गिनती 25
पाठ
मण्डली मिलापवाले तम्बू के द्वार पर रो रही है, और उसी घड़ी एक आदमी सबकी आँखों के सामने से एक मिद्यानी स्त्री को अपने डेरे की ओर ले जाता है। शित्तीम में इस्राएल मोआबी स्त्रियों के साथ कुकर्म में और बालपोर की पूजा में फँस गया, परमेश्वर का कोप भड़का, मरी फैली, और चौबीस हजार लोग मर गए। पीनहास एक बरछी उठाता है, जिम्री और कोजबी को बेध देता है, मरी थम जाती है, और परमेश्वर उसके साथ "शान्ति की वाचा" बाँधते हैं। अध्याय मिद्यानियों के विरुद्ध एक आदेश के साथ बन्द होता है। यह अध्याय पढ़कर हम सहज नहीं होते, और शायद हमें सहज नहीं होना भी चाहिए।
मर्म
इस पाठ का केन्द्र वह वाक्य है जिसे हम जल्दी से पार कर जाते हैं: "जिसे इस्राएलियों के बीच मेरी जैसी जलन उठी।" परमेश्वर जलन रखते हैं। यह शब्द हमारे कानों को खटकता है, क्योंकि हम जलन को छोटेपन से जोड़ते हैं। पर वाचा एक विवाह जैसी है, और जहाँ प्रेम सच्चा है वहाँ बेवफाई उदासीनता नहीं जगाती। बालपोर की पूजा केवल गलत धार्मिक चुनाव नहीं थी; वह उस परमेश्वर के साथ विश्वासघात था जिसने इस्राएल को मिस्र से निकाला। और ध्यान दें: कोप और प्रायश्चित एक साथ खड़े हैं। पीनहास "प्रायश्चित" करता है, वही शब्द जो याजकों के बलिदानों के लिए है। परमेश्वर का न्याय यहाँ उनकी दया से अलग नहीं, उसी के भीतर से निकलता है। यह हमें चैन नहीं देता, पर सच्चाई देता है।
मुख्य सूत्र
बिलाम के मुँह से आशीष निकलवाने वाला परमेश्वर अब देखते हैं कि जो शाप बाहर से नहीं आ सका, वह भीतर से आ गया। शित्तीम कनान की सीमा है; वादे की दहलीज़ पर इस्राएल लगभग सब कुछ खो देता है। और वहीं एक याजक खड़ा होता है जिसकी "जलन" मण्डली के बीच में पड़कर मरी को थाम देती है। यह पैटर्न बाइबल में बार-बार लौटता है: एक व्यक्ति परमेश्वर के कोप और लोगों के बीच में खड़ा होता है। पीनहास बरछी लेकर खड़ा होता है; मसीह क्रूस पर खड़े होते हैं, और वहाँ बरछी उनके ही शरीर में बेधी जाती है। पीनहास के हाथ में जो हथियार था, मसीह के लिए वह उनका अपना जीवन बन गया। "शान्ति की वाचा" अब एक बरछी से नहीं, एक बलिदान से आती है।
दर्पण
यह अध्याय हमारे भीतर की उस चालाकी को उजागर करता है जो कहती है: बड़ा पाप एक ही क्षण में आता है। नहीं। यहाँ पहले खाना था, फिर दण्डवत्। पहले संग, फिर पूजा। धर्मत्याग भोजन की मेज़ से शुरू हुआ। जिम्री शिमोनियों का प्रधान था, कोजबी एक मिद्यानी प्रधान की बेटी; यह वासना से अधिक एक रणनीतिक गठबन्धन लगता है, वह किस्म का समझौता जो हम भी करते हैं जब कैरियर, पैसा या स्वीकृति दाँव पर हो। और ध्यान दें कि जिम्री ने यह छिपकर नहीं किया, "सब लोगों की आँखों के सामने" किया। पाप का सबसे ख़तरनाक चरण वह है जब उसमें शर्म बाकी न रहे।
आज यह करें: एक कागज़ पर वह एक "मेज़" लिखें जहाँ आप बैठते हैं और जहाँ बैठना आपको धीरे-धीरे बदल रहा है, कोई रिश्ता, कोई स्क्रीन, कोई सौदा; उसे नाम दें और परमेश्वर के सामने ऊँची आवाज़ में पढ़कर कहें, "यह आपकी जगह ले रहा है।"
अंतर्पाठ
पौलुस इस घटना को कुरिन्थ की कलीसिया के सामने रखते हैं, और इसीलिए पद 1 और 9 पर 1 कुरिन्थियों 10:8 का हवाला है। उनके लिए शित्तीम इतिहास का कोई बन्द अध्याय नहीं, बल्कि एक चेतावनी है उन लोगों के लिए जो सोचते हैं कि बपतिस्मा और प्रभु भोज उन्हें अछूता बना देते हैं। दूसरी ओर, प्रकाशितवाक्य 2 में पुनरुत्थित मसीह पिरगमुन की कलीसिया से कहते हैं कि तुम्हारे बीच बिलाम की शिक्षा पकड़े रहने वाले हैं, और थुआतीरा से मूर्तिपूजा और व्यभिचार के विषय में। वही दो धागे, मेज़ और बिस्तर, सदियों बाद भी कलीसिया के भीतर उलझे हुए हैं। बाइबल इस कहानी को शर्म से नहीं छिपाती; वह इसे दीवार पर टाँग देती है।
मुख्य पात्र
पीनहास असहज करता है। हम उसे नायक कहने में हिचकिचाते हैं, और यह हिचक ईमानदार है। पर पाठ को ध्यान से देखें: उसे कोई आदेश नहीं मिला था। मूसा ने न्यायियों को आदेश दिया था, पर पीनहास मण्डली के बीच से उठा, उस समय जब बाकी सब रो रहे थे। आँसू सच्चे थे, पर आँसुओं ने मरी नहीं रोकी। यहाँ एक भयावह प्रश्न छिपा है: क्या हमारा दुःख कभी कार्य का विकल्प बन जाता है? पीनहास के भीतर जो जलती थी, परमेश्वर उसे अपनी ही जलन कहते हैं, और उसका फल "शान्ति" है। यह विरोधाभास हल नहीं होता, और मैं उसे हल करने का दावा नहीं करूँगा। यहाँ चुप रहकर सोचना ही ईमानदारी है।
प्रसंग
यह चालीस वर्ष के भटकने का अन्त है। इस्राएल यरदन के पूर्व में मोआब के मैदानों में, शित्तीम में डेरा डाले हुए है, कनान से कुछ ही दिन दूर। पीछे बिलाम और बालाक की कहानी है, जिसमें शाप आशीष में बदल गया। मोआबी और मिद्यानी लोग सैनिक रूप से इस्राएल को हरा नहीं सके, इसलिए आतिथ्य और धर्म के रास्ते से भीतर आए। प्राचीन पूर्व में देवता के यज्ञ में खाना केवल भोजन नहीं था, वह निष्ठा की घोषणा थी, लगभग नागरिकता जैसी। बालपोर उपजाऊपन का देवता था, और उसकी पूजा में यौन रीतियाँ जुड़ी थीं। इसलिए यहाँ प्रश्न यह नहीं था कि इस्राएल युद्ध जीतेगा या नहीं, बल्कि यह कि सीमा पर पहुँचकर वह किसका बना रहेगा।
चिंतन
आपके जीवन में वह कौन सी "मेज़" है जहाँ आप बैठते हैं और जिसके बारे में आपने चुपचाप तय कर लिया है कि यह कोई बड़ी बात नहीं?
जब परमेश्वर अपनी जलन के बारे में बोलते हैं, तो आपके भीतर क्या जागता है, डर, प्रतिरोध, या एक अजीब सी राहत कि उन्हें फ़र्क पड़ता है?
Numbers में और गहराई से जानें
चुनी हुई पुस्तकें जो इस बाइबल पुस्तक को और गहराई से समझाती हैं।
Follows Israel through the wilderness and draws out lessons for the journey of faith.
Numbers: An Introduction and Commentary
A trusted Tyndale commentary: compact, careful and clear on every passage.
Numbers: God's Presence in the Wilderness
Preaching the wilderness years with Christ always in view.
Faith.network earns a small commission on Kobo purchases made through these links, at no extra cost to you. It helps keep the studies free.
Numbers 25 के बारे में अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
इस बाइबल अंश के बारे में सामान्य प्रश्नों के त्वरित उत्तर।
गिनती 25 का क्या अर्थ है?
गिनती 25 किस विषय में है?
गिनती 25 का ऐतिहासिक संदर्भ क्या है?
गिनती 25 हमें परमेश्वर के स्वभाव के बारे में क्या सिखाता है?
गिनती 25 आज भी कैसे प्रासंगिक है?
Numbers 25 में आपको क्या स्पर्श करता है?
इस अंश पर अभी तक कोई अंतर्दृष्टि साझा नहीं की गई है। पहले बनें और कुछ छोड़ें: एक अंतर्दृष्टि, प्रार्थना या धन्यवाद।
इस अंश को किसी और स्तर पर देखें
शुरुआती, धर्मशास्त्री, या कोई अलग लंबाई? सेटिंग्स बदलें और अपना संस्करण बनाएँ।
अध्ययन टूल में खोलें
