यशायाह 60:22
पाठ
एक वाक्य में परमेश्वर गिनती का पूरा गणित उलट देते हैं: "छोटे से छोटा एक हजार हो जाएगा और सबसे दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा।" जो कुल में सबसे नगण्य है, जिसकी गिनती किसी सूची में नहीं होती, वह हजार बन जाएगा; जो सबसे कमजोर है, वह राष्ट्र बन जाएगा। और फिर, मानो कोई हस्ताक्षर करके मुहर लगा रहा हो, वक्ता अपना नाम रखता है: "मैं यहोवा हूँ; ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूँगा।" यह पूरे अध्याय का समापन है, उस अध्याय का जो "उठ, प्रकाशमान हो" से शुरू हुआ था। प्रकाश, राष्ट्रों का आना, खुले फाटक, दुःख का अंत, और अब अंतिम बात: यह सब किसी की योजना या परिश्रम पर नहीं, बल्कि परमेश्वर के नाम और उनके समय पर टिका है।
केंद्रीय सत्य
इस पद में दो शब्द एक-दूसरे के आमने-सामने खड़े हैं और दोनों को साथ पकड़े रहना ही विश्वास है: "ठीक समय पर" और "शीघ्रता से।" परमेश्वर जल्दबाजी नहीं करते, पर ढीले भी नहीं हैं। जब उनका समय आता है, वे देर नहीं लगाते। इसका नैतिक परिणाम तीखा है: छोटे होना आपकी समस्या नहीं, आपकी स्थिति है, और उस स्थिति को बदलना आपका काम नहीं। हम अपनी दुर्बलता को छिपाने, बढ़ा-चढ़ाकर दिखाने या धक्का देकर खुद को बड़ा बनाने में जितनी ऊर्जा लगाते हैं, वह सब यहाँ बेकार घोषित हो जाती है। परमेश्वर वृद्धि देते हैं; हमें केवल उस छोटेपन में ईमानदारी और आज्ञाकारिता के साथ खड़े रहना है। यही अनुग्रह का व्यावहारिक चेहरा है: परिणाम उनका, निष्ठा हमारी।
मुख्य धारा
यह वचन परमेश्वर के काम करने के एक स्थायी तरीके का सार है। वे बड़े से शुरू नहीं करते। एक बाँझ स्त्री से एक जाति, एक बंदी दास से एक राष्ट्र, एक चरवाहे लड़के से एक राजवंश, और अंत में बेतलेहेम की चरनी से पूरी सृष्टि का उद्धार। यशायाह 60 में राष्ट्र सिय्योन के प्रकाश की ओर आते हैं, पर वह प्रकाश किसी सैन्य विजय से नहीं, बल्कि उस पर से उगता है जिसे "त्यागी गई और घृणित ठहरी" कहा गया (पद 15)। मसीह में यही पैटर्न अपने सबसे गहरे रूप में पूरा होता है: क्रूस पर टँगा हुआ एक ठुकराया हुआ आदमी, दुनिया की नजर में सबसे दुर्बल, और वहीं से वह "सामर्थी जाति" जन्म लेती है जिसमें हर भाषा और कुल के लोग गिने जाते हैं। इसलिए यह पद केवल भविष्य की भविष्यवाणी नहीं, परमेश्वर के चरित्र का दस्तखत है।
दर्पण
यह वचन उस बेचैनी पर हाथ रखता है जो हममें से अधिकतर को रोज सताती है: कि हम काफी नहीं हैं। दफ्तर में वह सहकर्मी जिसकी आवाज हमेशा सुनी जाती है और आपकी नहीं। वह छोटी सी मंडली जहाँ बीस लोग आते हैं और आप सोचते हैं कि इस मेहनत का क्या फायदा। घर में वह अनुशासन जो कोई नहीं देखता, वह बीमार माता-पिता की सेवा जिसका कोई प्रमाणपत्र नहीं मिलता। हम इस बेचैनी को दो तरीकों से हल करना चाहते हैं: या तो खुद को बड़ा दिखाकर, या हार मानकर। यह पद दोनों रास्ते बंद करता है। परमेश्वर कहते हैं कि वृद्धि उनका काम है और समय उनका है, इसलिए आपका काम केवल वफादारी है, चाहे वह कितनी ही छोटी दिखे। पर ध्यान दीजिए, यह आराम से ज्यादा एक चुनौती है: अगर बड़ा बनाना उनका काम है, तो आपके पास खुद को बड़ा बनाने के लिए झूठ बोलने, किसी को नीचा दिखाने या रविवार को दिखावा करने का कोई बहाना नहीं बचा।
आज एक कागज पर वह एक छोटा काम लिखिए जिसे आप इसलिए टाल रहे हैं क्योंकि वह "बहुत मामूली" लगता है, और अगले दस मिनट में उसे पूरा कर डालिए।
मुख्य पात्र
इस पद में एक ही सच्चा कर्ता है। "मैं यहोवा हूँ; ठीक समय पर यह सब कुछ शीघ्रता से पूरा करूँगा।" पूरे अध्याय में क्रियाएँ उन्हीं की हैं: मैं लाऊँगा, मैं ठहराऊँगा, मैं दया करूँगा, मैंने तुझे शोभायमान किया है। सिय्योन कुछ नहीं कमाती; वह केवल आँखें उठाकर देखती है (पद 4) और उसका मुख चमक उठता है। यह वह परमेश्वर है जो पद 10 में ईमानदारी से कहते हैं कि क्रोध में उन्होंने दुःख दिया था, और अब प्रसन्न होकर दया की है। वे अपने न्याय को छिपाते नहीं और अपनी करुणा को नापते नहीं। ऐसे परमेश्वर के सामने खड़ा होना आरामदायक नहीं है, पर भरोसेमंद है: जो अपनी नाराजगी के बारे में सच बोलते हैं, उनकी दया के वादे पर भी भरोसा किया जा सकता है।
एक बारीकी
"एक हजार" शब्द को जल्दी से मत पढ़िए। इब्रानी में एलेफ का अर्थ हजार भी है और कुल या वंश-समूह भी, यानी सेना और जनगणना की भाषा। इस्राएल अपने लोगों को "हजारों" में गिनता था। तो यह केवल संख्या का बढ़ना नहीं, बल्कि गिनती में शामिल होना है। जो अब तक किसी सूची में नाम रखने लायक नहीं समझा जाता था, वह अब खुद एक पूरा कुल बन जाता है। गिदोन की याद कीजिए, जिसने कहा था कि उसका कुल मनश्शे में सबसे कमजोर है और वह अपने पिता के घराने में सबसे छोटा (न्यायियों 6:15), और उसी से परमेश्वर ने छुटकारा दिया। यहाँ वही तर्क पूरे लौटे हुए समुदाय पर लागू होता है।
पहले श्रोता
कल्पना कीजिए: बाबुल से लौटे कुछ हजार लोग, टूटी शहरपनाह, अधूरा मंदिर, पड़ोसी जातियों का ताना, और फारस के साम्राज्य का एक छोटा सा प्रांत होने की अपमानजनक हकीकत। उनके कान में जनगणना के आँकड़े गूँजते थे और वे जानते थे कि वे कितने कम हैं। ऐसे लोगों को सुनाया गया कि राजा आएँगे, फाटक कभी बंद न होंगे, और सबसे दुर्बल एक सामर्थी जाति बन जाएगा। यह हास्यास्पद लगा होगा। इसीलिए वाक्य के अंत में वह हस्ताक्षर आता है, वही नाम जो मिस्र से निकालते समय प्रकट हुआ था। उनके लिए "मैं यहोवा हूँ" कोई धार्मिक तकिया-कलाम नहीं था, बल्कि इतिहास से लिया गया सबूत था कि यह परमेश्वर असंभव को पहले भी कर चुके हैं।
चिंतन
आप अपने जीवन के किस हिस्से में परमेश्वर के "ठीक समय" का इंतजार करने के बजाय खुद को बड़ा बनाने की कोशिश कर रहे हैं?
अगर आपकी सबसे छोटी और सबसे अनदेखी वफादारी को परमेश्वर एक दिन "एक हजार" बना सकते हैं, तो कल सुबह आप उसे किस भाव से करेंगे?
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Isaiah 60:22 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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यशायाह 60:22 का क्या अर्थ है?
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