व्यवस्थाविवरण 1:14
पाठ
मोआब के मैदान में, यरदन के पूर्वी किनारे पर, एक बूढ़ा नेता चालीस साल पीछे मुड़कर देखता है और होरेब की उस दोपहर को दोहराता है जब उसने कहा था: मैं अकेला तुम्हारा बोझ नहीं उठा सकता, हर गोत्र में से बुद्धिमान और समझदार और प्रसिद्ध पुरुष चुन लो। और फिर वह उनका उत्तर उद्धृत करता है, ठीक उनके अपने शब्दों में: "जो कुछ तू हम से कहता है उसका करना अच्छा है।" बस इतना ही। एक वाक्य, जिसमें पूरी सभा की सहमति दर्ज है, बिना किसी विवाद, बिना किसी शर्त के। मूसा इस सहमति को याद दिलाता है इससे पहले कि वह उसी अध्याय में उनकी उस बगावत का ज़िक्र करे जो कादेशबर्ने में हुई थी।
मूल बात
यह छोटा-सा वाक्य दो सच्चाइयाँ एक साथ खोलता है। पहली: परमेश्वर अपने लोगों को एक ही आदमी के कंधों पर नहीं टिकाते। मूसा के हाथ में चमत्कारों की छड़ी थी, फिर भी न्याय और अगुवाई का भार वह बाँटता है, और लोग स्वयं अपने अगुवे चुनते हैं। यह प्राचीन पूर्व की राजशाही से बिलकुल उलटा है, जहाँ अधिकार ऊपर से थोपा जाता था। दूसरी, और अधिक चुभने वाली: सहमति देना सस्ता है। "अच्छा है" कहना उतना ही आसान था जितना बाद में यह कहना कि "जो देश हमारा परमेश्वर यहोवा हमें देता है वह अच्छा है" और फिर भी उसमें प्रवेश करने से मना कर देना। मूसा यह वाक्य इसलिए दोहराता है ताकि नई पीढ़ी सुने कि शब्दों और आज्ञाकारिता के बीच कितनी दूरी हो सकती है।
सूत्र
मूसा का यह वाक्य कि "मैं तुम्हारा भार अकेला नहीं उठा सकता" पूरे पवित्रशास्त्र में एक लम्बी लकीर खींचता है। हर अगुवा, चाहे वह कितना ही बड़ा हो, अंततः थक जाता है; इस्राएल का इतिहास टूटे हुए न्यायियों, थके हुए भविष्यद्वक्ताओं और असफल राजाओं की कतार है। परमेश्वर इस भार को बाँटते हैं, पर वे इसे हल नहीं करते। हल तब आता है जब एक ऐसा अगुवा खड़ा होता है जो सचमुच अकेले पूरे लोगों का बोझ उठा लेता है, और उठाते हुए टूट भी जाता है। यीशु मसीह मूसा की तरह सत्तर बुज़ुर्ग नहीं माँगते; वे स्वयं क्रूस तक भार ले जाते हैं। पर वे भी बारह चुनते हैं, क्योंकि परमेश्वर के लोगों की देखभाल हमेशा बाँटी हुई ज़िम्मेदारी रही है, कभी किसी एक आदमी का करिश्मा नहीं।
दर्पण
आप जानते हैं यह वाक्य कैसा लगता है, क्योंकि आपने भी कहा है। मंडली की सभा में सिर हिलाना, प्रवचन के अंत में "आमीन" कहना, पत्नी से यह कहना कि हाँ, हमें सचमुच खर्च पर बात करनी चाहिए, बच्चे से यह वादा कि इस बार शनिवार तुम्हारा है। "जो कुछ तू हम से कहता है उसका करना अच्छा है" हमारी सबसे स्वाभाविक भाषा है, और सबसे सस्ती भी। इस्राएल झूठ नहीं बोल रहा था; वे उस पल में सचमुच सहमत थे। समस्या यह है कि सहमति भावना है, आज्ञाकारिता समय लेती है। आज ही एक काम कीजिए: पिछले महीने आपने जो एक "हाँ" कहा था और अब तक निभाया नहीं, उसे कागज़ पर लिखिए और अभी अपने कैलेंडर में उसके लिए एक तारीख और समय तय कर दीजिए।
अन्तर्पाठ
सीनै पर्वत के नीचे, निर्गमन 24 में, यही लोग लगभग यही शब्द कह चुके थे: जो कुछ यहोवा ने कहा है वह सब हम करेंगे। कुछ ही अध्यायों बाद वे सोने का बछड़ा गढ़ रहे थे। मूसा जब व्यवस्थाविवरण में उनका "अच्छा है" दोहराता है, तो वह इस पैटर्न को उजागर कर रहा है, इसे कोसने के लिए नहीं बल्कि नई पीढ़ी को चेताने के लिए। यीशु ने बाद में दो बेटों की कहानी सुनाई, जिनमें एक ने "जी हाँ" कहकर नहीं किया और दूसरे ने मना करके कर दिया। मत्ती की वह उपमा इसी पुराने घाव पर उंगली रखती है: परमेश्वर के राज्य में शब्द नहीं, पाँव गिने जाते हैं।
विवरण
ध्यान दीजिए उस एक शब्द पर: "अच्छा"। इब्रानी में यह तोव है, वही शब्द जो सृष्टि के हर दिन के अंत में गूँजता है। इस अध्याय में यह तीन बार लौटता है, और हर बार दाँव ऊँचा होता जाता है। पहले लोग कहते हैं कि मूसा की योजना करना "अच्छा है"। फिर भेदिये लौटकर कहते हैं, "जो देश हमारा परमेश्वर यहोवा हमें देता है वह अच्छा है।" और अंत में परमेश्वर स्वयं शपथ खाते हैं कि यह पीढ़ी "उस अच्छे देश" को देखने न पाएगी। एक ही शब्द: पहले उनकी सहमति, फिर उनका आकलन, फिर उनका खोया हुआ हिस्सा। जिसे उन्होंने बार-बार "अच्छा" कहा, उसी में वे घुसने से डर गए।
श्रोता
जो लोग मोआब के मैदान में खड़े होकर यह सुन रहे थे, उनमें से लगभग कोई भी होरेब में मौजूद नहीं था। उनके माता-पिता जंगल में गाड़े जा चुके थे। ये वे बच्चे थे जिनके बारे में कहा गया था कि "वे लूट में चले जाएँगे"। उनके पैरों के नीचे यरदन की घाटी की नम मिट्टी थी, सामने खजूर के पेड़ और यरीहो की दीवारें, और पीछे चालीस साल की धूल। और मूसा उनसे कहता है "तुम ने मुझसे कहा", हालाँकि उन्होंने कुछ नहीं कहा था। यही इस्राएल की सोच का ढंग है: लोग एक शरीर हैं, पीढ़ियाँ अलग-अलग नहीं। पिताओं का हल्का "हाँ" अब बेटों की विरासत है, और चेतावनी भी। वे सुन रहे थे: इस बार कहना नहीं, करना है।
चिंतन
आपकी ज़िंदगी में इस समय कौन-सा "अच्छा है" ऐसा है जिसे आपने कह तो दिया है, पर जिसमें प्रवेश करने से आप डर रहे हैं?
मूसा ने भार बाँटा और लोगों को अगुवे चुनने दिए। आप जिस ज़िम्मेदारी को अकेले ढो रहे हैं, उसमें किसे भरोसे के साथ शामिल कर सकते हैं, और क्यों अब तक नहीं किया?
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Deuteronomy 1:14 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Deuteronomy 1 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
पिता, कभी आपका कहना होता है कि लौट जाओ, फिर से उसी सुनसान रास्ते पर चलो। मन भारी होता है, पर मैं जानता हूँ कि आप वहाँ भी साथ चलते हैं। मुझे धीरज दीजिए, ताकि मैं अपनी जल्दबाजी छोड़कर आपके समय पर भरोसा रखूँ। जंगल का यह मोड़ भी आपके हाथ में है।
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