बाइबल व्याख्या

निर्गमन 27

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

परमेश्वर मूसा को वेदी का नाप देते हैं: बबूल की लकड़ी की, पाँच हाथ चौकोर, तीन हाथ ऊँची, चारों कोनों पर सींग, और पूरी तरह पीतल से मढ़ी हुई। साथ में राख उठाने के पात्र, फावड़ियाँ, कटोरे, काँटे, अँगीठियाँ, एक जाली की झंझरी, और उठाकर ले चलने के लिये डंडे। फिर आँगन: सौ हाथ लम्बा, पचास हाथ चौड़ा, सनी के कपड़े की पाँच हाथ ऊँची कनात, चाँदी की पट्टियों और पीतल के खानों वाले खम्भे, और पूरब की ओर एक कामदार परदा। अन्त में दीवट के लिये कूटा हुआ निर्मल जैतून का तेल, जिससे दीपक साँझ से भोर तक जलता रहे।

मर्म

यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर के पास आने का एक क्रम है, और वह क्रम खून से शुरू होता है। सबसे पहले जो चीज़ आँगन में घुसते ही आपके सामने पड़ती है वह सोने का कोई पात्र नहीं, बल्कि एक खोखली, कालिख से पुती, पीतल की वेदी है जिसके नीचे राख का ढेर लगा रहता है। पवित्र परमेश्वर मध्य में बसने आए हैं, पर उनकी उपस्थिति एक कीमत माँगती है, और वह कीमत परमेश्वर स्वयं ठहराते हैं। ध्यान दीजिये कि वेदी का नाप भी इस्राएल ने तय नहीं किया: "जैसी वह इस पर्वत पर तुझे दिखाई गई है वैसी ही बनाई जाए।" अनुग्रह मनमानी नहीं है; वह दिया हुआ रास्ता है, और इसीलिए भरोसे लायक है।

जोड़ने वाला सूत्र

धातुओं का दर्जा देखिये: आँगन में पीतल, खम्भों की पट्टियाँ चाँदी, और पर्दे के भीतर, जहाँ यह अध्याय हमें नहीं ले जाता, सोना। जितना पास, उतना कीमती; और उतना ही सीमित प्रवेश। पूरी व्यवस्था एक ही बात दोहराती है: यहाँ तक और आगे नहीं। मसीह इसी क्रम को उलट देते हैं। वे उस वेदी के बाहर, छावनी के बाहर मारे गए, वहीं जहाँ बलियों की राख फेंकी जाती थी, और इब्रानियों की पत्री हमें ठीक वहीं उनके पास जाने को बुलाती है। जिस पीतल की वेदी पर पशु चढ़ाया जाता था, वह मसीह की छाया थी; और जिस पर्दे ने प्रवेश रोका था, वह उनकी मृत्यु के क्षण फट गया।

दर्पण

हम एक ऐसे धर्म के आदी हो गए हैं जिसमें कुछ भी गन्दा नहीं होता। रविवार साफ़ कपड़े, साफ़ संगीत, साफ़ शब्द। यह अध्याय हाथ में फावड़ा थमा देता है और कहता है, राख उठाओ। सोचिये कि आपके जीवन में परमेश्वर के पास आने की असली कीमत कहाँ चुकानी पड़ती है: उस रिश्ते में जहाँ आपको पहले माफ़ी माँगनी है, उस पैसे में जो लौटाना है, उस आदत में जो सचमुच मरनी है। हम चाहते हैं कि आँगन में घुसते ही दीवट की रौशनी मिले, पर रास्ता वेदी से होकर जाता है। और दूसरी ओर: वेदी में डंडे लगे हैं, वह उठाकर चलने योग्य है। जहाँ भी आपका डेरा जाए, क्षमा का स्थान साथ चलता है।

पहले सुनने वाले

जो लोग यह सुन रहे थे उन्होंने मिस्र के मन्दिर देखे थे: विशाल पत्थर के अहाते, जिनके भीतर आम आदमी कभी नहीं जा सकता था, देवता की मूर्ति अन्धकार में बन्द, और पुजारी सत्ता के दलाल। अब उन्हें कहा जा रहा है कि उनके परमेश्वर का आँगन कपड़े का होगा, खूँटों से बँधा, पाँच हाथ ऊँचा, यानी एक लम्बे आदमी से थोड़ा ही ऊँचा। कोई उसके पार देख नहीं सकता था, पर धुआँ सबको दिखता था। हर परिवार अपने तम्बू से उठती वह लौ देख सकता था और जान सकता था: वे यहीं हैं, हमारे बीच, चलते-फिरते डेरे में। यह छुड़ाए हुए गुलामों के लिये अविश्वसनीय बात थी।

शास्त्र के भीतर की गूँज

वेदी के सींग बाद के इतिहास में फिर उभरते हैं। जब अदोनिय्याह को अपनी जान का डर हुआ, वह भागकर वेदी के सींग पकड़ लेता है, और वही करता है योआब भी। इस्राएल जानता था कि यह जगह शरण की जगह है, जहाँ राजा की तलवार रुकनी चाहिए। यह कोई सजावटी उभार नहीं था; यह पकड़ने की चीज़ थी। दूसरी गूँज दीपक की है: यहाँ आज्ञा है कि दीपक "साँझ से भोर तक यहोवा के सामने" जलता रहे, और शमूएल की कहानी के शुरू में हमें बताया जाता है कि परमेश्वर का दीपक अभी बुझा नहीं था, जबकि उस समय एली की आँखें धुँधली पड़ चुकी थीं। एक जलता दीया इस्राएल के लिये सिर्फ़ रौशनी नहीं, वादा था।

एक बारीक ब्यौरा

"कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल।" दबाकर या पीसकर निकाले गए तेल में गूदा और तलछट मिल जाती थी, जो बत्ती को धुँआ देती और लौ को काँपने पर मजबूर करती। पहला तेल हाथ से कूटकर, बूँद-बूँद इकट्ठा किया जाता था: महँगा, धीमा, थोड़ी मात्रा में। परमेश्वर सबसे साधारण काम के लिये, यानी एक दीया जलाए रखने के लिये, सबसे महँगी चीज़ माँगते हैं। और यह तेल याजक नहीं, साधारण इस्राएली लाते थे। जिस लौ को वे स्वयं कभी नहीं देखते थे, उसे जलाए रखने में उनका श्रम लगा था। भक्ति का बड़ा हिस्सा ऐसा ही है: बिना दर्शक के, बिना श्रेय के, बस इसलिये कि रौशनी बुझे नहीं।

चिन्तन

आपके विश्वास में वह "कूट के निकाला हुआ" हिस्सा कौन-सा है, जो महँगा है और जिसे कोई देखता नहीं?

वेदी के सींग शरण की जगह थे। आज आप डर के क्षण में सबसे पहले किसे पकड़ते हैं, और क्या वह सचमुच पकड़ने लायक है?

Exodus में और गहराई से जानें

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The Message of Exodus

Alec Motyer

Traces how God rescues a people for himself, from slavery to Sinai.

Exodus For You

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An accessible chapter by chapter guide that keeps pointing to Jesus.

Exodus: An Introduction and Commentary

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Exodus

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Exodus 27 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

निर्गमन 27 का क्या अर्थ है?
परमेश्वर मूसा को वेदी का नाप देते हैं: बबूल की लकड़ी की, पाँच हाथ चौकोर, तीन हाथ ऊँची, चारों कोनों पर सींग, और पूरी तरह पीतल से मढ़ी हुई। साथ में राख उठाने के पात्र, फावड़ियाँ, कटोरे, काँटे, अँगीठियाँ, एक जाली की झंझरी, और उठाकर ले चलने के लिये डंडे। फिर आँगन: सौ हाथ लम्बा, पचास हाथ चौड़ा, सनी के कपड़े की पाँच हाथ ऊँची कनात, चाँदी की पट्टियों और पीतल के खानों वाले खम्भे, और पूरब की ओर एक कामदार परदा। अन्त में दीवट के लिये कूटा हुआ निर्मल जैतून का तेल, जिससे दीपक साँझ से भोर तक जलता रहे।
निर्गमन 27 किस विषय में है?
धातुओं का दर्जा देखिये: आँगन में पीतल, खम्भों की पट्टियाँ चाँदी, और पर्दे के भीतर, जहाँ यह अध्याय हमें नहीं ले जाता, सोना। जितना पास, उतना कीमती; और उतना ही सीमित प्रवेश। पूरी व्यवस्था एक ही बात दोहराती है: यहाँ तक और आगे नहीं। मसीह इसी क्रम को उलट देते हैं। वे उस वेदी के बाहर, छावनी के बाहर मारे गए, वहीं जहाँ बलियों की राख फेंकी जाती थी, और इब्रानियों की पत्री हमें ठीक वहीं उनके पास जाने को बुलाती है। जिस पीतल की वेदी पर पशु चढ़ाया जाता था, वह मसीह की छाया थी; और जिस पर्दे ने प्रवेश रोका था, वह उनकी मृत्यु के क्षण फट गया।
निर्गमन 27 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
जो लोग यह सुन रहे थे उन्होंने मिस्र के मन्दिर देखे थे: विशाल पत्थर के अहाते, जिनके भीतर आम आदमी कभी नहीं जा सकता था, देवता की मूर्ति अन्धकार में बन्द, और पुजारी सत्ता के दलाल। अब उन्हें कहा जा रहा है कि उनके परमेश्वर का आँगन कपड़े का होगा, खूँटों से बँधा, पाँच हाथ ऊँचा, यानी एक लम्बे आदमी से थोड़ा ही ऊँचा। कोई उसके पार देख नहीं सकता था, पर धुआँ सबको दिखता था। हर परिवार अपने तम्बू से उठती वह लौ देख सकता था और जान सकता था: वे यहीं हैं, हमारे बीच, चलते-फिरते डेरे में। यह छुड़ाए हुए गुलामों के लिये अविश्वसनीय बात थी।
निर्गमन 27 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
"कूट के निकाला हुआ जैतून का निर्मल तेल।" दबाकर या पीसकर निकाले गए तेल में गूदा और तलछट मिल जाती थी, जो बत्ती को धुँआ देती और लौ को काँपने पर मजबूर करती। पहला तेल हाथ से कूटकर, बूँद-बूँद इकट्ठा किया जाता था: महँगा, धीमा, थोड़ी मात्रा में। परमेश्वर सबसे साधारण काम के लिये, यानी एक दीया जलाए रखने के लिये, सबसे महँगी चीज़ माँगते हैं। और यह तेल याजक नहीं, साधारण इस्राएली लाते थे। जिस लौ को वे स्वयं कभी नहीं देखते थे, उसे जलाए रखने में उनका श्रम लगा था। भक्ति का बड़ा हिस्सा ऐसा ही है: बिना दर्शक के, बिना श्रेय के, बस इसलिये कि रौशनी बुझे नहीं।
निर्गमन 27 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
वेदी के सींग शरण की जगह थे। आज आप डर के क्षण में सबसे पहले किसे पकड़ते हैं, और क्या वह सचमुच पकड़ने लायक है?
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Exodus 27 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 18

आँगन की लम्बाई सौ हाथ, और चौड़ाई पचास हाथ, और ऊँचाई पाँच हाथ की हो।" पाँच हाथ, यानी किसी भी आदमी के कद से ऊँचा। कोई बाहर से झाँककर अंदर नहीं देख सकता था। परमेश्वर की पवित्रता की एक सीमा थी। फिर भी उसी दीवार में एक द्वार रखा गया, चौड़ा और खुला। वह छिपता नहीं, वह बुलाता है। तू किस ओर से भीतर आना चाहता है, दीवार फाँदकर या द्वार से?

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