एज्रा 10
पाठ
एज्रा परमेश्वर के भवन के सामने भूमि पर पड़ा रो रहा है, और उसके इस विलाप के चारों ओर एक पूरी भीड़ जुट आती है, जो स्वयं भी बिलख-बिलख कर रोती है। शकन्याह प्रस्ताव रखता है कि लोग वाचा बाँधें और अन्यजाति स्त्रियों तथा उनके बच्चों को दूर करें; एज्रा शपथ खिलाता है, तीन दिन में सारा यहूदा यरूशलेम में बुलाया जाता है, और वर्षा में काँपती हुई सभा सहमत होती है। अध्याय एक लम्बी नामसूची पर समाप्त होता है: वे याजक, लेवी और साधारण इस्राएली जिन्होंने अन्यजाति स्त्रियाँ ब्याह ली थीं, और जिनके घरों में बच्चे भी थे।
मर्म
यह अध्याय हमें एक असहज सत्य के सामने खड़ा करता है: पाप निजी नहीं रहता, और उसकी कीमत निर्दोष लोग भी चुकाते हैं। एज्रा के लिए दाँव पर विवाह की व्यवस्था नहीं, बल्कि उस लौटी हुई मुट्ठी भर मण्डली का अस्तित्व है। बँधुआई ने सिखाया था कि परमेश्वर मज़ाक नहीं करते; अब वही समुदाय उसी ढलान पर फिर पैर रख रहा है जिससे बेबीलोन तक की यात्रा शुरू हुई थी। इसलिए शकन्याह का वाक्य कि "इस दशा में भी इस्राएल के लिये आशा है" प्रायश्चित से पहले आता है, न बाद में। आशा उनकी शुद्धता पर नहीं, परमेश्वर की करुणा पर टिकी है। परन्तु पाठ हमें यह भी नहीं छिपाता कि पश्चाताप के फैसले घाव छोड़ जाते हैं।
सूत्र
पूरे बाइबल-कथानक में यह अध्याय एक बेचैन कड़ी है। परमेश्वर एक ऐसे वंश को बचाए रखते हैं जिसमें से मसीह आएगा, और यहाँ वह वंश धुँधला होने के कगार पर है। एज्रा की तलवार जैसी सफाई अस्थायी उपाय है, स्थायी समाधान नहीं; क्योंकि हृदय की अशुद्धता को कोई सूची, कोई अलगाव मिटा नहीं सकता। इसीलिए भविष्यवक्ता नई वाचा की, नए हृदय की बात करते हैं। जब यीशु मसीह आते हैं, तो वे अलगाव को दूसरी दिशा से हल करते हैं: अशुद्ध को छूकर अशुद्ध नहीं होते, बल्कि शुद्ध कर देते हैं। एज्रा को समुदाय बचाने के लिए लोगों को बाहर करना पड़ा; मसीह ने समुदाय बचाने के लिए स्वयं बाहर निकाले जाना चुना।
दर्पण
हम यह अध्याय पढ़कर सहज ही एज्रा पर उँगली उठाते हैं, और उस दूसरी बात से बच निकलते हैं जो असल में हमें चुभती है: कि हमारे समझौते हमारे बच्चों के जीवन में उगते हैं। जिस नौकरी के लिए आपने ईमानदारी की सीमा थोड़ी खिसकाई, जिस रिश्ते में आपने चुप्पी को शान्ति कह दिया, जिस कर्ज़ को आपने आय से बड़ा बना लिया, उसका बिल किसी और के नाम भी आता है। एज्रा की मण्डली की एक बात मानने योग्य है: उन्होंने कहा कि "यह दो एक दिन का काम नहीं है"। सच्चा पश्चाताप जल्दबाज़ नहीं होता, वह क्रमबद्ध, ठंडे दिमाग़ से किया गया श्रम होता है, महीनों चलने वाला। भावना में रोना आसान है; तीन महीने तक सूची बनाना कठिन।
अन्तर्पाठ
एज्रा व्यवस्थाविवरण के उस आदेश पर खड़ा है जो कनानी जातियों से विवाह मना करता था, और वह सुलैमान को याद रखता है, जिसकी विदेशी पत्नियों ने उसका मन परमेश्वर से फेर दिया था। यही चिंता नहेमायाह के अन्तिम अध्याय में लौटती है। परन्तु वही शास्त्र रूत की पुस्तक भी सौंपता है, जहाँ एक मोआबी स्त्री इस्राएल में मिल जाती है और दाऊद की परदादी बनती है; और मत्ती अपनी वंशावली में तामार, राहाब और रूत के नाम गर्व से लिखता है। यशायाह विदेशी को मन्दिर में स्वागत देता है। मलाकी कहते हैं कि परमेश्वर विवाह-विच्छेद से घृणा करते हैं, और पौलुस कुरिन्थियों को स्पष्ट लिखता है कि अविश्वासी पति या पत्नी को न छोड़ो। ये तनाव सुलझाना हमारा काम नहीं; उन्हें सुनना हमारा काम है। एज्रा एक विशेष संकट में लिया गया कठोर आपातकालीन निर्णय है, न कि सब युगों का नियम, और शास्त्र स्वयं उस पर अन्तिम मुहर नहीं लगाता।
एक बारीकी
नौवें महीने का बीसवाँ दिन, अर्थात् दिसम्बर के आसपास, यरूशलेम में बारिश का मौसम। लोग खुले चौक में बैठे हैं, "उस विषय के कारण और भारी वर्षा के मारे काँपते हुए"। दो कारणों से काँपना: भीतर का भय और बाहर की ठंड, एक ही शब्द में गुँथे हुए। और यह शब्द अकेला नहीं है; शकन्याह ने पहले ही उन लोगों की बात की थी जो "परमेश्वर की आज्ञा सुनकर थरथरानेवाले" हैं। बाइबल में काँपना कमज़ोरी नहीं, एक प्रकार की आध्यात्मिक स्वस्थता है: वह हृदय जो परमेश्वर के वचन को हल्के में नहीं लेता। यशायाह के अन्त में परमेश्वर कहते हैं कि वे ऐसे ही दीन और वचन से थरथराने वाले जन की ओर दृष्टि करते हैं। भीगते, ठिठुरते लोगों की वह सभा, विडम्बना यह है, ठीक वही जगह है जहाँ परमेश्वर देखते हैं।
पहले श्रोता
इसे पढ़ने वाले फ़ारसी साम्राज्य के अधीन जी रहे यहूदी थे: कोई राजा नहीं, कोई सेना नहीं, यरूशलेम की दीवार टूटी, आबादी शायद बीस-तीस हज़ार। उनके लिए "अन्यजाति स्त्री" राजनीति और अस्तित्व का प्रश्न था, केवल धर्म का नहीं। भूमि के अधिकार, विरासत, बच्चों की पहचान, सब इस पर टिके थे कि लौटे हुए समुदाय की सीमा कहाँ खिंचती है। और जिन्होंने बँधुआई देखी थी, उनके कानों में "परमेश्वर का भड़का हुआ कोप" कोई काल्पनिक धमकी नहीं थी, वह उनके दादा-दादी का जीवित अनुभव था। इसीलिए वे तीन दिन में आ गए, और इसीलिए उन नामों की सूची उनके लिए बोझिल नहीं, गम्भीर थी: ये लोग गुमनाम पापी नहीं, पड़ोसी थे।
चिंतन
आपके जीवन में कोई ऐसा समझौता है जिसकी कीमत आपके बाद आने वाले चुकाएँगे, और जिसे सुधारने में "दो एक दिन" से अधिक लगेगा?
शास्त्र यहाँ कठोर अलगाव और वहाँ रूत के स्वागत में बोलता है; आप इन दोनों स्वरों को दबाए बिना कैसे सुनते हैं?
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Ezra 10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
एज्रा 10 का क्या अर्थ है?
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एज्रा 10 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
एज्रा 10 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
एज्रा 10 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Ezra 10 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
एज्रा ने वह पाप नहीं किया था, फिर भी उसी का शोक उसे खा रहा था। "उसने न तो रोटी खाई, न पानी पिया, क्योंकि वह बन्धुआई से आए हुओं के विश्वासघात के कारण शोक करता रहा।" और यह शोक उसने भीड़ के सामने नहीं, एक बन्द कोठरी में किया। दूसरों के पाप पर हमारी पहली प्रतिक्रिया क्या होती है, उँगली उठाना या घुटने टेकना?
पिता, मैं जानता हूँ कि जो गलत हो चुका है, वह एक या दो दिन में नहीं सुधरता। बारिश में खड़े रहने जैसी यह घड़ी भारी लगती है, और मन कहता है कि काम बहुत बड़ा है। मुझे जल्दबाजी से नहीं, धीरज से चलने की शक्ति दे। एक कदम आज, और अगला कल, तेरे साथ।
नामों की एक सूखी सूची, और बस। पर हर नाम के पीछे एक टूटा हुआ आदमी खड़ा है, जिसने अपनी गलती मानी: "हारीम की सन्तान में से मासेयाह, एलिय्याह, शमायाह, यहीएल और उज्जियाह।" ये याजक थे, जिन्हें दूसरों को राह दिखानी थी। फिर भी उनके नाम छिपाए नहीं गए। सच्चा पश्चाताप गुमनाम नहीं रहता। तू अपनी भूल किसके सामने नाम लेकर मानने को तैयार है?
पहले महीने के पहले दिन तक उन्होंने उन सब पुरुषों की जाँच पूरी कर ली।" पूरे तीन महीने लगे। भीड़ का फैसला एक साथ नहीं हुआ, हर आदमी का नाम अलग से देखा गया। पाप से निपटना जल्दबाज़ी का काम नहीं। परमेश्वर तुझे भी झुंड में नहीं, नाम लेकर बुलाता है। और जो टेढ़ा है, उसे सुलझाने में समय लगता है। क्या तू उतना समय देने को तैयार है?
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