बाइबल व्याख्या

एज्रा 4

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

काम चल रहा था। नींव पड़ चुकी थी, पत्थर ढोए जा रहे थे, और तभी पड़ोस से कुछ लोग आए, हाथ बढ़ाकर, मुस्कुराते हुए: "हमें भी अपने संग बनाने दो; क्योंकि तुम्हारे समान हम भी तुम्हारे परमेश्वर की खोज में लगे हुए हैं।" जरुब्बाबेल और येशुअ ने मना कर दिया, और उसी घड़ी मुस्कान उतर गई। जो साथी बनने आए थे, वे विरोधी बन गए: पहले डराना, फिर रिश्वत, फिर वकील, फिर राजा के दरबार में चिट्ठियाँ। और अंत में एक सूखा, भारी वाक्य: "तब परमेश्वर के भवन का काम जो यरूशलेम में है, रुक गया।" सत्रह साल तक रुका रहा।

मर्म

यह अध्याय हमें एक असुविधाजनक सच्चाई सिखाता है: परमेश्वर का काम रुक सकता है। रुकता है। कागज़ों पर, सरकारी मुहरों के नीचे, पड़ोसियों की ईर्ष्या से। कोई स्वर्ग से आग नहीं गिरती, कोई फ़रिश्ता रहूम और शिमशै का हाथ नहीं रोकता। परमेश्वर चुप रहते हैं, और काम बंद हो जाता है।

पर ध्यान दीजिए कि लेखक इसे हार की तरह नहीं, समय की तरह लिखता है: "फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।" यानी एक तारीख़ है जिसके बाद फिर शुरू होगा। परमेश्वर की सार्वभौमिकता का मतलब यह नहीं कि उनका काम कभी रुकता नहीं; इसका मतलब यह है कि रुकावट की भी एक आख़िरी तारीख़ वही तय करते हैं। विश्वास अक्सर इसी अंतराल में जीना सीखता है, जहाँ ईंटें पड़ी रहती हैं और कुछ नहीं होता।

सूत्र

बँधुआई से लौटे लोग सोचते थे कि लौटना ही बहाली है। यह अध्याय दिखाता है कि नहीं: वे लौट तो आए, पर अब भी "महानद के इस पार" किसी और के राज्य में जी रहे हैं, किसी और के कर चुका रहे हैं, किसी और की आज्ञा की प्रतीक्षा में हैं। मंदिर बनेगा, पर छोटा; शहरपनाह बनेगी, पर बाद में। पुराना नियम यहाँ अपनी ही अधूरी साँस लेता है।

इसी अधूरेपन में वह प्यास पैदा होती है जिसे मसीह पूरा करते हैं। जब यीशु मंदिर की ओर इशारा करके कहते हैं कि वे तीन दिन में उसे खड़ा कर देंगे, तो वे उस भवन की बात कर रहे हैं जिसे कोई अर्तक्षत्र रोक नहीं सकता। रहूम की चिट्ठी पत्थरों को रोक सकी; कब्र का पत्थर उस मंदिर को नहीं रोक सका।

दर्पण

आपने भी शायद यही देखा है: जो काम आपने परमेश्वर के नाम पर शुरू किया, वह किसी दफ़्तर की फ़ाइल में अटक गया। सेवकाई में कोई राजनीति आ गई। परिवार में जो सुलह आप चाहते थे, वह किसी एक व्यक्ति की ज़िद से रुक गई। और सबसे कड़वा यह कि विरोध अक्सर धार्मिक भाषा में आता है, जैसे यहाँ आया था: "हम भी तुम्हारे परमेश्वर की खोज में लगे हुए हैं।" शब्द सही, नीयत दूसरी।

और उसके बाद वह थकान, जिसे पद 4 ठीक-ठीक नाम देता है: "निराश करने और उन्हें डराकर"। हिम्मत तोड़ना ही सबसे सस्ता हथियार है। दुश्मन को मंदिर गिराना नहीं पड़ा, बस राजमिस्त्री का दिल तोड़ना पड़ा।

आज यह कीजिए: उस एक अधूरे काम का नाम कागज़ पर लिखिए जो आपने परमेश्वर के लिए शुरू किया था और जो रुक गया, और उसके नीचे लिखिए "दारा के दूसरे वर्ष तक", फिर उसे परमेश्वर के सामने ज़ोर से पढ़कर कहिए कि समय उनका है।

एक बारीकी

पद 14 पर रुकिए: "हम लोग तो राजभवन का नमक खाते हैं।" यह प्राचीन पूर्व का मुहावरा है, वफ़ादारी की शपथ; जिसका नमक खाया, उसका हुआ। पर यह वाक्य उन्हीं लोगों के मुँह से निकल रहा है जो दो पद पहले तक कह रहे थे कि वे यहोवा को बलि चढ़ाते हैं।

यही उनका असली धर्म है। उनकी भक्ति वहाँ है जहाँ उनकी रोटी है। जब यहूदियों के साथ मिलना फ़ायदेमंद लगा, वे यहोवा के खोजी बन गए; जब ठुकराए गए, वे राजा के नमकख़ोर बन गए। जरुब्बाबेल का "नहीं" कठोर लगता है, पर वह इसी दोहरेपन को पहचानता है। मंदिर की नींव में मिलावट नहीं चल सकती, क्योंकि जो नींव में मिला, वही दीवार में फैलेगा।

श्रोता

पहले पाठक वे लोग थे जो एज्रा और नहेम्याह के बाद की पीढ़ियों में यरूशलेम में जी रहे थे: एक छोटा, गरीब प्रांत, अब भी किसी साम्राज्य के अधीन। उनके लिए यह अध्याय पुरानी कहानी नहीं, उनका वर्तमान था। वे जानते थे कि पड़ोसी क्या होते हैं, कि कर क्या होता है, कि एक शाही आदेश कितनी तेज़ी से सब कुछ बदल देता है।

इसीलिए लेखक ने कालक्रम तोड़कर क्षयर्ष और अर्तक्षत्र की चिट्ठियाँ भी यहीं जोड़ दीं। वह कह रहा है: यह एक बार की घटना नहीं, यह हमारा स्थायी हाल है। विरोध मौसमी नहीं, लगातार है। और फिर भी, देखो, मंदिर खड़ा है। यही उनकी सांत्वना थी।

अंतर्पाठ

हाग्गै की भविष्यवाणी ठीक उसी दारा के दूसरे वर्ष में आती है जिस पर यह अध्याय खत्म होता है। यानी जहाँ एज्रा 4 सन्नाटे में डूबता है, वहीं परमेश्वर का वचन फिर बोलना शुरू करता है। रुकावट का अंत किसी नए राजा की कृपा से नहीं, एक नबी की आवाज़ से होता है।

और नए नियम में प्रेरितों के काम में वही पैटर्न लौटता है: विरोधी अदालतों और अधिकारियों का सहारा लेते हैं, चेले रोके जाते हैं, पर वचन बढ़ता जाता है। परमेश्वर का काम रोका जा सकता है; मिटाया नहीं जा सकता।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन सी "मदद की पेशकश" थी जिसे ठुकराना ज़रूरी था, और क्या आपने उसे पहचाना?

जो काम आपका रुका पड़ा है, उसमें आप परमेश्वर की अनुपस्थिति देख रहे हैं या उनका समय?

Ezra में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Ezra and Haggai

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Rebuilding the temple and the people, read as one story of restoration.

Ezra and Nehemiah: An Introduction and Commentary

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A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

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Ezra 4 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

एज्रा 4 का क्या अर्थ है?
काम चल रहा था। नींव पड़ चुकी थी, पत्थर ढोए जा रहे थे, और तभी पड़ोस से कुछ लोग आए, हाथ बढ़ाकर, मुस्कुराते हुए: "हमें भी अपने संग बनाने दो; क्योंकि तुम्हारे समान हम भी तुम्हारे परमेश्वर की खोज में लगे हुए हैं।" जरुब्बाबेल और येशुअ ने मना कर दिया, और उसी घड़ी मुस्कान उतर गई। जो साथी बनने आए थे, वे विरोधी बन गए: पहले डराना, फिर रिश्वत, फिर वकील, फिर राजा के दरबार में चिट्ठियाँ। और अंत में एक सूखा, भारी वाक्य: "तब परमेश्वर के भवन का काम जो यरूशलेम में है, रुक गया।" सत्रह साल तक रुका रहा।
एज्रा 4 किस विषय में है?
बँधुआई से लौटे लोग सोचते थे कि लौटना ही बहाली है। यह अध्याय दिखाता है कि नहीं: वे लौट तो आए, पर अब भी "महानद के इस पार" किसी और के राज्य में जी रहे हैं, किसी और के कर चुका रहे हैं, किसी और की आज्ञा की प्रतीक्षा में हैं। मंदिर बनेगा, पर छोटा; शहरपनाह बनेगी, पर बाद में। पुराना नियम यहाँ अपनी ही अधूरी साँस लेता है।
एज्रा 4 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
और उसके बाद वह थकान, जिसे पद 4 ठीक-ठीक नाम देता है: "निराश करने और उन्हें डराकर"। हिम्मत तोड़ना ही सबसे सस्ता हथियार है। दुश्मन को मंदिर गिराना नहीं पड़ा, बस राजमिस्त्री का दिल तोड़ना पड़ा।
एज्रा 4 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यही उनका असली धर्म है। उनकी भक्ति वहाँ है जहाँ उनकी रोटी है। जब यहूदियों के साथ मिलना फ़ायदेमंद लगा, वे यहोवा के खोजी बन गए; जब ठुकराए गए, वे राजा के नमकख़ोर बन गए। जरुब्बाबेल का "नहीं" कठोर लगता है, पर वह इसी दोहरेपन को पहचानता है। मंदिर की नींव में मिलावट नहीं चल सकती, क्योंकि जो नींव में मिला, वही दीवार में फैलेगा।
एज्रा 4 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
हाग्गै की भविष्यवाणी ठीक उसी दारा के दूसरे वर्ष में आती है जिस पर यह अध्याय खत्म होता है। यानी जहाँ एज्रा 4 सन्नाटे में डूबता है, वहीं परमेश्वर का वचन फिर बोलना शुरू करता है। रुकावट का अंत किसी नए राजा की कृपा से नहीं, एक नबी की आवाज़ से होता है।
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Ezra 4 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 24

तब यरूशलेम में परमेश्वर के भवन का काम रुक गया, और वह फारस के राजा दारा के राज्य के दूसरे वर्ष तक रुका रहा।" सोलह साल। नींव पड़ी रही, दीवारें अधूरी रहीं, और लोग हर सुबह उस अधूरे काम को देखते रहे। तेरे जीवन में भी शायद कुछ ऐसा ही अधूरा पड़ा है। पर ध्यान दे, यह आयत "रुक गया" पर खत्म नहीं होती, वह एक तारीख बताती है। परमेश्वर ने रुकने का समय भी तय कर रखा था, और फिर से शुरू होने का भी।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 3

जरुब्बाबेल और येशुअ ने मदद ठुकरा दी: "हमारे परमेश्वर के लिये भवन बनाना तुम्हारा नहीं हमारा ही काम है।" कितना कठिन रहा होगा, जब काम बड़ा था और हाथ कम। पर हर बढ़ा हुआ हाथ परमेश्वर की ओर से नहीं होता। क्या तुम्हारे जीवन में भी कोई ऐसी मदद है, जो काम तो आसान करती है, पर नींव कमज़ोर कर देती है?

धन्यवाद संपादकीय पर पद 11

पिता, धन्यवाद कि जब विरोधियों ने राजा अर्तक्षत्र को वह चिट्ठी लिखी, तब भी तेरा काम तेरे हाथ से नहीं छूटा। धन्यवाद कि हमारे विरुद्ध लिखी हर बात तू पढ़ता है और तेरी योजना कोई कागज़ रोक नहीं सकता। तेरे भरोसे हम शांत रहते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 10

पत्र में विरोधियों ने पहले अपना परिचय बड़े नामों से दिया, "महान और प्रतिष्ठित ओस्नप्पर" जिसने उन्हें लाकर सामरिया में बसाया था। ध्यान दे, ये लोग खुद उजाड़े गए और किसी और की मर्जी से बसाए गए थे। फिर भी अब दूसरों के बसने का विरोध कर रहे हैं। दर्द इंसान को कोमल भी बनाता है और कठोर भी। तेरे साथ जो हुआ, उसने तुझे किस ओर मोड़ा?

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