यशायाह 60:19
पाठ
यशायाह ६० के अन्त में एक ऐसा वाक्य आता है जो पूरी दृष्टि को उलट देता है: "फिर दिन को सूर्य तेरा उजियाला न होगा, न चाँदनी के लिये चन्द्रमा परन्तु यहोवा तेरे लिये सदा का उजियाला और तेरा परमेश्वर तेरी शोभा ठहरेगा।" अब तक अध्याय में जातियाँ सोना, लोबान, लबानोन की लकड़ी लेकर सिय्योन को सजाने आ रही थीं। यहाँ परमेश्वर कहते हैं कि अन्ततः न सूर्य, न चाँद, न आयातित सोना, बल्कि वे स्वयं उस नगर का प्रकाश और उसका गहना होंगे।
मर्म
यह केवल बेहतर रोशनी का वादा नहीं है, यह प्रकाश के स्रोत का बदल जाना है। पूरे बाइबल में परमेश्वर प्रायः देनेवाले हैं: वे रोटी देते हैं, भूमि देते हैं, शान्ति देते हैं। यहाँ वे वरदान नहीं, स्वयं को देते हैं। उद्धार का चरम बिन्दु परिस्थितियों का सुधार नहीं, उपस्थिति है। सूर्य एक मध्यस्थ है, एक माध्यम जिसके द्वारा प्रकाश हम तक पहुँचता है; मध्यस्थ तब हट जाता है जब मुख आमने-सामने हो। इसीलिए अगला पद कहता है कि "तेरे विलाप के दिन समाप्त हो जाएँगे" (पद २०)। जहाँ परमेश्वर स्वयं उजियाला हैं, वहाँ अन्धकार का कोई कोना बचता ही नहीं, और शोक अन्धकार के कोनों में ही पलता है।
सूत्र
सृष्टि की कहानी याद कीजिए: पहले दिन प्रकाश हुआ, और सूर्य-चाँद चौथे दिन बने। अर्थात् प्रकाश सूर्य से पुराना है; सूर्य प्रकाश का पात्र है, उसका जनक नहीं। यशायाह ६०:१९ हमें उसी आदिम अवस्था में लौटाता है, पर ऊपर की ओर: अब प्रकाश परमेश्वर की उपस्थिति से सीधा आता है। नए नियम में यही धारा यीशु मसीह तक पहुँचती है, जो स्वयं को जगत की ज्योति कहते हैं, और प्रकाशितवाक्य के अन्त में नए यरूशलेम को न सूर्य की आवश्यकता है न चाँद की, क्योंकि परमेश्वर की महिमा उसे प्रकाशित करती है और मेम्ना उसका दीपक है। शास्त्र की शुरुआत प्रकाश से होती है और अन्त उस प्रकाश से जिसका कोई अस्त नहीं।
दर्पण
हम सब गौण प्रकाशों के सहारे जीते हैं। नौकरी जो पहचान देती है, बच्चों की प्रगति जो दिन को अर्थ देती है, स्वास्थ्य जो योजनाओं को सम्भव रखता है, कोई एक रिश्ता जिसके बिना घर अँधेरा लगता है। ये बुरे नहीं हैं; परमेश्वर ने ही सूर्य और चाँद बनाए। पर वे चन्द्रमा हैं, सूर्य नहीं। जब कोई मित्र दूर चला जाता है, जब रिपोर्ट अच्छी नहीं आती, जब बच्चा वैसा नहीं निकलता जैसा सोचा था, तब पता चलता है कि हमने चाँदनी को ही दिन समझ रखा था। यह पद आपको उन उजालों से घृणा करना नहीं सिखाता, उन्हें उनकी जगह पर रखना सिखाता है।
आज शाम कागज पर उस एक चीज़ या व्यक्ति का नाम लिखिए जिसके बिना आपका जीवन अँधेरा लगता है, और उस नाम के नीचे लिखकर ज़ोर से पढ़िए: "यहोवा तेरे लिये सदा का उजियाला।"
अन्तर्पाठ
तीन जगहें इस पद के साथ बात करती हैं। पहली, उत्पत्ति १, जहाँ सूर्य और चाँद को "उजियाला देने" के लिए ठहराया जाता है; यशायाह उनकी नौकरी समाप्त होने की घोषणा करता है, क्योंकि जिसने उन्हें नियुक्त किया था वही स्वयं आ खड़ा हुआ। दूसरी, प्रकाशितवाक्य २१ और २२, जहाँ यूहन्ना लगभग शब्दशः यही चित्र दोहराते हैं, और यशायाह ६० के खुले फाटक तथा जातियों का धन भी वहीं लौट आते हैं; इससे साफ़ होता है कि यह अध्याय केवल बाबुल से लौटे यहूदियों का इतिहास नहीं, अन्तिम नगर की भविष्यवाणी भी है। तीसरी, और यह तनाव पैदा करती है: उसी पुस्तक में यशायाह ३०:२६ कहता है कि उस दिन चाँद सूर्य जैसा और सूर्य सातगुना तेज़ होगा। एक जगह ज्योतिर्मण्डल बढ़ाया जाता है, दूसरी जगह हटा दिया जाता है। दोनों चित्र एक ही बात कहते हैं अलग भाषा में: वर्तमान प्रकाश उस दिन के लिए पर्याप्त नहीं।
विवरण
"शोभा" शब्द पर रुकिए। इब्रानी में यह तिफ़अरेत है, गहना, सुन्दरता, वह चीज़ जिससे कोई सजता है। यह शब्द इस अध्याय में बार-बार लौटता है: पद ७ में "शोभायमान भवन", पद ९ में "उसने तुझे शोभायमान किया है", पद १३ में लबानोन के पेड़ पवित्रस्थान को "सुशोभित" करने आते हैं। पूरा अध्याय सजावट की सूची है, ऊँट, सोना, लोबान, मेढ़े, देवदार। और फिर पद १९ में सूची कट जाती है: तेरा परमेश्वर तेरी शोभा ठहरेगा। जो नगर बाहर से मिली चीज़ों से सुन्दर दिख रहा था, अन्त में उसकी सुन्दरता कोई वस्तु नहीं, कोई व्यक्ति है।
पहचान
पहले सुननेवाले वे लोग थे जिनका नगर अभी खण्डहर था, शहरपनाह टूटी, मन्दिर साधारण, राजा कोई नहीं। उनके लिए रात रोमांटिक नहीं, ख़तरनाक थी: तेल महँगा, दीये छोटे, फाटक अँधेरा होते ही बन्द, और बाहर लुटेरे। इसी पृष्ठभूमि में पद ११ का "तेरे फाटक सदैव खुले रहेंगे" और पद १९ का "सूर्य तेरा उजियाला न होगा" एक ही वादा है: अब कभी बन्द करने की, कभी डरने की ज़रूरत नहीं। और जो जाति निर्वासन में यह मानने लगी थी कि परमेश्वर ने मुँह फेर लिया, उसे बताया गया कि वही मुँह अब उसका स्थायी उजाला बनेगा। यह उनके लिए धर्मशास्त्र नहीं, साँस लेने की जगह थी।
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आपके जीवन का कौन-सा "चन्द्रमा" इतना बड़ा हो गया है कि आप उसे सूर्य समझ बैठे हैं, और उसका मलिन होना आपको कैसा लगता है?
यदि परमेश्वर स्वयं आपकी शोभा हैं, तो आप किन चीज़ों से अपने आपको सजाना छोड़ सकते हैं, इस सप्ताह, ठोस रूप से?
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