है। और दूसरी ओर गिदोन का आईना भी है: क्या आपकी सफलता के बाद माँगा गया छोटा-सा "हक़" ही वह चीज़ है जो धीरे-धीरे आपके घर को खा जाएगी?
मुख्य पात्र
गिदोन इस अध्याय में थका हुआ आदमी है, और थकान उसकी सबसे ईमानदार पहचान है। जो आदमी अध्याय छह में डरकर दाख के कुंड में गेहूँ झाड़ रहा था, वह अब एप्रैमियों को कूटनीतिक जवाब देकर शांत कर देता है, पर अपने ही भाइयों की मौत का हिसाब चुकाने पर उतर आता है: "वे तो मेरे भाई, वरन् मेरे सहोदर भाई थे।" यह पवित्र युद्ध नहीं, ख़ून का बदला है। सबसे मार्मिक दृश्य वह है जब वह अपने लड़के यतेरे को तलवार थमाता है और लड़का डर जाता है। पिता बेटे को क्रूरता सिखाना चाहता है और असफल होता है। जो आदमी परमेश्वर की आवाज़ से शुरू हुआ था, वह अब अपनी ही इज़्ज़त की आवाज़ पर चल रहा है।
पहले सुननेवाले
न्यायियों की यह कहानी उन इस्राएलियों को सुनाई गई जो राजाओं के ज़माने में जी रहे थे और जानते थे कि सोना कैसे मंदिर में पहुँचता है। उनके कान "सत्तर बेटे", "बहुत स्त्रियाँ", "बैंगनी रंग के वस्त्र" और "ऊँटों के गलों की जंजीर" सुनते ही खड़े हो जाते थे: यह तो राजा का सामान है। बैंगनी रंग उस समय राजसी दर्जे की निशानी था, इतना महँगा कि आम आदमी उसे छू भी नहीं सकता था। वे यह भी जानते थे कि क़बीलों के बीच रोटी बाँटना केवल दया नहीं, वाचा का कर्तव्य था। सुक्कोत का इनकार उनके लिए भूख का नहीं, विश्वासघात का किस्सा था, और गिदोन का एपोद उन्हें अपने ही समय के मंदिरों की याद दिलाता था।
एक बारीकी
"एपोद" पर ठहरिए। मूल में यह याजक का वस्त्र है, वही जिस पर परमेश्वर की इच्छा जानने के लिए इस्राएल भरोसा करता था। गिदोन मूर्ति नहीं बनवाता; वह कुछ ऐसा बनवाता है जो धार्मिक रूप से पूरी तरह सही दिखता है। सत्रह सौ शेकेल सोना, यानी लगभग बीस किलो, ओप्रा में रखा गया, गिदोन के अपने गाँव में, न कि शीलो में जहाँ यहोवा का तम्बू था। यहीं फंदा छिपा है: पूजा का केंद्र परमेश्वर के ठहराए स्थान से हटकर उद्धारकर्ता के अपने आँगन में आ गया। पाठ कहता है कि सारा इस्राएल "व्यभिचारिणी के समान" उसके पीछे हो लिया, वही शब्द जो आगे बाल के लिए आता है। धर्म का सबसे ख़तरनाक रूप नकली देवता नहीं, सही चीज़ ग़लत जगह पर है।
चिंतन
आपके जीवन में कौन-सी "अच्छी" चीज़ धीरे-धीरे परमेश्वर की जगह के पास खिसक आई है, इतनी सम्मानित कि उस पर सवाल उठाना मुश्किल लगता है?
सुक्कोत ने रोटी रोक ली क्योंकि नतीजा अभी साफ़ नहीं था। आप किसकी मदद इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि उसका भविष्य अनिश्चित लगता है?
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
गिदोन की सारी लड़ाई के पीछे एक छिपा हुआ घाव था। सब कुछ खत्म होने पर वह पूछता है, "जो पुरुष तुमने ताबोर पर घात किए थे वे कैसे थे?" वे उसके अपने भाई थे। कभी कभी हमारी सबसे बड़ी लड़ाइयों की जड़ में कोई पुराना दर्द दबा होता है, जिसे हम परमेश्वर के काम का नाम देकर ढक देते हैं। तेरे भीतर क्या दबा है?
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