बाइबल व्याख्या

नहूम 3

बाइबल
यह अध्याय JL Group के सहयोग से संभव हुआ है

पाठ

नहूम का तीसरा अध्याय नीनवे पर एक "हाय" के साथ खुलता है: वह नगरी जो खून, छल और लूट से भरी है, जिसकी लूट कभी कम नहीं पड़ती। कवि हमें युद्ध के बीच खड़ा कर देता है, कोड़े फटकारते हैं, रथ उछलते हैं, और शवों का ढेर इतना ऊँचा है कि लोग "मुर्दों से ठोकर खा खाकर चलते हैं।" फिर परमेश्वर स्वयं बोलते हैं: "देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ।" आगे मिस्र की अमोन नगरी का उदाहरण, टिड्डियों का रूपक, और अंत में वह वाक्य जो सब समेट लेता है: "तेरा घाव न भर सकेगा, तेरा रोग असाध्य है।"

मर्म

यह अध्याय बताता है कि परमेश्वर हिंसा को नैतिक रूप से तटस्थ नहीं मानते। साम्राज्य अपने आप को व्यवस्था कहता है, अपनी लूट को कर, अपने आतंक को शांति नीति। नहूम इन नामों को छीन लेता है और असली शब्द रख देता है: हत्या, छल, वेश्यावृत्ति, टोना। पद 5 का वाक्य "मैं तेरे विरुद्ध हूँ" पूरे अध्याय की धुरी है, क्योंकि यहाँ हार का कारण सैन्य नहीं, नैतिक है। नीनवे इसलिए गिरती है कि परमेश्वर उसके विरुद्ध खड़े हैं। और ध्यान दें, यह क्रोध अंधा नहीं है, बल्कि उन जातियों के प्रति सहानुभूति से जन्मा है जिन्हें नीनवे ने "बेच डाला।" जहाँ किसी का शोषण होता है, वहाँ परमेश्वर उदासीन दर्शक नहीं रहते।

मुख्य सूत्र

नीनवे का पतन उस बड़ी कहानी का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर धीरे-धीरे हर उस शक्ति को उतारते हैं जो स्वयं को अंतिम समझती है। पद 17 की तस्वीर लगभग व्यंग्य है: राजा के मुकुटधारी अफसर सर्दी में बाड़ पर टिकी टिड्डियाँ हैं, धूप निकली और गायब, "कोई नहीं जानता कि वे कहाँ गए।" यही तर्क मरियम के गीत तक और यीशु मसीह के क्रूस तक चलता है, जहाँ रोम की सारी शक्ति एक मरते हुए आदमी के आगे खोखली सिद्ध हुई। मसीह में परमेश्वर ने एक और रास्ता भी खोला: वे स्वयं उस हिंसा के नीचे आ गए जिसकी नीनवे ने आदत बना ली थी। न्याय टला नहीं, वह किसी और के कंधे पर आया।

दर्पण

अब असली सवाल: हम अपनी लूट को क्या नाम देते हैं। वह ठेका जो सिर्फ इसलिए मिला कि आपने किसी छोटे व्यापारी की कीमत तोड़ दी। वह घरेलू सहायक जिसका वेतन आपने आठ साल से नहीं बढ़ाया। वह मज़ाक जिससे दफ़्तर में एक जूनियर हर बार थोड़ा और सिकुड़ जाता है। घर में वह लहज़ा जिससे पत्नी या बच्चा चुप हो जाता है, और आप इसे अनुशासन कहते हैं। नीनवे का पाप यह नहीं था कि वह क्रूर थी, बल्कि यह कि उसने क्रूरता को व्यवस्था के रूप में स्वाभाविक बना लिया था, "लूट कम नहीं होती है।" जहाँ आपकी सुविधा किसी और की चुप्पी पर टिकी है, वहाँ पद 5 आपके नाम के साथ पढ़ा जाना चाहिए।

अन्तर्पाठ

योना की पुस्तक इसी नीनवे को पश्चाताप करते दिखाती है, और परमेश्वर उसे क्षमा कर देते हैं। नहूम उसी शहर का अंत लिखता है। दोनों को साथ रखिए और आप कुछ असुविधाजनक सीखते हैं: कृपा वास्तविक है, पर वह स्थायी छूट नहीं है। एक पीढ़ी की तौबा अगली पीढ़ी की क्रूरता को ढँक नहीं देती। दूसरी गूँज यशायाह 10 में है, जहाँ अश्शूर परमेश्वर के हाथ का "डंडा" है, फिर उसी डंडे पर न्याय आता है क्योंकि उसने अपने आप को औज़ार नहीं, कर्ता समझ लिया। जो लोग परमेश्वर के काम में उपयोगी हुए हैं, वे भी अपनी उपयोगिता के पीछे छिप नहीं सकते।

प्रश्न

पद 19 काँटे की तरह चुभता है: "जितने तेरा समाचार सुनेंगे, वे तेरे ऊपर ताली बजाएँगे।" क्या परमेश्वर के वचन में किसी के विनाश पर तालियाँ बजाना ठीक है? नहूम यह हमें सिखाने के लिए नहीं कहता कि हम शत्रु के पतन का जश्न मनाएँ, वह बता रहा है कि पीड़ितों की राहत कैसी दिखती है। जिस माँ का बच्चा सड़क पर पटका गया, उसके मुँह में यह वाक्य निन्दा नहीं, साँस है। फिर भी तनाव बना रहता है, क्योंकि यीशु मसीह हमें शत्रु से प्रेम करना सिखाते हैं। मैं इसे सुलझाता नहीं: पीड़ित की राहत और मसीह की क्षमा एक ही परमेश्वर में मिलती हैं, पर वह मेल हमारे भीतर अक्सर अभी अधूरा है।

श्रोता

नहूम के पहले सुननेवाले यहूदा के वे लोग थे जिनके दादा-परदादा ने अश्शूर की सेना को देखा था: गाँव जलते, कैदी नंगे कतार में बँधे, राजाओं के मुँह में काँटे। उनके लिए नीनवे कोई प्रतीक नहीं, एक सचमुच का पता था, जिसके नाम से बच्चे चुप हो जाते थे। पद 14 का उपहास वे मुस्कुराकर सुनते होंगे: "पानी भर ले, गढ़ों को अधिक दृढ़ कर," जैसे कोई कहे, अपनी तैयारी करते रहो। और पद 7 का प्रश्न, "कौन उसके कारण विलाप करे?", उनके लिए एक मुक्ति थी: वह साम्राज्य जिसने सबको रुलाया, उसके लिए कोई रोनेवाला नहीं मिलेगा। इतिहास सचमुच परमेश्वर के हाथ में है, यह उनके लिए सिद्धांत नहीं, जीने का आधार था।

चिन्तन

मेरे जीवन में कौन सी सुविधा किसी और की चुप्पी या कमज़ोरी पर टिकी है, और मैं उसे किस भले नाम से पुकारता हूँ?

जब मैं किसी अन्यायी के पतन की खबर सुनता हूँ, तो मेरे भीतर पीड़ितों के लिए राहत जागती है या अपने अहंकार की संतुष्टि?

Nahum में और गहराई से जानें

चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।

The Message of Obadiah, Nahum and Zephaniah

Gordon Bridger

The shortest prophets, taken seriously and applied today.

Jonah, Nahum, Habakkuk, Zephaniah

James Bruckner

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Nahum 3 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।

नहूम 3 का क्या अर्थ है?
नहूम का तीसरा अध्याय नीनवे पर एक "हाय" के साथ खुलता है: वह नगरी जो खून, छल और लूट से भरी है, जिसकी लूट कभी कम नहीं पड़ती। कवि हमें युद्ध के बीच खड़ा कर देता है, कोड़े फटकारते हैं, रथ उछलते हैं, और शवों का ढेर इतना ऊँचा है कि लोग "मुर्दों से ठोकर खा खाकर चलते हैं।" फिर परमेश्वर स्वयं बोलते हैं: "देख, मैं तेरे विरुद्ध हूँ।" आगे मिस्र की अमोन नगरी का उदाहरण, टिड्डियों का रूपक, और अंत में वह वाक्य जो सब समेट लेता है: "तेरा घाव न भर सकेगा, तेरा रोग असाध्य है।"
नहूम 3 किस विषय में है?
नीनवे का पतन उस बड़ी कहानी का हिस्सा है जिसमें परमेश्वर धीरे-धीरे हर उस शक्ति को उतारते हैं जो स्वयं को अंतिम समझती है। पद 17 की तस्वीर लगभग व्यंग्य है: राजा के मुकुटधारी अफसर सर्दी में बाड़ पर टिकी टिड्डियाँ हैं, धूप निकली और गायब, "कोई नहीं जानता कि वे कहाँ गए।" यही तर्क मरियम के गीत तक और यीशु मसीह के क्रूस तक चलता है, जहाँ रोम की सारी शक्ति एक मरते हुए आदमी के आगे खोखली सिद्ध हुई। मसीह में परमेश्वर ने एक और रास्ता भी खोला: वे स्वयं उस हिंसा के नीचे आ गए जिसकी नीनवे ने आदत बना ली थी। न्याय टला नहीं, वह किसी और के कंधे पर आया।
नहूम 3 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
योना की पुस्तक इसी नीनवे को पश्चाताप करते दिखाती है, और परमेश्वर उसे क्षमा कर देते हैं। नहूम उसी शहर का अंत लिखता है। दोनों को साथ रखिए और आप कुछ असुविधाजनक सीखते हैं: कृपा वास्तविक है, पर वह स्थायी छूट नहीं है। एक पीढ़ी की तौबा अगली पीढ़ी की क्रूरता को ढँक नहीं देती। दूसरी गूँज यशायाह 10 में है, जहाँ अश्शूर परमेश्वर के हाथ का "डंडा" है, फिर उसी डंडे पर न्याय आता है क्योंकि उसने अपने आप को औज़ार नहीं, कर्ता समझ लिया। जो लोग परमेश्वर के काम में उपयोगी हुए हैं, वे भी अपनी उपयोगिता के पीछे छिप नहीं सकते।
नहूम 3 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
नहूम के पहले सुननेवाले यहूदा के वे लोग थे जिनके दादा-परदादा ने अश्शूर की सेना को देखा था: गाँव जलते, कैदी नंगे कतार में बँधे, राजाओं के मुँह में काँटे। उनके लिए नीनवे कोई प्रतीक नहीं, एक सचमुच का पता था, जिसके नाम से बच्चे चुप हो जाते थे। पद 14 का उपहास वे मुस्कुराकर सुनते होंगे: "पानी भर ले, गढ़ों को अधिक दृढ़ कर," जैसे कोई कहे, अपनी तैयारी करते रहो। और पद 7 का प्रश्न, "कौन उसके कारण विलाप करे?
नहूम 3 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
जब मैं किसी अन्यायी के पतन की खबर सुनता हूँ, तो मेरे भीतर पीड़ितों के लिए राहत जागती है या अपने अहंकार की संतुष्टि?
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Nahum 3 पर समुदाय क्या साझा करता है

इस अंश पर पाठकों और संपादकीय टीम से अंतर्दृष्टि, प्रार्थनाएँ और धन्यवाद।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 16

नीनवे के व्यापारी गिने नहीं जा सकते थे, "तूने अपने व्यापारी आकाश के तारों से भी अधिक बढ़ाए।" पर नहूम कहता है, ये टिड्डियों जैसे हैं, चट कर जाते हैं और उड़ जाते हैं। जो कुछ तेरे पास इकट्ठा है, पूछ: क्या यह ठहरने आया है, या बस खा कर चले जाने? जिन चीज़ों पर तू भरोसा रखता है, उनके पंख होते हैं।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 17

नीनवे के अधिकारी गिनती में ढेरों थे, पर नहूम उन्हें टिड्डियों जैसा कहता है, "जो जाड़े के दिन बाड़ों पर बसेरा करती हैं, परन्तु सूर्य के निकलते ही उड़ जाती हैं, और कोई नहीं जानता कि वे कहाँ गईं।" ठंड में डटे रहना आसान है, धूप चढ़ते ही पता चलता है कौन सचमुच ठहरा है। तेरा भरोसा किस पर टिका है, भीड़ पर या उस पर जो नहीं उड़ता?

प्रार्थना संपादकीय पर पद 1

पिता, जहाँ झूठ और लूट से नींव रखी जाती है, वहाँ कुछ भी टिकता नहीं। मेरे भीतर भी छल के छोटे कोने हैं, उन्हें उजाले में ले आइए। मुझे ऐसा जीवन दीजिए जो किसी के खून और आँसुओं पर खड़ा न हो, बल्कि आपकी सच्चाई पर।

अंतर्दृष्टि संपादकीय पर पद 7

नीनवे गिरी, और नबी पूछता है, "उसके लिये कौन विलाप करेगा? मैं तेरे लिये शान्ति देनेवाले कहाँ से ढूँढ़ूँ?" जिस नगर ने बरसों दूसरों के आँसू बहाए, उसके अपने पतन पर एक भी आँख गीली नहीं हुई। जो हम दूसरों के साथ बोते हैं, वही हमारे बुरे दिनों में हमारे पास लौटकर आता है। आज किसी के दुःख में चुपचाप बैठना सीख लो। कल तुम्हें भी किसी की ज़रूरत होगी।

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