बाइबल व्याख्या

होशे 10:12

बाइबल

पाठ

बारहवें पद में अचानक स्वर बदल जाता है। दस अध्यायों तक होशे ने बटे हुए मन, टूटती वेदियों, बुलबुले की तरह मिट जाने वाले सामरिया और जुए के नीचे झुकाई गई बछिया की बात की है; और तभी, न्याय की इस घोषणा के बीचोंबीच, एक निमंत्रण फूट पड़ता है: "अपने लिये धार्मिकता का बीज बोओ, तब करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो।" खेती की भाषा में तीन आज्ञाएँ हैं, बोओ, काटो, जोतो, और उनके पीछे एक चेतावनी भरी घड़ी: "अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है।" और अंत में वह वाक्य जो सब कुछ उलट देता है, क्योंकि उपज मनुष्य के हाथ से नहीं, ऊपर से आती है: "वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाएँ।"

केंद्रीय सत्य

यहाँ बोने और काटने का सामान्य नियम टूट जाता है, और यही इस पद का धर्मशास्त्रीय हृदय है। जो बोया जाता है वह धार्मिकता है, परन्तु जो काटा जाता है वह "करुणा के अनुसार" है, इब्रानी में हेसेद, अर्थात वाचा की वह वफादार दया जिसे परमेश्वर तोड़ते नहीं। बीज और फसल का माप बराबर नहीं है; मनुष्य मुट्ठी भर आज्ञाकारिता डालता है और परमेश्वर की वाचा-भक्ति की पूरी फसल पाता है। तेरहवाँ पद इसका उल्टा दिखाता है: दुष्टता का हल और अन्याय की फसल, वहाँ भी माप बराबर नहीं, बस दूसरी दिशा में। और अंतिम पंक्ति हर सौदेबाजी को खत्म कर देती है। उद्धार उगता नहीं, बरसता है। पड़ती भूमि जोतना हमारा काम है, वर्षा भेजना कभी हमारा काम नहीं था।

मुख्य सूत्र

"अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है" वाक्य में एक घड़ी टिक रही है, और यही घड़ी पूरे बाइबल-वृत्तांत में बार-बार बजती है। इस्राएल की पड़ती भूमि जोती नहीं गई; सामरिया गिरा, बेतेल की वेदियाँ उजड़ीं। परन्तु परमेश्वर ने अपनी वाचा-भक्ति वापस नहीं ली, बल्कि उसे और गहरे उतारा: जो फसल मनुष्य नहीं उगा सका, उसे उन्होंने स्वयं बोया। यीशु मसीह उस धार्मिकता के बीज हैं जो भूमि में गिरकर मरता है, और उनकी क्रूस पर उँडेली गई करुणा वही वर्षा है जिसका होशे संकेत दे रहे हैं। ध्यान दीजिए, आठवें पद के शब्द, "हमको छिपा लो", लूका में यीशु के मुँह से यरूशलेम के लिए फिर सुनाई देते हैं। न्याय की वही चेतावनी, वही खुला निमंत्रण, अब देहधारी होकर सड़क पर चलता हुआ।

दर्पण

पड़ती भूमि वह ज़मीन है जो कभी उपजाऊ थी, फिर छोड़ दी गई; काँटे उग आए, मिट्टी सख्त हो गई। हममें से अधिकतर के पास ऐसी एक ज़मीन है। वह विवाह जिसमें बातचीत घटकर सूचनाओं का आदान-प्रदान रह गई। वह पिता या बहन जिसका नंबर फोन में है पर जिसे दो साल से नहीं मिलाया। वह पैसा जिसका हिसाब आप देखना नहीं चाहते क्योंकि देखने से कुछ बदलना पड़ेगा। हम इसे व्यस्तता कहते हैं, पर होशे इसे बटा हुआ मन कहते हैं। और जोतने का काम रोमांटिक नहीं होता; वह सख्त मिट्टी को तोड़ना है, वह पहला वाक्य कहना है जो गले में अटकता है। परमेश्वर वर्षा भेजने का वचन देते हैं, हल चलाने का नहीं। आज ही अपने फोन में उस एक व्यक्ति का नाम खोलिए जिससे आपने महीनों से बात नहीं की, और सिर्फ इतना भेजिए कि आप उसे याद कर रहे हैं।

पहले सुननेवाले

यह उत्तरी राज्य के लोग हैं, यारोबाम द्वितीय के बाद का समय, जब समृद्धि अभी दिख रही थी पर नींव खिसक चुकी थी। ये किसान थे; बीज, हल, हेंगा, दाँवना, ये उपमाएँ नहीं, उनका रोज़मर्रा था। जब होशे कहते हैं "अपनी पड़ती भूमि को जोतो", तो वे जानते थे कि इसका अर्थ पहली वर्षा से पहले की वह कठिन मेहनत है जो अगले पूरे साल का भोजन तय करती है। और जब वे "उद्धार बरसाएँ" सुनते थे, तो उनके मन में बाल की मूर्ति उठती थी, वही देवता जिससे उनके पड़ोसी वर्षा माँगते थे। होशे उनके धर्म के केंद्र पर हाथ रखते हैं: वर्षा और उद्धार, दोनों एक ही परमेश्वर से आते हैं, और अश्शूर की भेंट या बछड़े की वेदी से नहीं।

मुख्य पात्र

इस पद में परमेश्वर एक ऐसे स्वामी के रूप में सामने आते हैं जो अपने ही अभियुक्त को हल थमा रहे हैं। ग्यारहवें पद में वे एप्रैम की सुन्दर गर्दन पर जूआ रखते हैं, दसवें पद में ताड़ना की बात करते हैं, तेरहवें में उसके धोखे का फल गिनाते हैं; और ठीक इन दोनों के बीच खड़े होकर वे कहते हैं, आओ, अभी देर नहीं हुई। यह परमेश्वर का सबसे कठिन और सबसे सुन्दर पहलू है: उनका न्याय और उनका निमंत्रण एक ही साँस में आते हैं, क्योंकि दोनों एक ही वाचा-प्रेम से निकलते हैं। यह वह पिता है जो सज़ा सुनाते हुए भी दरवाज़ा खुला रखता है, और जिसकी करुणा अपने ही क्रोध से आगे दौड़ जाती है।

कठिन प्रश्न

यदि उद्धार ऊपर से बरसता है, तो बोने और जोतने का आदेश क्यों? और यदि हमें बोना ही है, तो क्या यह कमाई नहीं हुई? पद इस तनाव को हल नहीं करता, वह उसे खुला छोड़ देता है, और शायद ईमानदारी यही है। हल चलाना पानी नहीं बनाता, पर बिना जुती ज़मीन पर पानी बहकर निकल जाता है। आज्ञाकारिता अनुग्रह को खरीदती नहीं, वह उसे झेलने योग्य बनाती है। और फिर भी एक काँटा बाकी रहता है: इस्राएल ने नहीं जोता, और सामरिया गिर गया। निमंत्रण असली था, इनकार भी असली था, और परिणाम भी। परमेश्वर जबरदस्ती वर्षा नहीं करते। यह मुझे डराता है, और मुझे लगता है इसे डराना ही चाहिए।

मनन के प्रश्न

आपके जीवन की कौन सी भूमि पड़ती है, यानी कभी उपजाऊ थी और अब छोड़ दी गई है, और उसे जोतने में क्या चीज़ आपको रोक रही है?

"करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे" पर विश्वास करना आपके लिए कठिन क्यों है, यह सोचकर कि आपने इस साल वास्तव में क्या बोया है?

Hosea में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Hosea

Derek Kidner

The prophet's broken marriage as a window into God's relentless love.

Hosea: An Introduction and Commentary

David Hubbard

A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.

Hosea, Amos, Micah

Gary Smith

Explains what it meant then, and bridges it honestly to life now.

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Hosea 10:12 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

होशे 10:12 का क्या अर्थ है?
बारहवें पद में अचानक स्वर बदल जाता है। दस अध्यायों तक होशे ने बटे हुए मन, टूटती वेदियों, बुलबुले की तरह मिट जाने वाले सामरिया और जुए के नीचे झुकाई गई बछिया की बात की है; और तभी, न्याय की इस घोषणा के बीचोंबीच, एक निमंत्रण फूट पड़ता है: "अपने लिये धार्मिकता का बीज बोओ, तब करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे; अपनी पड़ती भूमि को जोतो।" खेती की भाषा में तीन आज्ञाएँ हैं, बोओ, काटो, जोतो, और उनके पीछे एक चेतावनी भरी घड़ी: "अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है।" और अंत में वह वाक्य जो सब कुछ उलट देता है, क्योंकि उपज मनुष्य के हाथ से नहीं, ऊपर से आती है: "वह आए और तुम्हारे ऊपर उद्धार बरसाएँ।"
होशे 10:12 किस विषय में है?
"अभी यहोवा के पीछे हो लेने का समय है" वाक्य में एक घड़ी टिक रही है, और यही घड़ी पूरे बाइबल-वृत्तांत में बार-बार बजती है। इस्राएल की पड़ती भूमि जोती नहीं गई; सामरिया गिरा, बेतेल की वेदियाँ उजड़ीं। परन्तु परमेश्वर ने अपनी वाचा-भक्ति वापस नहीं ली, बल्कि उसे और गहरे उतारा: जो फसल मनुष्य नहीं उगा सका, उसे उन्होंने स्वयं बोया। यीशु मसीह उस धार्मिकता के बीज हैं जो भूमि में गिरकर मरता है, और उनकी क्रूस पर उँडेली गई करुणा वही वर्षा है जिसका होशे संकेत दे रहे हैं। ध्यान दीजिए, आठवें पद के शब्द, "हमको छिपा लो", लूका में यीशु के मुँह से यरूशलेम के लिए फिर सुनाई देते हैं। न्याय की वही चेतावनी, वही खुला निमंत्रण, अब देहधारी होकर सड़क पर चलता हुआ।
होशे 10:12 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यह उत्तरी राज्य के लोग हैं, यारोबाम द्वितीय के बाद का समय, जब समृद्धि अभी दिख रही थी पर नींव खिसक चुकी थी। ये किसान थे; बीज, हल, हेंगा, दाँवना, ये उपमाएँ नहीं, उनका रोज़मर्रा था। जब होशे कहते हैं "अपनी पड़ती भूमि को जोतो", तो वे जानते थे कि इसका अर्थ पहली वर्षा से पहले की वह कठिन मेहनत है जो अगले पूरे साल का भोजन तय करती है। और जब वे "उद्धार बरसाएँ" सुनते थे, तो उनके मन में बाल की मूर्ति उठती थी, वही देवता जिससे उनके पड़ोसी वर्षा माँगते थे। होशे उनके धर्म के केंद्र पर हाथ रखते हैं: वर्षा और उद्धार, दोनों एक ही परमेश्वर से आते हैं, और अश्शूर की भेंट या बछड़े की वेदी से नहीं।
होशे 10:12 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यदि उद्धार ऊपर से बरसता है, तो बोने और जोतने का आदेश क्यों? और यदि हमें बोना ही है, तो क्या यह कमाई नहीं हुई? पद इस तनाव को हल नहीं करता, वह उसे खुला छोड़ देता है, और शायद ईमानदारी यही है। हल चलाना पानी नहीं बनाता, पर बिना जुती ज़मीन पर पानी बहकर निकल जाता है। आज्ञाकारिता अनुग्रह को खरीदती नहीं, वह उसे झेलने योग्य बनाती है। और फिर भी एक काँटा बाकी रहता है: इस्राएल ने नहीं जोता, और सामरिया गिर गया। निमंत्रण असली था, इनकार भी असली था, और परिणाम भी। परमेश्वर जबरदस्ती वर्षा नहीं करते। यह मुझे डराता है, और मुझे लगता है इसे डराना ही चाहिए।
होशे 10:12 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
"करुणा के अनुसार खेत काटने पाओगे" पर विश्वास करना आपके लिए कठिन क्यों है, यह सोचकर कि आपने इस साल वास्तव में क्या बोया है?
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Hosea 10 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 14

पिता, जब दुनिया की हिंसा और टूटन की खबरें मन को बेचैन करती हैं, तो मैं तेरे सामने चुप खड़ा होता हूँ। जिन दीवारों पर मैं भरोसा करता हूँ, वे मुझे बचा नहीं सकतीं। तू ही मेरी सच्ची ओट है। उन माँओं और बच्चों पर दया कर जो आज डर के साये में जी रहे हैं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 7

पिता, जो कुछ हम मजबूत समझकर थामे रहते हैं, वह पानी पर तैरते झाग जैसा बह जाता है। हमें सिखा कि हम अपना भरोसा उन चीज़ों पर न रखें जो टिक नहीं सकतीं। आप ही हमारी नींव बनें, ताकि सब कुछ हिल जाए तब भी हम आपमें स्थिर रहें।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 13

पिता, मैंने कई बार अपनी ताकत और अपनी चतुराई पर भरोसा किया, और जो बोया वही काटा। मुझे माफ कर दे। मेरे मन की वह जमीन फिर से तोड़, जहाँ झूठ जड़ पकड़ लेता है। सिखा कि सच्चाई बोऊँ और तेरे सहारे जीना सीखूँ।

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