बाइबल व्याख्या

नीतिवचन 23

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

शासक की मेज़

अध्याय का पहला दृश्य ही चौंकाने वाला है। हाकिम के साथ भोजन पर बैठे हो? अच्छी बात है, पर सावधान। मेज़ पर जो परोसा गया है वह "धोखे का भोजन" है। यानी वह मुफ्त नहीं है, उसकी कीमत बाद में चुकानी पड़ेगी। इसके बाद पिता अपने बेटे को धन की दौड़, कंजूस मेज़बान, अनाथों की सीमा, बच्चों की ताड़ना, माता-पिता का आदर, वेश्या का जाल, और सबसे लम्बा, दाखमधु के नशे की तस्वीर तक ले जाता है। एक पिता अपने बेटे को असली दुनिया में जीने की समझ दे रहा है।

असली भूख कहाँ है

यह अध्याय शरीर की भूखों पर बहुत बात करता है, पेट, पैसा, यौन इच्छा, नशा। पर इसकी असली धार यह है, कि हर भूख के पीछे एक झूठ छिपा है। हाकिम की स्वादिष्ट थाली, धनी की चमक, वेश्या का आकर्षण, दाखमधु का लाल रंग, सब कुछ पहले सुन्दर दिखता है और अन्त में डसता है। "अन्त में वह सर्प के समान डसता है।" बुद्धि यहाँ केवल नैतिक नियम नहीं है, यह देखने की क्षमता है, कि जो चीज़ अभी मीठी लग रही है वह कहाँ ले जाएगी। परमेश्वर का भय, जो नीतिवचन की बुनियाद है, इसी दूरदृष्टि को जन्म देता है।

बड़ी कहानी में इसकी जगह

यह पिता का उपदेश उस बड़े परमेश्वर की छाया है जो अपने बच्चों को असली जीवन सिखाता है। पद 11 पर ठहरिए, अनाथों का "छुड़ानेवाला सामर्थी है।" यहाँ "छुड़ानेवाला" वही शब्द है जो पूरे पुराने नियम में परमेश्वर के लिए आता है, और जो अन्त में यीशु मसीह में पूरा होता है, जो दुर्बलों का पक्ष लेता है। और पद 23, "सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं।" यीशु ने कहा था कि सच्चाई हमें स्वतंत्र करती है। नीतिवचन का यह अध्याय हमें सिखाता है कि मसीह के चेले होने का अर्थ है, हर दिन छोटे-छोटे चुनावों में सच्चाई को खरीदते जाना, चाहे कीमत लगे।

आपकी मेज़, आपका बटुआ

अपने आप से पूछिए, आपकी "हाकिम की मेज़" क्या है? वह प्रमोशन जो आपके बॉस दे रहे हैं पर जिसकी शर्तें आप अभी नहीं जानते? वह क्लाइंट जो थोड़ी बेईमानी माँग रहा है? पद 4 सीधा वार करता है, "धनी होने के लिये परिश्रम न करना।" यह आलस्य का समर्थन नहीं है, यह उस पागल दौड़ की निंदा है जिसमें आज हर पेशेवर फँसा है। और पद 10, अनाथों की सीमा। आज इसका मतलब है, कमज़ोर सहकर्मी का श्रेय न लेना, नौकर की तनख्वाह न काटना, विधवा बहन की ज़मीन पर नज़र न रखना। पद 13-14, बच्चों की ताड़ना, आज के माता-पिता के लिए असहज है, पर मूल बात यह है, बच्चे को "न" सुनना सिखाना उसकी आत्मा को बचाना है। जो पिता कभी सीमा नहीं खींचता, वह वास्तव में प्रेम नहीं कर रहा।

पिता की चौपाल

यह अध्याय एक इस्राएली पिता की आवाज़ है, जो अपने युवा बेटे को उस दुनिया में भेज रहा है जहाँ शासक हैं, व्यापारी हैं, वेश्याएँ हैं, और शराबखाने हैं। प्राचीन निकट पूर्व में एक हाकिम के साथ भोजन करना सम्मान था, पर एक जाल भी, क्योंकि वहाँ आपसे राजनीतिक निष्ठा, गुप्त सूचना, या एहसान माँगा जा सकता था। पद 10 की "पुरानी सीमाएँ" वे पत्थर थे जो खेतों की सीमा तय करते थे, और उन्हें रात में हटाकर पड़ोसी की ज़मीन हड़प लेना आम अपराध था, खासकर अनाथ परिवारों के विरुद्ध जिनका कोई रक्षक न था। पद 29-35 का शराबी दृश्य नगर के फाटक पर बैठे बूढ़ों की देखी हुई सच्चाई है, जो युवाओं को बर्बाद होते देखते आए थे।

कठिन प्रश्न

पद 13-14 आज के पाठक को असहज करते हैं, "यदि तू उसको छड़ी से मारे, तो वह न मरेगा।" क्या यह हिंसा का समर्थन है? ईमानदारी से कहें, यह अध्याय शारीरिक ताड़ना को हल्के में नहीं लेता, वह उस समय का सामान्य तरीका था। पर मूल शब्द "छड़ी" चरवाहे की उस लाठी की भी है जो भेड़ों को रास्ता दिखाती है, भजन 23 वाली। ज़ोर मारने पर नहीं है, ज़ोर इस बात पर है कि प्रेम की सीमा-रेखा बच्चे की आत्मा को अधोलोक से बचाती है। जो पिता डर के मारे कभी सुधार नहीं करता, वह बच्चे को उसी नियति की ओर धकेल रहा है जिससे बचाना चाहता था। यह पद हमें सज़ा का नुस्खा नहीं देता, यह हमें ज़िम्मेदारी का बोझ देता है।

लाल रंग जो डसता है

पद 31 पर ठहरिए, "जब दाखमधु लाल दिखाई देता है, और कटोरे में उसका सुन्दर रंग होता है।" यहाँ पिता एक क्षण के लिए कवि बन जाता है। वह बेटे को शराब की बुराई की सूखी सूची नहीं देता, वह उसकी सुन्दरता का वर्णन करता है। क्यों? क्योंकि पाप को केवल कुरूप बताना बेईमानी है। पाप सुन्दर दिखता है, इसीलिए तो फँसाता है। बुद्धिमान पिता झूठ नहीं बोलता, वह कहता है, हाँ, यह लाल है, यह चमकता है, यह जीभ पर मीठा है, और यह सर्प है। यही ईमानदारी हमें हर प्रलोभन के सामने चाहिए, चाहे वह स्क्रीन पर हो, बटुए में हो, या मेज़ के पार बैठे व्यक्ति में। पहले उसकी सुन्दरता स्वीकार कीजिए, फिर उसके डंक को याद रखिए।

चिंतन

Proverbs में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

God's Wisdom for Navigating Life

Timothy Keller

A daily devotional that turns Proverbs into a year of practical wisdom.

Proverbs

Derek Kidner

Sorts the sayings into themes so the book's wisdom comes into focus.

Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.

यह व्याख्या साझा करें

सुसमाचार फैलाने में मदद करें। यह व्याख्या किसी ऐसे व्यक्ति को भेजें जिसे इससे प्रोत्साहन मिल सके।

WhatsApp Email Facebook X / Twitter

Proverbs 23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नीतिवचन 23 का क्या अर्थ है?
अध्याय का पहला दृश्य ही चौंकाने वाला है। हाकिम के साथ भोजन पर बैठे हो? अच्छी बात है, पर सावधान। मेज़ पर जो परोसा गया है वह "धोखे का भोजन" है। यानी वह मुफ्त नहीं है, उसकी कीमत बाद में चुकानी पड़ेगी। इसके बाद पिता अपने बेटे को धन की दौड़, कंजूस मेज़बान, अनाथों की सीमा, बच्चों की ताड़ना, माता-पिता का आदर, वेश्या का जाल, और सबसे लम्बा, दाखमधु के नशे की तस्वीर तक ले जाता है। एक पिता अपने बेटे को असली दुनिया में जीने की समझ दे रहा है।
नीतिवचन 23 किस विषय में है?
यह अध्याय शरीर की भूखों पर बहुत बात करता है, पेट, पैसा, यौन इच्छा, नशा। पर इसकी असली धार यह है, कि हर भूख के पीछे एक झूठ छिपा है। हाकिम की स्वादिष्ट थाली, धनी की चमक, वेश्या का आकर्षण, दाखमधु का लाल रंग, सब कुछ पहले सुन्दर दिखता है और अन्त में डसता है। "अन्त में वह सर्प के समान डसता है।" बुद्धि यहाँ केवल नैतिक नियम नहीं है, यह देखने की क्षमता है, कि जो चीज़ अभी मीठी लग रही है वह कहाँ ले जाएगी। परमेश्वर का भय, जो नीतिवचन की बुनियाद है, इसी दूरदृष्टि को जन्म देता है।
नीतिवचन 23 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह पिता का उपदेश उस बड़े परमेश्वर की छाया है जो अपने बच्चों को असली जीवन सिखाता है। पद 11 पर ठहरिए, अनाथों का "छुड़ानेवाला सामर्थी है।" यहाँ "छुड़ानेवाला" वही शब्द है जो पूरे पुराने नियम में परमेश्वर के लिए आता है, और जो अन्त में यीशु मसीह में पूरा होता है, जो दुर्बलों का पक्ष लेता है। और पद 23, "सच्चाई को मोल लेना, बेचना नहीं।" यीशु ने कहा था कि सच्चाई हमें स्वतंत्र करती है। नीतिवचन का यह अध्याय हमें सिखाता है कि मसीह के चेले होने का अर्थ है, हर दिन छोटे-छोटे चुनावों में सच्चाई को खरीदते जाना, चाहे कीमत लगे।
नीतिवचन 23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
अपने आप से पूछिए, आपकी "हाकिम की मेज़" क्या है? वह प्रमोशन जो आपके बॉस दे रहे हैं पर जिसकी शर्तें आप अभी नहीं जानते? वह क्लाइंट जो थोड़ी बेईमानी माँग रहा है? पद 4 सीधा वार करता है, "धनी होने के लिये परिश्रम न करना।" यह आलस्य का समर्थन नहीं है, यह उस पागल दौड़ की निंदा है जिसमें आज हर पेशेवर फँसा है। और पद 10, अनाथों की सीमा। आज इसका मतलब है, कमज़ोर सहकर्मी का श्रेय न लेना, नौकर की तनख्वाह न काटना, विधवा बहन की ज़मीन पर नज़र न रखना। पद 13-14, बच्चों की ताड़ना, आज के माता-पिता के लिए असहज है, पर मूल बात यह है, बच्चे को "न" सुनना सिखाना उसकी आत्मा को बचाना है। जो पिता कभी सीमा नहीं खींचता, वह वास्तव में प्रेम नहीं कर रहा।
नीतिवचन 23 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
यह अध्याय एक इस्राएली पिता की आवाज़ है, जो अपने युवा बेटे को उस दुनिया में भेज रहा है जहाँ शासक हैं, व्यापारी हैं, वेश्याएँ हैं, और शराबखाने हैं। प्राचीन निकट पूर्व में एक हाकिम के साथ भोजन करना सम्मान था, पर एक जाल भी, क्योंकि वहाँ आपसे राजनीतिक निष्ठा, गुप्त सूचना, या एहसान माँगा जा सकता था। पद 10 की "पुरानी सीमाएँ" वे पत्थर थे जो खेतों की सीमा तय करते थे, और उन्हें रात में हटाकर पड़ोसी की ज़मीन हड़प लेना आम अपराध था, खासकर अनाथ परिवारों के विरुद्ध जिनका कोई रक्षक न था। पद 29-35 का शराबी दृश्य नगर के फाटक पर बैठे बूढ़ों की देखी हुई सच्चाई है, जो युवाओं को बर्बाद होते देखते आए थे।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Proverbs 23 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

तू पापियों के विषय मन में डाह न करना, परन्तु दिन भर यहोवा का भय मानते रहना।"

ध्यान दे, जलन का इलाज यहाँ "और मेहनत कर" नहीं, बल्कि "दिन भर" परमेश्वर का भय मानना है। क्योंकि डाह सुबह की एक सोच से शुरू होती है और शाम तक पूरे मन पर कब्ज़ा कर लेती है।

जिसके सामने तू हर घंटे जीता है, वही तय करता है कि तू किसे देखकर कुढ़ेगा।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 28

पिता, कुछ फंदे रास्ते में छिपकर मेरा इंतज़ार करते हैं, और मैं अक्सर देर से पहचानता हूँ। मेरी आँखें खोल, मेरे मन को सावधान कर। मुझे वहाँ से दूर रख जहाँ मेरा भरोसा टूट सकता है, और मुझे अपने रिश्तों में सच्चा और वफ़ादार बना रह।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 13

पिता, मुझे अपने बच्चों से ऐसा प्यार करना सिखा जो सिर्फ़ हाँ कहना न जाने, बल्कि सही समय पर रोकना और सुधारना भी जाने। मेरे सुधार में गुस्सा नहीं, कोमलता हो। और जब मैं थक जाऊँ, तो तेरी बुद्धि मेरा सहारा बने।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

जब तेरे मुँह से सीधी बातें निकलेंगी, तब मेरा अन्तःकरण मगन होगा।" पिता यहाँ बेटे की कमाई या नाम की बात नहीं कर रहा। उसकी खुशी इस बात में है कि बेटे के होंठों से सच निकले। सोचो, तुम्हारी कही एक सच्ची बात किसी के भीतर तक आनन्द पहुँचा सकती है। और परमेश्वर भी तो पिता है। आज तुम्हारी बातें उसके मन को क्या दे रही हैं?

इस अंश को किसी और स्तर पर देखें

शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।

अध्ययन टूल में खोलें