लैव्यव्यवस्था 25:10
पाठ
पचासवाँ वर्ष अलग करके पवित्र ठहराया जाए। उस वर्ष पूरे देश में, हर बस्ती और हर खेत में, "छुटकारे का प्रचार" किया जाए। इस वर्ष का नाम जुबली है, और इसका व्यावहारिक अर्थ बहुत ठोस है: जिसने कर्ज़ के दबाव में अपनी पुश्तैनी ज़मीन बेच दी थी, वह उसे वापस पाएगा, और जो गरीबी के कारण किसी और के घर में मजदूर बनकर रह रहा था, वह अपने परिवार में लौट जाएगा। पिछला पद बताता है कि इसकी घोषणा कैसे होती है: प्रायश्चित के दिन, सातवें महीने के दसवें दिन, "जय जयकार के महाशब्द का नरसिंगा" पूरे देश में फूँका जाता है। यानी क्षमा के दिन की गूँज सीधे अर्थव्यवस्था में उतरती है।
मूल बात
कल्पना कीजिए कि आप उस दिन एक पहाड़ी ढलान पर खड़े हैं। तीन साल पहले सूखा पड़ा, बीज खत्म हुआ, और आपने अपने पिता की ज़मीन का वह टुकड़ा पड़ोसी को बेच दिया जिस पर आपके दादा की कब्र है। आपका बड़ा बेटा अब उसी पड़ोसी के यहाँ मजदूरी करता है। फिर दूर से नरसिंगे की आवाज़ आती है, और आवाज़ पास आती जाती है, गाँव दर गाँव। इस पद का धर्मशास्त्रीय हृदय यही है: परमेश्वर गरीबी को स्थायी नहीं होने देते। पद 23 इसका आधार देता है, "भूमि मेरी है," इसलिए कोई भी इंसान किसी दूसरे इंसान को हमेशा के लिए नहीं खरीद सकता। छुटकारा यहाँ भावना नहीं, दस्तावेज़ है; अनुग्रह यहाँ ज़मीन की पैमाइश में लिखा जाता है।
जोड़ने वाला धागा
इस्राएल में "छुड़ानेवाला" कोई काव्यात्मक उपाधि नहीं थी, बल्कि कानूनी पद था। पद 25 कहता है कि कंगाल हुए आदमी की बेची हुई ज़मीन को "उसके कुटुम्बियों में से जो सबसे निकट हो" वह छुड़ा ले। यानी छुटकारे के लिए दो चीज़ें चाहिए: रिश्तेदारी और सामर्थ्य। जो सक्षम है पर अपना नहीं, वह नहीं छुड़ा सकता; जो अपना है पर कंगाल है, वह भी नहीं। बाइबल का पूरा धागा इसी जोड़ पर टिका है। यीशु मसीह ने जब अपनी सेवकाई की शुरुआत नासरत की सभा में यशायाह का वह हिस्सा पढ़कर की जिसमें बंधुओं की रिहाई और "प्रभु के प्रसन्न रहने के वर्ष" की घोषणा है, तो उन्होंने जुबली की शब्दावली जानबूझकर उठाई। वे निकट कुटुम्बी बने, हमारा मांस और लहू, और उनके पास चुकाने का दाम भी था। नरसिंगा प्रायश्चित के दिन फूँका जाता था; क्रूस पर वही दोनों बातें एक साथ हुईं, पाप की कीमत और कर्ज़दार की रिहाई।
दर्पण
हम आर्थिक पतन को नैतिक चरित्र मान लेते हैं। जो आदमी तीन बार धंधे में डूबा, उसके बारे में हमारे मन में एक फाइल बन जाती है, और वह फाइल कभी बंद नहीं होती। जुबली इसी फाइल पर हमला करती है। यह कहती है कि कोई भी इंसान अपनी सबसे बुरी आर्थिक घड़ी में हमेशा के लिए कैद नहीं रहेगा। अपने आप से पूछिए: आपके जीवन में कौन है जिसे आपने स्थायी रूप से "नीचे" की श्रेणी में रख दिया है? वह भाई जिसने उधार लिया और लौटाया नहीं, वह सहकर्मी जिसकी गलती दस साल पुरानी है, वह रिश्तेदार जिसे आप मिलने पर एहसान जताए बिना नहीं रह पाते। पद 17 की चेतावनी सीधी है: "तुम अपने-अपने भाई-बन्धु पर उपद्रव न करना।" दबाव डालना भी उपद्रव है।
आज ही एक कागज़ पर उस व्यक्ति का नाम और वह रकम या वह एहसान लिखिए जो आपके पास उसके विरुद्ध बकाया है, और उनमें से एक ऐसा चुनकर, जिसे आप सचमुच छोड़ सकते हैं, उसे अभी संदेश भेज दीजिए कि यह हिसाब खत्म हुआ।
एक बारीकी
"छुटकारे का प्रचार" में जो इब्रानी शब्द है, वह है द्रोर, जिसका अर्थ है बंधन से खुली छूट, जैसे पिंजरे का दरवाज़ा खोल देना। ध्यान दीजिए कि आज्ञा "छुटकारा देना" नहीं, "छुटकारे का प्रचार करना" है। घोषणा सार्वजनिक है, और यही उसकी ताकत है। कर्ज़दार को खुद अपने हक की याद दिलानी नहीं पड़ती; सारे देश में नरसिंगा उसके लिए बोलता है। प्राचीन संसार में गरीब आदमी की सबसे बड़ी कमज़ोरी यही थी कि उसकी आवाज़ कचहरी तक नहीं पहुँचती थी। यहाँ परमेश्वर ही सार्वजनिक घोषणा करवाते हैं, लेनदार के कानों में भी, ताकि कोई यह न कह सके कि उसे पता नहीं था। अनुग्रह गुप्त समझौता नहीं, खुला ऐलान है।
मुख्य पात्र
इस पद के पीछे खड़े परमेश्वर एक ज़मींदार हैं जो अपनी ज़मीन किराए पर नहीं, विरासत में देते हैं। पद 23 में वे इस्राएलियों को अपनी ही भूमि में "परदेशी और बाहरी" कहते हैं, और पद 55 में दो टूक बोलते हैं: "इस्राएली मेरे ही दास हैं; वे मिस्र देश से मेरे ही निकाले हुए दास हैं।" यह ईर्ष्यालु स्वर नहीं, रक्षात्मक स्वर है। जिसने ईंट के भट्ठों से लोगों को निकाला, वह देखना नहीं चाहते कि वही लोग कनान में एक नया भट्ठा खड़ा कर लें, इस बार अपने ही भाइयों के लिए। परमेश्वर का चरित्र यहाँ दो धारों वाला है: वे उदार हैं कि सब कुछ देते हैं, और वे सख्त हैं कि किसी को उसे हड़पने नहीं देते। उनकी स्मृति लंबी है; मिस्र उनके लिए सदा वर्तमान रहता है।
श्रोता
ये निर्देश उन लोगों ने सुने जिनके पास अभी ज़मीन थी ही नहीं। सीनै के पास, तंबुओं में, धूल और भेड़ों की गंध के बीच, उन्हें बताया गया कि पचासवें साल क्या करना है। यह भविष्य के बारे में इतना निश्चित बोलना था कि सुननेवालों की साँस रुक जाए। साथ ही वे उस संसार को जानते थे जहाँ नया राजा गद्दी पर बैठते ही कभी-कभी कर्ज़ माफी का फरमान जारी करता था, राजा की मर्ज़ी पर, एक बार, कृपा के रूप में। यहाँ वह कृपा कैलेंडर में गाड़ दी गई, सात गुणा सात, गिनती करने योग्य, राजा की मनमर्ज़ी से बाहर। गरीब किसान के लिए इसका मतलब था कि वह अपने बेटे से कह सकता था: गिनती करते रहो, एक दिन नरसिंगा बजेगा।
आपके हिसाब की किन कॉपियों में आप नाम दर्ज रखते हैं, और कौन सा नाम आज काटा जा सकता है?
अगर अनुग्रह आपके बजट और आपके कैलेंडर में लिखा जाता, तो उसमें क्या बदलना पड़ता?
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Leviticus 25:10 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
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Leviticus 25 पर समुदाय क्या साझा करता है
इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।
और जुबली के वर्ष में छूट जाएगा, और वह अपनी निज भूमि का अधिकारी हो जाएगा।" ध्यान दे, जिसके पास लौटाने को कुछ न था, उसे भी भूमि वापस मिली। छुटकारा उसकी जेब पर नहीं, परमेश्वर के ठहराए समय पर टिका था। तेरी असफलता आखिरी शब्द नहीं है। जो तू खो बैठा है, उसे लौटाने वाला परमेश्वर आज भी जीवित है।
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