बाइबल व्याख्या

भजन संहिता 2

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

स्वर्ग में बैठा हुआ परमेश्वर हँसता है। यह भजन की सबसे चुभने वाली पंक्ति है, और सबसे राहत देने वाली भी। भजन शुरू होता है एक हैरानी भरे प्रश्न से: राष्ट्र क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, राजा क्यों यहोवा और उनके अभिषिक्त के विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हैं? उनका नारा साफ है, "आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें।" इसके उत्तर में परमेश्वर बहस नहीं करते; वे हँसते हैं, फिर क्रोध में बोलते हैं और घोषणा करते हैं कि उन्होंने अपने चुने हुए राजा को सिय्योन पर बिठा दिया है। राजा स्वयं गवाही देता है: "तू मेरा पुत्र है।" अन्त में चेतावनी और निमंत्रण साथ आते हैं: बुद्धिमान बनो, काँपते हुए मगन हो, पुत्र को चूमो।

मूल बात

यह भजन दो सत्ताओं का टकराव दिखाता है, पर टकराव बराबरी का नहीं है। मनुष्य की सबसे संगठित शक्ति, राजाओं का गठबंधन, परमेश्वर के सामने एक शोर से ज़्यादा कुछ नहीं। ध्यान दीजिए कि विद्रोहियों को परमेश्वर का शासन "बन्धन" और "रस्सियाँ" लगता है। यही पाप की जड़ है: परमेश्वर के अधिकार को दासता समझना और अपनी स्वायत्तता को स्वतंत्रता। परमेश्वर इसका उत्तर तर्क से नहीं, एक व्यक्ति से देते हैं। "मैंने तो अपने चुने हुए राजा को… नियुक्त किया है।" परमेश्वर का शासन किसी विचारधारा के रूप में नहीं, बल्कि एक अभिषिक्त राजा के रूप में आता है। और वह क्रोध जिससे भजन काँपता है, अन्त में एक द्वार खुला छोड़ता है: "धन्य है वे जो उसमें शरण लेते हैं।" न्याय करने वाला ही शरणस्थान है।

सूत्र

"अभिषिक्त" के लिए इब्रानी शब्द है माशीअख, मसीह। दाऊद के वंश का हर राजा इस भजन के साथ राजगद्दी पर बैठा, और हर बार यह भजन उससे बड़ा साबित हुआ। कोई भी यहूदी राजा "दूर-दूर के देशों" का स्वामी नहीं बना। वादा खाली बर्तन की तरह पड़ा रहा, प्रतीक्षा करता हुआ। फिर यरदन के किनारे स्वर्ग से वही वचन सुनाई दिया जो पद 7 में है, यीशु के ऊपर। और जब यरूशलेम में हेरोदेस और पिलातुस मिलकर उनके विरुद्ध खड़े हुए, तो कलीसिया ने प्रार्थना में यही भजन पढ़ा (प्रेरितों 4:25-26); उन्होंने पहचाना कि सारा "षड्‍यंत्र" उस क्रूस पर आकर टूट गया। पुनरुत्थान वह "आज" है जिसमें पुत्र सिंहासन पर बैठा।

दर्पण

आपके भीतर भी वह पंक्ति कहीं गूँजती है: "उनकी रस्सियों को अपने ऊपर से उतार फेंके।" यह नास्तिकता की भाषा नहीं, बहुत बार धार्मिक लोगों की भाषा है। जब पैसे के मामले में आप हिसाब किसी को नहीं देना चाहते, जब विवाह में क्षमा माँगने से ज़्यादा सही साबित होना ज़रूरी लगता है, जब काम पर एक छोटा सा झूठ आपकी सुरक्षा बन जाता है, तब आप चुपचाप एक रस्सी काट रहे होते हैं। दूसरी ओर, भजन उन्हें भी संबोधित करता है जो डरे हुए हैं। जिन ताकतों से आप घबराते हैं, वह बॉस, वह अदालत, वह बीमारी की रिपोर्ट, वे स्वर्ग में हँसी का विषय हैं। यह लापरवाही नहीं सिखाता, पर यह डर का आकार छोटा कर देता है।

संदर्भ

प्राचीन पूर्व में जब कोई राजा मरता और उसका बेटा गद्दी पर बैठता, तो अधीन राज्यों के लिए यही मौका होता कर देना बंद करने का। नया राजा, कमज़ोर पल। यही पृष्ठभूमि है पद 1-3 की: गठबंधन बन रहे हैं, दूत भेजे जा रहे हैं, विद्रोह की योजना चल रही है। यरूशलेम इस दुनिया में कोई महाशक्ति नहीं था, मिस्र और अश्शूर के बीच फँसा एक छोटा पहाड़ी राज्य। इसी छोटेपन में यह भजन दावा करता है कि सिय्योन का पहाड़ पवित्र है और वहाँ बैठा राजा परमेश्वर का पुत्र कहलाता है। आसपास के राष्ट्रों में राजा को देवता का पुत्र कहना आम था; यहाँ वह जन्म से नहीं, नियुक्ति और वाचा से पुत्र है।

श्रोता

राजगद्दी के समारोह में खड़े लोग यह भजन सुनते और दो चीज़ें एक साथ महसूस करते: गर्व और असहजता। गर्व, क्योंकि उनका छोटा सा राष्ट्र स्वर्ग के दरबार से जुड़ा घोषित हो रहा था। असहजता, क्योंकि वे अपने राजा को जानते थे, उसकी कमज़ोरियाँ, उसके समझौते। लोहे के डंडे और कुम्हार के बर्तन की भाषा उनके अनुभव से मेल नहीं खाती थी। बाबेल के निर्वासन के बाद, जब कोई दाऊदी राजा बचा ही नहीं, यह भजन और भी तीखा हो गया। वे इसे इतिहास की तरह नहीं, प्रार्थना और प्रतीक्षा की तरह पढ़ते थे। इसीलिए जब पहली कलीसिया ने इसे यीशु पर लागू किया, वह कोई नई चालाकी नहीं थी; वह एक लंबी प्रतीक्षा का उत्तर था।

प्रश्न

लोहे का डंडा और चकनाचूर बर्तन। यह वही यीशु हैं जो क्रूस पर अपने हत्यारों के लिए प्रार्थना करते हैं? हमें यह जोड़ असहज करता है, और होना भी चाहिए। भजन इसे नरम नहीं करता, और प्रकाशितवाक्य भी नहीं, जो इसी पद को मेम्ने पर लागू करता है। शायद ईमानदार उत्तर यह है: जिस प्रेम को बुराई से कोई फ़र्क न पड़े, वह प्रेम नहीं उदासीनता है। जो राजा अत्याचारियों के आगे झुक जाए, वह पीड़ितों से विश्वासघात करता है। फिर भी यह पूरी तरह हमारे गले नहीं उतरता, और भजन हमें वहीं छोड़ देता है, हाथ में एक चेतावनी और एक निमंत्रण लिए: "काँपते हुए मगन हो।" डर और आनंद एक साथ। यही मसीह के सामने खड़े होने का सही रूप है।

चिंतन

आपके जीवन में कौन सी "रस्सी" है जिसे आप चुपचाप उतार फेंकना चाहते हैं, और आप उसे बंधन क्यों समझते हैं?

"काँपते हुए मगन हो" आपके लिए व्यवहार में कैसा दिखेगा, इस हफ़्ते, किसी एक ठोस स्थिति में?

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Psalms 2 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

भजन संहिता 2 का क्या अर्थ है?
स्वर्ग में बैठा हुआ परमेश्वर हँसता है। यह भजन की सबसे चुभने वाली पंक्ति है, और सबसे राहत देने वाली भी। भजन शुरू होता है एक हैरानी भरे प्रश्न से: राष्ट्र क्यों हुल्लड़ मचाते हैं, राजा क्यों यहोवा और उनके अभिषिक्त के विरुद्ध षड्‍यंत्र रचते हैं? उनका नारा साफ है, "आओ, हम उनके बन्धन तोड़ डालें।" इसके उत्तर में परमेश्वर बहस नहीं करते; वे हँसते हैं, फिर क्रोध में बोलते हैं और घोषणा करते हैं कि उन्होंने अपने चुने हुए राजा को सिय्योन पर बिठा दिया है। राजा स्वयं गवाही देता है: "तू मेरा पुत्र है।" अन्त में चेतावनी और निमंत्रण साथ आते हैं: बुद्धिमान बनो, काँपते हुए मगन हो, पुत्र को चूमो।
भजन संहिता 2 किस विषय में है?
"अभिषिक्त" के लिए इब्रानी शब्द है माशीअख, मसीह। दाऊद के वंश का हर राजा इस भजन के साथ राजगद्दी पर बैठा, और हर बार यह भजन उससे बड़ा साबित हुआ। कोई भी यहूदी राजा "दूर-दूर के देशों" का स्वामी नहीं बना। वादा खाली बर्तन की तरह पड़ा रहा, प्रतीक्षा करता हुआ। फिर यरदन के किनारे स्वर्ग से वही वचन सुनाई दिया जो पद 7 में है, यीशु के ऊपर। और जब यरूशलेम में हेरोदेस और पिलातुस मिलकर उनके विरुद्ध खड़े हुए, तो कलीसिया ने प्रार्थना में यही भजन पढ़ा (प्रेरितों 4:25-26); उन्होंने पहचाना कि सारा "षड्‍यंत्र" उस क्रूस पर आकर टूट गया। पुनरुत्थान वह "आज" है जिसमें पुत्र सिंहासन पर बैठा।
भजन संहिता 2 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
प्राचीन पूर्व में जब कोई राजा मरता और उसका बेटा गद्दी पर बैठता, तो अधीन राज्यों के लिए यही मौका होता कर देना बंद करने का। नया राजा, कमज़ोर पल। यही पृष्ठभूमि है पद 1-3 की: गठबंधन बन रहे हैं, दूत भेजे जा रहे हैं, विद्रोह की योजना चल रही है। यरूशलेम इस दुनिया में कोई महाशक्ति नहीं था, मिस्र और अश्शूर के बीच फँसा एक छोटा पहाड़ी राज्य। इसी छोटेपन में यह भजन दावा करता है कि सिय्योन का पहाड़ पवित्र है और वहाँ बैठा राजा परमेश्वर का पुत्र कहलाता है। आसपास के राष्ट्रों में राजा को देवता का पुत्र कहना आम था; यहाँ वह जन्म से नहीं, नियुक्ति और वाचा से पुत्र है।
भजन संहिता 2 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लोहे का डंडा और चकनाचूर बर्तन। यह वही यीशु हैं जो क्रूस पर अपने हत्यारों के लिए प्रार्थना करते हैं? हमें यह जोड़ असहज करता है, और होना भी चाहिए। भजन इसे नरम नहीं करता, और प्रकाशितवाक्य भी नहीं, जो इसी पद को मेम्ने पर लागू करता है। शायद ईमानदार उत्तर यह है: जिस प्रेम को बुराई से कोई फ़र्क न पड़े, वह प्रेम नहीं उदासीनता है। जो राजा अत्याचारियों के आगे झुक जाए, वह पीड़ितों से विश्वासघात करता है। फिर भी यह पूरी तरह हमारे गले नहीं उतरता, और भजन हमें वहीं छोड़ देता है, हाथ में एक चेतावनी और एक निमंत्रण लिए: "काँपते हुए मगन हो।" डर और आनंद एक साथ। यही मसीह के सामने खड़े होने का सही रूप है।
भजन संहिता 2 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"काँपते हुए मगन हो" आपके लिए व्यवहार में कैसा दिखेगा, इस हफ़्ते, किसी एक ठोस स्थिति में?

Psalms 2 में आपको क्या स्पर्श करता है?

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