यशायाह 55:8
पाठ
आठवाँ पद एक छोटे से शब्द से शुरू होता है जो अक्सर हमारी नज़र से फिसल जाता है: "क्योंकि"। परमेश्वर कहते हैं कि उनके विचार हमारे विचारों जैसे नहीं हैं, और उनकी गति हमारी गति जैसी नहीं है। यह वाक्य आकाश से गिरा हुआ कोई रहस्यमय सूत्र नहीं है, बल्कि उससे ठीक पहले कही गई बात का कारण है: कि दुष्ट अपनी चाल चलन छोड़कर लौट आए, और परमेश्वर "पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा।" यानी यह पद परमेश्वर की अगम्यता की घोषणा से पहले उनकी क्षमा की व्याख्या है।
मूल बात
हम इस पद को आमतौर पर वहाँ बोलते हैं जहाँ कुछ समझ में नहीं आता: बीमारी, मृत्यु, बंद दरवाज़े। "परमेश्वर के विचार हमारे विचारों जैसे नहीं," हम कहते हैं, और चुप हो जाते हैं। लेकिन यशायाह इसे बिलकुल दूसरी दिशा में कहते हैं। जो चीज़ मनुष्य के लिए असंभव है, वह है इतनी उदार क्षमा। हमारा हिसाब यह है कि अपराध की कीमत चुकाई जाए, कि लौटनेवाले को पहले साबित करना पड़े, कि भरोसा धीरे-धीरे और शर्तों के साथ लौटे। परमेश्वर का हिसाब दूसरा है। वे बिना रुपये दाखमधु और दूध देते हैं, और बिना परखने की अवधि के क्षमा करते हैं। यही वह ऊँचाई है जिसकी बात यहाँ हो रही है, और यही अनुग्रह है, जो हमारे तर्क को उलट देता है।
मुख्य सूत्र
यह पद यशायाह 53 के ठीक बाद आता है, और यह क्रम संयोग नहीं है। पहले वह सेवक, जो हमारे अपराधों के कारण घायल किया गया; फिर यह खुला निमंत्रण, "अहो सब प्यासे लोगों, पानी के पास आओ।" मुफ़्त क्षमा मुफ़्त नहीं थी; उसकी कीमत परमेश्वर ने स्वयं चुकाई। यही वह "गति" है जो हमारी गति से आकाश और पृथ्वी जितनी दूर है: परमेश्वर दोषी को छोड़ने के लिए स्वयं दोष उठा लेते हैं। और पद 3 की "दाऊद पर की अटल करुणा की वाचा" को प्रेरितों ने सीधे यीशु मसीह के जी उठने पर लागू किया (प्रेरितों 13:34), क्योंकि वही वह अनंत राजा है जिसमें यह वाचा टिकती है। क्रूस पर चढ़ाया गया मसीह मनुष्य के तर्क को मूर्खता लगता है, और ठीक इसी कारण वह इस पद का सबसे स्पष्ट उदाहरण है।
दर्पण
आप शायद उस पद को दस साल से जानते हैं जिसे आपने अपने बारे में कभी माफ़ नहीं किया। वह बात जो आप हर बार प्रार्थना में दोहराते हैं, मानो परमेश्वर पहली बार सुन ही न पाए हों। या वह रिश्ता जहाँ आपने माफ़ तो कर दिया, पर हिसाब की एक छोटी बही अब भी मन के किसी कोने में खुली रखी है, ताकि ज़रूरत पड़ने पर पन्ने पलटे जा सकें। यह पद उसी बही पर हाथ रखता है। हमारी गति यह है कि क्षमा किश्तों में मिले और शर्तों पर टिके। परमेश्वर की गति यह है कि वे "पूरी रीति से" क्षमा करते हैं, एक ही बार में, बिना परखने की अवधि के। आज एक कागज़ पर वह एक बात लिखिए जिसे आप बार-बार कबूल करते आए हैं, उसके नीचे लिखिए "वह पूरी रीति से उसको क्षमा करेगा", और फिर उस कागज़ को फाड़ दीजिए।
प्रोफ़ाइल
ये शब्द उन लोगों के लिए थे जो बाबेल में बैठे थे, मंदिर जलकर राख, नगर टूटा हुआ, और उनके पास अपनी हार का एक साफ़ धार्मिक स्पष्टीकरण था: हमने पाप किया, इसलिए परमेश्वर ने हमें छोड़ दिया, और अब बात खत्म है। यह हिसाब गलत नहीं था, बस अधूरा था। जब उन्होंने सुना कि परमेश्वर के विचार उनके विचारों जैसे नहीं हैं, तो उनके कानों में यह किसी दार्शनिक रहस्य की तरह नहीं, बल्कि एक झटके की तरह पड़ा होगा: तुम्हारी गिनती कि तुम्हारा किस्सा समाप्त हो चुका है, वह मेरी गिनती नहीं है। निर्वासित लोगों के लिए सबसे कठिन विश्वास यही था कि उन्हें फिर से चाहा जा सकता है। पद 5 और भी आगे जाता है: जिन जातियों को वे जानते तक नहीं, वे भी दौड़ी आएँगी।
अंतर्पाठ
पौलुस रोमियों 11:33 में इसी विचार पर पहुँचते हैं, और ध्यान दीजिए कहाँ: दुःख की चर्चा के बाद नहीं, बल्कि इस बात के बाद कि परमेश्वर ने अन्यजातियों और इस्राएल दोनों पर दया करने का रास्ता निकाला। परमेश्वर की अगम्य गहराई पर विस्मय वहाँ अनुग्रह के सामने खड़े होकर आता है, न कि रहस्य के सामने हार मानकर। इसका उल्टा उदाहरण योना है: नीनवे को क्षमा मिलते ही वह क्रोधित होता है, क्योंकि उसके विचार परमेश्वर के विचारों जैसे नहीं थे, और उसे यही सबसे ज़्यादा चुभा। योना की नाराज़गी इस पद की सबसे ईमानदार टिप्पणी है, क्योंकि वह दिखाती है कि परमेश्वर की ऊँचाई हमें केवल सांत्वना नहीं देती, कभी-कभी हमें नाराज़ भी करती है।
संदर्भ
यशायाह के इस भाग की पृष्ठभूमि छठी शताब्दी ईसा पूर्व का निर्वासन है, जहाँ यहूदी एक विशाल साम्राज्य के भीतर एक हारी हुई, छोटी और शक्तिहीन जाति थे। बाबेल के देवताओं के भव्य जुलूस दिखते थे; यहोवा का मंदिर खंडहर था। ऐसे माहौल में अध्याय 55 बाज़ार की भाषा में बोलता है: मोल लो, दाम, रुपया, परिश्रम। यह उन लोगों की रोज़मर्रा की दुनिया थी, जहाँ हर चीज़ की कीमत थी और हर एहसान का बदला चुकाना पड़ता था। ठीक इसी बाज़ार के बीच परमेश्वर एक ऐसी दुकान खोलते हैं जहाँ कीमत नहीं ली जाती। पद 8 उसी असंगति की व्याख्या है: यह अर्थव्यवस्था तुम्हारी नहीं, मेरी है।
चिंतन
आप किस बात को "पूरी रीति से" क्षमा किया हुआ मानने से इनकार करते रहे हैं, अपने बारे में या किसी और के बारे में?
अगर परमेश्वर की ऊँचाई सबसे पहले उनकी क्षमा में दिखती है, तो यह पद आपके दुःख के प्रश्नों पर बोलने के तरीके को कैसे बदलता है?
पढ़ने योग्य मसीही पुस्तकें
आपकी भाषा में उपलब्ध, सावधानी से चुनी गई पुस्तकें।
अगस्तीन की व्यक्तिगत साक्षी परमेश्वर की अनुग्रह से बदलने वाली शक्ति को गहराई से प्रकट करती है।
चालीस दिनों की यह यात्रा आपको परमेश्वर के दिए जीवन-उद्देश्य को खोजने और जीने में सहायता करती है।
परमेश्वर की उपस्थिति का अभ्यास
रसोई में सेवा करते हुए भी परमेश्वर के साथ निरंतर संगति करने की सरल कला यह पुस्तक सिखाती है।
नाज़ी यातना-शिविर में भी क्षमा और विश्वास की यह सच्ची साक्षी परमेश्वर की विश्वासयोग्यता की गवाही देती है।
प्रतिदिन के भक्ति-लेख यीशु की कोमल आवाज़ सुनने और उसकी शांति में विश्राम पाने में सहायता करते हैं।
एक Amazon Associate के रूप में, Faith.network योग्य खरीदारी से आय अर्जित करता है। इससे मंच निःशुल्क बना रहता है।
Isaiah 55:8 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
यशायाह 55:8 का क्या अर्थ है?
यशायाह 55:8 किस विषय में है?
यशायाह 55:8 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
यशायाह 55:8 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
यशायाह 55:8 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Isaiah 55 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
भटकटैया की सन्ती सनौबर, और बिच्छू पेड़ की सन्ती मेंहदी उगेगी।" काँटे तो शाप की निशानी थे, आदम की मिट्टी की कहानी। परमेश्वर उन्हें बस उखाड़ता नहीं, वही मिट्टी में सुगंध वाला पेड़ लगाता है। तेरे जीवन की जो जगह सबसे चुभती है, वही उसके नाम का सदा का चिन्ह बन सकती है।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें