भजन संहिता 25:14
पाठ
भजन के बीचोंबीच एक वाक्य ऐसा आता है जो लगभग फुसफुसाहट जैसा है: "यहोवा के भेद को वही जानते हैं जो उससे डरते हैं, और वह अपनी वाचा उन पर प्रगट करेगा।" दाऊद यहाँ न कुछ माँग रहा है, न शिकायत कर रहा है; वह एक बात बता रहा है जो उसने जान ली है। परमेश्वर के पास एक ऐसा भेद है जो सबके सामने खुला नहीं पड़ा, और वह भेद उन्हें मिलता है जो उनसे डरते हैं। और इसके साथ ही एक दूसरी बात जुड़ी है: वे अपनी वाचा, अपना ठहराया हुआ सम्बन्ध, ऐसे लोगों पर प्रगट करते हैं। जानना और प्रगट किया जाना, दोनों एक ही साँस में कहे गए हैं।
मर्म
यह पद परमेश्वर को केवल शासक के रूप में नहीं, बल्कि ऐसे व्यक्ति के रूप में दिखाता है जो अपने मन की बात किसी से साझा करते हैं। आज्ञाएँ वे सबको देते हैं, पर भेद वे हर किसी को नहीं बताते। और यहाँ चौंकाने वाली बात यह है कि इस भीतरी घेरे में प्रवेश बुद्धि, पद या धार्मिक उपलब्धि से नहीं मिलता, बल्कि भय से। वही भय जिसे हम दूरी समझते हैं, यहाँ निकटता का द्वार बन जाता है। जो परमेश्वर को हल्के में नहीं लेता, जो उनके सामने अपने को छोटा मानता है, उसी के सामने वे अपना हृदय खोलते हैं। यह अनुग्रह है, पर सस्ता अनुग्रह नहीं: परमेश्वर उन्हें अपने पास बैठाते हैं जो उनके होने के भार को महसूस करते हैं।
सूत्र
पुराने नियम में परमेश्वर बार-बार अपनी वाचा को खुले में रखते हैं: पत्थर की पट्टियाँ, गवाह, शर्तें। फिर भी यह पद कहता है कि वाचा का एक पहलू ऐसा है जो "प्रगट" किया जाना पड़ता है, जैसे किसी को अंदर बुलाकर बताया जाए। यही धागा नए नियम तक खिंचता है। पौलुस इफिसियों में लिखते हैं कि परमेश्वर ने अपनी इच्छा का भेद हमें बता दिया, और वह भेद कोई सिद्धांत नहीं, एक व्यक्ति है, मसीह। और यीशु स्वयं अपने चेलों से कहते हैं कि वे अब उन्हें दास नहीं, मित्र कहते हैं, क्योंकि जो कुछ उन्होंने पिता से सुना, वह उन्हें बता दिया। भजन 25:14 का फुसफुसाया हुआ वादा वहाँ ऊँची आवाज़ में पूरा होता है: परमेश्वर की भीतरी मंडली का दरवाज़ा क्रूस के रास्ते खुलता है, और भीतर बैठा हुआ व्यक्ति हमें नाम से जानता है।
दर्पण
हम अक्सर परमेश्वर से भेद नहीं, जानकारी चाहते हैं। यह नौकरी लूँ या नहीं, इस रिश्ते का क्या होगा, बच्चा जो रास्ता चुन रहा है वह कहाँ ले जाएगा, रिपोर्ट में क्या निकलेगा। हम प्रार्थना को एक पूछताछ खिड़की बना लेते हैं और फिर शिकायत करते हैं कि खिड़की के पीछे कोई बैठा नहीं है। पर यह पद कहता है कि परमेश्वर पहले उत्तर नहीं, सम्बन्ध देते हैं। भय का अर्थ यहाँ डरकर पीछे हटना नहीं, बल्कि यह मान लेना कि वे परमेश्वर हैं और मैं नहीं; कि मेरी योजना उनकी सलाह से बड़ी नहीं। जब तक हम उन्हें अपनी ज़रूरतों का साधन समझते हैं, भेद बंद रहता है, इसलिए नहीं कि वे कंजूस हैं, बल्कि इसलिए कि साधन को कोई मन की बात नहीं बताता।
आज शाम फोन दूसरे कमरे में रखकर पाँच मिनट चुपचाप बैठिए और परमेश्वर से केवल इतना कहिए: "उत्तर देने से पहले मुझे आपका आदर करना सिखाइए।" फिर चुप रहिए।
श्रोता
जो लोग यह भजन पहली बार गाते थे, वे शत्रुओं से घिरे, लज्जा के डर से भरे लोग थे। उस संस्कृति में शत्रु के सामने लज्जित होना केवल भावना नहीं, सामाजिक मृत्यु थी; इसीलिए दाऊद बार-बार कहते हैं "मुझे लज्जित न होने दे"। ऐसे लोगों के लिए यह पद एक अजीब सांत्वना था: तुम्हारे पास सुरक्षा भले न हो, पर परमेश्वर के भीतरी घेरे में जगह है। राजाओं की सभा उन्हें जानी-पहचानी थी; वहाँ निर्णय बंद दरवाज़ों के पीछे होते थे और साधारण जन केवल परिणाम देखते थे। यह भजन कहता है कि स्वर्ग के राजा की सभा में नम्र लोग बैठाए जाते हैं। जिनके पास दरबार में कोई पहुँच नहीं थी, उनके पास सबसे ऊँचे दरबार की पहुँच थी।
एक बारीकी
जिस शब्द का अनुवाद "भेद" हुआ है, वह इब्रानी में सोद है, और उसका पहला अर्थ "गुप्त बात" नहीं बल्कि "घनिष्ठ मंडली" है, वह मंडली जहाँ सलाह की जाती है, जहाँ मित्र सिर जोड़कर बैठते हैं। भविष्यद्वक्ताओं के बारे में कहा जाता था कि वे परमेश्वर की सोद में खड़े होते हैं। इसका मतलब यह है कि दाऊद यहाँ किसी छिपी सूचना का वादा नहीं कर रहे, बल्कि एक कुर्सी का। भेद जानना यानी उस कमरे में होना जहाँ परमेश्वर बोलते हैं। और यही कारण है कि अगली पंक्ति वाचा की बात करती है: कमरे में बैठने वाले को दस्तावेज़ पढ़कर नहीं, बल्कि लिखने वाले के मुँह से सुनकर पता चलता है कि उसका मन क्या है।
पृष्ठभूमि
यह भजन इब्रानी वर्णमाला के क्रम में रचा गया है, अक्षर दर अक्षर, मानो कोई अपनी पूरी परेशानी को सिलसिलेवार परमेश्वर के सामने रख रहा हो। दाऊद अकेले हैं और पीड़ित, शत्रु बढ़ गए हैं, जवानी के पाप पीछा कर रहे हैं, और मन का क्लेश फैलता जा रहा है। इसी उथल-पुथल के ठीक बीच में, पद तेरह और पंद्रह के बीच, यह शांत घोषणा रखी गई है। यह किसी शांत मठ में नहीं, बल्कि जाल और घात के बीच लिखी गई पंक्ति है। और भजन का अंत निजी नहीं रहता: "हे परमेश्वर इस्राएल को उसके सारे संकटों से छुड़ा ले।" एक आदमी की फुसफुसाहट पूरे समुदाय की प्रार्थना बन जाती है।
चिंतन
आप परमेश्वर से जो सबसे ज़्यादा पूछते हैं, क्या वह उनका उत्तर है या उनकी उपस्थिति? इन दोनों में फर्क आपके जीवन में कहाँ दिखाई देता है?
"भय" शब्द सुनकर आपके भीतर पहली प्रतिक्रिया क्या उठती है, और यह पद उस प्रतिक्रिया को कहाँ चुनौती देता है?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
Psalms 25:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
भजन संहिता 25:14 का क्या अर्थ है?
भजन संहिता 25:14 किस विषय में है?
भजन संहिता 25:14 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
भजन संहिता 25:14 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
भजन संहिता 25:14 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Psalms 25 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें