बाइबल व्याख्या

जकर्याह 8

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

यरूशलेम, जो कभी उजाड़ पड़ा था, फिर से ऐसा नगर बनेगा जहाँ बूढ़े लाठी लिए चौकों में बैठेंगे और बच्चे खेलते हुए दिखेंगे। परमेश्वर अपनी प्रजा को पूरब और पश्चिम से लौटा लाएँगे, उपवास के दिन उत्सव में बदलेंगे, और अन्य जातियाँ भी एक यहूदी के वस्त्र की छोर पकड़कर कहेंगी, "हम तुम्हारे संग चलेंगे, क्योंकि हमने सुना है कि परमेश्वर तुम्हारे साथ है।" इन सब के बीच परमेश्वर अपनी प्रजा से एक बात माँगते हैं: सत्य बोलो, सच्चा न्याय करो, एक दूसरे की हानि की कल्पना मत करो।

मर्म

यह अध्याय एक ऐसे परमेश्वर को दिखाता है जो अपनी प्रजा के लिए "जलजलाहट" रखते हैं। शब्द तीखा है: यह कोई ठंडी करुणा नहीं, यह जलनेवाला प्रेम है। और इसी प्रेम की तह में एक बात छिपी है, जिसे पद 6 सीधे कहता है: "चाहे उन दिनों में यह बात इन बचे हुओं की दृष्टि में अनोखी ठहरे, परन्तु क्या मेरी दृष्टि में भी यह अनोखी ठहरेगी?" यहाँ परमेश्वर की परिभाषा बदलती है। हम जो असंभव मानकर छोड़ चुके हैं, उनके लिए वह "अनोखा" भी नहीं। पुनर्स्थापना उनकी सामर्थ्य के लिए मामूली बात है, पर हमारी कल्पना के लिए हमेशा असंभव लगती है।

प्रवाह

यह वादा एक बंधुआई के बाद खड़ी हुई थकी हुई प्रजा से किया जा रहा है, पर इसकी परछाईं दूर तक जाती है। पद 23 का दृश्य, जिसमें दस अन्यजाति एक यहूदी की छोर पकड़ते हैं, नए नियम में पूरा होता दिखता है, जहाँ यीशु मसीह के द्वारा हर जाति के लोग परमेश्वर के लोगों में सम्मिलित होते हैं। और पद 8 का वादा, "वे मेरी प्रजा ठहरेंगे और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा", वही वाचा-सूत्र है जो प्रकाशितवाक्य के अंत तक गूँजता है। जो यरूशलेम जकर्याह देखता है, वह पत्थर के नगर से कहीं बड़ा है, वह एक ऐसी दुनिया की झलक है जहाँ बच्चे बिना डर के खेलते हैं।

दर्पण

रुककर पद 4 और 5 पर ठहरिए। बूढ़े चौकों में बैठे हैं। बच्चे सड़कों पर खेल रहे हैं। यह परमेश्वर की भलाई की तस्वीर है, न कोई मंदिर का वैभव, न सेना की जीत। बस साधारण जीवन, बिना डर के। यह छवि आप पर उँगली रखती है: आपका डर क्या इतना बड़ा हो चुका है कि आप ऐसे "साधारण" वादों पर हँसने लगे हैं? "मेरी नौकरी का क्या होगा, मेरे बच्चे किस दुनिया में बड़े होंगे, मेरी बीमारी कब जाएगी" — इन सवालों के बीच पद 6 आपकी ओर मुड़ता है। जिसे आप अनोखा, अविश्वसनीय, "अब बहुत देर हो चुकी" मान चुके हैं, परमेश्वर उसे मामूली कहते हैं। और फिर पद 13 चुभता है: "तुम्हारे हाथ ढीले पड़ने न पाएँ।" यानी, परमेश्वर जानते हैं कि आपके हाथ ढीले पड़ चुके हैं। थकान असली है। पर वादा भी असली है।

प्रश्न

पद 14 और 15 एक कठिन बात कहते हैं। परमेश्वर स्वीकार करते हैं कि पहले उन्होंने "हानि करने की ठान ली थी और फिर न पछताया।" जो प्रजा बंधुआई में गई, उसे परमेश्वर ने भेजा था। अब वही परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने "भलाई करने की ठान ली है।" प्रश्न उठता है: क्या परमेश्वर बदलते हैं? क्या उनका मन पलटता है? यहाँ आसान उत्तर देना बेईमानी होगी। पाठ यह नहीं कहता कि परमेश्वर ने गलती मानी। पाठ यह कहता है कि उनका न्याय जितना पक्का था, उनकी करुणा उतनी ही पक्की है। दोनों उनके एक ही चरित्र से निकलते हैं। यह रहस्य पूरी तरह सुलझता नहीं, पर यह भरोसा देता है: उनकी भलाई का इरादा भी उतना ही अटल है जितना कभी उनका दंड था।

अंतर्पाठ

पद 16 का आदेश, "एक दूसरे के साथ सत्य बोला करना", सीधे इफिसियों 4:25 में उठाया गया है, जहाँ पौलुस मसीह में नई मानवता के लिए यही आधार रखता है। यह संयोग नहीं। जकर्याह की पुनर्स्थापित प्रजा और पौलुस की कलीसिया, दोनों को एक ही चीज़ बनाती है: सच्चाई, जो झूठ की सस्ती शांति से इंकार करती है। और पद 23 का दृश्य यशायाह 2 की उस पहाड़ी को याद कराता है जहाँ सब जातियाँ बहकर आती हैं। बाइबल की कहानी हमेशा बाहर की ओर फैलती है, कभी सिकुड़ती नहीं।

पृष्ठभूमि

यह लगभग 518 ईसा पूर्व है। बंधुआई से लौटी प्रजा को अठारह वर्ष हो चुके हैं। मंदिर की नींव पड़ी है, पर काम अटका हुआ है। पद 10 इस माहौल का सच्चा चित्र देता है: मजदूरी नहीं मिलती, यात्रा असुरक्षित है, पड़ोसियों में लड़ाई है। लोग जो कल्पना करके लौटे थे, वह टूट चुकी है। यरूशलेम अभी भी खंडहर जैसा है, चौकों में न बूढ़े हैं, न खेलते बच्चे। इसी थकी हुई, निराश, संदेह से भरी भीड़ के बीच जकर्याह खड़ा होकर कहता है: परमेश्वर लौट आए हैं। पद 3 का "मैं सिय्योन में लौट आया हूँ" उन कानों के लिए है जो सोच चुके थे कि परमेश्वर उन्हें भूल गए।

चिंतन

*पद 6 आपसे पूछता है: आपने अपने जीवन की कौन-सी बात "अब असंभ

Zechariah में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Zechariah

Barry Webb

Night visions and the coming King, patiently explained.

Haggai, Zechariah

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Zechariah 8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

जकर्याह 8 का क्या अर्थ है?
यरूशलेम, जो कभी उजाड़ पड़ा था, फिर से ऐसा नगर बनेगा जहाँ बूढ़े लाठी लिए चौकों में बैठेंगे और बच्चे खेलते हुए दिखेंगे। परमेश्वर अपनी प्रजा को पूरब और पश्चिम से लौटा लाएँगे, उपवास के दिन उत्सव में बदलेंगे, और अन्य जातियाँ भी एक यहूदी के वस्त्र की छोर पकड़कर कहेंगी, "हम तुम्हारे संग चलेंगे, क्योंकि हमने सुना है कि परमेश्वर तुम्हारे साथ है।" इन सब के बीच परमेश्वर अपनी प्रजा से एक बात माँगते हैं: सत्य बोलो, सच्चा न्याय करो, एक दूसरे की हानि की कल्पना मत करो।
जकर्याह 8 किस विषय में है?
यह अध्याय एक ऐसे परमेश्वर को दिखाता है जो अपनी प्रजा के लिए "जलजलाहट" रखते हैं। शब्द तीखा है: यह कोई ठंडी करुणा नहीं, यह जलनेवाला प्रेम है। और इसी प्रेम की तह में एक बात छिपी है, जिसे पद 6 सीधे कहता है: "चाहे उन दिनों में यह बात इन बचे हुओं की दृष्टि में अनोखी ठहरे, परन्तु क्या मेरी दृष्टि में भी यह अनोखी ठहरेगी?
जकर्याह 8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह वादा एक बंधुआई के बाद खड़ी हुई थकी हुई प्रजा से किया जा रहा है, पर इसकी परछाईं दूर तक जाती है। पद 23 का दृश्य, जिसमें दस अन्यजाति एक यहूदी की छोर पकड़ते हैं, नए नियम में पूरा होता दिखता है, जहाँ यीशु मसीह के द्वारा हर जाति के लोग परमेश्वर के लोगों में सम्मिलित होते हैं। और पद 8 का वादा, "वे मेरी प्रजा ठहरेंगे और मैं उनका परमेश्वर ठहरूँगा", वही वाचा-सूत्र है जो प्रकाशितवाक्य के अंत तक गूँजता है। जो यरूशलेम जकर्याह देखता है, वह पत्थर के नगर से कहीं बड़ा है, वह एक ऐसी दुनिया की झलक है जहाँ बच्चे बिना डर के खेलते हैं।
जकर्याह 8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
रुककर पद 4 और 5 पर ठहरिए। बूढ़े चौकों में बैठे हैं। बच्चे सड़कों पर खेल रहे हैं। यह परमेश्वर की भलाई की तस्वीर है, न कोई मंदिर का वैभव, न सेना की जीत। बस साधारण जीवन, बिना डर के। यह छवि आप पर उँगली रखती है: आपका डर क्या इतना बड़ा हो चुका है कि आप ऐसे "साधारण" वादों पर हँसने लगे हैं?
जकर्याह 8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पद 14 और 15 एक कठिन बात कहते हैं। परमेश्वर स्वीकार करते हैं कि पहले उन्होंने "हानि करने की ठान ली थी और फिर न पछताया।" जो प्रजा बंधुआई में गई, उसे परमेश्वर ने भेजा था। अब वही परमेश्वर कहते हैं कि उन्होंने "भलाई करने की ठान ली है।" प्रश्न उठता है: क्या परमेश्वर बदलते हैं?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Zechariah 8 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 19

जो महीने यरूशलेम के विनाश की याद में आँसुओं के थे, परमेश्वर उन्हीं को बदल देता है: "चौथे, पाँचवें, सातवें और दसवें महीने के उपवास यहूदा के घराने के लिये हर्ष और आनन्द के दिन और उत्तम पर्व ठहरेंगे।" वह दुःख की तारीखें मिटाता नहीं, उन्हें गवाही बना देता है। और साथ ही कहता है, "सच्चाई और मेल से प्रीति रखो।" तेरे कैलेंडर में कौन सा दिन है जिसे तू अब तक मातम का मानता है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 18

धन्यवाद, पिता, कि आपका वचन चुप नहीं रहा। "सेनाओं के यहोवा का यह वचन मेरे पास पहुँचा" पढ़कर मन भर आता है, क्योंकि आप आज भी बोलते हैं। मेरे उजड़े और थके दिनों में भी आपकी आवाज़ मुझ तक पहुँचती है, और यही मेरी आशा बनी रहती है।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 8

मैं उनको ले आऊँगा, और वे यरूशलेम के बीच में बसेंगे; और वे मेरी प्रजा ठहरेंगे, और मैं सच्चाई और धर्म से उनका परमेश्वर ठहरूँगा।" गौर करो, लौटने का काम परमेश्वर अपने ज़िम्मे लेता है। बिखरे हुए लोग खुद रास्ता नहीं खोज पाए थे, वही उन्हें ले आया। और रिश्ता आधा अधूरा नहीं, सच्चाई का। तुम जहाँ भटक गए हो, वहाँ से तुम्हें कौन ले आएगा?

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 2

मुझे सिय्योन के लिये बड़ी जलन हुई है, हाँ, बड़ी जलजलाहट के साथ जलन।" यह उन लोगों से कहा गया जो खँडहरों के बीच खड़े थे और सोचते थे कि परमेश्वर उन्हें भूल गया। पर वह ठंडा नहीं पड़ा था, वह जल रहा था, तुम्हारे लिये। क्या तुम मान सकते हो कि तुम्हारे टूटे हुए हाल पर भी उसका प्रेम इतना गहरा है?

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