बाइबल व्याख्या

1 इतिहास 23

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

दाऊद बहुत बूढ़ा हो चुका है, और वह मरने से पहले एक अंतिम काम करता है: वह सुलैमान को राजा ठहराता है और फिर मंदिर की सेवा के लिए लेवियों को व्यवस्थित करता है। तीस वर्ष से ऊपर के अड़तीस हजार लेवीय गिने जाते हैं, और उन्हें काम बाँट दिए जाते हैं: चौबीस हजार भवन के काम के लिए, छः हजार सरदार और न्यायी, चार हजार द्वारपाल, और चार हजार गायक-वादक। इसके बाद गेर्शोन, कहात और मरारी के घरानों की लंबी वंशावली आती है, और अंत में दाऊद का तर्क: यहोवा ने अपनी प्रजा को विश्राम दिया है, इसलिए अब लेवियों को तम्बू ढोना नहीं पड़ेगा। उनका नया काम है सेवा, शुद्धिकरण, रोटी, बलिदान, और सुबह-शाम की स्तुति।

मर्म

पद 26 इस पूरे अध्याय की धुरी है: "लेवियों को निवास और उसकी उपासना का सामान फिर उठाना न पड़ेगा।" सदियों तक लेवी का काम बोझ उठाना था। तम्बू, खंभे, पर्दे, संदूक, सब कंधों पर। जंगल में परमेश्वर की उपस्थिति चलती-फिरती थी, और उसे ढोना पड़ता था। अब वह उपस्थिति ठहर गई है, और सेवा का स्वरूप बदल जाता है: ढोने की जगह गाना, उठाने की जगह खड़े रहना। यह छोटा प्रशासनिक बदलाव नहीं है, यह परमेश्वर के काम का एक चरण पूरा होने की घोषणा है। विश्राम पहले आता है, सेवा उसके बाद। लेवियों की स्तुति उनके परिश्रम का पुरस्कार नहीं, बल्कि परमेश्वर द्वारा दिए गए विश्राम का उत्तर है। यही क्रम पूरे बाइबल में अनुग्रह का क्रम है।

जोड़ने वाला सूत्र

एक बूढ़ा राजा जो स्वयं मंदिर नहीं बना सकता, अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाता है और उस पुत्र के मंदिर के लिए पूजा की व्यवस्था तैयार करता है। दाऊद की वंशावली यहीं रुकती नहीं; इतिहास की पुस्तक इसे इसलिए लिखती है क्योंकि वह एक बड़े दाऊद-पुत्र की प्रतीक्षा कर रही है। सुलैमान का मंदिर गिर गया, दूसरा मंदिर भी गिरा, परंतु मसीह ने अपने शरीर को मंदिर कहा और उसे तीन दिन में उठाया। और ध्यान दें: वह विश्राम जो दाऊद ने पद 25 में घोषित किया, अधूरा था, क्योंकि यरूशलेम में इस्राएल सदा नहीं रहा। इब्रानियों का लेखक ठीक यहीं दबाव डालता है: यदि यहोशू या दाऊद ने पूरा विश्राम दे दिया होता, तो परमेश्वर आगे किसी और दिन की बात न करते। असली "अब बोझ उठाना न पड़ेगा" मसीह के मुँह से आता है, जब वे थके हुओं को अपने पास बुलाते हैं।

दर्पण

हमें बोझ ढोना अच्छा लगता है, क्योंकि उससे हमारी उपयोगिता सिद्ध होती है। कक्षा में देर तक रुकने वाला शिक्षक, घर में सबका बोझ अकेले उठाने वाली माँ, कलीसिया में हर काम अपने कंधे पर लेने वाला अगुवा; हम कंधों से अपनी कीमत नापते हैं। इसलिए यह वचन असहज करता है: परमेश्वर लेवियों से बोझ छीन लेते हैं और उनके हाथ में वाद्य थमा देते हैं। कुछ लेवियों को यह पदावनति लगी होगी। हमें भी लगती है। जब कोई काम हमसे ले लिया जाता है, जब स्वास्थ्य या उम्र या हालात हमें किनारे कर देते हैं, तो हम पूछते हैं कि अब मेरा मूल्य क्या है। यह अध्याय उत्तर देता है: तुम्हारी सेवा तुम्हारी पहचान नहीं, परमेश्वर की उपस्थिति के सामने खड़े होना तुम्हारी पहचान है।

शास्त्र की गूँज

गिनती की पुस्तक में लेवियों की सेवा की उम्र तीस वर्ष तय की गई थी, और यहाँ पद 3 उसी नियम को दोहराता है, परंतु पद 24 और 27 में दाऊद उसे बीस वर्ष कर देता है। कारण सीधा है: तम्बू ढोने के लिए पूरी शारीरिक शक्ति चाहिए थी, मंदिर में स्तुति करने के लिए नहीं। परमेश्वर की आज्ञा की आत्मा बदली नहीं, उसका प्रयोग बदल गया, क्योंकि परिस्थिति बदल गई। दूसरी गूँज पतरस की पहली पत्री में सुनाई देती है, जहाँ विश्वासियों को जीवित पत्थर और पवित्र याजकवर्ग कहा गया है। जो कार्य यहाँ अड़तीस हजार लोगों में बाँटा गया था, वह अब मसीह की देह में हर सदस्य को दिया गया है, और उसका केंद्र वही है जो पद 30 में है: सुबह-शाम धन्यवाद और स्तुति।

पृष्ठभूमि

यह लगभग एक हजार वर्ष ईसा पूर्व का दृश्य है, दाऊद के शासन का अंत, राजनीतिक रूप से नाजुक क्षण। सत्ता का हस्तांतरण प्राचीन पूर्व में अक्सर खून से होता था, और दाऊद के घर में तो षड्यंत्रों की कमी न थी। परंतु इतिहास की पुस्तक यह सारी उलझन छोड़ देती है और एक ही बात पर टिकती है: राजा अपनी अंतिम शक्ति उपासना के ढाँचे को स्थिर करने में लगाता है। यह पुस्तक बहुत बाद में लिखी गई, बंधुआई से लौटे उन लोगों के लिए जिनके पास न सिंहासन था न सेना, केवल एक साधारण मंदिर और वंशावलियाँ थीं। उनके लिए ये नाम उदासीन सूची नहीं थे, बल्कि प्रमाण थे कि परमेश्वर की सेवा में उनका स्थान अभी भी सुरक्षित है।

एक बारीकी

पद 22 पर रुकिए: "एलीआजर पुत्रहीन मर गया, उसके केवल बेटियाँ हुईं; अतः कीश के पुत्रों ने जो उनके भाई थे उन्हें ब्याह लिया।" वंशावली के बीच यह एक टूटी हुई डोर है। एक परिवार जिसका नाम मिटने वाला था, जिसकी बेटियों का भविष्य अनिश्चित था। सूची इस दुख को छिपाती नहीं; वह दर्ज करती है कि भाइयों ने आगे आकर उन्हें अपने घर में जगह दी, और इस तरह वह नाम बचा रहा। परमेश्वर की सेवा की सूची में निःसंतान लोगों, अनाथों और किनारे पड़े लोगों के लिए जगह है, और वह जगह किसी और के आगे बढ़ने से बनती है। यहीं छुड़ानेवाले का धुँधला चित्र है: वह जो हमारे मिटते नाम को अपने घर में ले लेता है।

चिंतन के प्रश्न

आपकी सेवा में कौन-सा "बोझ" ऐसा है जिसे परमेश्वर ने कभी आपके कंधे पर रखा ही नहीं, और आप उसे छोड़ने से डरते हैं क्योंकि तब आपकी पहचान क्या रहेगी?

पद 30 कहता है कि लेवीय सुबह और शाम स्तुति के लिए खड़े रहते थे। आपके दिन में वह नियमित, बिना कारण की स्तुति कहाँ है, जो किसी संकट या ज़रूरत से नहीं, केवल विश्राम पाने से निकलती है?

1 Chronicles में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Chronicles

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Shows why the retold history of Chronicles is a book of hope.

1 Chronicles: An Introduction and Commentary

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A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

1 and 2 Chronicles

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1 Chronicles 23 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

1 इतिहास 23 का क्या अर्थ है?
दाऊद बहुत बूढ़ा हो चुका है, और वह मरने से पहले एक अंतिम काम करता है: वह सुलैमान को राजा ठहराता है और फिर मंदिर की सेवा के लिए लेवियों को व्यवस्थित करता है। तीस वर्ष से ऊपर के अड़तीस हजार लेवीय गिने जाते हैं, और उन्हें काम बाँट दिए जाते हैं: चौबीस हजार भवन के काम के लिए, छः हजार सरदार और न्यायी, चार हजार द्वारपाल, और चार हजार गायक-वादक। इसके बाद गेर्शोन, कहात और मरारी के घरानों की लंबी वंशावली आती है, और अंत में दाऊद का तर्क: यहोवा ने अपनी प्रजा को विश्राम दिया है, इसलिए अब लेवियों को तम्बू ढोना नहीं पड़ेगा। उनका नया काम है सेवा, शुद्धिकरण, रोटी, बलिदान, और सुबह-शाम की स्तुति।
1 इतिहास 23 किस विषय में है?
एक बूढ़ा राजा जो स्वयं मंदिर नहीं बना सकता, अपने पुत्र को सिंहासन पर बैठाता है और उस पुत्र के मंदिर के लिए पूजा की व्यवस्था तैयार करता है। दाऊद की वंशावली यहीं रुकती नहीं; इतिहास की पुस्तक इसे इसलिए लिखती है क्योंकि वह एक बड़े दाऊद-पुत्र की प्रतीक्षा कर रही है। सुलैमान का मंदिर गिर गया, दूसरा मंदिर भी गिरा, परंतु मसीह ने अपने शरीर को मंदिर कहा और उसे तीन दिन में उठाया। और ध्यान दें: वह विश्राम जो दाऊद ने पद 25 में घोषित किया, अधूरा था, क्योंकि यरूशलेम में इस्राएल सदा नहीं रहा। इब्रानियों का लेखक ठीक यहीं दबाव डालता है: यदि यहोशू या दाऊद ने पूरा विश्राम दे दिया होता, तो परमेश्वर आगे किसी और दिन की बात न करते। असली "अब बोझ उठाना न पड़ेगा" मसीह के मुँह से आता है, जब वे थके हुओं को अपने पास बुलाते हैं।
1 इतिहास 23 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
गिनती की पुस्तक में लेवियों की सेवा की उम्र तीस वर्ष तय की गई थी, और यहाँ पद 3 उसी नियम को दोहराता है, परंतु पद 24 और 27 में दाऊद उसे बीस वर्ष कर देता है। कारण सीधा है: तम्बू ढोने के लिए पूरी शारीरिक शक्ति चाहिए थी, मंदिर में स्तुति करने के लिए नहीं। परमेश्वर की आज्ञा की आत्मा बदली नहीं, उसका प्रयोग बदल गया, क्योंकि परिस्थिति बदल गई। दूसरी गूँज पतरस की पहली पत्री में सुनाई देती है, जहाँ विश्वासियों को जीवित पत्थर और पवित्र याजकवर्ग कहा गया है। जो कार्य यहाँ अड़तीस हजार लोगों में बाँटा गया था, वह अब मसीह की देह में हर सदस्य को दिया गया है, और उसका केंद्र वही है जो पद 30 में है: सुबह-शाम धन्यवाद और स्तुति।
1 इतिहास 23 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
पद 22 पर रुकिए: "एलीआजर पुत्रहीन मर गया, उसके केवल बेटियाँ हुईं; अतः कीश के पुत्रों ने जो उनके भाई थे उन्हें ब्याह लिया।" वंशावली के बीच यह एक टूटी हुई डोर है। एक परिवार जिसका नाम मिटने वाला था, जिसकी बेटियों का भविष्य अनिश्चित था। सूची इस दुख को छिपाती नहीं; वह दर्ज करती है कि भाइयों ने आगे आकर उन्हें अपने घर में जगह दी, और इस तरह वह नाम बचा रहा। परमेश्वर की सेवा की सूची में निःसंतान लोगों, अनाथों और किनारे पड़े लोगों के लिए जगह है, और वह जगह किसी और के आगे बढ़ने से बनती है। यहीं छुड़ानेवाले का धुँधला चित्र है: वह जो हमारे मिटते नाम को अपने घर में ले लेता है।
1 इतिहास 23 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
पद 30 कहता है कि लेवीय सुबह और शाम स्तुति के लिए खड़े रहते थे। आपके दिन में वह नियमित, बिना कारण की स्तुति कहाँ है, जो किसी संकट या ज़रूरत से नहीं, केवल विश्राम पाने से निकलती है?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

1 Chronicles 23 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 9

पिता, धन्यवाद कि आपकी दृष्टि में हर नाम गिना जाता है। शलोमीत, हजीएल और हारान जैसे तीन नाम भी आपके वचन में दर्ज हैं, क्योंकि वे आपके घराने की सेवा के लिए ठहराए गए थे। धन्यवाद कि हमारा परिवार, हमारा छोटा सा काम भी आपकी नज़र से छूटा नहीं है।

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