बाइबल व्याख्या

यहोशू 18

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

शीलो में मिलापवाला तम्बू खड़ा हो चुका है, देश बड़े हिस्से में वश में आ गया है, और फिर भी सात गोत्र अपना भाग लिए बिना बैठे हैं। यहोशू उन्हें झिंझोड़ता है: "कब तक ढिलाई करते रहोगे?" वह हर गोत्र से तीन-तीन आदमी चुनवाकर उन्हें देश नापने, लिखने और लौट आने भेजता है; फिर यहोवा के सामने चिट्ठी डालकर बाँट कर देता है। पहली चिट्ठी बिन्यामीन की निकलती है, और अध्याय का बाकी हिस्सा सीमाओं और छब्बीस नगरों की सूखी सूची है, जिसके बीच में चुपचाप एक नाम पड़ा है: यबूस, जो यरूशलेम भी कहलाता है।

मूल बात

यह अध्याय एक असहज बात कहता है: परमेश्वर का दिया हुआ वरदान अपने आप आपकी जेब में नहीं आता। देश दिया जा चुका है, यह भाषा पूरे अध्याय में भूतकाल में है, "जो देश तुम्हारे पूर्वजों के परमेश्वर यहोवा ने तुम्हें दिया है"। दान पूरा है; अधिकार में लेना अधूरा है। यह विरोधाभास नहीं, अनुग्रह का ढंग है। परमेश्वर देते हैं, और फिर हमें उठकर चलने, नापने, लिखने और बसने के लिए बुलाते हैं। जो लोग सोचते हैं कि कृपा हमें निष्क्रिय बनाती है, उन्हें यहोशू का सवाल चुभेगा। और जो सोचते हैं कि सब कुछ हमारी मेहनत पर टिका है, उन्हें चिट्ठी चुभेगी: सीमाएँ मनुष्य नापता है, बँटवारा यहोवा के सामने होता है।

सूत्र

इस अध्याय की धुरी शीलो है, वह पहली जगह जहाँ तम्बू भटकना छोड़कर ठहरता है। भटकती उपस्थिति को घर मिल गया, क्योंकि लोगों को घर मिल गया। यही परमेश्वर की पूरी कहानी का आकार है: वे अपने लोगों के बीच बसना चाहते हैं। शीलो आगे टूटेगा, मन्दिर बनेगा और वह भी गिरेगा, जब तक वह न आया जिसमें परमेश्वर ने देह लेकर हमारे बीच अपना तम्बू खड़ा किया। और लेवियों के बारे में जो कहा गया है, वह इस सूत्र की सबसे तीखी लड़ी है: "यहोवा का दिया हुआ याजकपद ही उनका भाग है।" ज़मीन के बजाय परमेश्वर स्वयं विरासत। मसीह में यही हर विश्वासी की स्थिति बन जाती है।

आत्म-दर्पण

"कब तक ढिलाई करते रहोगे?" इब्रानी शब्द मित्रप्पीम का अर्थ है हाथ ढीले छोड़ देना, पकड़ खोल देना। यह आलस नहीं, थकान है। सात गोत्रों ने लड़ाइयाँ देखी थीं; अब छावनी आरामदेह लग रही थी। आपको यह पहचान में आएगा। वह बातचीत जो आपने अपने पिता के साथ पाँच साल से टाल रखी है। वह प्रार्थना जो आपने छोड़ दी क्योंकि उत्तर देर से आया। वह सेवा जिसके लिए आपने हाँ कही थी और जिसे अब आप दूसरों के भरोसे चलने देते हैं। वह क्षमा जिसे आप सैद्धान्तिक रूप से मानते हैं पर व्यावहारिक रूप से नापने नहीं गए। हमारी सबसे बड़ी हार अक्सर इनकार नहीं, स्थगन होती है। और ध्यान दें कि यहोशू ने उन्हें युद्ध पर नहीं, नापने पर भेजा: जाओ, देखो, लिखकर लाओ। ठोस, छोटा, पहला कदम।

आज एक कागज़ लें और उस एक बात का नाम लिखें जिसे आप जानते हैं कि परमेश्वर ने आपको दिया है और आपने अभी तक अपने अधिकार में नहीं लिया, और उसके नीचे इस हफ़्ते की एक तारीख़ लिख दें।

मुख्य पात्र

यहोशू यहाँ सेनापति से ज़्यादा चरवाहा दिखता है। वह लोगों को धिक्कारता है, पर उन्हें अकेला नहीं छोड़ता; वह उन्हें ढाँचा देता है, प्रति गोत्र तीन आदमी, एक स्पष्ट काम, लौटने की जगह। बूढ़ा हो चुका नेता जानता है कि वह सब कुछ खुद नहीं कर सकता, और यह उसे कड़वा नहीं बनाता। सबसे बड़ी बात: जब सारी जानकारी उसके हाथ में आ जाती है, तब भी वह खुद फैसला नहीं करता। "मैं यहाँ शीलो में यहोवा के सामने तुम्हारे लिये चिट्ठी डालूँगा।" जिसके पास नक्शा है, उसके पास सत्ता आ सकती थी। यहोशू वह सत्ता परमेश्वर के हाथ में लौटा देता है। नेतृत्व का सबसे कठिन हिस्सा यही है: जानकारी को नियंत्रण में न बदलने देना।

अन्तर्पाठ

लेवियों के बारे में कही गई बात भजन संहिता में गूँजती है, जहाँ भजनकार कहता है कि यहोवा ही उसका भाग और उसका कटोरा हैं, यानी जिसके पास परमेश्वर हैं उसे ज़मीन की सूची की ज़रूरत नहीं। दूसरी ओर एक अंधेरी गूँज भी है: शीलो, जो यहाँ आराधना का पहला स्थायी केंद्र बनता है, यिर्मयाह के दिनों में खंडहर बन चुका था, और परमेश्वर ने उसी खंडहर को यरूशलेम के लिए चेतावनी बनाया। पवित्र जगह होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जो मण्डली आज तम्बू खड़ा करती है, वह कल भी विश्वासयोग्य रहेगी, यह अपने आप तय नहीं होता।

प्रश्न

बिन्यामीन की नगर-सूची में "यबूस (जो यरूशलेम भी कहलाता है)" लिखा है। पर यबूस उस समय बिन्यामीन का नहीं था; वह लगभग चार सौ साल बाद दाऊद के हाथ आएगा। तो यह सूची क्या है, इतिहास या दावा? ईमानदारी से: यह दावा है। परमेश्वर के वचन ने वह नाम बिन्यामीन के खाते में लिख दिया, जबकि ज़मीन पर यबूसी वहीं बसे रहे। यह सुविधाजनक नहीं है। इसका मतलब है कि परमेश्वर की सच्ची घोषणा और हमारे अनुभव के बीच पीढ़ियों का फ़ासला हो सकता है, और उस फ़ासले में मरने वाले लोग होते हैं जिन्होंने वादा तो सुना पर पूरा होते नहीं देखा। यह अन्याय जैसा लगता है, और शास्त्र इसे मिटाता नहीं। वह केवल इतना कहता है: जो लिखा गया, वह रद्द नहीं हुआ।

चिंतन

आपके जीवन में वह कौन-सी बात है जिसे आप सैद्धान्तिक रूप से "परमेश्वर का दिया हुआ" मानते हैं, पर व्यावहारिक रूप से जिसकी सीमाएँ नापने आप कभी नहीं गए?

यदि आपके पास भी जानकारी और अधिकार होता जैसा यहोशू के पास था, तो आप उसे परमेश्वर के सामने रखते या अपने फैसले में बदल लेते?

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Joshua: An Introduction and Commentary

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Joshua 18 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

यहोशू 18 का क्या अर्थ है?
शीलो में मिलापवाला तम्बू खड़ा हो चुका है, देश बड़े हिस्से में वश में आ गया है, और फिर भी सात गोत्र अपना भाग लिए बिना बैठे हैं। यहोशू उन्हें झिंझोड़ता है: "कब तक ढिलाई करते रहोगे?" वह हर गोत्र से तीन-तीन आदमी चुनवाकर उन्हें देश नापने, लिखने और लौट आने भेजता है; फिर यहोवा के सामने चिट्ठी डालकर बाँट कर देता है। पहली चिट्ठी बिन्यामीन की निकलती है, और अध्याय का बाकी हिस्सा सीमाओं और छब्बीस नगरों की सूखी सूची है, जिसके बीच में चुपचाप एक नाम पड़ा है: यबूस, जो यरूशलेम भी कहलाता है।
यहोशू 18 किस विषय में है?
इस अध्याय की धुरी शीलो है, वह पहली जगह जहाँ तम्बू भटकना छोड़कर ठहरता है। भटकती उपस्थिति को घर मिल गया, क्योंकि लोगों को घर मिल गया। यही परमेश्वर की पूरी कहानी का आकार है: वे अपने लोगों के बीच बसना चाहते हैं। शीलो आगे टूटेगा, मन्दिर बनेगा और वह भी गिरेगा, जब तक वह न आया जिसमें परमेश्वर ने देह लेकर हमारे बीच अपना तम्बू खड़ा किया। और लेवियों के बारे में जो कहा गया है, वह इस सूत्र की सबसे तीखी लड़ी है: "यहोवा का दिया हुआ याजकपद ही उनका भाग है।" ज़मीन के बजाय परमेश्वर स्वयं विरासत। मसीह में यही हर विश्वासी की स्थिति बन जाती है।
यहोशू 18 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
आज एक कागज़ लें और उस एक बात का नाम लिखें जिसे आप जानते हैं कि परमेश्वर ने आपको दिया है और आपने अभी तक अपने अधिकार में नहीं लिया, और उसके नीचे इस हफ़्ते की एक तारीख़ लिख दें।
यहोशू 18 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
लेवियों के बारे में कही गई बात भजन संहिता में गूँजती है, जहाँ भजनकार कहता है कि यहोवा ही उसका भाग और उसका कटोरा हैं, यानी जिसके पास परमेश्वर हैं उसे ज़मीन की सूची की ज़रूरत नहीं। दूसरी ओर एक अंधेरी गूँज भी है: शीलो, जो यहाँ आराधना का पहला स्थायी केंद्र बनता है, यिर्मयाह के दिनों में खंडहर बन चुका था, और परमेश्वर ने उसी खंडहर को यरूशलेम के लिए चेतावनी बनाया। पवित्र जगह होना सुरक्षा की गारंटी नहीं है। जो मण्डली आज तम्बू खड़ा करती है, वह कल भी विश्वासयोग्य रहेगी, यह अपने आप तय नहीं होता।
यहोशू 18 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
आपके जीवन में वह कौन-सी बात है जिसे आप सैद्धान्तिक रूप से "परमेश्वर का दिया हुआ" मानते हैं, पर व्यावहारिक रूप से जिसकी सीमाएँ नापने आप कभी नहीं गए?
हमारे साझेदारों के सहयोग से संभव

Joshua 18 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

धन्यवाद संपादकीय पर पद 22

धन्यवाद है आपका कि "बेतराबा, समारैम, बेतेल" जैसे छोटे छोटे नगरों के नाम भी आपके वचन में लिखे गए। आपने बिन्यामीन के हर परिवार को रहने की ठोस जगह दी। मेरा छोटा सा घर, मेरा मोहल्ला, मेरा ठिकाना भी आपकी ही देन है, और आप उसका नाम जानते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 12

बिन्यामीन के हिस्से की सीमा यरीहो के पास से होकर जाती है, उसी यरीहो के पास जहाँ कभी दीवारें गिरी थीं। जो कल युद्ध का मैदान था, वह आज घर की बाड़ बन गया। और सीमा का अंत? "बेतावेन के जंगल में निकली।" तेरे हिस्से में भी शायद कुछ जंगल हो। पर वह भी परमेश्वर का नापा हुआ है, भूल से मिला नहीं।

प्रार्थना संपादकीय पर पद 26

पिता, जिन नामों को कोई याद नहीं रखता, वे भी आपकी सूची में लिखे हैं। मुझे भी अपनी जगह दीजिए, चाहे वह छोटी और साधारण ही क्यों न हो। मैं दूसरों की जगह देखकर बेचैन हो जाता हूँ, पर आपने जो मेरे लिए ठहराया है, उसमें चैन से बसना सिखाइए।

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