जकर्याह 11
पाठ
चरवाहे बिना छोड़ी गई भेड़ों का यह अध्याय आग से शुरू होता है: लबानोन के देवदार, बाशान के बांजवृक्ष, यरदन का घना वन, सब भस्म। फिर परमेश्वर भविष्यद्वक्ता को एक अजीब भूमिका देते हैं: "घात होनेवाली भेड़-बकरियों का चरवाहा हो जा।" वह दो लाठियाँ लेता है, एक का नाम अनुग्रह और दूसरी का एकता, और भेड़ों को चराता है, परन्तु वे उससे घृणा करती हैं। मजदूरी में उसे चाँदी के तीस टुकड़े तौल दिए जाते हैं, वह उन्हें कुम्हार के आगे फेंक देता है, दोनों लाठियाँ तोड़ता है, और अन्त में परमेश्वर उस देश पर एक मूर्ख चरवाहा ठहराते हैं जो भेड़ों को खा जाएगा।
मर्म
यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर का सबसे भारी दण्ड आग नहीं, अकाल नहीं, तलवार भी नहीं है। सबसे भारी दण्ड यह है कि वे अच्छा चरवाहा वापस ले लें और बुरा चरवाहा दे दें। "मैं तुम को न चराऊँगा" इस पुस्तक का सबसे डरावना वाक्य है। हम सोचते हैं कि न्याय बाहर से आता है, परन्तु यहाँ न्याय भीतर से आता है: वही नेतृत्व जो लोग चाहते थे, वही उनका दण्ड बन जाता है। और ध्यान दीजिए कि जो लाठी टूटती है उसका नाम अनुग्रह है। अनुग्रह कोई ऐसी चीज़ नहीं जो अपने आप बहती रहती है; वह एक जीवित हाथ में पकड़ी हुई लाठी है, और वह हाथ खींचा भी जा सकता है। जिस अनुग्रह को हम अपना अधिकार समझ बैठते हैं, वही सबसे नाज़ुक होता है।
सूत्र
मत्ती ने इस अध्याय को अनदेखा नहीं किया। चाँदी के तीस टुकड़े, वह तुच्छ दाम जिस पर परमेश्वर के चरवाहे का मूल्य आँका गया, यहूदा के हाथ में फिर आते हैं, और वही चाँदी फिर मन्दिर में फेंकी जाती है और कुम्हार के खेत में बदल जाती है। यह संयोग नहीं, यह प्रतिरूप है। इस्राएल का इतिहास बार-बार एक ही बिन्दु पर आता है: परमेश्वर चरवाहा भेजते हैं, भेड़ें उसे ठुकराती हैं, दाम तौल देती हैं। परन्तु जकर्याह में लाठी टूटती है और कहानी वहीं रुक जाती है; सुसमाचार में चरवाहा स्वयं टूटता है और भेड़ें बच जाती हैं। यीशु मसीह वह चरवाहा हैं जो अनुग्रह की लाठी तोड़ने के बजाय अपना प्राण देते हैं, और जो यहूदा और इस्राएल की टूटी हुई एकता को अपने शरीर में जोड़ते हैं।
दर्पण
पद पाँच पर रुकिए: बेचनेवाले कहते हैं, "यहोवा धन्य है, हम धनी हो गए हैं।" यह धर्म और लालच का सबसे सहज मिश्रण है, और यह हमें भी छूता है। जब सौदा हमारे पक्ष में जाता है, हम उसे आशीष कहते हैं, चाहे उसमें कोई पिस गया हो। जब अपने विभाग में, अपने व्यवसाय में, अपने परिवार में हम किसी कमज़ोर को अपनी सुविधा के लिए इस्तेमाल करते हैं और फिर परमेश्वर को धन्यवाद देते हैं, हम इन बेचनेवालों की पंक्ति में खड़े हैं। और अगर आप अगुवा हैं, छोटे समूह के, कक्षा के, घर के, तो पद सोलह आपके लिए है: खोई हुई को न ढूँढ़ना भी हिंसा है। आज ही उस एक व्यक्ति का नाम लिखिए जो आपकी देखरेख में था और चुपचाप गायब हो गया, और उसे दस मिनट के भीतर एक संदेश भेजिए।
श्रोता
जकर्याह के सुननेवाले लौटे हुए बन्दी थे, थोड़े से लोग, टूटी दीवारों वाले यरूशलेम में, फारसी साम्राज्य के अधीन, अपने ही याजकों और रईसों के हाथों में। उनके कानों में "चरवाहा" शब्द राजनीतिक था; राजा और याजक चरवाहे कहलाते थे। इसलिए जब उन्होंने सुना कि तीन चरवाहे एक महीने में नष्ट हो गए और अन्त में एक मूर्ख चरवाहा ठहराया जाएगा, तो उन्होंने अपने ही नेताओं के चेहरे देखे। और भेड़ों का "घात होनेवाली" कहलाना उन्हें चुभा होगा, क्योंकि वे स्वयं को छुड़ाई हुई भेड़ें समझ रहे थे। यह भविष्यद्वाणी उनकी वापसी के उत्साह पर ठंडा पानी डालती है: लौट आना पर्याप्त नहीं, चरवाहे को सुनना पड़ेगा।
प्रसंग
यह मन्दिर के पुनर्निर्माण के बाद का समय है, ईसा पूर्व छठी सदी का अन्त या उसके कुछ दशक बाद। बाहर की महाशक्तियाँ बदल रही हैं, और भीतर धनी और दीन के बीच खाई गहरी हो रही है। अध्याय की शुरुआत उत्तर से होती है, लबानोन और बाशान से, यानी उस रास्ते से जिससे आक्रमणकारी सेनाएँ हमेशा आती थीं। देवदार और बांजवृक्ष सिर्फ़ पेड़ नहीं, वे शक्ति और अभिमान के प्रतीक थे, राजमहलों की लकड़ी। यरदन के किनारे का घना वन सिंहों का ठिकाना था; जब वह जलता है, तो सिंह भी गरजते हैं। यह चित्र स्पष्ट है: ऊँचाई से नीचे तक, राजा से जंगली जानवर तक, कोई सुरक्षित नहीं जब चरवाहा हट जाता है।
प्रश्न
सबसे कठिन बात पद छह है: "मैं इस देश के रहनेवालों पर फिर दया न करूँगा।" क्या परमेश्वर की दया की कोई सीमा है? पवित्रशास्त्र इसे मीठा नहीं करता। यहाँ परमेश्वर स्वयं लोगों को एक दूसरे के हाथ में पकड़वा देते हैं, और यह मनमानी क्रूरता नहीं, बल्कि लगातार ठुकराए गए अनुग्रह का स्वाभाविक परिणाम है। फिर भी एक दरार खुली रह जाती है: पद ग्यारह में "दीन भेड़-बकरियाँ जो मुझे ताकती थीं" पहचान लेती हैं कि यह यहोवा का वचन है। जो ताकते रहते हैं, वे न्याय के बीचोंबीच भी परमेश्वर को पहचानते हैं। यह सस्ती राहत नहीं है, क्योंकि लाठी फिर भी टूटती है। परन्तु यह इशारा है कि टूटी लाठी के पीछे भी वही हाथ है जो एक दिन क्रूस थामेगा।
चिन्तन
आपके जीवन में अनुग्रह की कौन सी लाठी है जिसे आपने अपना अधिकार मान लिया है, और उसे उपहार मानने से क्या बदलेगा?
जिन लोगों की ज़िम्मेदारी आपको सौंपी गई है, उनमें से कौन "खोई हुई" है, और आपकी चुप्पी उसके लिए क्या कह रही है?
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इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
हे लबानोन, अपने फाटक खोल दे, कि आग तेरे देवदारों को भस्म करे।" फाटक खोलना आमतौर पर मेहमान के लिए होता है, पर यहाँ आग के लिए। लबानोन के देवदार ऊँचाई और मजबूती की निशानी थे, फिर भी वे बचा नहीं सके।
तेरे जीवन में भी कोई ऐसी ऊँचाई है जिस पर तू भरोसा करता है? पूछ ले, वह आग के सामने टिकेगी या नहीं।
हाय उस निकम्मे चरवाहे पर!" जिसकी सज़ा उसकी बाँह और दाहिनी आँख पर आती है। ठीक वही दो चीज़ें, जिनकी एक चरवाहे को सबसे ज़्यादा ज़रूरत होती है: बचाने का बल और देखने की नज़र। जो शक्ति दूसरों के लिए काम में नहीं आती, वह सूख जाती है। तुम्हारे हाथ में परमेश्वर ने किसे सौंपा है? उसकी ओर देखना बंद न करो।
पिता, धन्यवाद कि जब "देवदार गिर गया है" तब भी आप अटल खड़े हैं। धन्यवाद कि आप हमारे घमंड के ऊँचे वृक्षों को समय रहते चेतावनी देते हैं, ताकि हम अपनी ऊँचाई पर नहीं, बल्कि आप पर भरोसा रखना सीखें। हमारी सुरक्षा बाशान के बांजवृक्षों में नहीं, आपके हाथों में है।
पिता, धन्यवाद कि आप उस निकम्मे चरवाहे जैसे नहीं हैं। आप बिछड़ों को ढूँढ़ते हैं, घायलों को चंगा करते हैं और अपने झुंड को खिलाते हैं। धन्यवाद कि मेरी सुधि लेने वाला कोई है, और आपकी छड़ी मुझे डराने नहीं, संभालने के लिए है।
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